मंडला

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मण्डला पुलिस की जुआ के अड्डे पर दबिश

नैनपुर - पुलिस अधीक्षक मडला द्वारा सभी पुलिस अधिकारियों को संगठित जुआ सट्टा खिलाने वालों को चिन्हित करते हुवे सभी के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही के दिये गये हैं निर्देश जुआ खेलने एवं लिखाने वाले 84 सटोरियों को घेराबंदी कर पकड़ा गया [] नगद 29 लाख 2 हजार 955 रूपये, 15 वाहन सहित 84 मोबाईल जन जिनकी अनुमानित किमत 99 लाख 42 हजार रूपये कुल मशरूका 1 करोड़ 28 लाख 44 हजार 955 रुपये की जप्ती की गई

पुलिस अधीक्षक मंडला द्वारा जिले मे पदस्थ समस्त राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को संगठित जुआ, सट्टा खिलाने वालों को चिन्हित करते हुये उनके विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही हेतु आदेशित किया गया है। पुलिस अधीक्षक मंडला को नैनपुर क्षेत्र में जुआ की सूचना प्राप्त हुई थी। उक्त सूचना की तस्दीक एवं जुआ फड़ पर दबिश की कार्रवाई हेतु पुलिस अधीक्षक द्वारा टीम का गठन किया गया तथा गठित टीम को प्राप्त सूचनाओं के आधार पर टीम भेजकर संभावित स्थानो का भौतिक निरीक्षण तकनीकी आधार पर सत्यापन हेतु भेजा गया। अति. पुलिस अधीक्षक मंडला, एसडीओपी मंडला अश्विन कुमार डीएसपी राहुल कटरे के मार्गदर्शन में मंडला एवं थाना नैनपुर की टीम द्वारा थाना नैनपुर क्षेत्रान्तर्गत निवारी एवं वार्ड न. 14 नैनपुर में अलग-अलग टीम ब्दारा जुआ फड़ पर दबिश देते हुए घेराबंदी कर कुल 84 लोगों को घेराबंदी कर पकड़ा गया जिनके कब्जे से कुल लगभग 29 लाख 2 हजार नगद, 8 दो पहिया, 7 चार पहिया वाहन कुल 15 वाहन, 84 मोबाईल जिनकी कुल अनुमानित किमत 1 करोड़ 28 लाख 44 हजार 955 रूपये तथा तास के 25 गड्डी को जम कर 84 आरोपियों का कृत्य ध्रुत अधिनियम का पाये जाने से आरोपियों के विरुध्द थाना नैनपुर में दो पृथक-पृथक मामले पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया । दबिश में पकड़ाये आरोपी जिला सिवनी, नरसिंहपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, मण्डला से जुआ खेलने आये हुए थे तथा लाखों का दाव लगाते थे।

उक्त कार्यवाही में पुलिस अधीक्षक मण्डला की विशेष टीम जिसमें रक्षित निरीक्षक सुनील नागवंशी, थाना प्रभारी नैनपुर निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नगपुरे, उप निरी. बी. के. पंडोरिया, सउनि राजेश सेवईवार, सउनि मुकेश चौधरी, थाना प्रभारी कोतवाली जसवंत राजपूत, उप निरी. हरच्छद ठाकुर, उपनिरी. बलवंत सिंह तेकाम, उपनिरी. गिरिश शर्मा थाना महाराजपुर, सउनि अक्षय यादव, आर. 165 राजेन्द्र, आर. 377 अक्षय भलावी, आर, 588 भागवत आर. 366 अमित गरियार, प्रआर. 101 अजब सिंह, प्रआर 278 अभिषेक ठाकुर, आर. 288 आनंद गौतम, आर 51 रोबिन चौधरी, आर 234 चन्द्रभान पटले, आर. 720 मनोज धुर्वे, आर 74 आलमदार हुसैन, एफएसएल आर 102 अभय आर. 243 लक्की सोनकर, नवआर 360 गुरू पाण्डेय, आर. विनोद प्रआर, 259 ओमप्रकाश आर. 145 रामलाल आर 479 महा सिंह आर. 539 हेमंत आर 724 रूपेन्द, आर 420 महेन्द्र, आर. 77 विनोद आर. 521 राजेश, आर. 740 रूपक, नवआर 407 राजा , आर. 668 पिंकू यादव मौजूद रहे

पहली बारिश में वही 63 लाख से बनी सीसी रोड

नैनपुर । नगरपालिका नैनपुर के वार्ड क्रमांक 14 में करीब 9 माह पूर्व  63 लाख रूपये से अधिक लागत से फिल्टर प्लांट से स्टांप डेम तक पहुंच मार्ग  टेंडर प्रक्रिया के तहत सीसी रोड का निर्माण कार्य कराया गया था। ठेकेदार के द्वारा उपरोक्त कार्य 13 से 14 प्रतिशत कम दर पर लेकर ऐसा निर्णय कार्य किया गया की  पहली बारिश को भी नहीं झेल पाई  और  40 से 50 मीटर सेमेंट सड़क टुकड़ों टुकड़ों में बट गई ।   ज्ञात हो नगरपालिका नैनपुर में  गत पांच वर्षों से कम दर पर निर्माण कार्य लेकर बाहरी क्षेत्रों व जिले के बाहर से आए ठेकेदारों  के द्वारा नगर में घटिया से घटिया गुणवत्ता हीन कार्य  किया जाता आ रहा है। जिसका खामियाजा नगर के वार्डों  की जनता भुगत रही है।  नैनपुर नगर पालिका में एक नहीं अनेक ठेकेदार मंडला, बम्हनी, विछिया, सिवनी, जबलपुर , सहडोल  सहित अन्य नगरों से  टेंडर प्रक्रिया में भाग लेकर कम दर पर रेट  डालकर गुणवत्ता हीन कार्य कर भुगतान लेकर  रफूचक्कर  हो रहे हैं। निर्माण कार्य की गुणवत्ता कुछ माह बाद  जब नगरपालिका को दिखाई देती है तब तक अपना सारा भुगतान  प्राप्त  कर  ठेकेदार लापता हो चुके होते हैं और दोबारा नैनपुर नगरपालिका  में टेंडर नहीं डालते  हैं ऐसे एक नहीं अनेक ठेकेदार हैं जो ऐसा कर चुके हैं। 

 जिसकी बानगी नगर के वार्ड क्रमांक 14 में निर्मित सड़क आज खुली आंखों दिखाई दे रही। प्राप्त जानकारी अनुसार  पूर्व परिषद नगरपालिका परिषद के द्वारा  वार्ड क्रमांक 14 में एक समुदायिक भवन एवं फिल्टर प्लांट से होते हुए स्टांप टेम तक सीसी रोड का निर्माण करने 1 करोड़ 53 लाख रूपये का स्टीमेट तैयार कर स्वीकृत पश्चात ई-टेंडर के माध्यम से ठेकेदार प्रीतेश पटेल विछिया जिला मंडला को कार्यादेश जारी किया गया था उपरोक्त कार्य ठेकेदार ने 13 से 14 प्रति कम दर पर लेकर कार्य प्रारंभ किया परंतु ठेकेदार के द्वारा सम्पूर्ण सीसी रोड निर्माण कार्य  में जीएसबी नहीं की गई जिससे आज सीसी रोड पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त होकर  टुकड़ों टुकड़ों में तब्दील हो गई जिसका प्रमाण छुपाने ठेकेदार के द्वारा 29 मई 2023 की सुबह  से जेसीबी मशीन लगाकर सड़क के टुकड़ों  को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया । आश्चर्यचकित वार्ड वासियों ने स्थानीय मीडिया कर्मियों को  सूचना दी । इस घटिया गुणवत्ता हीन निर्माण कार्य में कब कहां किसकी गलती है यह गम्भीर जांच का विषय बना हुआ है। क्या नगरपालिका परिषद इस गम्भीर भ्रष्टाचार युक्त निर्माण कार्य की जांच कराते कार्यवाही करेगी या ठेकेदार की दबंगता के चलते सब कुछ ऐसा ही चलता रहेगा। 


राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने माना, एमपीआरडीसी ने सड़क बनाने में बरती लापरवाही

चिल्पी-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में एमपीआरडीसी द्वारा जमकर लापरवाही बरती गई है। जिसका खामियाजा आज भी जिलेवासी भुगत रहे हैं। 92 किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण एमपीआरडीसी द्वारा 2015-16 में अधिकृत निर्माण एजेंसी द्वारा करवाया गया। इस राजमार्ग के निर्माण में मंडला जिले के अंदर जमकर लापरवाही उजागर हुई, लेकिन एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साधी रही और इंतजार करते रहे कि कब इसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सुपुर्द कर दिया जाए। राजमार्ग के निर्माण में बरती गई लापरवाही के कारण हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस मार्ग का टेकओवर करने में लेटलतीफी की और एमपीआरडीसी के अधिकारियों से सड़क निर्माण में बरती गई लापरवाहियों को ठीक करने के लिए कहा।

2015-16 में हुआ था निर्माण


राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने माना है कि मंडला-चिल्पी-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में जमकर गुणवत्ताहीन कार्य किया गया है। जिसे सुधारा जाना एमपीआरडीसी की जिम्मेदारी बनती है। यही कारण है कि 2015-16 में राजमार्ग के निर्माण के 3 वर्षों के परफॉर्मेंस पीरियड के बाद एमपीआरडीसी के अधिकारियों को इस मार्ग की सुध लेनी थी लेकिन इसमें उन्होंने कोताही बरती।


बिना सुधार के एनएचएआई के सुपुर्द किया


राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी अमृतलाल साहू ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में की गई लापरवाही को सुधारे बिना यदि इसे एनएचएआई के सुपुर्द किया जाता और एनएचएआई ने इसका टेकओवर कर लिया होता तो शुरुआती दौर में ही राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में बरती गई खामियों को सुधारने में ही एनएचएआई को लाखों रुपए खर्च करने पड़ जाते जो कि एमपीआरडीसी को करना चाहिए था। यही कारण है कि इसका टेकओवर करने में देरी हुई है।

राजमार्ग में आई दरारें

मंडला -चिल्पी- रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हुए कुछ वर्ष बीतने के बाद ही राजमार्ग में कई जगह दरारें आ चुकी हैं, गड्ढे पड़ चुके हैं और गड्ढे गहरे होते जा रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजमार्ग के निर्माण में निर्माण सामग्रियों का उपयोग निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं किया गया। राजमार्ग में बनाए गए पुल में बारिश का पानी भरने पर पानी की निकासी के इंतजाम नहीं किए गए। सड़क की ढाल सही ढंग से नहीं दिए जाने के कारण राजमार्ग में बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी भर रहा है जो दुर्घटना का कारण बन सकता है।


मंडला में भारी बारिश, नदी नाले उफान पर, मंडला सिवनी बालाघाट संपर्क टूटा

मंडला में हो रही अनवरत वर्षा के कारण नदी नाले उफान पर आ गए हैं। कई पुल पुलिया उनके आगोश में समा चुके हैं। सिर्फ ग्रामीण इलाके ही नहीं, नगरीय क्षेत्रों में भी लोगों के घरों में पानी भर रहा है। मंडला सिवनी मार्ग, मंडला नैनपुर मार्ग और मंडला बालाघाट मार्ग बंद हो चुका है। भारी बारिश के कारण नैनपुर से बालाघाट मार्ग के बीच पड़ने वाला गुड्डू गगरिया पुल बह जाने के कारण बालाघाट मार्ग बंद हो गया है।

दूसरी और मंडला नैनपुर सिवनी मार्ग पर पड़ने वाले थावर पुल पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण यह मार्ग भी बंद हो गया है। सिर्फ यही नहीं, मंडला से नैनपुर जाने के लिए मक्के डिट्टोरी मार्ग पर भी नाले के उफान पर आने के कारण पुलिया उसके आगोश में समा चुकी है और मंडला से नैनपुर जाने वाला वैकल्पिक मार्ग भी बंद हो गया है।


मंडला की कलेक्ट्रेट कॉलोनी में घर में बह रहा है नाले का पानी

मंडला व सिवनी में छोटी-बड़ी नदियां उफान पर हैं। आवाजाही करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन के लोग भी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं। नगर पालिका मंडला क्षेत्र में स्थित है। नगर पालिका की साफ-सफाई के दावे की असलियत उजागर हो गई। कलेक्ट्रेट कॉलोनी में चांदनी पान कॉर्नर के घर का नजारा, जहां नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने के कारण नालों का पानी लोगों के घर में घुस रहा है।


मंडला में 80 वर्ष की उम्र में लिख दिया 510 पन्नों का ग्रंथ मानस के मोती

अंजनिया निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक यदुनंदन सिंह पटेल ने 80 वर्ष की उम्र में युवाओं जैसा जोश दिखाते हुए 510 पन्ने के ग्रंथ मानस के मोती की अपनी हस्तलिपि में रचना की है। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक यदुनंदन सिंह पटेल ने बताया कि युवा अवस्था से ही उनकी रूचि अध्यात्म की ओर रही है। शासकीय सेवा से निवृत्त होने के पश्चात जब उन्होंने अध्यात्मिक ग्रंथों के पठन की ओर कदम बढ़ाया तभी से कि मानस के मोती नाम का उनका यह मन में भाव आया कि आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ ऐसा दस्तावेज तैयार किए जाएं जो उनके लिए हितकर साबित हो।


रामायण से की 500 शब्दों की खोज

यदुनंदन सिंह पटेल ने बताया मानस के मोती हस्तलिखित ग्रंथ श्रीरामचरितमानस पर आधारित एक शोध प्रबंध है। उन्होंने तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस से उद्धृत शब्दावली से लगभग 500 शब्दों की खोज की गई है और अपनी कृति मानस के मोती में उन शब्दों से जुड़ी पंक्तियों का उल्लेख किया गया। कौन सा शब्द किस कांड के अंतर्गत किस दोहे का है इसका उल्लेख भी विशेष रूप किया गया है। ताकि समझने में आसानी हो। श्री पटैल ने इस ग्रंथ में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन से जुड़े अनेक पहलुओं को रेखांकित करने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का अनुसरण कर मनुष्य अपनी जीवन यात्रा को सुगम बना सकता है।


53 लाख रुपए की लागत से बना अमृत सरोवर पहली ही बारिश में फूटा

जिले भर में जल संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अमृत सरोवर का निर्माण कराया। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारियों द्वारा अमृत सरोवर बनवाए गए, लेकिन निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों की मिलीभगत से लाखों रुपए की लागत से बनने वाले अमृत सरोवरों को दो-तीन लाख रुपये में ही तैयार करवा दिया गया और शेष लाखों रुपए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।

लाखों रुपए की हेरफेर कर बनाया गया ऐसा ही एक अमृत सरोवर का उदाहरण सामने आया है। निवास विकासखंड में ग्राम पंचायत सुखरी संग्रामपुर के पोषक ग्राम खरखरा और संग्रामपुर के बीच अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया और इसकी लागत लगभग 53 लाख आंकी गई।पहली ही बारिश में यह तालाब फूट गया और इसमें संग्रह किया हुआ पानी दूर-दूर तक फैल गया। पहली ही बारिश की बौछार तालाब की दीवारें झेल नहीं पाई और उनमें पहले कई फुट लंबी दरार पड़ी और कुछ देर बाद तालाब का एक हिस्सा पूरी तरह से ढह गया।

जानकारी के अनुसार, उक्त जलाशय का निर्माण दो नालों के बीच कराया गया था। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट सहित निस्तार के लिए ग्रामीणों को फायदा मिल सके। पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है। जलाशय पर पानी निकासी नहीं बनाई गई थी जिसकी वजह से ओवर फ्लो हुआ।

तालाब की दीवारों को गुणवत्ताहीन तरीके से बनाए जाने के कारण यह पानी का दबाव झेल नहीं पाया और जलाशय फूट गया। उक्त घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दी गई है। विभाग जांच में जुट गया है। घटना की जानकारी मिलते ही घटना स्थल पर निवास थाना प्रभारी सुरेश सोलंकी भी मौके पर पहुंचे।

कलेक्टर ने लिया संज्ञान


लगभग 53 लाख की लागत से निर्मित किए गए तालाब के पहली ही बारिश में धराशाई हो जाने के मामले को कलेक्टर सलोनी सिडाना ने तत्काल संज्ञान में लिया। कलेक्टर का कहना है कि आरईएस के तीनों अधिकारी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और सब इंजीनियर को नोटिस जारी किया गया है तथा इन पर कार्रवाई के लिए जबलपुर कमिश्नर को पत्र लिखा गया है।