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बीमारी से पीडि़त बच्चे के इलाज के लिए भटक रहे माता-पिता

साहब...मेरे जिगर के टुकड़े को बचा लीजिए। गंभीर बीमारी से पीडि़त है, छिंदवाड़ा के डॉक्टरों ने नागपुर में इलाज कराने के लिए कहा है, लेकिन हमारे पास इतना भी पैसा नहीं है कि उसे दो वक्त की रोटी खिला सकें। ऐसे में इलाज कैसे कराएं। पिछले एक सप्ताह से गुहार लेकर कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे ये विनती सिवनी प्राणमोती निवासी संजू गिरी गोस्वामी की है। अपने 13 वर्षीय पुत्र अजय गिरी गोस्वामी के इलाज के लिए भटक रहे संजू और उसकी पत्नी सुनीता हार मान चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई बड़ी आर्थिक मदद नहीं मिल रही। जिससे अपने बच्चे का इलाज करा सकें। रोज सुबह होते ही कलेक्टे्रट पहुंच जाते हैं, ताकि कहीं से कोई आर्थिक सहायता मिल जाए और उनके बच्चे का बेहतर इलाज करा सकें, लेकिन सुबह से लेकर शाम तक कार्यालयों और नेताओं के चक्कर काटने के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। बच्चे के इलाज के लिए मदद नहीं। शरीर में पड़ रही गांठे, पेट में है दर्द 13 वर्षीय पीडि़त अजय को गंभीर बीमारी है। पेट में दर्द हो रहा है और शरीर में गांठे पड़ रही हैं। छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में कुछ दिन इलाज भी चला। जिसके बाद डॉक्टरों ने नागपुर में इलाज कराने की सलाह दी। तब से अजय के पिता संजू इलाज की राशि के लिए नेताओं से लेकर अफसरों के पास जा रहा है। मजदूरी कर जैसे-तैसे करते हैं परिवार का गुजारा संजू और उसकी पत्नी मजदूरी कर जैसे-तैसे अपने परिवार का गुजारा करते हैं। संजू मिस्त्री का काम करता है। वहीं उसकी पत्नी कंस्ट्रक्शन में मजदूर है। जैसे-तैसे जिंदगी कट रही थी, लेकिन इस बीच अपने जिगर के टुकड़ें को गंभीर बीमारी हो गई। जिस वजह से काम भी छूट गया। अब हालात ये हैं कि घर में अन्न का दाना तक नहीं बचा है। घर का दाना और पैर पट्टी बेची तब करवाया इलाज अपने बेटे का इलाज कराने के लिए संजू और उसकी पत्नी सुनीता के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि जिला अस्पताल में ही इलाज करवा सके। बेटे के इलाज के लिए दवाइयां लगने पर संजू को घर का दाना और सुनीता को अपने पैर पट्टी बेचनी पड़ गई। तब जाकर छिंदवाड़ा में इलाज हो सका। एसडीएम ने उपलब्ध कराई एम्बुलेंस महज साढ़े तीन हजार रुपए लेकर संजू के पिता देर शाम नागपुर अपने बेटे का इलाज कराने के लिए गया है। छिंदवाड़ा एसडीएम अतुल सिंह ने नि:शुल्क एम्बुलेंस नागपुर जाने के लिए मुहैया करवाई। संजू ने बताया कि नागपुर जाकर पता चलेगा कि कितनी राशि बेटे के इलाज के लिए लग रही है।