सिवनी

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घंसौर में समरजीत सिंह हफ्ता वसूली के लिए दे रहा धमकी--

---यदि आज के दौर में भी गुंडा टैक्स वसूल करने के लिए धमकी दी जा रही है और खुलेआम गुंडागर्दी दिखाई जा रही है तो समझ जाए की कानून व्यवस्था पटरी से नीचे उतर गई है। ताजा मामला घंसौर थाना क्षेत्र का है जहां के कुछ युवक गुंडा टैक्स वसूलने के लिए खुलेआम गुंडागर्दी करने लगे है जिनके ऊपर कारवाही करने से घंसौर टी आई अनिल पटेल को परहेज है। बताया जाता है की गत दिवस घंसौर क्षेत्र के कुछ दबंग लोगो ने देर रात  जय जिनेन्द्र पेट्रोल पंप में जाकर जमकर हंगामा मचाया और हफ्ता देने के लिए दबाव बनाया जिसकी रिपोर्ट घंसौर थाने में दर्ज कराई गई। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार घंसौर में जय जिनेन्द्र पेट्रोल पंप के संचालक मयंक गोलहानी ने पुलिस को बताया की बीती रात्रि लगभग साढ़े बारह बजे  वह पेट्रोल टेंकर खाली करा रहा था ।तभी  समरजीत सोलंकी पिता रणवीर सिंह सोलंकी, सुभम यादव ,यश तिवारी, मोहित सोनी उनके पेट्रोल पम्प पहुंचे । यश तिवारी ने पेट्रोल पंप से 1263/-रूपये का पेट्रोल भरवायाऔर कर्मचारी संजय सोनी से कहने लगा की मैं पैसे नहीं दूंगा तब कर्मचारी संजय सोनी ने बोला की पैसे क्यो नही देते तो समरजीत सोलंकी ने उसे गाली देना शुरू कर दिया। समरजीत सिंह पेट्रोल पम्प संचालक मयंक गोलहानी के पास आया और उससे कहा की मुझे पांच हजार रुपिया हफ्ता वसुली चाहिये । इसी बीच गुंडागर्दी दिखाते हुए  शुभम यादव, मोहित सोनी ने  मयंक के साथ धक्का मुक्की करने लगे।  समरजीत सोलंकी ने मयंक का  कालर पकड लिया और गालियाँ देते हुये कहने लगा की यदि हफ्ता वसुली नही दोगे तो तुम्हारे पेट्रोल पंप, वेयर हाऊस में आग लगा दूंगा ,तुम्हे गोली मार दूंगा। समरजीत सिंह ने यह भी धमकी दिया की  यदि तु मेरी शिकायत थाना मे करता है तो मै तुझे पेट्रोल पंप आना भुलवा दूंगा । बाद में मयंक ने हंड्रेड डायल को बुलवाया जिसके बाद उन्होंने  फिर 100 डायल वाहन को 1263 रूपये दिए। बाद में मयंक घंसौर थाना पहुंचा। बताया जाता है की जब से घंसौर थाने में अनिल पटेल टी आई के पद पर पदस्थ हुए है तब से घंसौर क्षेत्र में गुंडागर्दी चरम पर पहुंच गई है। स्थिति यह हो गई है कि समरजीत सिंह सोलंकी जैसे युवकों की गुंडागर्दी बढ़ गई है जो अब हफ्ता वसूली नहीं मिलने पर पेट्रोल पम्प, वेयर हाउस में आग लगाने तक की धमकी देने लगे हैं। फिलहाल घंसौर पुलिस ने घंसौर के गुंडों के विरुद्ध धारा 294,323,506,384, 190 ,34 के तहत मामला पंजीबद्ध किया। देखना यह है की पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करती है या उनके ऊपर मेहरबानी दिखाती है। फिलहाल घंसौर क्षेत्र में कानून व्यवस्था पटरी से नीचे उतर गई है।

शादी और नौकरी का झांसा देकर युवक ने रिटायर्ड अधीक्षक को 27 लाख से ठगा -----

- डूंडा सिवनी थाने में एफ आई आर दर्ज-------बालाघाट जिले के एक युवक ने गोंडवाना आदिवासी मैरिज ग्रुप से पहले युवती के परिजनों से संपर्क बढ़ाया और शादी व नौकरी का झांसा देकर परिजनों से 27 लाख की ठगी कर लिया जिसकी रिपोर्ट डूंडा सिवनी थाने में दर्ज कराई गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार डूंडा सिवनी थाना क्षेत्र के चंद्र प्रभा नगर निवासी एक युवती अपनी बहन के साथ डूंडा सिवनी थाना पहुंची और पुलिस को जानकारी देते हुए बताया की उसने बी.एस.सी. फाईनल एवं जी.एन.एम. तक पढ़ाई किया है। युवती ने बताया की परिजन मेरी शादी के लिये रिश्ते देख रहे है तो वह सोशल मीडिया फेसबुक पर गोंडवाना आदिवासी मैरिज ग्रुप से जुड़ गई  अपना बायोडाटा डाल दिय जिसके बाद शादी से संबंधित बात करने के लिये एक व्यक्ति ने मेरे पास फोन किया जिसने अपना नाम सूरज तेकाम निवासी उकवा जिला बालाघाट का होना बताया। युवक ने बताया की वह एवं व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में नौकरी करता है।  25 अक्टूबर 2023 को दोपहर 11.30 बजे सूरज तेकाम युवती के  परिवार वालों से मिलने के लिये उसके घर  घर टैगोर वार्ड पहुंचा तब सूरज तेकाम ने युवती की मां से बोला कि आपकी छोटी बेटी को व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में कम्प्यूटर आपरेटर की नौकरी लगवा दूँगा जिसके लिए  - (दस लाख रुपये उच्च अधिकारियों को देना पड़ेगा। युवक की बातो पर विश्वास करते हुए युवती की मां ने उससे कहा की मेरे बड़े दामाद विजेन्द्र सिंह उईके एवं भतीजा सागर मरकाम की भी नौकरी लगावा दो ।तब सूरज तेकाम ने कहा कि प्रत्येक के दस-दस लाख रुपये देना पड़ेगा तब युवती की मां सूरज तेकाम के झासे आ गई । महिला ने अपनी पुत्री  के नाम पर  दस लाख रुपये , दामांद के नाम पर 05 लाख  रुपये एवं मामा के लड़के सागर के नाम पर 5 लाख रुपये  कुल बीस लाख रुपये ऑन लाइन सूरज के मित्र  प्रकाश बड़पात्रे के मो.नं. पर एवं स्वयं के मोबाईल नम्बर पर आनलाईन डलवाया ।                बोलेरो फाइनेंस के नाम से भी लिए पैसे----------- पीड़ित युवती ने पुलिस को बताया की सूरज नामक युवक ने उसकी मां को भरोसे में  बुलेरो महेन्द्रा कंपनी सिवनी से फायनेंस करवाने के लिए ढाई लाख रूपये लिया और बोला कि मेराजबलपुर में प्लाट है जिसे बेचने के बाद पैसा दे दूंगा ।

प्लॉट खरीदने के नाम से भी लिया पैसा ------ बताया जाता है की सूरज ने युवती की मां को अपनी बातो पर इतना फंसा लिया था की युवती की मां उसकी हर बात मानने लगी थी जिसका युवक पूराफायदा उठाता था। बताया जाता है की एक दिन युवक ने युवती की  मां से कहा की बिरसा बालाघाट में 1500 वर्गफिट का एक प्लॉट है जिसे मैं 5,69,000/- में ले रहा हूं जिसकी रजिस्ट्री आपकी पुत्री के नाम करूंगा रजिस्ट्री के लिए आप मुझे 5 लाख रूपये दे दीजिए तब युवती की मां ने उसे 05 लाख रूपये दे दिये। लेकिन सूरजलाल तेकाम ने प्लाट की रजिस्ट्री स्वंय के नाम कराया।        बाद में पैसे के लिए झुलाते रहा युवक------ युवती की मां ने युवक की बातो पर भरोसा करते हुए लगभग 27 लाख रुपिया दे दिया लेकिन युवक ने ना तो नौकरी लगवाया और ना ही पैसे वापिस किए तब युवती के परिजनों ने उससे पैसे मांगना शुरू किया तो पहले वह आज देता हूं कल देता हूं कहते रहा फिर उसने फोन उठाना बंद कर दिया।              युवक ने कही और कर लिया विवाह------- बताया जाता है की पीड़ित युवती ने पुलिस को बताया की जब उन्होंने युवक के बारे में पता लगाया तो पता चला की  सूरजलाल तेकाम  निवासी लीलामेटा तह. परसवाडा जिला बालाघाट का रहने वाला है और उसने  03 मई 2024 को ग्राम पीसाझोडी तह. घोडाडोंगरी जिला बैतूल की रहने वाली एक युवती से शादी कर लिया है। तब युवती के परिजन समझ गए की वह ठगी का शिकार हो गए तब युवती थाना पहुंची। बताया जाता है की युवती की मां आदिवासी हास्टल अधीक्षिका के पद से रिटायर्ड हुई है जिसके  रिटायर्टमेंट का पैसा और उसकी बहन के जेवर गिरवी रखकर सूरजलाल तेकाम को लगभग 70 लाख ऑन लाइन दिए थे। पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर जांच में ले लिया।

12 साल पहले जमीन खरीदने वाली हैदराबाद की कंपनी को नायब तहसीलदार ने नोटिस किया जारी


आखिरकार हैदराबाद की व्ही.एन.एस. रियालिटी प्रायवेट लिमिटेड हैदराबाद की कंपनी को न्यायालय नायब तहसीलदार घंसौर वृत्त कहानी के नायब तहसीलदार अरूण दुबे ने नोटिस जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। असल में दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने गतांक में समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि 12 वर्ष पहले  व्ही एन एस रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद ने लगभग 350 एकड़ जमीन थर्मल पावर प्लांट प्रोजेक्ट लगाने के उद्देश्य से क्रय की गई थी। तब कंपनी की तरफ से भू अर्जन अधिनियम 1994 की धारा 41 के अनुसार जनरल मैनेजर कोडुरू साबा शिवाराव पिता व्यंकटरमैया निवासी नेताजी रिंग रोड़ हैदराबाद आंध्रप्रदेश तथा राज्यपाल म.प्र. की ओर से तत्कालीन कलेक्टर अजीत कुमार के द्वारा 19 अक्टूबर 2011 को अनुबंध संपादित किया गया था जिसका प्रकाशन म.प्र. असाधारण राजपत्र दिनांक 11/11/2011 को प्रकाशित किया गया था उक्त पॉवर प्लांट के लिए जिन किसानों की जमीन कंपनी ने क्रय किया था उन किसानों को यह आश्वस्त किया गया था कि भूमिधारक के परिवार से कम से कम एक सदस्य को योग्यता अनुसार कार्य पर लगाया जायेगा। लेकिन कंपनी ने थर्मल पॉवर का प्रोजेक्ट शुरू किया ही नही बाद में उक्त कंपनी ने हैदराबाद की ही अन्य कंपनियों को जमीन बेच दिया जिसका सीमांकन किया जा रहा है। बताया जाता है कि किसानों ने भी एसडीएम व नायब तहसीलदार से शिकायत किया था। नायब तहसीलदार अरूण दुबे ने नोटिस जारी करते हुए कहा है कि जनवरी 2024 में किसानों की उक्त भूमि कंपनी के द्वारा अन्य कंपनियों को बेच दी गई जिसकी जानकारी संबंधित किसानों को नही दी गई। इस मामले में नायब तहसीलदार ने कंपनी को नोटिस जारी करते हुए 15 मई तक न्यायालय में उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि हैदराबाद की व्ही एन एस रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने 350 एकड़ जमीन खरीदा था जिसे उन्होने हैदराबाद की ही लगभग 05 कंपनियों को जनवरी 2024 में थर्मल पॉवर प्लांट के नाम से खरीदी गई जमीन बेच दिया और उसकी रजिस्ट्री भी हो गई। जिन कंपनीयों को हैदराबाद की व्ही एन एस रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने जमीन बेची है उनमेें हैदराबाद की ही व्ही.एम.एस. रियेलिटी प्रायवेट लिमिटेड हैदराबाद आंधप्रदेश, जिसके प्रतिनिधी निवारा चक्रवर्ती कोडुरू पिता कोडुरू सत्य नारायण निवासी जुपल्ली होम्स तेलंगाना,  एन.एस. (नॉर्थ 24 परगनास) रियेलिटी प्रायवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधी अनंत नारायण वेणुगोपालन पोलियाची पिता वेणुगोपालन अनंत नारायण निवासी मल्लपुर कपरा रंगारेडी आंधप्रदेश, खलघाट रियेलिटी प्रायवेट लिमिटेड जिसके अधिकृत प्रतिनिधी पंचकुला व्यकंट श्री निवासी पिता स्व. श्री पंचगुलाल व्यंकट चंद्रशेखर निवासी आर्मी पब्लिक स्कूल के सामने हैदराबाद, बी.एस.एल. एग्रो फार्मस एण्ड प्रॉपर्टी प्रायवेट लिमिटेड अधिकृत प्रतिनिधी जी.ब्रम्हानंद राव निवासी तीसरा माला बंजारा हिला खैराताबाद हैदराबाद को बेच दिया जिसका सीमांकन किया जा रहा है जिसे दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसके बाद नायब तहसीलदार अरूण दुबे ने कंपनी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।



डॉ.तुषारकांत की पैरवी करने वाले अखिलेश राय के पिता और भाई फर्जीवाड़ा में जा चुके है जेल


सिवनी जिले में जगह-जगह भू-माफियाओं का मकडज़ाल फैला हुआ है। भू-माफियाओं की नजर शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की जमीनों में भी रहती है। आश्चर्य इस बात का है कि कई ऐसे भू-माफिया है जो फर्जीवाड़ा करने में अपने परिवार की इज्जत को भी दांव में लगा देते है। इन दिनों धनौरा में विवादित डॉ. तुषारकांत विश्वास की पैरवी करने वाले धनौरा के अखिलेश राय चर्चाओं में है। सूत्र बताते है कि अखिलेश राय और क्षेत्र के विवादित डॉ. तुषारकांत के बेहद ही मधुर संबंध है मधुर संबंध के पीछे कोई व्यवसायिक कारण है या कुछ और कारण यह तो जांच का विषय है लेकिन हम बता दें कि अखिलेश राय का परिवार धनौरा क्षेत्र की विवादित जमीन खरीदने के मामले में सुर्खियां बटोरते रहा है और कूट रचित दस्तावेज बनाकर बेशकीमती जमीन में कब्जा करने का हर संभव प्रयास करता है। बताया जाता है कि मई 2024 को अखिलेश राय के पिता शिव प्रसाद राय एवं उनके भाई सतीश राय के विरूद्ध पुलिस ने धारा 419, 420, 466, 467, 468, 471, 120 बी के तहत मामला पंजीबद्ध किया था जिसके बाद अखिलेश राय के पिता शिवप्रसाद पिता दीपचंद राय एवं भाई सतीश पिता शिवप्रसाद राय लंबे समय तक फरार रहे थे। बाद में उन्हें जेल की हवा खाना पड़ा था। 

तामसिंह बिसेन ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट-----उल्लेखनीय है कि मई 2023 को बरेली निवासी निवासी तामसिंह पिता पूरन सिंह बिसेन उम्र 67 साल ने धनौरा पुलिस को आवेदन देते हुए बताया कि धनौरा निवासी शिव प्रसाद पिता दीपचंद राय उम्र 68 साल ने अपने पुत्र सतीश पिता शिव प्रसाद राय 48 साल के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के कुछ लोगों को साथ में लेकर फर्जीवाड़ा करते हुए कूटरचित दस्तावेज बनाया और उनकी जमीन की रजिस्ट्री करते हुए उसमें कब्जा करने का प्रयास किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार तानसिंह पिता पूरन सिंह बिसेन की ग्राम बरेला में खसरा नंबर 296 ,313 रकबा क्रमश 2.75 ,4.43 तथा ग्राम बरेली के लेखसिंह डेहरिया निवासी घटेरी की भूमि खसरा नंबर 318 रकबा  1.14 हेक्टे कुल रकबा 08.30 हेक्टे है जिसमे कई वर्षों से वह भूमिस्वामी एव आधिपत्यधारी है जिसमें नामांतरण के लिए पिता-पुत्र ने  एक मुख्तारनामा तैयार कर भोपाल में रजिस्ट्री कराया था जिसका पता उन्होंने 208 राजहंस होटल आईएसबीटी भोपाल लिखाया था जिसके बाद धनौरा पुलिस ने पिता पुत्र के विरूद्ध गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया था जिसके बाद पिता पुत्र कई महीनों तक फरार रहे और बाद में फिर उनकी गिरफ्तारी हुई थी।

हिन्दी भाषी राज्यों में कम वोटिंग से भाजपा चिंतित, कम वोटिंग से सत्ता पक्ष को होते रहा है नुकसान

हिन्दी भाषी राज्यों में कम वोटिंग से भाजपा चिंतित, कम वोटिंग से सत्ता पक्ष को होते रहा है नुकसान

सिवनी महाकौशल 27  अपै्रल 2024

लोकसभा चुनाव में दूसरे चरण में भी वोटिंग का पहले फेज जैसा हाल रहा जिसके कारण विभिन्न राजनेतिक दलों के साथ साथ चुनाव आयोग भी चिंतित है क्योंकि हर साल चुनाव आयोग प्रयास करता है की अधिक से अधिक मतदान हो जिसके लिए कई जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाते है। वैसे दो चरणों में जिस तरह मतदान कम हुआ उसके बाद अब राजनीतिक मामलों के जानकार समीक्षा में जुट गए है वही एन डी ए और इंडिया गठबंधन भी समीक्षा करने में जुटे हुए है। 

जानकारो की माने तो लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में भी मतदान प्रतिशत कम होने से कम मार्जिन वाली सीटों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।  2019 में लगभग 75 सीटों पर नजदीकी मुकाबला था. ऐसे में परिणाम किसी भी तरफ झुक सकता है। दूसरे चरण में शुक्रवार को 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 88 सीटों पर मतदान हुए। दूसरे चरण के चुनाव में भी मतदाताओं के भीतर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाई दिया। दूसरे चरण  का वोटिंग ट्रेंड पहले चरण के चुनाव से भी खराब रहा. दूसरे चरण में लगभग 63.00 प्रतिशत मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि 2019 में इन्हीं सीटों पर 70 फीसदी से ज्यादा लोगों ने बढ़-चढक़र वोट किया था जिसका फायदा सत्ता में काबिज भाजपा को मिला था। लेकिन दो चरणों में कम होते इस वोटिंग प्रतिशत ने सभी राजनीतिक दलों का गणित बिगाड़ दिया है। याद दिला दे की पहले चरण में 21 राज्यों की 102 लोकसभा सीटों पर 64 प्रतिशत वोट डाले गए थे. पिछले चुनाव में उन सीटों पर भी 70 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुए थे। यही हाल दूसरे चरण में भी रहा. किसी भी राज्य में मतदान का आंकड़ा 80 फीसदी को पार नहीं कर सका जो चिंता का विषय हो सकता है।

वैसे यदि आंकड़ों की बात करें तो सबसे ज्यादा त्रिपुरा में 78.6 प्रतिशत और सबसे कम उत्तर प्रदेश में 54.8 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. वहीं मणिपुर में 77.2 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 73.1 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 71.8 प्रतिशत, असम में 70.8, जम्मू और कश्मीर में 71.6, केरल में 65.3, कर्नाटक में 67.3, राजस्थान में 63.9, मध्य प्रदेश में 56.8, महाराष्ट्र में 54.3 और बिहार में 54.9 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट किया।

वोटिंग प्रतिशत कम होने के कारण बदलते रही है सरकारें 

वैसे पिछले कुछ चुनाव के रिकॉर्ड को देखे तो पिछले लगभग 12 में से 5 चुनावों में वोटिंग प्रतिशत कम हुए हैं और इनमें से चार बार सरकार बदली है। जानकर बताते है की  1980 के चुनाव में मतदान प्रतिशत कम हुआ तब जनता पार्टी को हटाकर कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। वहीं 1989 में मत प्रतिशत गिरने से कांग्रेस की सरकार चले गई थी और केंद्र में  बीपी सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी थी। 1991 में भी मतदान में गिरावट के बाद केंद्र में कांग्रेस की वापसी हुई थी। हालांकि 1999 में वोटिंग प्रतिशत में गिरावट के बाद भी सत्ता नहीं बदली। वहीं 2004 में एक बार फिर मतदान में गिरावट का फायदा विपक्षी दलों को मिला था और कांग्रेस की सरकार बनी। 2009 में भी कांग्रेस की ही  सरकार बनी थी।1977 से लेकर अब तक हुए 12 चुनावों में मतदान प्रतिशत 55 प्रतिशत से लेकर 67 प्रतिशत के आसपास ही रहा है. साल 2019 के चुनाव में देश में सबसे अधिक  मतदान 2019 में हुआ था जब 67.4 प्रतिशत वोट पड़े थे. 12 में से 7 चुनावों में मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी देखने को मिली. इन चुनावों के परिणाम पर नजर देने के बाद पता चलता है कि 7 में से 4 बार सरकार बदली. वहीं 3 चुनावों में सरकार नहीं बदली अर्थात सत्ताधारी दल को वोट परसेंट के बढऩे का फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी हो सकता है. साल 1984, 2009 और 2019 के चुनावों में वोट परसेंट के बढऩे का लाभ सत्ताधारी दल को हुआ और उसकी बड़ी बहुमत के साथ वापसी हुई। 4 चुनाव ऐसे रहे हैं जब मतदान में बढ़ोतरी हुई और केंद्र की सरकार बदल गयी. साल 1977, 1996, 1998 और 2014 के चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ ही सत्ता में भी परिवर्तन देखने को मिला.

60 प्रतिशत से अधिक मतदान होने पर किसे मिली जीत? 

पिछले 12 चुनावों के रिकॉर्ड को देखे तो   1977, 1984,1989, 1998,1999,2014 और 2019 के चुनावों में 60 प्रतिशत से अधिक वोट पड़े हैं. इन चुनावों के परिणाम को अगर देखें तो 1977,1989, 1998 और 2014 के चुनावों में सत्ता में परिवर्तन देखने को मिली थी। वहीं तीन चुनाव 1989,1999 और 2019 के चुनावों में 60 प्रतिशत से अधिक वोटिंग के बाद भी सत्ताधारी दलों की वापसी हुई थी। 

कम मतदान प्रतिशत वाले चुनावों का हाल

पूर्व के रिकॉर्ड को देखे तो जिन चुनावों में 60 प्रतिशत से कम वोट पड़े उन चुनावों के परिणाम चौकाने वाले रहे। आंकड़े बताते है की  1980 के चुनाव में 56.9 प्रतिशत वोट पड़े थे और केंद्र में सत्ता परिवर्तन हो गया था। तब जनता पार्टी की सरकार हार गयी थी और कांग्रेस की वापसी हो गयी थी। 1991 के चुनाव में 55.9 प्रतिशत वोट पड़े थे और केंद्र में एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हो गयी थी।1996 के चुनाव में 57.9 प्रतिशत वोट पड़े थे तब खंडित जनादेश मिलने के बाद संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी थी. 2004 और 2009 के चुनावों में भी कम वोट परसेंट रहे थे इन चुनावों में कांग्रेस की सरकार बनी थी। जबकि 2014 और 2019 में भाजपा की सरकार बनी। इस बार दो चरणों के चुनाव में फिलहाल मतदान प्रतिशत कम ही है जिसका किसे फायदा मिलेगा और किसे नुकसानी होगी यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन फिलहाल कम मतदान होने से राजनेतिक दलों के अलावा चुनाव आयोग चिंतित नजर आ रहा है।

वोटिंग कम होने से हिन्दी राज्यों में बढ़ी चिंता

 दोनो चरणों में  हिंदी भाषी राज्यों में  मतदाताओ ने वोटिंग को लेकर ज्यादा रुचि नहीं दिखाया। पूर्व के चुनाव  2014 और 2019 में हिंदी भाषी क्षेत्र में अच्छी-खासी तादाद में लोगों ने वोट किया था लेकिन इस बार मतदाताओं में वो जोश देखने को नहीं मिला। यूपी में दोनों चरणों में वोटिंग कम हुई जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा की सीटें हैं, लेकिन वहां के वोटरों में चुनाव को लेकर उत्साह नहीं दिख रहा है. पहले चरण में जहां 57 प्रतिशत वोट पड़े, वहीं दूसरे चरण में महज 54.8 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वही बिहार में भी इस बार मतदाता वोट को लेकर काफी नीरस दिख रहे हैं. पहले चरण में जहां 48 फीसदी लोगों ने वोट किया, वहीं दूसरे चरण में  54.9 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी मतदाताओं ने नही दिखाई रुचि.      लोक सभा चुनाव में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मतदाताओं ने भी बहुत अधिक रुचि नहीं दिखाई। दूसरे चरण में भी दोनों प्रदेशों में कम मतदान हुआ । हिंदी भाषी क्षेत्रों में कम मतदान होने से सबसे ज्यादा चिंतित भाजपा होगी क्योंकि भाजपा को सबसे ज्यादा बढ़त हिंदी भाषी क्षेत्रों से ही मिलती है। बताया जाता है की दूसरे चरण के लिए  मतदान होने से पहले ही  देश के गृह मंत्री अमित शाह ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित चुनाव के प्रभारी महेंद्र सिंह सह प्रभारी सतीश सिंह के साथ रणनीति बनाया था। चूंकि मध्यप्रदेश में दो चरणों के 12 लोकसभा सीट में मतदान हुआ है और सभी सीटों में मतदान प्रतिशत कम रहा जिसके लिए क्यूअब भाजपा तीसरे और चौथे चरण में 17 लोकसभा सीटों में मतदान बढ़ाने को लेकर विशेष प्रयास करेगी ताकि कम मतदान से पार्टी को कोई नुकसान ना हो।

दसवीं में घटिया परीक्षा परिणाम देने वाले 39 स्कूलों के प्राचार्यो को डीईओ ने किया नोटिस जारी

गोरखपुर के स्कूल का सिर्फ 9.38 प्रतिशत रहा परीक्षा परिणामशासकीय स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को शासन हर महीने वेतन के रूप में मोटी-मोटी रकम देता है लेकिन अधिकांश स्कूल के शिक्षक बच्चों को पढ़ाने में रूचि लेते ही नही जिसके कारण 10 वीं और 12 वीं बोर्ड की परीक्षाओं में अधिकांश स्कूलों का परिणाम खराब हो जाता है। इस बार सिवनी में हाई स्कूल की परीक्षा में लगभग 56.81 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा। सिवनी जिले के 39 ऐसे स्कूल है जहा का परीक्षा परिणाम 9.38 प्रतिशत से लेकर 35 प्रतिशत रहा। ऐसे स्कूल के प्राचार्यो को जिला शिक्षा अधिकारी एस.एस. कुमरे ने कारण बताओं नोटिस जारी किया है। 

गोरखपुर का रहा सबसे कम परीक्षा परिणाम

सिवनी जिले के जिन 39 स्कूलों के प्राचार्यो को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया उनमें विकासखण्ड घंसौर के अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोरखुपर के प्राचार्य भी शामिल है जिनके स्कूल का परीक्षा परिणाम सिर्फ 9.38 प्रतिशत ही रहा। इसके अलावा शासकीय हाई स्कूल बगदरी घंसौर का 16.67 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल बरेला का 22.54 प्रतिशत, शासकीय उ.मा. विद्यालय मेहता घंसौर का 25.88 प्रतिशत एवं शास.उन्नयन हाई स्कूल सारसडोल घंसौर का 33.33 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा। 

लखनादौन विकासखण्ड के 10 स्कूल रहे फिसड्डी

लखनादौन विकासखण्ड परीक्षा परिणाम देने के मामले में फिसड्डी रहा स्थिति यह हो गई कि शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय लखनादौन का ही परीक्षा परिणाम 21.43 प्रतिशत रहा। इसके अलावा शासकीय उन्नयन हाई स्कूल संगईमाल का 21.05 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल सनाईडोंगरी का 22 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल जुगरई का 23.53 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल भिलमा का 26.32 प्रतिशत, शासकीय उन्नयन हाई स्कूल बंजारी का 27.27 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल सिरमंगनी का 28.95 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल बगलई का 32.35 प्रतिशत एवं शासकीय उ.मा. विद्यालय घूरवाड़ा का 34.02 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा।

केवलारी क्षेत्र के 06 स्कूलों के प्राचार्यो को जारी हुआ नोटिस

केवलारी विकासखण्ड के भी लगभग 06 ऐसे स्कूल रहे जिनका परीक्षा परिणाम बेहद ही खराब रहा जिसमें शासकीय हाई स्कूल चिरचिरा का 23.08 प्रतिशत, शासकीय उन्नयन हाई स्कूल अर्जुनझिर का 23.08 प्रतिशत, शास.उ.मा. विद्यालय सरेखा का 31.82 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल गंगाटोला का 33.33 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल बोथिया का 33.33 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल बगलई का 33.94 प्रतिशत एवं शासकीय उ.मा. विद्यालय छींदा का 34.52 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा।

धनौरा के 04 स्कूल पिछड़े

धनौरा विकासखण्ड में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनौरा के प्राचार्य ने अन्य स्कूलों की तुलना में बेहद ही खराब प्रदर्शन किया। उक्त स्कूल का परीक्षा परिणाम 30.95 प्रतिशत रहा। जब उत्कृष्ट विद्यालय की यह स्थिति है तो अन्य विद्यालयों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। धनौरा के ही शासकीय उ.मा. विद्यालय बगहाई का 19.15 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल ग्वारी का 25 प्रतिशत, शासकीय उ.मा. विद्यालय मुर्गहाई का 32.84 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा।

बरघाट क्षेत्र के 03 स्कूल के प्राचार्य को नोटिस हुआ जारी

बरघाट विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले शासकीय उ.मा. विद्यालय बुढ़ैनाकलां का परीक्षा परिणाम 26.26 प्रतिशत रहा। इसके अलावा शासकीय कन्या उ.मा. विद्यालय बरघाट का 32.14 प्रतिशत एवं शासकीय उन्नयन हाई स्कूल कांचना बरघाट का 34.48 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा।छपारा विकासखण्ड के दो स्कूल के प्राचार्य को जारी हुआ नोटिसछपारा विकासखण्ड के सिर्फ दो ऐसे स्कूल है जहां 35 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम रहा जिनमें से एक शासकीय उ.मा. विद्यालय लकवाह जिसका 28.95 प्रतिशत एवं शास.उ.मा. विद्यालय केकड़ा जिसका परीक्षा परिणाम 30.61 प्रतिशत रहा।सिवनी विकासखण्ड के 08 स्कूलों के प्राचार्यो को मिला नोटिससिवनी विकासखण्ड के अंतर्गत 08 स्कूलों के प्राचार्यो को खराब परीक्षा परिणाम देेने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी एस.एस. कुमरे ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसमें शासकीय उच्चतर माध्यमि विद्यालय कान्हीवाड़ा का परीक्षा परिणाम 23.26 प्रतिशत, शासकीय उ.मा. विद्यालय बखारी 26.21 प्रतिशत, शासकीय हाई स्कूल खैरी 26.67 प्रतिशत, शास. हाई स्कूल आमाकोला 27.95 प्रतिशत, शास. हाई स्कूल बींझावाड़ा 28.99 प्रतिशत, शास.उ.मा. विद्यालय हथनापुर 31.34 प्रतिशत, शास. नेताजी सुभाषचंद्र बोस उ.मा. विद्यालय 31.86 प्रतिशत, शास. हाई स्कूल जाम का 35 प्रतिशत रहा।04 हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्यो को भी नोटिस हुआ जारीजिला शिक्षा अधिकारी ने सिवनी जिले के 04 हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्यो को भी नोटिस जारी किया जिसमें लखनादौन विकासखण्ड के शास.उ.मा. विद्यालय खखरिया के प्राचार्य जिनके स्कूल का परीक्षा परिणाम 12.24 प्रतिशत, धनौरा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले शासकीय उ.मा. विद्यालय बगहाई का परीक्षा परिणाम 13.79 प्रतिशत, शास.कन्या.उ.मा. विद्यालय धनौरा का 16.76 प्रतिशत एवं घंसौर विकासखण्ड के शास.उ.मा. विद्यालय गोरखपुर का 31.03 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा जहां के प्राचार्यो को जिला शिक्षा अधिकारी ने कारण बताओं नोटिस जारी किया है।


शुक्रवारी में धनाढ्य लोगों के सामने यातायात विभाग की खत्म हो जाती है ड्यूटी


सडक़ के बीचों बीच खड़े वाहनों के ऊपर नहीं होती कारवाही

ऐसा लगता है कि सिवनी में यातायात महकमें में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी गांव से आने वाले सीधे-साधे लोगों या शहर के मध्यम वर्गीय या गरीब लोगो की  बाइक पकड़ कर  कार्रवाई करना तक ही सीमित रहती है। धनाढ्य और पैसे वाले लोगों के सामने सिवनी  के यातायात महकमें के अधिकारियों की ड्यूटी लगभग समाप्त हो जाती है या यूं कहीं की धनाढ्य लोगों के सामने सिवनी का यातायात महकमा घुटने टेक देता है जैसा कि शुक्रवारी क्षेत्र में होता है। कहने को तो शुक्रवारी में एस डी ओ पी कार्यालय है लेकिन सिवनी एस डी ओ पी का ध्यान भी शुक्रवारी की बिगड़ी यातायात व्यवथा की तरफ नही जाता। यदि आप गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार से है और आपने सिवनी के विभिन्न क्षेत्रों में अपना वाहन खड़ा किया है तो यातायात महकमे की नजर आप पर पड़ जाएगी और आपके वाहन में हेमर लगा दिया जाएगा और चालानी कारवाही कर दी जाएगी। लेकिन यदि आप धनाढ्य और पैसे वाले है तो फिर आप शुक्रवारी जैसे अति व्यततम क्षेत्र में सडक़ के बीचों बीच अपनी कार पार्क कर सकते है क्योंकि यातायात महकमे की ड्यूटी शुक्रवारी में आकर खत्म हो जाती है और यातायात महकमें के अधिकारियों को सडक़ के बीचो-बीच खड़ी कार दिखाई नहीं देती। यातायात महकमा शुक्रवारी में कार खड़ी करने वाले लोगो के ऊपर कारवाही क्यों नही करता यह सवाल जिले के एस पी को यातायात प्रभारी से अवश्य पूछना चाहिए। यह सवाल तो सिवनी एस डी ओ पी से भी पूछना चाहिए की उनके कार्यालय के सामने लोग बेखौफ होकर अपनी कार सडक़ के बीचों बीच लगाकर चले जाते है जिसके कारण लगभग हर दिन जाम की स्थिति बनती है बावजूद इसके एस डी ओ पी भी कोई कारवाही क्यों नही कराते। आखिर धनाढ्य लोगो के ऊपर मेहरबानी का राज क्या है ?

कांग्रेस को लगा झटका ,भाजपा में आया आनंद----- संतोष नानू पंजवानी और रामाकांत राय ने भी थामा भाजपा का दामन-

------लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बड़ा झटका लगा सिवनी विधानसभा के प्रत्याशी रहे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष आनंद पंजवानी ,नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व नगर कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष संतोष नानू पंजवानी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के करीबी रामाकांत राजू राय को प्रदेश भाजपा कार्यालय भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव,प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व्ही डी शर्मा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अभी तक प्रदेश के कई नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था लेकिन सिवनी जिले का कोई बड़ा चेहरा भाजपा में नहीं आया था। विधानसभा चुनाव में लगभग एक लाख वोट हासिल करने वाले आनंद पंजवानी का पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को जबरदस्त नुकसान होगा।           31 मार्च को कई और लोग थाम सकते है भाजपा का दामन-----31 मार्च को प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का घंसौर आगमन होना है जो लोकसभा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते  के पक्ष में आम सभा को संबोधित करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि आनंद पंजवानी के भाजपा में आने के बाद उनके सैकड़ो समर्थक 31 मार्च को घंसौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं जिसमें सिवनी विधानसभा के अलावा केवलारी और बरघाट विधानसभा के कई लोग के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आनंद पंजवानी,नानू पंजवानी और रामाकांत राय को भाजपा की सदस्यता दिलाने में फग्गन सिंह कुलस्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रही।प्रदेश भाजपा कार्यालय में सदस्यता लिए जाने के दौरान जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे,महामंत्री अजय डागोरिया भी मौजूद थे।आनंद पंजवानी के द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा दिए जाने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया में उनके कई समर्थकों ने भी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा की घोषणा कर दिया ।आनंद पंजवानी के द्वारा अचानक से कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामने से जिला कांग्रेस भी सकते में है।               राजा बघेल की कांग्रेस में वापसी से कई लोग है आहत------ विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से गद्दारी करने के मामले में राजा बघेल को 06 वर्षो के लिए निष्कासित कर दिया था। 26 मार्च को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष  जीतू पटवारी ने राजा बघेल को सीधी लोकसभा का प्रभारी बना दिया जिसके बाद से कांग्रेस के कई निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है। आनंद पंजवानी और नानू पंजवानी के द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद कांग्रेस के कई और लोग इस्तीफा देने का मन बना चुके है।

कांग्रेस को लगा झटका ,भाजपा में आया आनंद----- संतोष नानू पंजवानी और रामाकांत राय ने भी थामा भाजपा का दामन--

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बड़ा झटका लगा सिवनी विधानसभा के प्रत्याशी रहे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष आनंद पंजवानी ,नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व नगर कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष संतोष नानू पंजवानी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के करीबी रामाकांत राजू राय को प्रदेश भाजपा कार्यालय भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव,प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व्ही डी शर्मा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अभी तक प्रदेश के कई नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था लेकिन सिवनी जिले का कोई बड़ा चेहरा भाजपा में नहीं आया था। विधानसभा चुनाव में लगभग एक लाख वोट हासिल करने वाले आनंद पंजवानी का पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को जबरदस्त नुकसान होगा।           31 मार्च को कई और लोग थाम सकते है भाजपा का दामन-----31 मार्च को प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का घंसौर आगमन होना है जो लोकसभा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते  के पक्ष में आम सभा को संबोधित करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि आनंद पंजवानी के भाजपा में आने के बाद उनके सैकड़ो समर्थक 31 मार्च को घंसौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं जिसमें सिवनी विधानसभा के अलावा केवलारी और बरघाट विधानसभा के कई लोग के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आनंद पंजवानी,नानू पंजवानी और रामाकांत राय को भाजपा की सदस्यता दिलाने में फग्गन सिंह कुलस्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रही।प्रदेश भाजपा कार्यालय में सदस्यता लिए जाने के दौरान जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे,महामंत्री अजय डागोरिया भी मौजूद थे।आनंद पंजवानी के द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा दिए जाने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया में उनके कई समर्थकों ने भी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा की घोषणा कर दिया ।आनंद पंजवानी के द्वारा अचानक से कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामने से जिला कांग्रेस भी सकते में है।               राजा बघेल की कांग्रेस में वापसी से कई लोग है आहत------ विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से गद्दारी करने के मामले में राजा बघेल को 06 वर्षो के लिए निष्कासित कर दिया था। 26 मार्च को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष  जीतू पटवारी ने राजा बघेल को सीधी लोकसभा का प्रभारी बना दिया जिसके बाद से कांग्रेस के कई निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है। आनंद पंजवानी और नानू पंजवानी के द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद कांग्रेस के कई और लोग इस्तीफा देने का मन बना चुके है।

कांग्रेस को लगा झटका ,भाजपा में आया आनंद----- संतोष नानू पंजवानी और रामाकांत राय ने भी थामा भाजपा का दामन--

-----लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बड़ा झटका लगा सिवनी विधानसभा के प्रत्याशी रहे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष आनंद पंजवानी ,नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व नगर कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष संतोष नानू पंजवानी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के करीबी रामाकांत राजू राय को प्रदेश भाजपा कार्यालय भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव,प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व्ही डी शर्मा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अभी तक प्रदेश के कई नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था लेकिन सिवनी जिले का कोई बड़ा चेहरा भाजपा में नहीं आया था। विधानसभा चुनाव में लगभग एक लाख वोट हासिल करने वाले आनंद पंजवानी का पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को जबरदस्त नुकसान होगा।           31 मार्च को कई और लोग थाम सकते है भाजपा का दामन-----31 मार्च को प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का घंसौर आगमन होना है जो लोकसभा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते  के पक्ष में आम सभा को संबोधित करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि आनंद पंजवानी के भाजपा में आने के बाद उनके सैकड़ो समर्थक 31 मार्च को घंसौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं जिसमें सिवनी विधानसभा के अलावा केवलारी और बरघाट विधानसभा के कई लोग के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आनंद पंजवानी,नानू पंजवानी और रामाकांत राय को भाजपा की सदस्यता दिलाने में फग्गन सिंह कुलस्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रही।प्रदेश भाजपा कार्यालय में सदस्यता लिए जाने के दौरान जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे,महामंत्री अजय डागोरिया भी मौजूद थे।आनंद पंजवानी के द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा दिए जाने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया में उनके कई समर्थकों ने भी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा की घोषणा कर दिया ।आनंद पंजवानी के द्वारा अचानक से कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामने से जिला कांग्रेस भी सकते में है।          राजा बघेल की कांग्रेस में वापसी से कई लोग है आहत------ विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से गद्दारी करने के मामले में राजा बघेल को 06 वर्षो के लिए निष्कासित कर दिया था। 26 मार्च को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष  जीतू पटवारी ने राजा बघेल को सीधी लोकसभा का प्रभारी बना दिया जिसके बाद से कांग्रेस के कई निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है। आनंद पंजवानी और नानू पंजवानी के द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद कांग्रेस के कई और लोग इस्तीफा देने का मन बना चुके है।

कांग्रेस को लगा झटका ,भाजपा में आया आनंद----- संतोष नानू पंजवानी और रामाकांत राय ने भी थामा भाजपा का दामन--

-----लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बड़ा झटका लगा सिवनी विधानसभा के प्रत्याशी रहे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष आनंद पंजवानी ,नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष व नगर कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष संतोष नानू पंजवानी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के करीबी रामाकांत राजू राय को प्रदेश भाजपा कार्यालय भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव,प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व्ही डी शर्मा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अभी तक प्रदेश के कई नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था लेकिन सिवनी जिले का कोई बड़ा चेहरा भाजपा में नहीं आया था। विधानसभा चुनाव में लगभग एक लाख वोट हासिल करने वाले आनंद पंजवानी का पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को जबरदस्त नुकसान होगा।           31 मार्च को कई और लोग थाम सकते है भाजपा का दामन-----31 मार्च को प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का घंसौर आगमन होना है जो लोकसभा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते  के पक्ष में आम सभा को संबोधित करेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि आनंद पंजवानी के भाजपा में आने के बाद उनके सैकड़ो समर्थक 31 मार्च को घंसौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं जिसमें सिवनी विधानसभा के अलावा केवलारी और बरघाट विधानसभा के कई लोग के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आनंद पंजवानी,नानू पंजवानी और रामाकांत राय को भाजपा की सदस्यता दिलाने में फग्गन सिंह कुलस्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रही।प्रदेश भाजपा कार्यालय में सदस्यता लिए जाने के दौरान जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे,महामंत्री अजय डागोरिया भी मौजूद थे।आनंद पंजवानी के द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा दिए जाने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया में उनके कई समर्थकों ने भी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा की घोषणा कर दिया ।आनंद पंजवानी के द्वारा अचानक से कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामने से जिला कांग्रेस भी सकते में है।          राजा बघेल की कांग्रेस में वापसी से कई लोग है आहत------ विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से गद्दारी करने के मामले में राजा बघेल को 06 वर्षो के लिए निष्कासित कर दिया था। 26 मार्च को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष  जीतू पटवारी ने राजा बघेल को सीधी लोकसभा का प्रभारी बना दिया जिसके बाद से कांग्रेस के कई निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ता अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है। आनंद पंजवानी और नानू पंजवानी के द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद कांग्रेस के कई और लोग इस्तीफा देने का मन बना चुके है।

राजा बघेल को सीधी का प्रभारी बनाकर जीतू पटवारी ने सम्राट सिंह सरस्वार को हराने कर लिया प्रबंध----

 बालाघाट लोक सभा के कांग्रेस प्रत्याशी सम्राट सिंह सरस्वार के पास अभी भी मौका है की वह लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दे क्योंकि उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी से गद्दारी करने के मामले में 06 सालो के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी लोक सभा का प्रभारी बनाकर दोस्ती का फर्ज पूरा कर लिया। कांग्रेस से गद्दारी करने वाले राजा बघेल को  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सीधी लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है तथा सुश्री उमा धुर्वे को सह प्रभारी नियुक्त किया है।राजीव सिंह) उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी के द्वारा जारी पत्र में राजा बघेल से कहा गया है की वह अपने प्रभार के क्षेत्र में शीघ्र ही पहुंचकर लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष से व्यक्तिगत सम्पर्क एवं समन्वय स्थापित करते हुए मण्डलम, सेक्टर, बूथ स्तर पर बैठके आयोजित कर अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें ।  उक्त पत्र जारी होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है की जीतू पटवारी के कार्यकाल में जो नेता पार्टी से जितनी बड़ी गद्दारी करेगा जीतू पटवारी उन्हे उतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे जैसी जिम्मेदारी उन्होंने राजा बघेल जैसे निष्कासित नेता को दिया । अब लोग यह चर्चा करने लगे है की कांग्रेस में जिन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी लेना है तो वह लोकसभा चुनाव में सम्राट सिंह सरस्वार को हराने भीतरघात करते हुए गद्दारी करने लगे तो उनकी किस्मत खुल सकती है ऐसे में सम्राट सिंह सरस्वार सतर्क हो जाए और चुनाव लड़ने के विषय में पुनर्विचार करे वर्ना कांग्रेसियों के हाथ ही उन्हे हार मिलेगी । वैसे राजा बघेल की कांग्रेस में बहाली को लेकर यह भी चर्चा है की विधानसभा की तरह ही लोकसभा में भी राजा बघेल अपनी आदत के मुताबिक निपटाओ समिति के जरिए सक्रिय होंगे। ऐसी स्थिति में सम्राट सिंह सरस्वार को सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही होगा जिसकी भरपाई वह भविष्य में शायद ही कभी कर पाए।

06 साल के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी का प्रभारी बनाकर जीतू पटवारी ने सम्राट सिंह सरस्वार को हराने कर लिया प्रबंध-

--- बालाघाट लोक सभा के कांग्रेस प्रत्याशी सम्राट सिंह सरस्वार के पास अभी भी मौका है की वह लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दे क्योंकि उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी से गद्दारी करने के मामले में 06 सालो के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी लोक सभा का प्रभारी बनाकर दोस्ती का फर्ज पूरा कर लिया। कांग्रेस से गद्दारी करने वाले राजा बघेल को  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सीधी लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है तथा सुश्री उमा धुर्वे को सह प्रभारी नियुक्त किया है।राजीव सिंह) उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी के द्वारा जारी पत्र में राजा बघेल से कहा गया है की वह अपने प्रभार के क्षेत्र में शीघ्र ही पहुंचकर लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष से व्यक्तिगत सम्पर्क एवं समन्वय स्थापित करते हुए मण्डलम, सेक्टर, बूथ स्तर पर बैठके आयोजित कर अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें ।  उक्त पत्र जारी होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है की जीतू पटवारी के कार्यकाल में जो नेता पार्टी से जितनी बड़ी गद्दारी करेगा जीतू पटवारी उन्हे उतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे जैसी जिम्मेदारी उन्होंने राजा बघेल जैसे निष्कासित नेता को दिया । अब लोग यह चर्चा करने लगे है की कांग्रेस में जिन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी लेना है तो वह लोकसभा चुनाव में सम्राट सिंह सरस्वार को हराने भीतरघात करते हुए गद्दारी करने लगे तो उनकी किस्मत खुल सकती है ऐसे में सम्राट सिंह सरस्वार सतर्क हो जाए और चुनाव लड़ने के विषय में पुनर्विचार करे वर्ना कांग्रेसियों के हाथ ही उन्हे हार मिलेगी । वैसे राजा बघेल की कांग्रेस में बहाली को लेकर यह भी चर्चा है की विधानसभा की तरह ही लोकसभा में भी राजा बघेल अपनी आदत के मुताबिक निपटाओ समिति के जरिए सक्रिय होंगे। ऐसी स्थिति में सम्राट सिंह सरस्वार को सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही होगा जिसकी भरपाई वह भविष्य में शायद ही कभी कर पाए।

06 साल के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी का प्रभारी बनाकर जीतू पटवारी ने सम्राट सिंह सरस्वार को हराने कर लिया प्रबंध----

बालाघाट लोक सभा के कांग्रेस प्रत्याशी सम्राट सिंह सरस्वार के पास अभी भी मौका है की वह लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दे क्योंकि उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी से गद्दारी करने के मामले में 06 सालो के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी लोक सभा का प्रभारी बनाकर दोस्ती का फर्ज पूरा कर लिया। कांग्रेस से गद्दारी करने वाले राजा बघेल को  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सीधी लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है तथा सुश्री उमा धुर्वे को सह प्रभारी नियुक्त किया है।राजीव सिंह) उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी के द्वारा जारी पत्र में राजा बघेल से कहा गया है की वह अपने प्रभार के क्षेत्र में शीघ्र ही पहुंचकर लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष से व्यक्तिगत सम्पर्क एवं समन्वय स्थापित करते हुए मण्डलम, सेक्टर, बूथ स्तर पर बैठके आयोजित कर अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें ।  उक्त पत्र जारी होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है की जीतू पटवारी के कार्यकाल में जो नेता पार्टी से जितनी बड़ी गद्दारी करेगा जीतू पटवारी उन्हे उतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे जैसी जिम्मेदारी उन्होंने राजा बघेल जैसे निष्कासित नेता को दिया । अब लोग यह चर्चा करने लगे है की कांग्रेस में जिन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी लेना है तो वह लोकसभा चुनाव में सम्राट सिंह सरस्वार को हराने भीतरघात करते हुए गद्दारी करने लगे तो उनकी किस्मत खुल सकती है ऐसे में सम्राट सिंह सरस्वार सतर्क हो जाए और चुनाव लड़ने के विषय में पुनर्विचार करे वर्ना कांग्रेसियों के हाथ ही उन्हे हार मिलेगी । वैसे राजा बघेल की कांग्रेस में बहाली को लेकर यह भी चर्चा है की विधानसभा की तरह ही लोकसभा में भी राजा बघेल अपनी आदत के मुताबिक निपटाओ समिति के जरिए सक्रिय होंगे। ऐसी स्थिति में सम्राट सिंह सरस्वार को सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही होगा जिसकी भरपाई वह भविष्य में शायद ही कभी कर पाए।

06 साल के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी का प्रभारी बनाकर जीतू पटवारी ने सम्राट सिंह सरस्वार को हराने कर लिया प्रबंध----

बालाघाट लोक सभा के कांग्रेस प्रत्याशी सम्राट सिंह सरस्वार के पास अभी भी मौका है की वह लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दे क्योंकि उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी से गद्दारी करने के मामले में 06 सालो के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी लोक सभा का प्रभारी बनाकर दोस्ती का फर्ज पूरा कर लिया। कांग्रेस से गद्दारी करने वाले राजा बघेल को  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सीधी लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है तथा सुश्री उमा धुर्वे को सह प्रभारी नियुक्त किया है।राजीव सिंह) उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी के द्वारा जारी पत्र में राजा बघेल से कहा गया है की वह अपने प्रभार के क्षेत्र में शीघ्र ही पहुंचकर लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष से व्यक्तिगत सम्पर्क एवं समन्वय स्थापित करते हुए मण्डलम, सेक्टर, बूथ स्तर पर बैठके आयोजित कर अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें ।  उक्त पत्र जारी होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है की जीतू पटवारी के कार्यकाल में जो नेता पार्टी से जितनी बड़ी गद्दारी करेगा जीतू पटवारी उन्हे उतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे जैसी जिम्मेदारी उन्होंने राजा बघेल जैसे निष्कासित नेता को दिया । अब लोग यह चर्चा करने लगे है की कांग्रेस में जिन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी लेना है तो वह लोकसभा चुनाव में सम्राट सिंह सरस्वार को हराने भीतरघात करते हुए गद्दारी करने लगे तो उनकी किस्मत खुल सकती है ऐसे में सम्राट सिंह सरस्वार सतर्क हो जाए और चुनाव लड़ने के विषय में पुनर्विचार करे वर्ना कांग्रेसियों के हाथ ही उन्हे हार मिलेगी । वैसे राजा बघेल की कांग्रेस में बहाली को लेकर यह भी चर्चा है की विधानसभा की तरह ही लोकसभा में भी राजा बघेल अपनी आदत के मुताबिक निपटाओ समिति के जरिए सक्रिय होंगे। ऐसी स्थिति में सम्राट सिंह सरस्वार को सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही होगा जिसकी भरपाई वह भविष्य में शायद ही कभी कर पाए।

06 साल के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी का प्रभारी बनाकर जीतू पटवारी ने सम्राट सिंह सरस्वार को हराने कर लिया प्रबंध----

 बालाघाट लोक सभा के कांग्रेस प्रत्याशी सम्राट सिंह सरस्वार के पास अभी भी मौका है की वह लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दे क्योंकि उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी से गद्दारी करने के मामले में 06 सालो के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी लोक सभा का प्रभारी बनाकर दोस्ती का फर्ज पूरा कर लिया। कांग्रेस से गद्दारी करने वाले राजा बघेल को  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सीधी लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है तथा सुश्री उमा धुर्वे को सह प्रभारी नियुक्त किया है।

राजीव सिंह) उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी के द्वारा जारी पत्र में राजा बघेल से कहा गया है की वह अपने प्रभार के क्षेत्र में शीघ्र ही पहुंचकर लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष से व्यक्तिगत सम्पर्क एवं समन्वय स्थापित करते हुए मण्डलम, सेक्टर, बूथ स्तर पर बैठके आयोजित कर अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें ।  उक्त पत्र जारी होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है की जीतू पटवारी के कार्यकाल में जो नेता पार्टी से जितनी बड़ी गद्दारी करेगा जीतू पटवारी उन्हे उतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे जैसी जिम्मेदारी उन्होंने राजा बघेल जैसे निष्कासित नेता को दिया । अब लोग यह चर्चा करने लगे है की कांग्रेस में जिन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी लेना है तो वह लोकसभा चुनाव में सम्राट सिंह सरस्वार को हराने भीतरघात करते हुए गद्दारी करने लगे तो उनकी किस्मत खुल सकती है ऐसे में सम्राट सिंह सरस्वार सतर्क हो जाए और चुनाव लड़ने के विषय में पुनर्विचार करे वर्ना कांग्रेसियों के हाथ ही उन्हे हार मिलेगी । वैसे राजा बघेल की कांग्रेस में बहाली को लेकर यह भी चर्चा है की विधानसभा की तरह ही लोकसभा में भी राजा बघेल अपनी आदत के मुताबिक निपटाओ समिति के जरिए सक्रिय होंगे। ऐसी स्थिति में सम्राट सिंह सरस्वार को सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही होगा जिसकी भरपाई वह भविष्य में शायद ही कभी कर पाए।

06 साल के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी का प्रभारी बनाकर जीतू पटवारी ने सम्राट सिंह सरस्वार को हराने कर लिया प्रबंध

---- बालाघाट लोक सभा के कांग्रेस प्रत्याशी सम्राट सिंह सरस्वार के पास अभी भी मौका है की वह लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दे क्योंकि उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी से गद्दारी करने के मामले में 06 सालो के लिए निष्कासित राजा बघेल को सीधी लोक सभा का प्रभारी बनाकर दोस्ती का फर्ज पूरा कर लिया। कांग्रेस से गद्दारी करने वाले राजा बघेल को  प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सीधी लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है तथा सुश्री उमा धुर्वे को सह प्रभारी नियुक्त किया है।

राजीव सिंह) उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी के द्वारा जारी पत्र में राजा बघेल से कहा गया है की वह अपने प्रभार के क्षेत्र में शीघ्र ही पहुंचकर लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष से व्यक्तिगत सम्पर्क एवं समन्वय स्थापित करते हुए मण्डलम, सेक्टर, बूथ स्तर पर बैठके आयोजित कर अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें ।  उक्त पत्र जारी होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है की जीतू पटवारी के कार्यकाल में जो नेता पार्टी से जितनी बड़ी गद्दारी करेगा जीतू पटवारी उन्हे उतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे जैसी जिम्मेदारी उन्होंने राजा बघेल जैसे निष्कासित नेता को दिया । अब लोग यह चर्चा करने लगे है की कांग्रेस में जिन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी लेना है तो वह लोकसभा चुनाव में सम्राट सिंह सरस्वार को हराने भीतरघात करते हुए गद्दारी करने लगे तो उनकी किस्मत खुल सकती है ऐसे में सम्राट सिंह सरस्वार सतर्क हो जाए और चुनाव लड़ने के विषय में पुनर्विचार करे वर्ना कांग्रेसियों के हाथ ही उन्हे हार मिलेगी । वैसे राजा बघेल की कांग्रेस में बहाली को लेकर यह भी चर्चा है की विधानसभा की तरह ही लोकसभा में भी राजा बघेल अपनी आदत के मुताबिक निपटाओ समिति के जरिए सक्रिय होंगे। ऐसी स्थिति में सम्राट सिंह सरस्वार को सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही होगा जिसकी भरपाई वह भविष्य में शायद ही कभी कर पाए।

फरार चल रहे सहायक आयुक्त अमर उईके के चहेते शशिकांत सिंह हटाए गए

सिवनी महाकौशल । सिवनी में 30 सितंबर 2022 को सहायक आयुक्त के पद पर अमर उईके को पदस्थ किया गया था ।अपनी  पदस्थापना के बाद से ही अमर उईके शशिकांत सिंह, वीरेंद्र बोरकर, राकेश दुबे जैसे कई अधिकारियों के ऊपर मेहरबान रहे और उन्हे अपना विश्वास पात्र बना लिया था। बताया जाता है कि सहायक आयुक्त अमर सिंह के रहते उक्त सभी  अधिकारियों की विभाग में तूती  बोला करती थी ।अमर उईके की  उच्च स्तरीय सांठगांठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब अमर उईके के विरूद्ध डिंडौरी में धारा 420, 409 के तहत एफआईआर दर्ज हुई तब वह फरार हो गए। जनजातीय कार्य में विभाग का काम सुचारू रूप से से चल सके इसके लिए विभाग के कुछ कर्मचारियों ने जिले के आला अधिकारियों को गुमराह कर अमर सिंह के करीबी  शशिकांत सिंह को प्रभारी एसी बनाये जाने की नोट शीट चलवा दिया और शशिकांत सिंह सहायक आयुक्त भी बन गए जबकि नियमानुसार वह सहायक आयुक्त नही बन सकते थे ।उनकी मूल पदस्थापना धोबीसर्रा हाई स्कूल  प्राचार्य के पद पर है लेकिन अमर उईके की मेहरबानी से उन्हें एडी का प्रभार दे दिया गया था। बताया जाता है कि नियमानुसार सहायक आयुक्त का प्रभार प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को देना होता है लेकिन अमर उईके के कुछ चहेते बाबूओं ने शशिकांत सिंह को प्रभार दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। बताया जाता है कि जब यह मामला जिला कलेक्टर के संज्ञान में आया तो उन्होने शशिकांत सिंह को हटाकर एस. आर. मरावी को प्रभारी एसी बना दिया जिससे उन बाबूओ को झटका लगा जिन्होंने शशिकांत सिंह को प्रभारी सहायक आयुक्त बनवाने में नियमो को अनदेखा कर नोट शीट चलाया था।देखना यह है कि जिला कलेक्टर उन बाबूओं की भूमिका की जांच करते है या नही जिन्होने नियम विरूद्ध तरीके से शशिकांत सिंह को प्रभारी सहायक आयुक्त बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था।

लोकसभा चुनाव के लिए 20 मार्च को अधिसूचना होगी जारी,27 मार्च तक जमा होंगे नामांकन ।

भोपाल। केंद्रीय निवार्चन आयुक्त ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दी है। चुनाव की घोषणा के साथ ही देश के साथ-साथ प्रदेश में भी आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। देश में कुल सात चरणों में मतदान होगा। मप्र में पहले चरण के साथ ही मतदान की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। इसके लिए 20 मार्च को अधिसूचना जारी होगी और 30 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 19 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होगा। प्रदेश में कुल चार चरणों में मतदान होगा।म.प्र. में 19 अपै्रल को पहले चरण का मतदान होगा जिसमें महाकौशल क्षेत्र की जबलपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा लोकसभा के साथ-साथ सीधी एवं शहडोल लोकसभा में चुनाव होंगे।वही दूसरा चरण 26 अप्रैल  को चुनाव होंगे जिसमें 07 लोकसभा सीट टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद एवं बैतूल लोकसभा के चुनाव होंगे। 07 मई को 08 लोकसभा जिसमें मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल एवं राजगढ़ में चुनाव होंगे वही 13 मई को चौथे चरण का चुनाव होगा जिसमें 08 लोकसभा देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगौन एवं खंडवा लोकसभा की सीट शामिल है। पहले चरण के लिए 20 मार्च को अधिसूचना जारी होगी जिसके बाद नामांकन फार्म भरे जायेंगे वही 30 मार्च तक नामांकन फार्म वापिस लिए जायेंगे।

प्रदेश में पांच करोड़ 64 लाख से ज्यादा मतदाता

प्रदेश में इस बार पांच करोड़ 64 लाख 15 हजार 310 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में देखें तो प्रदेश में लगभग 50 लाख मतदाता बढ़े हैं। पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के वक्त प्रदेश में 5 करोड़ 60 लाख मतदाता थे।

भाजपा ने सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित, कांग्रेस पिछड़ीलोकसभा चुनाव के ऐलान से पहले भाजपा ने सभी 29 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने 15 सीटों पर पिछली बार विजयी रहे प्रत्याशियों को फिर मौका दिया है, वहीं 14 सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं। वहीं कांग्रेस अब तक सिर्फ 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर पाई है। उसने तीन विधायकों को भी लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारा है। भिंड से फूल सिंह बरैया, सतना से सिद्धार्थ कुशवाहा और मंडला से ओमकार सिंह मरकाम चुनाव लड़ेंगे। एक सीट कांग्रेस ने सहयोगी दल सपा के लिए छोड़ी है। यानी 18 सीटों पर उसे अपने उम्मीदवार घोषित करना बाकी है। बताया जाता है की कांग्रेस की केंद्रीय सी ई सी ने 18 मार्च तक एक एक नाम मांगे है। 


क्या फरार चल रहे अमर उईके के ऊपर इनाम घोषित करेगी डिंडोरी पुलिस


हाई कोर्ट से अमर उईके के अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत की याचिका लिया वापिस
 डिंडोरी जिले में सहायक आयुक्त के पद पर पदस्थ रहते हुए भारी भरकम भ्रष्टाचार करने वाले अमर एक के विरुद्ध 21 फरवरी को डिंडोरी के सिटी कोतवाली थाने में 409 ,420 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया था तब से ही अमर ऊईके फरार चल रहे हैं जिन्हें डिंडोरी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई । अमर उईके की अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय सत्र न्यायाधीश डिंडौरी ने 27 फरवरी को खारिज कर दिया था जिसके बाद अमर उईके ने 02 मार्च को उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर किया था जिसके सुनवाई 11 मार्च को होना था उच्च न्यायालय में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल के समक्ष अग्रिम जमानत की याचिका की सुनवाई के दौरान अमर उईके के अधिवक्ता ने अचानक अग्रिम जमानत याचिका वापिस ले लिया जिसके बाद उच्च न्यायालय में इस प्रकरण को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय से याचिका खारिज होने के बाद अब सबकी नजर डिंडौरी पुलिस के ऊपर टिकी हुई है जानकारों की मानें तो पुलिस ऐसे मामले में अक्सर फरार आरोपियों के विरूद्ध ईनाम घोषित करती है ऐसे में देखना यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस फरार चल रहे अमर उईके के ऊपर ईनाम घोषित करती है या नही।

52 साल की राजनीति में एक भी चुनाव नही जीतने वाले सुरेश पचौरी ने थामा भाजपा का दामन

जिस नेता को 52 साल की राजनीति में एक भी बार चुनाव जीतने का मौका नहीं मिला उसने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए आज भाजपा का दामन थाम लिया। सुरेश पचौरी के अलावा प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और धार के पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, पिछली विधानसभा में इंदौर से कांग्रेस के विधायक रहे संजय शुक्ला, पूर्व विधायक विशाल पटेल, अर्जुन पलिया, सतपाल पलिया और  कैलाश मिश्रा ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। वैसे भाजपा का कुनबा तो बढ़ गया लेकिन सुरेश पचौरी को लेकर चर्चा चल रही है की जिस नेता को जनता ने कभी स्वीकार नहीं किया उसे भाजपा में लाकर पार्टी कौन सा फायदा उठाएगी। जो लोग सुरेश पचौरी की राजनीति को जानते है उनकी माने तो सुरेश पचौरी सन 1972 में कांग्रेस में आए थे। तब से लेकर अब तक उनके 52 साल के राजनैतिक जीवन में वे एक भी चुनाव नहीं जीत सके। हालांकि कांग्रेस ने उन्हें  राज्यसभा सांसद से लेकर केंद्र में मंत्री तक बनाया। इतना ही नहीं वह कांग्रेस संगठन में भी कई पदों पर रहे। मध्यप्रदेश में उनकी स्वीकार्यता नही थी फिर भी उन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया सुरेश पचौरी सन 1984 में युवक कांग्रेस के अध्यक्ष बने। वे सन 1984 में ही राज्यसभा के लिए भी चुन लिए गए। इसके बाद पचौरी सन 1990, सन 1996 और सन 2002 में भी राज्यसभा सांसद बने। राज्यसभा के सांसद के रूप में 6—6 साल का 4 बार का कार्यकाल पूरा किया। इस प्रकार राजनैतिक जीवन के पूरे 24 साल उन्होंने राज्यसभा में गुजारे।इतना ही नहीं, सुरेश पचौरी कई बार केंद्र की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे। केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने रक्षा विभाग का अहम दायित्व भी संभाला। वह 2004 से 2008 तक केंद्र में रक्षा के अलावा कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत और पेंशन, संसदीय मामलों के भी मंत्री रहे।उमा भारती से 01 लाख से अधिक वोटो से हारे थे चुनाव---- सुरेश पचौरी भले ही कांग्रेस के बड़े नेता थे लेकिन आम मतदाताओं के बीच वह कभी लोकप्रिय नहीं रहे।पहली बार सुरेश पचौरी सन 1999 में भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी की साध्वी उमा भारती के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे। इस चुनाव में वे 1.6 लाख वोट से हार गए थे। दूसरी बार उन्होंने 2013 में विधानसभा के लिए भाग्य आजमाया। वे भोजपुर विधानसभा सीट से खड़े हुए लेकिन इस चुनाव में भी वे बीजेपी के प्रत्याशी सुरेंद्र पटवा से हार गए थे। आम मतदाताओं ने सुरेश पचौरी को नकारा है। उन्हे ऐसा नेता कहा जाता है जिन्होंने अपनी ऐसी छवि नहीं बनाया जो दमदार नेता की छवि हो ऐसे सुरेश पचौरी का भाजपा में जाना भाजपा को क्या फायदा पहुंचाएगा यह तो पार्टी के रणनीतिकार जाने लेकिन सुरेश पचौरी के भाजपा में जाने से पार्टी के कुनबे में वृद्धि अवश्य हुई है।

बालाघाट लोक सभा की टिकिट होल्ड की गई, ढाल सिंह बिसेन का क्या होगा-

---- भारतीय जनता पार्टी किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेती। यही कारण है कि छोटे से छोटा चुनाव हो या बड़े से बड़ा चुनाव हो भारतीय जनता पार्टी फूंक फूंक कर कदम रखती है। एक तरफ इंडिया गठबंधन शीट शेयरिंग के मामले में उलझी हुई है वही दूसरी तरफ विधान सभा चुनाव की तरह भाजपा ने प्रत्याशियों की घोषणा करना प्रारंभ कर दिया। शनिवार को भाजपा ने प्रदेश की 195 लोक सभा सीट से प्रत्याशियों की अधिकृत घोषणा किया जिसमे मध्य प्रदेश की 29 लोक सभा में 24 लोकसभा सीट में प्रत्याशियों की अधिकृत घोषणा कर दी गई । भाजपा ने जिन 05 सीटों को होल्ड किया है उनमें छिंदवाड़ा, इंदौर, उज्जैन, बालाघाट और धार  शामिल है। वैसे बालाघाट लोक सभा को होल्ड क्यों किया गया यह तो पार्टी का नेतृत्व जाने लेकिन अंदर खाने से आ रही खबरों की माने तो मौजूदा सांसद डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन एक बार फिर टिकिट पाने प्रयास कर रहे है। हालांकि सर्वे में डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन कमजोर प्रत्याशी बताए जा रहे है । सूत्र तो यह भी बताते है की 2019 के लोक सभा चुनाव में डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन को टिकिट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गौरीशंकर बिसेन को चुनाव जीतने के बाद ढाल सिंह बिसेन ने दरकिनार कर दिया था। कई बार सार्वजनिक मंच से गौरीशंकर बिसेन ने ढाल सिंह बिसेन को चुनौती भी दिया। सांसद ढाल सिंह बिसेन के द्वारा ग्राम पंचायतों को वितरित किए गए टेंकरो और यात्री प्रतीक्षालय की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने कई बार सवाल भी उठाए थे अंदर खानों से आ रही खबरों की माने तो इस बार बालाघाट की राजनीति 2019 की तरह फंस गई है। 2019 में  गौरीशंकर बिसेन अपनी पुत्री मौसम बिसेन को टिकिट दिलाना चाहते थे । उनका तत्कालीन सांसद बोध सिंह भगत से भी जमकर विवाद रहा। 2019 में गौरीशंकर बिसेन यह नहीं चाहते थे की बोध सिंह भगत को टिकिट मिले जिसके लिए उन्होंने डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन की पैरवी किया था और उन्हें टिकट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था। इस बार गौरीशंकर बिसेन यह नहीं चाहते की ढाल सिंह बिसेन को टिकिट मिले । वैसे ढाल सिंह बिसेन की निष्क्रीय कार्यप्रणाली के साथ साथ उनकी अधिक उम्र भी उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। भाजपा के पैनल में जो नाम बताए जा रहे है उनमें गौरीशंकर बिसेन, वैभव पवार और रमेश भटेरे शामिल है जिनमे से गौरीशंकर बिसेन की बढ़ती उम्र भी उनके लिए परेशानी का कारण होगा ऐसे में बालाघाट से किसी नए चेहरे को मौका दिया जा सकता है । वैसे बालाघाट लोक सभा की सीट होल्ड होने से डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन के समर्थको के भीतर भी बैचेनी देखी जा सकती है।

भ्रष्ट सहायक आयुक्त अमर उईके की अग्रिम जमानत हुई खारिज, पुलिस अमर उईके को कब करेगी गिरफ्तार

--- सिवनी में पदस्थ सहायक आयुक्त अमर उईके के विरुद्ध -डिडौरी सिटी कोतवाली पुलिस ने 21 फरवरी को 420,409, के तहत मामला पंजीबद्ध किया जिसके बाद से अमर उईके फरार है। बताया जाता है की अमर उईके ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय सत्र न्यायधीश डिंडोरी के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी जिसे माननीय न्यायलय ने खारिज कर दिया। बताया जाता है की अमर उईके के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि डिंडोरी में पदस्थापना के दौरान उसे सुनवाई का मौका दिए बिना जांच टीम के द्वारा संदेहास्पद   प्रतिवेदन के आधार पर झूठा प्रकरण पंजीबद्ध किया । उसकी समाज में मान प्रतिष्ठा है यदि उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है तो उसके साथ बड़ी हकतलफी होगी। वही दूसरी और जमानत का विरोध करते हुए लोक अभियोजक ने तर्क देते हुए कहा की अमर उइके के विरुद्ध दस्तावेज है और कई तर्क दिए गए। सुनवाई के बाद डिंडोरी के सत्र न्यायधीश नीना आशापुरे ने उनकी अग्रिम जमानत खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है की आदिवासी विकास विभाग सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला की शिकायत पर तत्कालीन सहायक आयुक्त अमर सिंह उईके के खिलाफ शासकीय राशि का गबन और कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत पर आईपीसी की धारा 420,409 34 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। अमर उईके के रहते ट्राइवल राज्य छात्र वृति योजना के एक करोड़ 9 लाख 70 हजार 888 रुपए, एस टी छात्रवृति योजना के 11 लाख 26 हजार, एस टी पोस्ट मैट्रिक छात्र वृति योजना के 7 लाख 52 हजार 872 रुपए, एस टी छात्र वृति योजना के 64 लाख 13 हजार 992, रेडक्रॉस मद के 18 लाख 15 हजार,363 रुपए, खेल मद के 42 लाख 88 हजार 862 रुपए, स्काउट एवं गाइड मद के 5 लाख 79 हजार 600 रुपए, कुल 2 करोड़ 59 लाख, 97 हजार, 577 रुपए का भुगतान गलत तरीके से किया गया है। अमर उईके की अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब वह उच्च न्यायलय से अग्रिम जमानत कराने का प्रयास कर रहे है। वही दूसरी तरफ देखना यह है की डिंडोरी पुलिस फरार चल रहे अमर उईके को कब तक गिरफ्तार करती है।

बैंको कंस्ट्रक्शन कंपनी को 18.18% अधिकतर से ना दिया जाए नल जल आवर्धन का ठेका-: राजू यादव।

सिवनी नगर पालिका के द्वारा 29 फरवरी को अनान फानन में प्रेसीडेन्ट कौंसिल की बैठक आयोजित की गई है। उक्त बैठक का पहला एजेंडा अमृत 2-0 ट्रांच- 1 के अंतर्गत सिवनी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के सवर्द्धन का कार्य (लागत राशि - 4509,07 लाख रूपये) हेतु ठेकेदार मेसर्स बैंको कन्सट्रेक्सन प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी ग्वालियर म.प्र. की प्राप्त न्यूनतम निविदा दर 1888 प्रतिशत अधिक एस.ओ आर (लागत राशि- 536038 लाख रूपये) की वित्तीय स्वीकृति के संबंध में विचार एवम निर्णय रखा गया है। समाचार लिखे जाने तक पी आई यू के कुछ सदस्यो तक बैठक का पत्र तक नहीं पहुंचा था। बताया जाता है की बैठक में उक्त महत्वपूर्ण मुद्दे को लाया जा रहा है जब इस बात की जानकारी विवेकानंद वार्ड के पार्षद राजेश राजू यादव को मिली तो उन्होंने नगर पालिका के सी एम ओ रामकुमार कुरेवती को पत्र लिखते हुए कहा की प्रेसीडेन्ट कासिल की बैठक दिनांक 29/02/2024 में

प्रस्ताव क्रमांक 01 में उल्लेखित अमृत 20 ट्रांच- 1 के अंतर्गत सिवनी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था केसवर्द्धन का कार्य (लागत राशि 450907 लाख रूपये) हेतु ठेकेदार मेसर्स बैंको कन्सट्रक्सन प्रायवेटलिमिटेड कम्पनी ग्वालियर म.प्र की प्राप्त न्यूनतम निविदा दर 18.88 प्रतिशत अधिक एस.ओ.आर (लागत राशि- 5360.38 लाख रूपये) की वित्तीय स्वीकृति के लिए रखा गया है उक्त प्रस्ताव को यदि पारित किया जाता है तो नगर पालिका एवं मध्य प्रदेश शासन को आर्थिक क्षत्ति उठानी पड़ेगी।

राजू यादव ने  निवेदन किया है कि उक्त प्रस्ताव को दिनाक 29/02/2024 को होने वाली प्रेसीडेन्ट कासिल की बैठक में पारित ना किया जाये ।               क्या करेंगे पी आई यू के सदस्य--- वैसे इस पूरे मामले में सबकी नजर पी आई सी  के सदस्यो के ऊपर टिकी हुई है। सूत्र बताते है की ग्वालियर की कम्पनी ने उक्त काम के लिए 18.88 प्रतिशत अधिक दर पर भरा है जबकि अन्य जिलों में इससे कम दर पर काम स्वीकृत हुए है। बताया जाता है की अधिक दर से काम इसलिए स्वीकृत कराए जाने की तैयारी चल रही है क्योंकि उक्त योजना में कमीशन का खेल हो सके ऐसे में देखना यह है की पी आई सी के सदस्य उक्त प्रस्ताव को गिराते है अथवा नहीं। उल्लेखनीय है की दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने पूर्व में ही खुलासा किया था की अब नगर पालिका परिषद के द्वारा नई नल जल आवर्धन में भ्रष्टाचार करने की तैयारी में है और नगर पालिका परिषद के अधिकारी पी आई सी की बैठक में गुप चुप तरीके से प्रस्ताव लाकर पास कराने का प्रयास भी कर सकते है देखना यह है की पी आई सी के सदस्य अधिकारियों की कठपुतली बनते है या अपने विवेक से निर्णय लेते है।

बैंको कंस्ट्रक्शन कंपनी को 18.18% अधिकतर से ना दिया जाए नल जल आवर्धन का ठेका---

- सिवनी नगर पालिका के द्वारा 29 फरवरी को अनान फानन में प्रेसीडेन्ट कौंसिल की बैठक आयोजित की गई है। उक्त बैठक का पहला एजेंडा अमृत 2-0 ट्रांच- 1 के अंतर्गत सिवनी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के सवर्द्धन का कार्य (लागत राशि - 4509,07 लाख रूपये) हेतु ठेकेदार मेसर्स बैंको कन्सट्रेक्सन प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी ग्वालियर म.प्र. की प्राप्त न्यूनतम निविदा दर 1888 प्रतिशत अधिक एस.ओ आर (लागत राशि- 536038 लाख रूपये) की वित्तीय स्वीकृति के संबंध में विचार एवम निर्णय रखा गया है। समाचार लिखे जाने तक पी आई यू के कुछ सदस्यो तक बैठक का पत्र तक नहीं पहुंचा था। बताया जाता है की बैठक में उक्त महत्वपूर्ण मुद्दे को लाया जा रहा है जब इस बात की जानकारी विवेकानंद वार्ड के पार्षद राजेश राजू यादव को मिली तो उन्होंने नगर पालिका के सी एम ओ रामकुमार कुरेवती को पत्र लिखते हुए कहा की प्रेसीडेन्ट कासिल की बैठक दिनांक 29/02/2024 मेंप्रस्ताव क्रमांक 01 में उल्लेखित अमृत 20 ट्रांच- 1 के अंतर्गत सिवनी शहर की जलापूर्ति व्यवस्था केसवर्द्धन का कार्य (लागत राशि 450907 लाख रूपये) हेतु ठेकेदार मेसर्स बैंको कन्सट्रक्सन प्रायवेटलिमिटेड कम्पनी ग्वालियर म.प्र की प्राप्त न्यूनतम निविदा दर 18.88 प्रतिशत अधिक एस.ओ.आर (लागत राशि- 5360.38 लाख रूपये) की वित्तीय स्वीकृति के लिए रखा गया है उक्त प्रस्ताव को यदि पारित किया जाता है तो नगर पालिका एवं मध्य प्रदेश शासन को आर्थिक क्षत्ति उठानी पड़ेगी।

राजू यादव ने  निवेदन किया है कि उक्त प्रस्ताव को दिनाक 29/02/2024 को होने वाली प्रेसीडेन्ट कासिल की बैठक में पारित ना किया जाये ।               क्या करेंगे पी आई यू के सदस्य--- वैसे इस पूरे मामले में सबकी नजर पी आई सी  के सदस्यो के ऊपर टिकी हुई है। सूत्र बताते है की ग्वालियर की कम्पनी ने उक्त काम के लिए 18.88 प्रतिशत अधिक दर पर भरा है जबकि अन्य जिलों में इससे कम दर पर काम स्वीकृत हुए है। बताया जाता है की अधिक दर से काम इसलिए स्वीकृत कराए जाने की तैयारी चल रही है क्योंकि उक्त योजना में कमीशन का खेल हो सके ऐसे में देखना यह है की पी आई सी के सदस्य उक्त प्रस्ताव को गिराते है अथवा नहीं। उल्लेखनीय है की दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने पूर्व में ही खुलासा किया था की अब नगर पालिका परिषद के द्वारा नई नल जल आवर्धन में भ्रष्टाचार करने की तैयारी में है और नगर पालिका परिषद के अधिकारी पी आई सी की बैठक में गुप चुप तरीके से प्रस्ताव लाकर पास कराने का प्रयास भी कर सकते है देखना यह है की पी आई सी के सदस्य अधिकारियों की कठपुतली बनते है या अपने विवेक से निर्णय लेते है।

अरी ग्राम पंचायत के उप सरपंच राजेंद्र बिसेन ने सरपंच के घर में घुसकर किया जानलेवा हमला----



इन दिनों कुछ ऐसे लोग है जो कानून को अपनी जेब में रखकर खुले आम गुंडागर्दी कर दहशत फैलाने का काम कर रहे हैं । ऐसा ही कुछ अरी ग्राम पंचायत में देखने को मिला जहां दिन दहाड़े ग्राम पंचायत के उपसरपंच राजेंद्र बिसेन ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर वर्तमान सरपंच दिलीप यादव और उनके परिवार के ऊपर प्राण घातक हमला करते हुए घायल कर दिया जिसकी रिपोर्ट अरी थाने में दर्ज कराई गई। बताया जाता है कि ग्राम पंचायत अरी में दिलीप यादव सरपंच है। वही राजेंद्र बिसेन उप सरपंच है। श्रीमति संध्या यादव ने पुलिस को बताया की सोमवार की दोपहर के समय उप सरपंच राजेंद्र यादव अपने साथी राजेंद्र बिसेन जो पूर्व उप सरपंच श्रीमती सीमा चौहान के पति है उन्हे व सुशील चौहान जो पूर्व सरपंच सीमा चौहान के पुत्र है अपने साथी प्रहलाद भोरगढ़े को लेकर सरपंच दिलीप यादव के घर पहुंचे और अतिक्रमण का नाप करने उनके घर आए तब दिलीप यादव ने कहा कि पहले सभी के मकान का नाप होगा तब उनके मकान का नाप होगा इसी बात को लेकर उप सरपंच राजेंद्र बिसेन ने अपने साथियों के साथ मिलकर गुंडागर्दी दिखाना शुरू कर दिया और बेखौफ होकर हाथ में लठ लेकर दिलीप यादव के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया तभी वहां दिलीप यादव की पुत्रियां व पुत्र बीच बचाव करने पहुंचे तो उन्होंने उनके साथ भी मारपीट कर दिया बताया जाता है कि उप सरपंच ने अपने साथियों के साथ मिलकर दिलीप यादव की पत्नि संध्या यादव के साथ भी मारपीट कर घायल कर दिया।  इस हादसे में दिलीप यादव का हाथ भी फ्रैक्चर हो गया हालांकि अरी पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध मामूली धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया जिससे उनके हौसले बढ़े हुए है।
अतिक्रमण के लिए नपाई करने क्यों पहुंचा उप सरपंच----
ग्राम पंचायत  अरी के उप सरपंच राजेंद्र बिसेन पूर्व सरपंच के पति और पुत्र के साथ अतिक्रमण हटाने के लिए सरपंच के घर क्यों गए यह बड़ा सवाल है। जानकारो की माने तो  उपसरपंच को ऐसा कोई अधिकार तो नहीं कि वह ग्राम पंचायत की तरफ से नपाई करने जाए यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानी थी तो वह ग्राम पंचायत की तरफ से की जानी थी जिसमें सचिव, रोजगार सहायक सहित ग्राम पंचायत के कर्मचारियों को जाना था । लेकिन राजेंद्र बिसेन का सरपंच के घर जाना और हाथ में लठ्ठ लेकर गुंडागर्दी दिखाना इस बात की और संकेत है कि कहीं ना कहीं उप सरपंच राजेंद्र बिसेन पुराने किसी विवाद के कारण ही सरपंच के घर गए थे। इस पूरे मामले में पूर्व सरपंच सीमा चौहान के पति राजेंद्र चौहान और उनके पुत्र सुशील चौहान की भूमिका भी संदिग्ध है क्योंकि प्रश्न यही है की अतिक्रमण हटाने सीमांकन कराने पूर्व सरपंच के पति और पुत्र क्यों रुचि ले रहे थे। यदि इस पूरे मामले की जांच निष्पक्षता से की जाये तो उप सरपंच राजेन्द्र बिसेन एवं पूर्व सरपंच के पति और पुत्र की भूमिका का खुलासा हो सकता है।

पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले दुपेंद्र अमूले06 साल के लिए पार्टी से हुए निष्कासित -

---जिला पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव में पार्टी के द्वारा अधिकृत प्रत्याशी राकेश सनोड़ीया के विरुद्ध नामांकन दाखिल कर पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले जिला पंचायत सदस्य दीपेंद्र अमूले को आखिरकार जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया ।जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजिक अकील  ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि हाल में ही सम्पन्न हुये जिला पंचायत के उपाध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी राकेश सनोडिया के विरूद्ध दुपेन्द्र लकी अमूले द्वारा पार्टी के निर्देशो की अवहेलना करते हुये चुनाव लड़ा। जिला कांग्रेस अनुशासन समिति द्वारा उनके इस कृत्य को पार्टी विरोधी गतिविधि मानकर उन्हें 6 वर्षो के लिए कांग्रेस पार्टी से निष्कासित किया गया। अन्य सदस्यों के खिलाफ भी अनुशासन समिति ने कारण बताओं नोटिस जारी किया है, समिति द्वारा छानबीन के बाद उनके विरूद्ध पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की कार्यवाही की जा सकती है। जिला कांग्रेस के द्वारा निष्कासन की कार्रवाई के बाद आप दुपेंद्र अमूले का साथ देते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले अन्य जिला पंचायत सदस्यों के ऊपर भी निष्कासन की बात गिर सकती है उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी को जिला पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ था जिला पंचायत के 19 वार्ड में से कांग्रेस  के पास 11 जिला पंचायत सदस्य है जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पास पांच और भाजपा के पास तीन सदस्य है। यदि दुपेंद्र अमूले पार्टी के साथ गद्दारी नहीं करते तो कांग्रेस अपना निर्विरोध उपाध्यक्ष बना लेती। चुनाव में कांग्रेस के द्वारा घोषित प्रत्याशी राकेश सनोड़ीया को 10 वोट मिले थे जबकि दुपेंद् अमूले को 09 वोट मिले थे जो भाजपा समर्थित सदस्यो और कांग्रेस समर्थित कुछ सदस्यो के सहारे चुनाव लड़े थे।

06 साल के लिए पार्टी से निष्कासित हुए दुपेंद्र अमूले---

--जिला पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव में पार्टी के द्वारा अधिकृत प्रत्याशी राकेश सनोदिया के विरुद्ध नामांकन दाखिल कर पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले जिला पंचायत सदस्य दीपेंद्र अमूले को आखिरकार जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजीव अखिल में प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि हाल में ही सम्पन्न हुये जिला पंचायत के उपाध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी राकेश सनोडिया के विरूद्ध दुपेन्द्र लकी अमूले द्वारा पार्टी के निर्देशो की अवहेलना करते हुये चुनाव लड़ा। जिला कांग्रेस अनुशासन समिति द्वारा उनके इस कृत्य को पार्टी विरोधी गतिविधि मानकर उन्हें 6 वर्षो के लिए कांग्रेस पार्टी से निष्कासित किया गया। अन्य सदस्यों के खिलाफ भी अनुशासन समिति ने कारण बताओं नोटिस जारी किया है, समिति द्वारा छानबीन के बाद उनके विरूद्ध पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की कार्यवाही की जा सकती है। जिला कांग्रेस के द्वारा निष्कासन की कार्रवाई के बाद आप दुपेंद्र अमूले का साथ देते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले अन्य जिला पंचायत सदस्यों के ऊपर भी निष्कासन की बात गिर सकती है उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी को जिला पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ था जिला पंचायत के 19 वार्ड में से कांग्रेस  के पास 11 जिला पंचायत सदस्य है जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पास पांच और भाजपा के पास तीन सदस्य है। यदि दुपेंद्र अमूले पार्टी के साथ गद्दारी नहीं करते तो कांग्रेस अपना निर्विरोध उपाध्यक्ष बना लेती। चुनाव में कांग्रेस के द्वारा घोषित प्रत्याशी राकेश सनोड़ीया को 10 वोट मिले थे जबकि दुपेंद् अमूले को 09 वोट मिले थे जो भाजपा समर्थित सदस्यो और कांग्रेस समर्थित कुछ सदस्यो के सहारे चुनाव लड़े थे।

06 साल के लिए पार्टी से निष्कासित हुए दुपेंद्र अमूले

-----जिला पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव में पार्टी के द्वारा अधिकृत प्रत्याशी राकेश सनोदिया के विरुद्ध नामांकन दाखिल कर पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले जिला पंचायत सदस्य दीपेंद्र अमूले को आखिरकार जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजीव अखिल में प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि हाल में ही सम्पन्न हुये जिला पंचायत के उपाध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी राकेश सनोडिया के विरूद्ध दुपेन्द्र लकी अमूले द्वारा पार्टी के निर्देशो की अवहेलना करते हुये चुनाव लड़ा। जिला कांग्रेस अनुशासन समिति द्वारा उनके इस कृत्य को पार्टी विरोधी गतिविधि मानकर उन्हें 6 वर्षो के लिए कांग्रेस पार्टी से निष्कासित किया गया। अन्य सदस्यों के खिलाफ भी अनुशासन समिति ने कारण बताओं नोटिस जारी किया है, समिति द्वारा छानबीन के बाद उनके विरूद्ध पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की कार्यवाही की जा सकती है। जिला कांग्रेस के द्वारा निष्कासन की कार्रवाई के बाद आप दुपेंद्र अमूले का साथ देते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले अन्य जिला पंचायत सदस्यों के ऊपर भी निष्कासन की बात गिर सकती है उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी को जिला पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ था जिला पंचायत के 19 वार्ड में से कांग्रेस  के पास 11 जिला पंचायत सदस्य है जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पास पांच और भाजपा के पास तीन सदस्य है। यदि दुपेंद्र अमूले पार्टी के साथ गद्दारी नहीं करते तो कांग्रेस अपना निर्विरोध उपाध्यक्ष बना लेती। चुनाव में कांग्रेस के द्वारा घोषित प्रत्याशी राकेश सनोड़ीया को 10 वोट मिले थे जबकि दुपेंद् अमूले को 09 वोट मिले थे जो भाजपा समर्थित सदस्यो और कांग्रेस समर्थित कुछ सदस्यो के सहारे चुनाव लड़े थे।

क्या अब कांग्रेस दुपेंद्र अमुले को करेगी निष्कासित--

---जिला पंचायत वार्ड क्रमांक 7 के सदस्य दुपेंद्र अमूले की कितनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने जिला पंचायत उपाध्यक्ष बनने के लिए पार्टी के द्वारा घोषित किए गए प्रत्याशी का विरोध कर फार्म भर दिया जिन्हे कुछ कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यो का साथ मिला लेकिन दुपेंद्र अमुले चुनाव हार गए। दुपेंद उर्फ लकी अमूले के चुनाव हारने के बाद सबकी निगाहें जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना के ऊपर टिकी हुई है।                   नामांकन जमा करने वाले मोहन को निष्कासित किया गया तो फिर दुपेंद्र को क्यों नही---- जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना के ऊपर सबकी नजर इसलिए टिकी हुई है क्योंकि जब 2022 को जिला पंचायत सदस्य के चुनाव हुए थे तब वार्ड क्रमांक 5 से कांग्रेस ने अपना समर्थित प्रत्याशी तेज सिंह रघुवंशी को बनाया था तब पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल ने भी नामांकन दाखिल कर दिया था जिसके बाद  तेज सिंह रघुवंशी और अर्जुन काकोडिया ने फौरन मोहन चंदेल को प्रदेश कांग्रेस कमेटी से 06 वर्षी के लिए निष्कासित करवा  दिया था। चूंकि जिला पंचायत में कांग्रेस के पास 11 सदस्य थे यदि दुपेंद्र उर्फ लकी अमूले पार्टी के साथ गद्दारी ना करते हुए पार्टी के द्वारा अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन कर देते तो जिला पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध हो सकता था लेकिन राजनेतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते उन्होंने पार्टी की गाइडलाइन से हटकर निर्दलीय फॉर्म भरा जिन्हें कांग्रेस के कुछ अन्य समर्थित सदस्यों का भी साथ मिला । दुपेंद्र अमूलेको पार्टी से गद्दारी करने के लिए जिला पंचायत के किन-किन जिला पंचायत सदस्यों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया इसका खुलासा तो आगामी अंकों में किया जाएगा लेकिन वर्तमान में सबकी नजर जिला कांग्रेस के ऊपर टिकी हुई है। देखना यह है कि जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना दुपेंद्र अमूले को 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर पार्टी को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं या फिर दुपेंद्र अमूले को अभय दान देते है।                                        क्या अर्जुन काकोडिया करवा पाएंगे कारवाही---- बरघाट विधानसभा के कुरई क्षेत्र से राकेश सनोड़ीया को पार्टी ने अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित किया था जो अर्जुन सिंह काकोडिया के करीबी है इसे संयोग ही कहा जाएगा की बरघाट विधानसभा के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 07 के सदस्य दुपेंद्र अमूले जिन्होंने पार्टी से गद्दारी कर  जिला पंचायत उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ा वह भी पूर्व विधायक अर्जुन काकोडिया के करीबी है ।सूत्र बताते हैं कि अर्जुन सिंह का ने दुपेंद्र अमूले को काफी समझाया था लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते दुपेंद्र अमूले ने अर्जुन काकोडिया  की बात को भी नजर अंदाज कर दिया ।जबकि अर्जुन काकोडिया ने ही दुपेंद्र अमूले को जिला पंचायत सदस्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था ।ऐसे में अब देखना यह है कि जिस जिस युवक  को उंगली पड़कर अर्जुन काकोडिया ने चलना सिखाया उस युवक के द्वारा पार्टी से गद्दारी किए जाने के बाद अर्जुन सिंह काकोडिया ने जिस तरह मोहन चंदेल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था उसी तरह दुपेंद्र अमूले को तकपार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में कितनी रुचि दिखाते है यह देखने वाली बात होगी।

क्या उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा कांग्रेस के सामने हथियार डालेगी या प्रत्याशी खड़ा करेगी------

12 फरवरी को जिला पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव होना है जिसके लिए कांग्रेस ने दो सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया था जिसने कांग्रेस समर्थित सदस्यो की बैठक आयोजित किया। बताया जाता है की उक्त कमेटी रविवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपेगी जिसके बाद कांग्रेस का प्रत्याशी तय होगा। वही दूसरी तरफ केंद्र और राज्य में सत्ता का सुख भोग रही भाजपा पूरी तरह से मौन धारण किए हुए है जिसके बाद सवाल उठ रहा है की क्या जिला पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव में भाजपा कांग्रेस के सामने हथियार डाल रही है। वैसे वर्तमान में कांग्रेस के पास बहुमत है। जिला पंचायत में 19 वार्ड है जिनमे से 11 सदस्य कांग्रेस के है जबकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के 05 और भाजपा के पास तीन सदस्य है। 2022 में हुए उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने उपाध्यक्ष पद पर गोंडवाना की श्रीमती ललिता रावेन शाह को समर्थन दिया था तब कांग्रेस समर्थित लल्लू बघेल को उपाध्यक्ष चुनाव में 14 वोट मिले थे और गोंडवाना और भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी ललिता रावेन शाह को सिर्फ 05 वोट मिले थे। यदि वर्तमान में भाजपा अपना प्रत्याशी खड़ा नही करती है तो भाजपा बैकफुट में चले जाएगी और भाजपा के सामने कई तरह के प्रश्न चिन्ह लगने लगेंगे। चूंकि भाजपा के पास श्रीमती रीना वरकड़े,श्रीमती रजनी ठाकुर और श्रीमति मालती डेहरिया सदस्य है। जबकि वर्तमान में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूरी तरह से बिखरी हुई है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष गया प्रसाद  सहित कई नेताओं को पार्टी ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया ऐसे में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पांच सदस्यों को सहज कर रखना असंभव है ।यदि भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार आदिवासी चेहरे के रूप में श्रीमती रीना वरकड़े के ऊपर दांव लगाते है तो संभव है गोंडवाना के कुछ सदस्य साथ आ जाए। वही कांग्रेस के कुछ सदस्य भी टूट सकते है लेकिन वर्तमान में भाजपा पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है ऐसे में फिलहाल तो भाजपा के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है की क्या वाकई जिला पंचायत उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा पूरी तरह से हथियार डाल रही है या फिर भाजपा के भीतर कुछ खिचड़ी पक रही है।             भाजपा समर्थित सदस्य वोटिंग में भाग लेंगे या नही-----यदि भारतीय जनता पार्टी अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करती है तो फिर संभव है कांग्रेस का निर्विरोध उपाध्यक्ष चुन लिया जाएगा । यदि सम्मिलन में भाजपा समर्थित सदस्य मौजूद रहते है और भाजपा कोई प्रत्याशी खड़ा नही करती है ऐसे में कांग्रेस का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाता है तो इससे पार्टी की किरकिरी होगी ऐसे में संभव है भाजपा समर्थित प्रत्याशी चुनावी प्रक्रिया के दौरान सदन से बाहर रहे। हालांकि अभी तक भाजपा ने अपने सदस्यो के लिए कोई निर्देश जारी नही किया है।

लखनादौन से तीसरी बार चुनाव जीतने वाले योगेन्द्र बाबा राजगढ़ जिले की उठा रहे समस्या


विधानसभा में लखनादौन क्षेत्र की समस्या उठाने से योगेन्द्र बाबा को क्यों है परहेज
लखनादौन विधानसभा चुनाव में योगेंद्र बाबा बिना मेहनत किए हुए तीसरी बार चुनाव जीत गए। लखनादौन विधानसभा के भोले भाले मतदाताओं ने तीसरी बार भी योगेंद्र बाबा को इस विश्वास से जिताया की दो बार ना सही तीसरी बार में तो योगेंद्र बाबा क्षेत्र के लोगों के बारे में सोचेंगे और उनकी आवाज विधानसभा में बुलंद करेंगे। कई समस्याओं से जूझ रहे लखनादौन विधानसभा के मतदाताओं की योगेंद्र बाबा को कोई फिक्र है ही नहीं वह सिवनी जिले और लखनादौन विधानसभा से जुड़े मुद्दे उठाने के बजाय विधानसभा में दूसरे जिले के मुद्दे उठाने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं इसके पीछे क्या कारण है यह तो योगेंद्र बाबा जानें। बताया जाता है कि इन दिनों विधानसभा सत्र चल रहा है लखनादौन के विधायक योगेंद्र बाबा ने लखनादौन सिवनी छोडक़र राजगढ़ जिले का मुद्दा उठाया उन्होंने विधानसभा में खेल युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग से पूछकर यह जानने का प्रयास किया कि  ‘क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासकीय कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित तलेनी सारंगपुर, जिला-राजगढ़ में नियुक्त प्रशासक द्वारा समिति के संचालक मण्डल के निर्वाचन हेतु कब-कब प्रस्ताव, कार्यालय उपायुक्त, सहकारिता, जिला-राजगढ़ को प्रेषित किये गये है? (ख) समिति के संचालक मंडल का निर्वाचन म.प्र. सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के नियमानुसार प्रशासक द्वारा समिति के संचालक मण्डल का निर्वाचन नहीं कराने के लिये दोषी है तो क्या इनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी? (ग) शासकीय कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित तलेनी सारंगपुर, जिला-राजगढ़ के अधीनस्थ पंजीकृत गृह निर्माण संस्था के बायलॉज एवं पंजीयन प्रमाण-पत्र की प्रति उपलब्ध कराई जावेगी? शासकीय कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित तलेनी सारंगपुर, जिला-राजगढ में। (घ) प्रशासक नियुक्त करते समय कौन-कौन संचालक कार्यरत थे अंतिम संचालक मण्डल निर्वाचन आमसभा की प्रति तथा अंतिम पारित अंकेक्षण (अंकेक्षण टीप, प्रपत्र 1 से 16 तथा उसके साथ संलग्न सदस्यता सूची, प्लाट आवंटन सूची, आय-व्यय, लाभ-हानि एवं स्थिति विवरण पत्रक) की प्रतियां उपलब्ध कराएं।’
योगेंद्र बाबा के प्रश्न का जवाब देते हुए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने जानकारी दिया की  (क) संस्था मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 69 के अंतर्गत परिसमापन में है, परिसमापित सहकारी संस्था के निर्वाचन कराए जाने का प्रावधान नहीं है। (ख) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) पंजीयन की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ठ के प्रपत्र-01 एवं उपविधि की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ठ के प्रपत्र-02 अनुसार है। (घ) उपायुक्त, सहकारिता जिला राजगढ़ कार्यालय भवन एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किये जाने एवं वर्षा के कारण निर्वाचन संबंधी पुराने अभिलेख नष्ट प्राय होने से जानकारी दी जाना संभव नहीं है तथा संस्था के अंतिम अंकेक्षण वर्ष 2017-18 की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-03 अनुसार है। वैसे लखनादौन और घंसौर  क्षेत्र के लोगों को योगेंद्र बाबा से यह आवश्यक पूछना चाहिए कि उन्हें तीसरी बार विधानसभा में राजगढ़ जिले से संबंधित प्रश्न पूछने के लिए विधानसभा में भेजा गया है या फिर लखनादौन घंसौर क्षेत्र से संबंधित प्रश्न उठाने के लिए भेजा गया है। वैसे यदि योगेंद्र बाबा सिवनी जिले से संबंधित भी प्रश्न लगाते तो कोई बात नहीं थी लेकिन उन्होंने राजगढ़ जिले से संबंधित प्रश्न लगाकर यह तो प्रमाणित कर ही दिया कि वह भले ही विधायक लखनादौन विधानसभा के हो लेकिन उन्हें फिक़्र अन्य जिलों की रहती है।

हाई कोर्ट के स्थगन के बाद भी मानसिंह कब्जा करते हुए कर रहा था निर्माण------

तहसीलदार न्यायालय ने लगाई रोक----- लोकतांत्रिक देश में किसी भी न्यायालय का आदेश सर्वोपरि होता है लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने आप को न्यायालय से बड़ा समझने लगते हैं जो न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर मनमर्जी चलते हैं ऐसा ही कुछ बरघाट थाना क्षेत्र में रहने वाले मान सिंह पिता दत्तू गड़ेवाल वाल के द्वारा किया जा रहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम नगर बरघाट के पटवारी हल्का नम्बर  50 रा ०नि०म व तहसील बरघाट में खसरा नं 311रकबा 0:02 हेक्टेयर भूमि वशीउर्रहरहमान पिता  रहमान खान निवासी वार्ड क्रमांक 3 बरघाट के अधिपत्य की भूमि है। इस भूमि को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में द्वितीय अपील क/1444/2015 में दिनांक 10/03/2021 को पारित  आदेश में  उक्त विवादित भूमि के संबंध में उभयपक्षों को यथास्थिति बनाए जाने का उल्लेख था। बताया जाता है की उच्च न्यायालय के यथा स्थिति आदेश के बावजूद मानसिंह पिता दत्तू जाति गढ़ेवाल निवासी सब्जी मंडी बाजार  बरघाट तहसील बरघाट द्वारा मनमर्जी चलाते हुए  आदेश का उल्लंघन उक्त मकान में जबरन अवैध कब्जा करते हुए अतिक्रमण किया और दबंगई दिखाते हुए उक्त उक्त भूमिका को तोड़ते हुए खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया जाने लगा तब आवेदक वशीउर्रह ने न्यायालय तहसीलदार के यहां अपील करते हुए ध्यान आकर्षित कराया कि माननीय उच्च न्यायालय ने उक्त भूमि में यथा स्थिति के आदेश दिए हैं। बताया जाता है की इस मामले में 

हल्का पटवारी को जांच के लिए भेजा जिन्होंने  अपने जांच प्रतिवेदन में बताया  कि ग्राम बरघाट के अभिलेख में रहमान खीं पिता जब्बार खॉ जाति मुसलमान के नाम भूमि स्वाभी एक पर खसरा  नं0 311 रकबा 0.02 हे० दर्ज है। स्थल जाच में पाया गया, कि खसरा नं0 311 एवं 295/1 में संयुक्त  रुप से मकान बना है। मकान की लम्बाई 48 फीट है, जिसकी लंबाई पीछे से 17 फीट पर छत का नाम 2 कमरे में खुला पाया गया। शेष यथावत है। बताया जाता है की इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए बरघाट तहसीलदार ने प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं हल्का पटवारी के प्रतिवेदन के आधार माननीय उच् चायालय के द्वितीय अपील कमांक/1444/2015 में दिनांक 10/03/2021 पारित यथास्थिति आदेशानुसार उभयक्ष यथास्थिति बनाये रखने आदेश पारित किया और आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कराने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।

जामुन पानी के सचिव छोटे खान के ऊपर मकान दिलाने 2 हजार रुपिया मांगने का लगा आरोप--

--- धनौरा जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जामुनपानी के सचिव छोटे खान के ऊपर प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत मकान का लाभ दिलाने के नाम पर दो हजार रुपिया मांगने का आरोप लगा। बताया जाता है की जामुन पानी ग्राम पंचायत के ग्राम सुकतरा निवासी कालू राम भलावी पिता पिल्लू भलावी ने तहसीलदार को आवेदन देते हुए बताया की वह अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहता है। पिछले लंबे समय से वह ग्राम पंचायत जामुन पानी ग्राम पंचायत के सचिव छोटे खान से प्रधान मंत्री आवास योजना का लाभ दिलाए जाने आग्रह करते रहा।पीड़ित ने तहसीलदार को दिए आवेदन में बताया की बाद में सचिव छोटे खान के द्वारा चढ़ोत्री के रूप में 2 हजार की मांग कर रहा है। चूंकि आवेदक गरीब परिवार का है जो दो हजार देने में सक्षम नहीं है। बताया जाता है की पिछले चार साल से कालूराम मकान के लिए परेशान है जिसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। बताया जाता है की कालू राम ने कई बार आवेदन निवेदन भी किया लेकिन कभी किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।

मेहरा पिपरिया के पूर्व सरपंच की हत्या के मामले में 16 आरोपियों को हुई आजीवन कारावास की सजा-----


       लगभग साढ़े छ  साल पहले कान्हीवाडा थाना अंतर्गत दो पक्षों में जमकर विवाद हुआ था जिसके बाद ग्राम पंचायत के सरपंच अशोक पटले और उसके भाई ज्ञानी पटले की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में   अतिरिक्‍त विशेष सत्र न्‍यायाधीश, जिला सिवनी ने आज 30.01.2024 दोहरे हत्या कांड के   को आरोपियों  को आजीवन कारावास की सजा सुनाया। उक्ताशाय की जानकारी देते हुए प्रदीप कुमार भौरे मीडिया सेल प्रभारी ने बताया की जिन आरोपियों को सजा सुनाई गई उनमें।(1) महानंद पटले पिता रामदयाल पटले, उम्र 27 वर्ष, (2) आनंद पटले पिता रामदयाल पटले, उम्र 30 वर्ष, (3) लोकेश टेमरे पिता ज्‍वालसिंह टेमरे, उम्र 33 वर्ष, (4) रितेश ठाकुर पिता रूपसिंह ठाकुर, उम्र 19 वर्ष, (5) कपिल पिता विसराम रांहगडाले, उम्र 19 वर्ष, (6) गोविंद पिता प्रभूदयाल पटले, उम्र 23 वर्ष, (7) निलेश पिता रामफल भगत, उम्र 20 वर्ष, (8) नंदकिशोर भगत पिता धनीराम, उम्र 23 वर्ष, (9) संजू उर्फ संजय बोपचे पिता मुन्‍नालाल बोपचे, उम्र 22 वर्ष, (10) शिवशंकर उर्फ मोनू पटले पिता प्रभुदयाल, उम्र 27 वर्ष, (11) दशरथ पिता सुखराम राहंगडाले, उम्र 32 वर्ष, (12) गिरीश पटले पिता जनार्दन, उम्र 20 वर्ष, (13) कृष्‍ण कुमार पिता जनार्दन पटले, 21 वर्ष, (14) मनीष बोपचे पिता मुन्‍नालाल बोपचे, उम्र 20 वर्ष, (15) राहुल पटले पिता रिखिराम पटले, उम्र 19 वर्ष, (16) दिनेश पिता रामरस भगत सभी निवासी ग्राम मेहरा पिपरिया, थाना कान्‍हीवाडा शामिल है जिन्हे  अशोक पटले एवं ज्ञानी पटले के हत्‍या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया हैं । वही  सबूत छुपाने तथा आरोपियो को हथियार मुहैय्या करने के जुर्म में आरोपी विनोद पंचेश्वर को 3 वर्ष की सजा।           यह था मामला----- लगभग साढ़े छ साल पहले 20 अगस्त .2017 को शाम करीब 5:30 बजे अशोक पटले पिता भोलाप्रसाद, उम्र 44 वर्ष, उसका भाई ज्ञानी उर्फ ज्ञानसिंह पटले, उम्र 38 वर्ष अपने दोस्‍तो के साथ बस स्‍टेण्‍ड, मेहरा पिपरिया में चाय पीते हुए बात‍चीत कर रहे थें, तभी आरोपी महानंद पटले अपने  साथियों को लेकर वहॉ पहुंचा और कट्टे से हवा में फायर करते हुए अपने  साथियों के साथ मिलकर  अशोक और उसके भाई ज्ञानी पर तलवार और लोहे की राड से हमला कर दिया । जब  बीच बचाव करने राकेश कटरे और फूलसिंह पटले गये तो उनके साथ भी आरोपियों ने तलवार व राड से मारपीट की, जिससे सभी को गंभीर चोट आयी। गंभीर हालात में अशोक और ज्ञानी को अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी  मौत  हो गयी थी। थाना कान्‍हीवाडा में घटना की रिपोर्ट मृतकगण के पिता भोलाप्रसाद पटले ने दर्ज करायी थी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 176/2017, धारा 147, 148, 149, 307, 294 भा.द.वि. एवं धारा 25, 27 आर्म्‍स एक्‍ट के तहत् दर्ज की गई थी एवं आहत अशोक और ज्ञानी की मृत्‍यु हो जाने के कारण धारा 302 भा.द.वि. का ईजाफा किया गया था। शासन की ओर से कोर्ट में सबूत ओर गवाहों को  लोक अभियोजक चंद्रशेखर ठाकुर के द्वारा  प्रस्तुत किया गया था,कोर्ट ने लोक अभियोजक के तर्कों से सहमत होते हुए 16 आरोपियो को धारा 307 में 10 वर्ष, तथा धारा 302 भादवि मे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है, तथा एक आरोपी को 25 आर्म्स एक्ट के अपराध में 3 वर्ष की सजा से दंडित किया है।

उधर संजीव मिश्रा ने एस पी को बताया ऑपरेटर के पिता को उठा ले गए ,इधर मोनू ने बयान दिया उसके साथ नही घटी घटना------

सिवनी में इन दिनों राजनीति चरम पर है। 19 जनवरी के बाद सिवनी में रेत और विधायक दिनेश राय मुनमुन को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। 19 जनवरी को सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन बरघाट विधानसभा के खैर घाट रेत खदान पहुंचे थे । रेत खदान में सांसद प्रतिनिधि संजू मिश्रा की पोकलेन मशीन चल रही थी तब विधायक ने एक वीडियो बनाकर वायरल किया था। वीडियो वायरल के बाद संजू मिश्रा के ऑपरेटर मोनू इनवाती के नाम से एस पी से शिकायत करते हुए बताया गया था कि दिनेश राय मुनमुन और अजय बाबा पांडे खदान पहुंचे थे और ऑपरेटर के साथ गाली गलौज कर मारपीट की गई थी जिसे दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस में प्रमुखता से प्रकाशित भी किया था। गुरुवार की दोपहर संजू मिश्रा ने एस पी को पुनः आवेदन दिया और एक वीडियो जारी कर बताया की उसके ऑपरेटर मोनू इनवाती के ऊपर दिनेश राय मुनमुन दबाव बना रहे हैं ।उसके घर अनिल राय अपने एक साथी के साथ पहुंचे और उसके पिता को अपने साथ ले जा लिए ।संजू मिश्रा ने वीडियो जारी कर यह भी कहा था कि उसके पास खदान से ऑपरेटर का फोन आया था  जिसने उसे बताया कि ग्राम पंचायत सिहोरा के सरपंच रामकुमार यादव कुछ साथियों के साथ घाट पहुंचे और उसे ले जाने का प्रयास कर रहे है। संजू मिश्रा के द्वारा एस पी को आवेदन देने के चंद घंटे के बाद ऑपरेटर मोनू इनवाती अपने परिजनों और रामकुमार यादव जिसका जिक्र संजू मिश्रा ने किया था वह एस पी के पास पहुंचे और अपना बयान दर्ज कराया। बाद में मोनू इनवाती का वीडियो भी वायरल किया गया । मोनू इनवाती ने विधायक दिनेश राय मुनमुन और अजय बाबा पांडे के बारे में कहा की उसके साथ किसी तरह की गाली गलौच और मारपीट नही की गई। मोनू इनवाती ने अपने बयान में कहा कि सांसद प्रतिनिधि संजू मिश्रा ने टाईप किये गये कागज पर मुझ से हस्ताक्षर कराए थे। मोनू  इनवाती ने अपने बयान मे बताया कि दूसरे दिन पेपर मे छपने के बाद घर वालों ने मुझसे पूछा कि तेरे साथ मारपीट की घटना हुई है क्या? मैने कहा नही ऐसा कुछ नही हुआ। परिवार वालों ने कहा कि तेरे बारे मारपीट की खबर छपी है और तूने पुलिस मे शिकायत किया है। तो फिर परिवार वाले मुझसे मिलने आए। और मुझे लेकर एसपी साहब के पास ले गए। फिर  मैंने एसपी साहब को बताया कि मेरे साथ किसी भी प्रकार की मारपीट या गाली-गलौज की कोई घटना नही हुई। तों एसपी साहब ने कहा कि तुमने शिकायत क्यों किया। तो मैन कहा कि  संजू भैया ने मुझसे लिखे कागज पर साईन कराए थे मुझे नही पता था कि उसमें किसी की शिकायत है। इस पूरे मामले में सही कौन है और गलत कौन है इसकी जांच नहीं हो पाई लेकिन प्रश्न यह उठता है कि यदि मोनू इनवाती सही बोल रहा है तो फिर उसने दोपहर के समय संजू मिश्रा को फोन लगाकर यह क्यों बताया की ग्राम पंचायत सिहोरा के सरपंच रामकुमार यादव कुछ लोगो के साथ खैर घाट उसे लेने आए है। चूंकि मोनू इनवाती का जो वीडियो वायरल हुआ उसमे भी रामकुमार यादव नजर आ रहा है।प्रश्न यह उठ रहा है की मशीन ऑपरेटर के ऊपर विधायक दिनेश राय मुनमुन का दबाव है या संजू मिश्रा का दबाव था? इस मामले में रामकुमार यादव की भूमिका की भी जांच होना चाहिए जिसका जिक्र संजू मिश्रा की शिकायत में भी है।

निलंबित हुए धनौरा थाना प्रभारी ईश्वरी पटले----- दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने उजागर किया था मामला-----

 आखिरकार धनौरा थाना प्रभारी ईश्वरी पटले को एक सब्जी दुकानदार को दबंगई दिखाना महंगा पड़ गया। दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने ईश्वरी पटले की दबंगई से संबंधित खबर प्रकाशित करते हुए  बताया था की कुछ दिन पहले धनौरा बस स्टैंड से अतिक्रमण हटाने को लेकर अधिकारियों के साथ थाना प्रभारी ईश्वरी पटले बस स्टैंड पहुंचे थे और ठिलिया  में दुकान लगाने वाले लोगों के साथ दबंगई दिखाते हुए उन्हें हटाने के निर्देश दे रहे थे। तब एक सब्जी की दुकान लगाकर अपनी आजीविका चलाने वाले युवक ने कहा कि साहब मैं कहां दुकान लगाऊंगा मुझे कहीं जगह दिला दीजिए। तब उसे गाली बकते हुए ईश्वरी पटले यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि मेरे घर के सामने जाकर दुकान लगा ले। सार्वजनिक जगह में ईश्वरी पटले के द्वारा सब्जी बेचकर अपनी आजीविका चलाने वाले दुकानदार के साथ गाली गलौच करने के मामले में एसपी ने गंभीरता से लिया और उन्हें निलंबित कर दिया। गतांक में दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया ताकि जब से डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं तब से दुर्व्यवहार करने के मामले में शाजापुर के कलेक्टर को हटाया गया था वह गत दिवस  देवास जिले की सोनकक्ष की तहसीलदार अंजली गुप्ता को भी ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार करने के मामले में हटा दिया गया था ।लेकिन ईश्वरी पटले के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।इस मामले को महाकौशल एक्सप्रेस ने प्रमुखता से उजागर किया जिसके बाद एस पी राकेश कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया और  ईश्वरी पटले को निलंबित करते हुए साफ संकेत दे दिया कि जिले में भी पुलिस अधिकारियों के द्वारा आम लोगों के साथ दुर्व्यव्यवहार किया जाना बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

सिवनी सहित श्यापुर, नीमच, मंदसौर और सिंगरौली के मेडीकल कॉलेज इसी सत्र में होंगे शुरू


केबिनेट की बैठक में लिए गये फैसले
सिवनी महाकौशल। सिवनी में बना मेडीकल कॉलेज इसी सत्र में शुरू होने जा रहा है बताया जाता है कि म.प्र. मंत्रीमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है गत दिवस बैठक के बाद राज्य के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने केबिनेट की बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इसी सत्र से 05 नये मेडीकल कॉलेज शुरू करने का निर्णय लिया गया है जिसमें सिवनी, श्योपुर, नीमच, मंदसौर एवं सिंगरौली के मेडीकल कॉलेज शामिल है बताया जाता है कि उक्त मेडीकल कॉलेज में शिक्षण स्टॉफ के पदों को भरने के लिए आवश्यक संशोधन लाया गया है बताया जाता है कि प्रोफेसर के 24, असिस्टेंट प्राफेसर के 70 से 75 के बीच सीधी भर्ती की जायेगी। उल्लेखनीय है कि कंडीपार में लगभग 36 एकड़ जमीन पर लगभग 3 सौ करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। निर्माण एजेंसी के द्वारा मेडीकल कॉलेज का अधिकांश हिस्सा पूर्ण कर दिया गया है उम्मीद की जा रही थी मेडीकल कॉलेज 2023 में ही प्रारंभ कर दिया जायेगा लेकिन तैयारियां पूर्ण नही हुई थी डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद केबिनेट की बैठक में लिर्णय लिये जाने के बाद अब मेडीकल कॉलेज खुलने का रास्ता साफ हो गया है।

लखनादौन अस्पताल के ओटी में किसी अनुमति से ट्यूब लगाने पहुंचा था प्रायवेट डॉक्टर संजय जैन


संजय जैन की भूमिका की क्यों नही हो रही जांच
सिवनी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पटरी से नीचे उतर गयी है जिसकी तरफ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपाल सिंह ठाकुर का ध्यान नही जाता 10 जनवरी को लखनादौन के अस्पताल में गर्भवती महिला विनीता राजपूत ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया था और चंद घंटे बाद उसकी मौत हो गई थी इस मामले में मृतिका के परिजनों ने अस्पताल में पदस्थ डॉ. श्रीमति वीथी जैन और उनके पति डॉ. संजय जैन के ऊपर लापरवाही का आरोप लगाया था घटना के बाद अब तक इस मामले की जांच अस्पताल प्रबंधन नही कर पाया दूसरी तरफ प्रायवेट अस्पताल के संचालक डॉ. संजय जैन ने मृतिका के पति रानू राजपूत सहित अन्य लोगों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराकर यह प्रमाणित कर दिया कि घटना के समय वह अस्पताल के ओटी में मौजूद थे जहां गर्भवती महिला का ऑपरेशन किया गया था डॉक्टर संजय जैन ने एफआईआर दर्ज कराते हुए पुलिस को बताया था कि विनीता राजपूत को डिलीवरी के लिए शासकीय अस्पताल लखनादौन में भर्ती कराया गया था जहां उनकी पत्नी डॉक्टर वी थी जैन शासकीय डॉक्टर है जिन्होंने उन्हें फोन करके बताया था कि मरीज विनीता राजपूत को श्वास नली में डालने वाले ट्यूब की आवश्यकता है यदि आपके पास उपलब्ध हो तो उक्त ट्यूब भिजवा दीजिए या स्वयं आ जाइए । तब डॉक्टर संजय जैन ट्यूब लेकर अस्पताल पहुंचा और ऑपरेशन थिएटर में चले गया। डॉक्टर संजय जैन ने पुलिस को बताया कि उसने डॉक्टर बी एस सोलंकी के साथ मिलकर मरीज के स्वांस  नाली में ट्यूब डाला था। शाम 5 बजे महिला की मौत हो गई जिसके बाद जब वह ऑपरेशन कक्ष के सामने वाले कमरे में पहुंचा तो मृतिका का पति रानू राजपूत अपने दो-तीन अन्य लोगों के साथ एक राय होकर आया और उसे गंदी-गंदी गाली देने लगा तब डॉक्टर ने गाली देने से मना किया तो उन्होंने डॉक्टर की पिटाई कर दिया जिसके बाद पुलिस ने मृतिका के पति सहित अन्य लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया। वैसे उक्त एफआईआर के आधार पर ही सीएमएचओ डॉ. ठाकुर को लखनादौन अस्पताल के बीएमओ से यह अवश्य पूछना चाहिए कि एक प्रायवेट डॉक्टर को सरकारी अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में चल रहे ऑपरेशन के दौरान किसकी अनुमति से ट्यूब लगाने भेजा गया क्या सिविल अस्पताल में ऑपरेशन के समय लगने वाली सामग्री नही रहती क्या डॉ. वीथी जैन ने अस्पताल प्रबंधन को यह बताया कि उन्हें एंडोट्रेकियल ट्यूब (श्वास नली में डालने वाली ट्यूब की आवश्यकता है), क्या डॉ. श्रीमति वीथी जैन ने अपने पति को एंडोट्रेकियल ट्यूब लाने की अनुमति लिया था और यदि ऐसा नही है तो फिर मृतिका के परिजन जब डॉ. वीथी जैन और उनके पति के ऊपर लापरवाही का आरोप लगा रहे है तो इसकी जांच करने से स्वास्थ विभाग के आला अधिकारी क्यों परहेज कर रहे है।

डॉक्टर संजय जैन ने मृतिका के पति के विरुद्ध दर्ज कराया एफ आई आर


03 दिन पहले डिलेवरी के बाद महिला की हुई थी मौत
तीन दिन पहले 10 जनवरी को लखनादौन के अस्पताल में विनीता राजपूत पति रानू राजपूत को प्रसव पीड़ा होने के चलते भर्ती कराया गया था जहां डॉक्टर वी थी जैन ने ऑपरेशन किया था। बताया जाता है कि स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के बाद शाम के समय महिला की मौत हो गई थी जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया था । महिला के परिजनों का आरोप था की  डॉक्टर वी थी जैन के पति डॉक्टर संजय जैन को सिविल हॉस्पिटल बुलाकर ऑपरेशन कराया गया । इस मामले में अधिकारियों की समझाईश के बाद परिजन मान गए थे और उन्होंने पोस्टमार्टम कराने  के बाद महिला का अंतिम संस्कार कर दिया था। घटना के दो दिन बाद डॉक्टर बी थी जैन के पति डॉक्टर संजय जैन जो की सेवा सदन अस्पताल लखनादौन के संचालक है उन्होंने मृतिका  के पति सहित दो-तीन लोगों के विरुद्ध  रिपोर्ट दर्ज कराया। डॉक्टर संजय जैन ने  पुलिस को बताया कि विनीता राजपूत को डिलीवरी के लिए शासकीय अस्पताल लखनादौन में भर्ती कराया गया था जहां उनकी पत्नी डॉक्टर वी थी जैन शासकीय डॉक्टर है जिन्होंने उन्हें फोन करके बताया था कि मरीज विनीता राजपूत को श्वास नली में डालने वाले ट्यूब की आवश्यकता है यदि आपके पास उपलब्ध हो तो उक्त ट्यूब भिजवा दीजिए या स्वयं आ जाइए । तब डॉक्टर संजय जैन ट्यूब लेकर अस्पताल पहुंचा और ऑपरेशन थिएटर में चले गया। डॉक्टर संजय जैन ने पुलिस को बताया कि उसने डॉक्टर बी एस सोलंकी के साथ मिलकर मरीज के स्वांस  नाली में ट्यूब डाला । बाद में महिला की मौत हो गई थी । जब वह ऑपरेशन कक्ष के सामने वाले कमरे में पहुंचा तो मृतिका का पति रानू राजपूत अपने दो-तीन अन्य लोगों के साथ एक राय होकर आया और उसे गंदी-गंदी गाली देने लगा तब डॉक्टर ने गाली देने से मना किया तो उन्होंने डॉक्टर की पिटाई कर दिया जिसके बाद पुलिस ने मृतिका के पति सहित अन्य लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया।
डॉक्टर सहलाम ने भी दर्ज कराई एफ आई आर
 डिलेवरी के बाद विनीता राजपूत नामक महिला की मौत हो जाने के बाद परिजनों ने हंगामा करते हुए दोषी डॉक्टरों के विरुद्ध कारवाही करने की मांग किया था। मृतिका के परिजनों की मांग का क्या हुआ यह तो पता नही लेकिन मृतिका के परिजनों के विरुद्ध एफ आई आर अवश्य हो गई। डॉक्टर संजय जैन के अलावा लखनादौन के अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर अशोक सहलाम पिता जी पी सहलाम ने लखनादौन थाना में आवेदन देते हुए एफआई आर दर्ज कराते हुए बताया कि  10 जनवरी को विनीता राजपूत की सीजर ऑपरेशन से प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी जिसके बाद उसके परिजनों के द्वारा अस्पताल में आक्रोश में आकर शासकीय संपत्ति की तोडफ़ोड़ कर दी गई जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात के विरुद्ध धारा 294 ,427 ताहि लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 2/3 के तहत अज्ञात के विरुद्ध मामला पंजीबद किया। याने कि मृतिका के परिजनों की रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही तो नही हुई लेकिन दो डॉक्टरों ने आवेदन दिया और एफआईदर्ज कराकर यह प्रमाणित कर दिया कि उनकी वजनदारी अभी कम नही हुई है।

दलसागर तालाब में 01 करोड़ 88 लाख की लागत से बन रहे फुटब्रिज निर्माण में एनजीटी ने लगाया स्थगन


नगर पालिका के अधिकारियों के विरूद्ध किया सख्त टिप्पणी
नेशनल ग्रीन ट्रीयूबनल भोपाल ने दलसागर तालाब में बनाये जा रहे लगभग 01 करोड़ 88 लाख की लागत से बनाये जा रहे फुट ओवर ब्रिज के निर्माण को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका के अधिकारियों के विरूद्ध सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्य की बात है जिन अधिकारियों को कानून के शासन को बनाये रखने की जिम्मेदारी दी गई है वह अप्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियमों का उल्लंघन कर रहे है और नोटिफिकेशन का उल्लंघन कर रहे है। असल में सिवनी नगर पालिका परिषद के द्वारा 01 करोड़ 56 लाख 73 हजार की लागत से फुट ब्रिज निर्माण का टेंडर निकाला गया था जिसे लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन को 36 प्रतिशत अधिक की दर से लगभग 1 करोड़ 88 लाख में ठेका स्वीकृत करते हुए 12 मई 2023 को कार्यादेश जारी किया गया नगर पालिका परिषद ने यह भी ध्यान नही रखा कि उक्त निर्माण कार्य में एनजीटी के नियमों का पालन हो रहा है या नही।
पिछले लगभग 8 महीने से नगर पालिका द्वारा दल सागर तालाब में फुटओवर ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है, निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा दल सागर तालाब की आर्द्र भूमि पर सडक़ निर्माण किया गया एवं स्थाई निर्माण कराया जा रहा है, साथ में कई पेड़ काटे गए हैं। जो दलसागर को अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति पहुंचा रहे हैं। भूमिगत जल स्रोत के रूप में दलसागर भूमिगत जल के संग्रहण में एक अहम भूमिका निभाता है जिससे शहर का अधिकाश भाग लाभान्वित होता है। फुट ओवर ब्रिज निर्माण के लिए नगर पालिका द्वारा बेतरतीब तरीके से पूरा का पूरा दलसागर तालाब सुखा दिया गया। टापू में निर्माण के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों का उपयोग किया गया जिससे टापू जैसी छोटी मिट्टी की इकाई को काफी क्षति पहुंची है। इन सभी को दृष्टिगत रखते हुए अधिवक्ता नवेंदु मिश्रा द्वारा नगर पालिका के विरुद्ध एनजीटी में एक याचिका दायर किया था जिसमें उन्होने फुटओवर ब्रिज निर्माण को आर्द्र भूमि नियम 2017 का उल्लंघन बताया था। याचिका में यह भी बताया गया है की दल सागर 2019 से आर्द्र भूमि के रूप में राज्य आर्द्र भूमि अधिकरण में 1202 नंबर पर रजिस्टर्ड है। जिसके अंतर्गत यह आर्द्र भूमि नियम 2017 के अंतर्गत आता है। जिसके बाद एनजीटी ने 20 अक्टूबर 2023 एक टीम का गठन करते हुए 06 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था बताया जाता है कि जांच टीम ने दलसागार तालाब में चल रहे निर्माण कार्यो का निरीक्षण किया और रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए अवगत कराया कि दलसागर झील एक मानव निर्मित झील है जिसका क्षेत्रफल 18 हेक्टेयर है साथ ही यह भी बताया कि उक्त द्वीप को मुख्य शहर से जोडऩे और आगंतुकों की सुविधा के लिए गौंड राजा दलपत शाह की एक मूर्ति स्थापित करने की योजना नगर पालिका परिषद सिवनी ने बनाई जिसमें एक ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है जांच के दौरान कुल आद्र भूमि क्षेत्र का लगभग 30 प्रतिशत भाग पानी से भरा पाया गया साथ ही द्वीप पर स्थापित की जाने वाली प्रतिमा के निर्माण के लिए एक सीमेंट कांक्रीट बेश तैयार पाया गया बताया जाता है कि टीम ने पाया कि उक्त निर्माण कार्य में पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हुए पंपों, नालों/ड्रेनिज सिस्टम को वेटलेण्ड की ओर मोड दिया गया जिससे पानी की गुणवत्ता दूषित हो रही है जिसके बाद माननीय श्रीमान न्यायमूर्ति शिवकुमार सिंह, न्यायिक सदस्य माननीय डॉ. ए. सेंथिल वेल ने स्थगत आदेश जारी कर दिया जिसके बाद अब सिवनी नगर पालिका परिषद में ओवरब्रिज निर्माण कार्य खटाई में पड़ गया वही इस निर्माण कार्य के बाद सिवनी नगर पालिका परिषद के सीएमओ रामकुमार कर्वेती एवं तकनीकि अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई।

पति के जन्म दिन में डॉक्टर रश्मि ने फांसी लगाकर मौत को लगाया गले


 डॉक्टर मुकेश अहिरवार की धर्मपत्नी श्रीमती रश्मि भी थी डॉक्टर
सिवनी महाकौशल। सिवनी के जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मुकेश अहिरवार की धर्मपत्नी श्रीमती रश्मि अहिरवार ने आर्चीपुरम टैगोर वार्ड में स्थित घर में फांसी लगाकर आत्म हत्या कर लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार यश हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर मुकेश अहिरवार की  40 वर्षीय पत्नी डॉ. रश्मि अहिरवार ने उस समय फांसी लगाया जब उनके पति मुकेश अहिरवार का जन्म दिन था। सूत्र बताते है की डॉक्टर मुकेश अहिरवार जन्मदिन की खुशियां मनाने के लिए कुरई क्षेत्र स्थित करमाझिरी रुखड़ के रिसोर्ट गए हुए थे। जहां उनके साथ उनके कुछ डॉक्टर मित्र व परिजन भी शामिल हुए थे।              
रात में ऐसा क्या हुआ की पत्नी ने लगा ली फांसी
 पार्टी से वापिस लौटने के बाद ऐसा क्या हुआ की पति के जन्म दिन में पत्नी घर पहुंची और फांसी लगाकर आत्म हत्या कर लिया। बताया जाता है की डॉक्टर मुकेश अहिरवार  और उनकी पत्नी श्रीमती रश्मि अहिरवार मूल रूप से जबलपुर के रहने वाले है जिनका अंतिम संस्कार जबलपुर में होगा। बताया जाता है की डॉ रश्मि अहिरवार के द्वारा घर में फांसी लगाने की जानकारी  कोतवाली पुलिस को मिली तब पुलिस ने मर्ग कायम किया है वहीं जांच के लिए एफएसएल टीम मौके पर पहुंची।

अब विजय गोलू पंडित ने नल जलावर्धन योजना का भुगतान रोकने लगाई आपत्ति



सिवनी महाकौशल। सिवनी नगर पालिका परिषद के द्वारा नल जल आवर्धन योजना का काम करने वाली मेसर्स लक्ष्मी सिविल इंजीनियर कंपनी को 01 करोड़ 66 लाख रुपया देने की तैयारी की जा रही है । दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया जा रहा है जिसके बाद सिवनी नगर पालिका परिषद के ऐसे पार्षदों ने भुगतान रोकने के लिए आपत्ति लगाना शुरू कर दिया जो कमीशन के खेल में शामिल नहीं है । पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के अकबर वार्ड पार्षद श्रीमती मालती पांडे के द्वारा आपत्ति लगाई गई थी उसके बाद मेजर ध्यानचंद वार्ड के पार्षद हाजी सोहेल पाशा के द्वारा आपत्ति लगाई गई थी और अब भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं अशोक वार्ड के पार्षद विजय गोलू पंडित के द्वारा नगरीय निकाय मंत्रालय सहित जिला कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को पत्र लिखते हुए बिना जांच किए भुगतान किए जाने पर आपत्ति लगाया है । गोलू पंडित ने जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों को दिए आवेदन में उल्लेख किया है कि नगर पालिका परिषद सिवनी के द्वारा नवीन जल आवर्धन योजना में किए गए वित्तीय अनियमित की जांच के लिए परिषद के द्वारा सर्वसम्मति से समिति का गठन किया गया था जांच समिति के सदस्यों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी से नल जल आवर्धन योजना से संबंधित दस्तावेज मांगे थे,नक्शे की प्रति सहित कई एहम दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन एक साल बाद भी सी एम ओ रामकुमार कर्वेती ने कोई दस्तावेज उपलब्ध नही कराया। गोलू पंडित ने पत्र में कहा है की उक्त योजना मे लगभग 48 करोड़ की था जिसमे ठेकेदार ने लगभग 62 करोड़ 55 लाख में लिया और डी पी आर के अनुरूप काम नही किया। पार्षदों की जांच टीम ने भी कई कमियां पाया जिससे सी एम ओ को भी एक साल पहले पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है बावजूद इसके संबंधित फर्म का भुगतान रोकने के बजाए मई में 01  करोड़ 92 लाख का भुगतान कर दिया गया और अब नगर पालिका प्रशासन 01 करोड़ 66 लाख का भुगतान करने की तैयारी में है। गोलू पंडित ने मांग किया है की कंपनी के द्वारा भर्ती गई अनियमितताओं की पहले जांच किया जाए और उसके बाद ही भुगतान किया जाए।

बादलपार क्षेत्र में पूर्व में भी जगदीश पाल और प्रवीण पाल के ऊपर रेत चोरी का बन चुका है मामला


बादलपार क्षेत्र के लोग पहले शिकायत करते है और फिर रेत का करने लगते है अवैध कारोबार
बादलापार पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले जोगीवाडा,चक्की खमरिया, सागर सहित आस पास के कई लोग रेत के अवैध कारोबार से जुड़े हुए है। बताया जाता है की हाल ही में सागर निवासी रिंकू पाल पिता गुरुप्रसाद पाल का एक बिना नंबर वाले ट्रेक्टर को खनिज विभाग की टीम ने रेत का अवैध परिवहन करते हुए जप्त कर बादलपार पुलिस चौकी प्रांगण में खड़ा करवा लिया था। इस कारवाही की अधिक चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि 13 दिसंबर को रिंकू पाल सहित देवीशंकर पाल,नरेश पाल ,जगदीश पाल ,चमक, अरविंदुबे,नारायण ,प्रीतम नामक व्यक्तियों  ने कलेक्टर एस पी को आवेदन देते हुए उन्हें अवगत कराया था की उनके क्षेत्र से रेत का अवैध उत्खनन करते हुए अवैध परिवहन कराया जा रहा है और शिकायत करने के बाद शिकायतकर्ता रिंकू पाल का ट्रेक्टर ही रेत का अवैध परिवहन करते पकड़ा गया जिसके बाद शिकायतकर्ता की पोल खुल गई। सूत्र बताते है पहले भी क्षेत्र के कुछ लोग इस तरह के कारनामों को अंजाम दे चुके है जो पहले शिकायत करते है और फिर दबाव बनाकर रेत का अवैध कारोबार करते है। दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने जब पड़ताल किया तो पता चला की पूर्व में भी उक्त क्षेत्र के लोगो के वाहन रेत का अवैध परिवहन करते हुए जप्त हो चुके है। बताया जाता है की  06 अप्रैल 2022 को बादलपार पुलिस चौकी के स्टाफ ने बादलपार खुर्द में गाड़ादान रास्ते में ट्रेक्टर क्रमांक एम पी 22 ए ए 7510 पकड़ा था जिसमे प्रवीण पाल पिता जगदीश पाल निवासी जोगीवाडा सवार था जिसने पुलिस को देखते ही हाइड्रोलिक से रेत नीचे गिरा दिया था । बताया जाता है की उक्त ट्रेक्टर में पेंच नदी संगम घाट से बिना रॉयल्टी के रेत लाई जा रही थी तब पुलिस ने ड्राइवर प्रवीण पाल और मालिक जगदीश पाल के विरुद्ध धारा 379,414,109 भादिव एवम म. प्र. रेत नियम 2019 का नियम 20(2)  के तहत मामला पंजीबद्ध किया था। सूत्रों की माने तो लंबे समय से रिंकू पाल, प्रवीण पाल, जगदीश पाल जैसे लोग रेत का अवैध कारोबार करते रहे हैं और झूठी शिकायत कर दबाव बनाने का काम करते रहे है। सूत्रों की माने तो इन दिनों बादल पार पुलिस चौकी प्रभारी प्रदीप शर्मा भी क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार करने वाले लोगो के ऊपर मेहरबान नजर आ रहे है तभी तो खनिज विभाग अमला सिवनी से जाकर रेत से भरे वाहन पकड़ रहा है लेकिन थाना प्रभारी कोई कारवाही नही कर रहे जो आश्चर्यजनक है।

तीन महीने से बंधक बनाए गए मजदूरों को छपारा पुलिस ने कराया मुक्त


गत दिवस छपारा पुलिस ने तीन महीने से बंधक बनाये गये मजदूरों को मुक्त कराते हुए उनके परिजनों से मिलाया। बताया जाता है कि सिवनी के छपारा थाना क्षेत्र के रायगढ़ निवासी संदेश पन्द्रराम ने छपारा थाना में शिकायत किया था कि उसके माता पिता व बहन सहित कमकापुर के करीब 10 लोग मजदूरी करने के लिए ग्राम लोवड़ी थाना मलहारपेठ जिला सतारा पुणे गये हुए है जिन्हें ठेकेदार ने तीन महीने से बंधक बनाकर रखा है जो मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाकर सुबह 4 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक प्रताडि़त करता है मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी सौरभ पटेल ने जिला पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह के निर्देश में एक टीम का गठन किया जिसमें सहायक उप निरीक्षक नियाज खान, प्रधान आरक्षक देवीसिंह को मजदूरों के साथ ग्राम लोवड़ी थाना मलहारपेठ पहुंचाया जहां छपारा पुलिस ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद से लगभग 10 मजदूरों को मुक्त कराया। पुलिस ने जिन मजदूरों को मुक्त कराया उनमें दुखमान पिता फत्तू सिंह, पप्पू पिता हीरामन यादव, ओमप्रकाश पिता सीजकुमार, श्रीमति सुकरती बाई पति सुमेरा, सक्कू बाई पति अकबर कुमरे, रामकुमर पिता झनक सिंह, कल्लू बाई पति अनीस कुमरे, ग्यारसी पति पप्पू यादव, छाया पिता दुखमान, गंगा दुलारी पिता दुखमान शामिल है।
 बताया जा रहा है इनमें अधिकांश मजदूर आदिवासी हैं जिन्हें एक ठेकेदार के द्वारा मनसर काम में ले जाने को बोलकर रात और रात तीन समान बदलकर उन्हें महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक गांव लोवडी ले जाकर छोड़ दिया गया था। 

बैठक में ड्राइवर को तुम्हारी औकात किया है बोलने वाले शाजापुर कलेक्टर के ऊपर गिर सकती है गाज--


हिट एंड रन कानून का विरोध के बीच मंगलवार को शाजापुर के कलेक्टर किशोर कान्याल का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था जिसमे वह एक ड्राइवर को उसकी औकात का एहसास कराते नजर आ रहे थे। सूत्र बताते है की इस मामले की सी एम डॉक्टर मोहन यादव ने गंभीरता से लिया है। कयास लगाए जा रहे है की कलेक्टर किशोर सान्याल को हटाया जा सकता है जिसके संकेत मुख्यमंत्री ने दे दिया  है। उल्लेखनीय है की  बस-ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के दौरान मंगलवार को शाजापुर में एक बैठक में कलेक्टर और ड्राइवर्स के बीच गहमा-गहमी हो गई थी। कलेक्टर ने बैठक में मौजूद एक  ड्राइवर से कहा था कि समझ क्या रखा है? क्या करोगे तुम, तुम्हारी औकात क्या है?

सूत्र बताते है की जब यह मामला

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संज्ञान में आया तो उन्होंने बुधवार सुबह किशोर कान्याल की भाषा पर नाराजगी जताया।उन्होंने कहा की मनुष्यता के नाते ऐसी भाषा हमारी सरकार में बर्दाश्त नहीं है। मैं खुद मजदूर परिवार का बेटा हूं। अधिकारी भाषा और व्यवहार का ध्यान रखें। जो अधिकारी ऐसी भाषा बोलते हैं, उन्हें मैदान में रहने का अधिकार नहीं है। कयास लगाए जा रहे है की इस पूरे मामले में शाजापुर के कलेक्टर को हटाया भी जा सकता है।


जबलपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कैसे जुटेगी भीड़

03 जनवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव जबलपुर पहुंचने वाले है। मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान हड़ताल कर रहे चालक परिचालकों के कारण जबलपुर प्रशासन के सामने कई बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है। बताया जाता है की मुख्यमंत्री गेरिसन ग्राउंड में विशाल जनसभा को संबोधित करने वाले है। लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भीड़ कैसे आएगी यह बड़ा सवाल इसलिए है क्योंकि हिट एंड रन कानून के विरोध में पूरे प्रदेश भर में बस,ट्रक सहित अन्य वाहनों के पहिए थमे हुए है। अमूमन ऐसा होता रहा है की मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए प्रशासन बस की व्यवस्था करता है । जबलपुर प्रशासन भी इस प्रयास में जुटा है की किसी तरह उन्हें बस की सुविधा मिल जाए इसके लिए पुलिस प्रशासनिक अधिकारी बस चालकों से मुलाकात करने आईएसबीटी बस स्टैंड पहुंचे भी थे लेकिन बात नहीं बन पाई ।बताया जाता है की अधिकारी इस प्रयास में थे की  3 जनवरी को सीएम आ रहें है, इसलिए बस चलाई जाए  लेकिन बस चालक तैयार नहीं हुए।                                              इधर उच्च न्यायलय ने हड़ताल को लेकर किया सुनवाई--प्रदेश में ड्राइवरों की चल रही हड़ताल को लेकर उच्च न्यायलय  में सुनवाई हुई। बताया जाता है की  हाईकोर्ट ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि हड़ताल को तुरंत खत्म करवाया जाए और परिवहन बहाल करवाए। बताया जाता है की  नागरिक उपभोक्ता मंच और अखिलेश त्रिपाठी की और से दायर याचिका पर सुनवाई में राज्य सरकार की और से महाधिवक्ता ने अंडरटेकिंग रिपोर्ट पेश किया और बताया कि आज शाम तक इस मामले में सरकार निर्णय ले रही है।  देखना यह है की हिट एंड रन मामले में ड्राइवर क्या कदम उठाते है वही दूसरी और सरकार का अगला कदम क्या होता है।

सागौन तस्कर हथियार लहराते हुए भागे


वन विभाग ने हाइवे से जप्त किया सागौन से भरा ट्रक
सिवनी जिले में सागौन तस्करो के इतने हौसले बढ़े हुए है कि वह धारदार हथियार लेकर तस्करी करते है और यदि कोई उन्हें रोकने का प्रयास करता है तो वह हथियार लहराते हुए भाग जाते है ऐसा ही कुछ नेशनल हाइवे 44 से लगे घोघरी गांव के जंगल में हुआ जहा छपारा वन विभाग की टीम ने सागौन तस्करी के मामले में एक ट्रक को पकड़ा तब वहा मौजूद तस्कर हाथ में हथियार लहराकर वन विभाग के अधिकारियों को चकमा देकर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गये। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अुनसार वन परिक्षेत्र छपारा की पश्चिम बीट के जंगल में कूप कटाई का सागौन कटा हुआ रखा हुआ था जिसे तस्कर ट्रक में लोड कर योजना बाद तरीके से ले जाने की तैयारी पर थे. मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की टीम ने दबिश दिया बताया जाता है कि वन विभाग की टीम को देखकर आरोपी हाथ में हथियार लेकर वहा से अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गये। ट्रक में लगभग  20 नग सागौन के ल_े लोड मिले जिसकी अनुमानित कीमत 1 लाख 81 हजार 735 रुपए बताई जा रही है। वन विभाग अमले ने अज्ञात तस्करों के विरूद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर तलाशी प्रारंभ कर दिया बताया जाता है कि इस कार्यवाही में वन रक्षक निरंजन मर्सकोले की मुखबिरी के कारण ही सफलता मिली। चर्चा है कि यदि वन विभाग अमला आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता पाता है तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते है वन विभाग की इस कार्यवाही में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी संजय जयसवाल, वनपाल चंद्र विनय सिंह, शकीरा अब्बास खान, वनरक्षक निरंजन मर्सकोले, वनरक्षक कृष्ण कुमार, वनपाल संतोष विश्वकर्मा, वनरक्षक बसंत धुर्वे, स्थाई कर्मचारी ओमशंकर यादव, सुरक्षा श्रमिक अमरचंद भलावी, सुरक्षा श्रमिक रिमलाल उइके सुरक्षा श्रमिक मौजूद रहे जिनकी कड़ी मशक्कत से सागौन तस्करी के मामले में ट्रक जप्त किया गया है गौरतलब है कि लगभग 04 दिन पहले बरघाट परिक्षेत्र की पखारा बीट से भी अवैध कटाई करने वाली एक गैंग को वन विभाग अमला पकड़ चुका है तब वन विभाग ने एक आयशर ट्रक, एक बोलेरो वाहन एवं एक आॢटका सहित कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
ट्रक में लिखा है सूर्यवंशी ब्रदर्स
बताया जाता है कि वन विभाग अमले ने जिस ट्रक को सागौन के साथ जप्त किया उसमें सूर्यवंशी ब्रदर्स लिखा हुआ है जिसका मालिका बरघाट निवासी बताया जा रहा है। जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है कि आखिर उक्त ट्रक में कौन-कौन शामिल था।

केवलारी में शिक्षक के घर लूट की वारदात को दिया गया अंजाम


लगभग 02 लाख की हुई लूट
केवलारी में बीती  रात्रि पांच लुटेरे एक शिक्षक के घर घुसे और बच्चे व महिला के ऊपर हथियार अड़ाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार केवलारी में गायत्री मंदिर के पास दीपक डहरिया नामक शिक्षक अपने परिवार के साथ रहता है। बताया जाता है कि बीती रात्रि शिक्षक अपने परिवार के साथ घर में सो रहा था तभी पीछे दरवाजे से पांच नकाबपोश लुटेरे घर के भीतर घुसे और शिक्षक के बच्चे के ऊपर पिस्टल अड़ा दिया वही शिक्षक की पत्नी के ऊपर भी धारदार हथियार अड़ा दिया गया जिसके बाद लुटेरों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया। बताया जाता है कि लुटेरे लगभग 24 से 25 हजार  रुपया नगद सहित सोना चांदी के जेवर ले उड़े। घटना के संबंध में बताया जाता है कि लुटेरों ने घर की एक-एक अलमारी की तलाशी लिया और जो जेवर मिले लूट लिया। बताया जाता है कि काफी देर तक लुटेरे लूट की वारदात को अंजाम देते रहे और बाद में वह फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद केवलारी पुलिस मौके पर पहुंची वही सिवनी एसपी भी मौके पर पहुंचे। इस मामले में केवलारी टी आई किशोर बावनकर ने बताया कि मामला पंजीबद्ध करते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है।

05 जनवरी से पहले कई जिले के कलेक्टर, एस पी सहित अन्य अधिकारियों के होंगे तबादले

----05 जनवरी के बाद चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं हो सकेंगे तबादले-----लोकसभा चुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग द्वारा 6 जनवरी से 8 फरवरी तक मतदाता सूची का संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम रखा गया है। बताया जाता है की मध्यप्रदेश में 05 जनवरी से पहले ही ट्रांसफर हो सकेंगे। सूत्र बताते है की मध्यप्रदेश की डॉक्टर मोहन सरकार 05 जनवरी से पहले कई जिले के कलेक्टर , एस पी सहित अन्य अधिकारियों के तबादले करेगी।बताया जाता है की  चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 30 जून को एक ही जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अफसरों के तबादले के आदेश भी दिए हैं। जिनमे कलेक्टर, एसपी, आईजी, संभागायुक्त, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस और नगर निरीक्षक शामिल हैं।आयोग ने कहा है कि चुनाव से सीधा संबंध रखने वाले अधिकारियों में से अगर कोई अफसर प्रमोशन के बाद भी 30 जून 2024 की स्थिति में जिले में तीन साल पूरे करता है तो उसे भी हटाया जाए। 31 जनवरी 2024 तक इसकी जानकारी आयोग को दी जाए।

विभाग बंटवारे के बाद होगी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी-----मध्यप्रदेश में 25 दिसंबर को 28 मंत्रियों ने शपथ ले लिया लेकिन समाचार लिखे जाने तक लगभग 05 दिन बाद तक विभागो का बंटवारा नहीं हुआ। सूत्र बताते है की विभागो का बंटवारा होते ही प्रदेश 05 जनवरी से पहले बड़ी प्रशासनिक सर्जरी होगी। हालांकि मुख्यमंत्री बनने के बाद सी एम डॉक्टर मोहन यादव ने सीएम ने उप सचिव व प्रमुख सचिव को बदल दिया है।वही अब सचिवालय से कई और अफसरों को  हटाएं जाने की तैयारी चल रही है । इसके साथ ही कई कलेक्टरों की लिस्ट भी तैयार है।सूत्रों की माने तो तबादले को लेकर सीएम सचिवालय ने सामान्य प्रशासन विभाग से आईएएस अफसरों की पोस्टिंग की जानकारी मांगी।जानकारी में मैदानी अफसर, नगर मंडल, विंध्याचल, सतपुड़ा और मंत्रालय के साथ-साथ लूप लाइन में पड़े अफसरों के नाम शामिल।

बताया जाता है की जिन कलेक्टर के तबादले होने की चर्चा है उनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर,उज्जैन, विदिशा,बैतूल,राजगढ़,बालाघाट, सिवनी सागर,नर्मदापुरम, शहडोल, सतना, खंडवा, सिंगरौली कटनी, सीधी, नरसिंहपुर, देवास सहित 2 दर्जन से ज्यादा कलेक्टर और आधा दर्जन संभाग आयुक्त की होने जा रही बदली। कलेक्टर के अलावा लगभग दो दर्जन से ज्यादा सीईओ जिला पंचायत, 8 निगम आयुक्त,  दो दर्जन से ज्यादा निगम मंडल के एमडी दर्जन भर विभाग आयुक्त के साथ ही साथ 50 से ज्यादा सचिव, प्रमुख सचिव, अपर मुख्य सचिव और अन्य स्थानों पर पदस्थ अधिकारी शामिल।कलेक्टर को बदले जाने का सबसे बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है की 2015 बैच के अफसर को फील्ड पर भेजा जाना है, वहीं 2014 बैच के तीन आईएएस अभी तक कलेक्टर नहीं बन सके हैं इनमें नेहा मीना और आदित्य सिंह प्रमुख है।इन्हे नही मिली फील्ड में पोस्टिंग-----बताया जाता है की मध्यप्रदेश में कई ऐसे आई ए एस अधिकारी है जो लंबे समय से लूप लाइन में है जिनमे आईएएस अफसर नेह मारव्या, रविंद्र सिंह, गिरीश शर्मा, चंद्रशेखर बालिंबे,अजय गुप्ता, धनंजय प्रताप सिंह, ज्ञानेश्वर पाटिल,अजीत कुमार,शिल्पा गुप्ता,सरिता प्रजापति मीनाक्षी सिंह और अभिषेक शामिल है जिन्हे कुछ जिले में कलेक्टर बनाया जा सकता है

गांजा बेचने की फिराक में था राजा बघेल


कोतवाली पुलिस ने दो अलग अलग कारवाही कर आरोपियों को दबोचा---

सिवनी कोतवाली पुलिस को उस समय एक बड़ी उपलब्धि मिली जब श्पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  गुरुदत्त शर्मा, के निर्देशन में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सिवनी  पुरुषोत्तम सिंह मरावी के मार्गदर्शन में कोतवाली टी आई सतीश तिवारी के नेतृत्व में अवैध मादक पदार्थ गांजा तस्करो पर कार्यवाही करते हुए  दो अलग अलग रास्तों में गांजा लेकर जा रहे तीन लोगो को गिरफ्तार किया। पुलिस ने पहली कारवाही पलारी तरफ से मरझोर रोड में किया। बताया जाता है की कोतवाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली की एक युवक बाइक से आ रहा है जिसके पास रखे बैग में गांजा हो सकता है। जानकारी मिलने के बाद कोतवाली की टीम ने बाईक से आ रहे व्यक्ति को रोककर घेराबंदी कर विधिवत तलाशी लिया  । बताया जाता है की युवक के पास 03 किलो गांजा और बाइक जप्त किया। पूछताछ में युवक ने अपना नाम राजा बघेल उर्फ राजा पलारी पिता रघुनाथ बघेल उम्र 47 साल निवासी ग्राम पलारी थाना बताया जिसके विरुद्ध अपराध क्रमांक 1104/23 धारा 8/20 एनडीपीएसएक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध किया। वही दूसरी कारवाही नागपुर रोड थोक सब्जी मंडी के आगे जोडा फुल के पास की गई। बताया जाता है की पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली की  एक पल्सर बाईक से दो लोग गांजे का परिवहन कर रहे है। सूचना मिलने पर पुलिस ने बाइक रोका और  विधिवत तलाशी ली गई तो उनके पास   5 किलो अवैध मादक पदार्थ गांजा मिला। पूछताछ में युवकों ने अपना नाम  अजय उर्फ अज्जू कोष्ठा एवं अंकित मिश्रा बताया  मिला जिन पर  एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाही की जाकर आरोपियों को गिरफ्तार कर आरोपियो को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा मे भेजा गया है।बताया जाता है की पूछताछ पर जानकारी मिली कि उक्त आरोपीगण पूर्व से गांजा बिक्री में संलिप्त रहे है जो आरोपियो का पूर्व से आपराधिक रिकार्ड होना पाया गया है। आरोपी राजा बघेल उर्फ राजा पलारी थाना लखनवाड़ा में गुडा सूची में सूचीबध्द है। जिस पर मारपीट, अवैध शराब बिक्री एवं जुआं एक्ट जैसे लगभग 08 मामले पंजीबध्द है इसके अतिरिक्त आरोपी अजय उर्फ अज्जू कोष्ठा पर भी लगभग आधा दर्जन से अधिक मामले मारपीट एंव आबकारी एक्ट के पंजीबध्द है। पुलिस की इस कारवाही में कार्य निरीक्षक सतीश तिवारी, उनि राहुल काकोडिया, सउनि विश्वरंजन रघुवंशी, प्र. आर. रामअवतार डेहरिया, प्र.आर. आत्माराम सिमोनिया, आर, नितेश राजपूत, आर. अमित रघुवंशी, आर. सतीश इनवाती, अभिषेक डेहरिया, महेन्द्र पटेल, शिवम बघेल, इरफान खान, सिध्दार्थ दुबे, मनोज हरिनखेडे, अरविंद मंडराह, अंकित देशमुख शामिल है।


तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं ने किस पार्टी का किया था काम


 
सिवनी महाकौशल 27  दिसं. 2023
सिवनी जिले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कई पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो गई जिसमे पार्टी के जिला अध्यक्ष गया प्रसाद कुमरे से लेकर प्रवक्ता रावेन शाह तक के नाम शामिल है जिन्हे पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 06 सालो के लिए निष्कासित कर दिया गया। बताया जाता है की गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष रहे गया प्रसाद कुमरे की अध्यक्षता में 14 दिसंबर 2023 को समीक्षा बैठक आयोजित कि गई थी जिसके  बाद 17 दिसंबर को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष गया प्रसाद कुमरे के हस्ताक्षर से एक निष्कासन पत्र जारी किया गया  था जिसमें उल्लेख किया गया की गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की रीती नीतियों के विरुद्ध काम करने के आरोप के चलते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रवक्ता रावेन शाह,महिला मोर्चा की अध्यक्ष सुभद्रा तुमराम,जिला महामंत्री अनिल गोनगे,अरविंद इनवाती जिला कार्यवाहक अध्यक्ष को 06 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। गया प्रसाद कुमरे को यह बताना चाहिए की जिन्हे उन्होंने 06 साल के लिए निष्कासित किया जब उन्होंने पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में काम नहीं किया तो फिर किसके पक्ष में काम किया था।
इधर अमान पोर्ते को बताना चाहिए गया प्रसाद ने किसके पक्ष में काम किया
17 दिसंबर को गया प्रसाद कुमरे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण चार लोगों को 6 साल के लिए निष्कासित किया उसके ठीक 04 दिन बाद 21 दिसंबर को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमान सिंह पोर्ते ने  पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशी के विरोध में काम करने के आरोप के चलते सिवनी जिले के अध्यक्ष गया प्रसाद कुमरे  महत लाल वरकड़े,अनिल कुडोपा,अरविंद उईके, एम एस परते को 06 साल के लिए निष्कासित कर दिया। यानी कि सिवनी जिले के 10 गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया । ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए की जिन्हें उन्होंने 6 साल के लिए निष्कासित किया उन्होंने अपनी पार्टी के लिए नहीं तो फिर किस पार्टी के प्रत्याशी के लिए काम किया था ? ताकि पार्टी से जुड़े हुए ईमानदार लोगों को पता चल सके की गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में भी ईमानदार नेता नहीं है।

अमीन उमेश शर्मा के कारण विभाग को हुआ 4 लाख 50 हजार का नुकसान, एस डी ओ ने कराई एफ आई आर दर्ज-----

अनुविभागी अधिकारी अपर बहन गंगा बंद उप संभाग क्रमांक 3 में अमीन के पद पर पदस्थ उमेश शर्मा की लापरवाही के कारण विभाग को लगभग साढे चार लाख रुपया का नुकसान हुआ जिसके बाद एसडीओ बस चौधरी ने छपारा थाने में आवेदन दिया जिसके बाद लापरवाह अमीन उमेश शर्मा के विरुद्ध थाने में धारा 409 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।                  निलंबन के बाद भी नही दिया था प्रभार---- बताया जाता है की अपार बहन गंगा बंद उप संभाग क्रमांक 3 भीमगढ़ में अमीन के पद पर पदस्थ उमेश शर्मा को 25 अक्टूबर को निलंबित किया गया था। उन्हें यह भी आदेशित किया गया था कि निलंबन के बाद वह अपना कार्यभार रामकुमार डेहरिया को सौंपेंगे लेकिन उमेश शर्मा ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश को हवा में उड़ा दिया। बताया जाता है कि निलंबित अमीन ने अपना कार्यभार रामकुमार डेहरिया को नहीं सौपा जिसके कारण शासन को डूब क्षेत्र के किसानों को पट्टे वितरण नहीं हो पाए इसके अलावा एम आर टी सी 6 से रही वसूल नही हो पाई,शासकीय दस्तावेजों का हस्तांतरण नही हो पाया जिससे शासन को  लगभग साढे चार लाख रुपया का नुकसान हुआ। जिसके बाद एसडीओ ने छपारा थाने में अमीन उमेश शर्मा के विरुद्ध आवेदन दिया जिसकी जांच के पश्चात अमीन उमेश शर्मा के विरुद्ध धारा 409 के तहत एफ आई आर दर्ज कराई गई।

अपनी राजनीति चमकाने योगेंद्र बाबा विधायक निधि का कर रहे दुरुपयोग

सिवनी महाकौशल 25  दिसं. 2023
2013 के विधानसभा चुनाव में योगेंद्र बाबा को कोई नहीं जानता था उनकी मां श्रीमती उर्मिला सिंह के नाम से योगेंद्र बाबा को विधानसभा की टिकट मिली थी तब श्रीमती उर्मिला सिंह के नाम से योगेंद्र बाबा पहली बार विधायक बन गए थे। क्षेत्र के लोगों ने उर्मिला सिंह के द्वारा किए गए कामों को ध्यान में रखकर योगेंद्र बाबा को 2013, 2018 और अब 2023 में तीसरी बार विधायक बनाया। वैसे योगेंद्र बाबा को विधायक बनाने में क्षेत्र के भोले भाले गरीब आदिवासियों सहित अन्य वर्गो का विशेष योगदान रहता है लेकिन चुनाव जीतने के बाद योगेंद्र बाबा कुछ धनाढ्य लोगो के हाथो की कठपुतली बन जाते है। 2018 में दूसरी बार चुनाव जीतकर विधायक बने योगेंद्र बाबा ने गरीबों के हिस्से का पैसा अपने कुछ करीबी धनाढ्य लोगो को दे दिया। गतांक में दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि योगेंद्र बाबा ने विधायक निधि से पैसा देते समय यह भी ध्यान नहीं रखा कि वह जो पैसा दे रहे हैं वह किसी गरीब के खाते में जा रहा है या अमीर के खाते में । सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार योगेंद्र बाबा ने अपनी विधायक निधि का एक बड़ा हिस्सा घंसौर क्षेत्र के कई धनाढ्य  और दबंग लोगों के ऊपर खर्च कर दिया । आश्चर्य इस बात का है कि पैसे खर्च करते समय उन्होंने यह भी नहीं देखा कि जिन लोगों के ऊपर वह विधायक निधि का पैसा खर्च कर रहे हैं वह घंसौर में रहते हैं या जबलपुर में । बताया जाता है कि योगेंद्र बाबा ने अमित कुमार जैन एवं श्रीमती नेहा जैन के नाम से शादी के लिए चार-चार हजार रुपया विधायक निधि से स्वीकृत किया। घंसौर से जुड़े सूत्रों की माने तो अमित कुमार जैन और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नेहा जैन घंसौर में रहते ही नहीं बल्कि वर्तमान में वह जबलपुर में रहते हैं और वहीं उनका व्यापार है । सूत्र तो यह भी बताते हैं कि अमित कुमार जैन और श्रीमती नेहा जैन सक्षम परिवार के लोग हैं बावजूद इसके उन्हें योगेंद्र बाबा ने विवाह समारोह के लिए चार चार हजार रुपिया दे दिया । सूत्रों की माने तो अमित कुमार जैन एवं श्रीमती नेहा जैन के घर में भी ऐसा कोई गरीब नही है जिसे विधायक निधि से पैसे देने की आवश्यकता हो। विधायक योगेंद्र बाबा को क्षेत्र की जनता को यह अवश्य बताना चाहिए की उन्हे विधायक निधि गरीबों के ऊपर खर्च करने के लिए दी गई है या अपने करीबी धनाढ्य लोगो के ऊपर खर्च करने के लिए दी गई है। उल्लेखनीय है की घंसौर मुख्यालय में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें योगेंद्र बाबा समय-समय पर उपकृत करते है । योगेंद्र बाबा के करीबी होने का फायदा उठाकर कुछ लोग ठेकेदारी तो कुछ मटेरियल सप्लाई करते है लेकिन जब चुनाव का समय आता है  तो वह घंसौर मुख्यालय से ही योगेंद्र बाबा को जीत नहीं दिला पाते ।

तबस्सुम खान डिस्ट्रिक जज के पद पर हुई पदोन्नत


प्रख्यात अधिवक्ता स्व. जकी अनवर खान की बेटी है तबस्सुम
सिवनी महाकौशल। सिवनी जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं रही। जिले की प्रतिभाओं को मौका मिलते ही उन्होंने अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है ऐसी ही प्रतिभा की धनी है तबस्सुम खान जो डिस्ट्रिक जज के पद पर पदोन्नत हुई है। सिवनी जिले के प्रख्यात अधिवक्ता और समाज सेवी स्वर्गीय  जक़ी अनवर की बेटी तबस्सुम खान वर्तमान में जबलपुर कोर्ट मे सिविल जज के रूप में सेवाएं दे रही थी। बता दे की तबस्सुम खान सीनियर अधिवक्ता सज्जाद अनवर की भतीजी और शहीद वार्ड के पार्षद जोएब जकी अनवर और युवा अधिवक्ता सोहेल जकी अनवर की बड़ी बहन है  जिनकी प्रारंभिक शिक्षा सिवनी में ही हुई है। तब्बसूम खान 2011 में सिविल जज जूनियर डिवीजन और 2018 में पदोन्नत होकर सिविल जज सीनियर डिवीजन और 2023 में जिला न्यायाधीश के लिए पदोन्नत हुई है। तब्बसुम खान को मिली उपलब्धि पर परिजनों और शुभचिंतको ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना किया।

तबस्सुम खान डिस्ट्रिक जज के पद पर हुई पदोन्नत


प्रख्यात अधिवक्ता स्व. जकी अनवर खान की बेटी है तबस्सुम

सिवनी महाकौशल। सिवनी जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं रही। जिले की प्रतिभाओं को मौका मिलते ही उन्होंने अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है ऐसी ही प्रतिभा की धनी है तबस्सुम खान जो डिस्ट्रिक जज के पद पर पदोन्नत हुई है। सिवनी जिले के प्रख्यात अधिवक्ता और समाज सेवी स्वर्गीय जक़ी अनवर की बेटी तबस्सुम खान वर्तमान में जबलपुर कोर्ट मे सिविल जज के रूप में सेवाएं दे रही थी। बता दे की तबस्सुम खान सीनियर अधिवक्ता सज्जाद अनवर की भतीजी और शहीद वार्ड के पार्षद जोएब जकी अनवर और युवा अधिवक्ता सोहेल जकी अनवर की बड़ी बहन है जिनकी प्रारंभिक शिक्षा सिवनी में ही हुई है। तब्बसूम खान 2011 में सिविल जज जूनियर डिवीजन और 2018 में पदोन्नत होकर सिविल जज सीनियर डिवीजन और 2023 में जिला न्यायाधीश के लिए पदोन्नत हुई है। तब्बसुम खान को मिली उपलब्धि पर परिजनों और शुभचिंतको ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना किया।

तबस्सुम खान डिस्ट्रिक जज के पद पर हुई पदोन्नत

सिवनी महाकौशल। सिवनी जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं रही। जिले की प्रतिभाओं को मौका मिलते ही उन्होंने अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है ऐसी ही प्रतिभा की धनी है तबस्सुम खान जो डिस्ट्रिक जज के पद पर पदोन्नत हुई है। सिवनी जिले के प्रख्यात अधिवक्ता और समाज सेवी स्वर्गीय  जक़ी अनवर की बेटी तबस्सुम खान वर्तमान में जबलपुर कोर्ट मे सिविल जज के रूप में सेवाएं दे रही थी। बता दे की तबस्सुम खान सीनियर अधिवक्ता सज्जाद अनवर की भतीजी और शहीद वार्ड के पार्षद जोएब जकी अनवर और युवा अधिवक्ता सोहेल जकी अनवर की बड़ी बहन है  जिनकी प्रारंभिक शिक्षा सिवनी में ही हुई है। तब्बसूम खान 2011 में सिविल जज जूनियर डिवीजन और 2018 में पदोन्नत होकर सिविल जज सीनियर डिवीजन और 2023 में जिला न्यायाधीश के लिए पदोन्नत हुई है। तब्बसुम खान को मिली उपलब्धि पर परिजनों और शुभचिंतको ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना किया।

गोंडवाना के अध्यक्ष गया प्रसाद प्रवक्ता रावेनशाह सहित कई नेता हुए 06 सालों के लिए निष्कासित

पार्टी से भीतर घात करने वाले हर जगह पाए जाते हैं जो पार्टी से अलग हटकर पार्टी के लोगो को ही निपटाने में लग जाते है। अभी तक कांग्रेस में भीतरघात करने वाले लोगों के चेहरे सामने आए जिन्हें पार्टी ने 6 साल के लिए निष्ठासित कर दिया अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में भी निष्कासन की कार्रवाई होने लगी है।  गत दिवस गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कई अलग-अलग पदाधिकारी को निष्कासित किया है । मजे की बात तो यह है कि जिला गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष गया प्रसाद कुमरे ने चार लोगों को पार्टी के निष्कासित किया लेकिन उनकी कार्रवाई के चार दिन बाद प्रदेश अध्यक्ष ने जिला गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष को ही पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए 06 साल के लिए  निष्कासित कर दिया ।
गया प्रसाद कुमरे ने रावन शाह सहित चार लोगो को किया निष्कासित
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष गया प्रसाद कुमरे की अध्यक्षता में 14 दिसंबर 2023 को समीक्षा बैठक आयोजित किया था। बताया जाता है की बैठक के बाद 17 दिसंबर को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष गया प्रसाद कुमरे के हस्ताक्षर से एक निष्कासन पत्र जारी किया गया जिसमें उल्लेख किया गया की गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की रीती नीतियों के विरुद्ध काम करने के आरोप के चलते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रवक्ता रावेन शाह,महिला मोर्चा की अध्यक्ष सुभद्रा तुमराम,जिला महामंत्री अनिल गोनगे,अरविंद इनवाती जिला कार्यवाहक अध्यक्ष को 06 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
इधर निष्कासन करने वाले गया प्रसाद को प्रदेश अध्यक्ष ने किया निष्कासित
17 दिसंबर को गया प्रसाद कुमरे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण चार लोगों को 6 साल के लिए निष्कासित किया उसके ठीक 04 दिन बाद 21 दिसंबर को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमान सिंह पोर्ते ने एक पत्र जारी किया जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी की अनुशंसा से पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशी के विरोध में काम करने के आरोप के चलते प्रदेश भर के 26 नेताओ को 06 साल के लिए निष्कासित किया जिसमे सिवनी जिले के अध्यक्ष गया प्रसाद कुमरे भी शामिल है। बताया जाता है की गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमान सिंह पोर्ते ने सिवनी जिले से गया प्रसाद कुमरे के अलावा महत लाल वरकड़े,अनिल कुडोपा,अरविंद उईके, एम एस परते शामिल है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के द्वारा की गई कार्रवाई अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है ।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेता रावेन शाह के साथ सी ई ओ पवार नवजीवन ने किया दुर्व्यवहार

सिवनी जिला पंचायत में जबसे सी ई ओ के पद पर पवार नवजीवन पदस्थ हुए है तब से ही वह विवादित है।ताजा मामला गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रवक्ता रहे रावेन शाह से जुड़ा है।बताया जाता है की पवार नवजीवन ने अपने कार्यालय में रावेन शाह के साथ अभद्रता किया जिससे आहत होकर रावेन शाह ने पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन से शिकायत करते हुए कहा की वह जनजाति वर्ग से आता है जिसके कारण सी ई ओ ने उसके साथ जानबूझकर जातिगत रूप से दुर्भावना रखते हुये कार्यालय में सार्वजनिक रूप से अमर्यादित भाषा का उपयोग कर अपमानित किया।  रावेन शाह ने विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा की 

 मेरी पत्नि जिला पंचायत सदस्य श्रीमती ललिता उईके है और मै गोंडवाना गणतंत्र पार्टी सिवनी का जिला प्रवक्ता हूं। इस आधार पर पूर्व में जिला पंचायत सीईओ पवार नवजीवन विजय के साथ भेंटवार्ता भी हुई थी।जिसमें चर्चा के दौरान नाम व जातिगत सामाजिक रूप से परिचय भी हुआ है। वहीं चर्चा के दौरान जिला पंचायत सीईओ शपवार नवजीवन विजय  द्वारा यह भी कहा गया था कि सिवनी जिले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का अच्छा वर्चस्व है और आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व रावेन शाह उईके आप कर रहे है यह अच्छी बात है। इस तरह से जिला पंचायत सीईओ पवार नवजीवन विजय उन्हे अच्छी तरह से जानते थे कि मैं रावेन शाह उईके आदिवासी समाज से आता हूं एवं जनजाति वर्ग से हूं व गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का जिला प्रवक्ता हूं साथ ही जिला पंचायत सदस्य श्रीमती ललिता उईके मेरी पत्नि है। 

गोंगपा जिला प्रवक्ता रावेन शाह उईके ने आगे बताया कि दिनांक 20 दिसंबर 2023 को समय लगभग 2.50 बजे से 3.50 बजे के बीच की बात है मैं क्षेत्रीय जनसमस्याओं का समाधान कराने के लिये जिला पंचायत कार्यालय सिवनी गया था। इस दौरान मैं जिला पंचायत सीईओ  पवार नवजीवन विजय के कक्ष में भी गया तब  भ्रत्य द्वारा गेट खोला गया उसके बाद जैसे ही प्रवेश किया समस्या सुने बिना ही मुझे देखते ही जिला पंचायत सीईओ  पवार नवजीवन विजय ने 

घूरकर देखते हुये बिना किसी कारण के ललकारते हुये कहा कि तुम चश्मा लगाकर कैसे अंदर आ गये हो तुम्हे अक्ल नहीं है। इसके साथ ही कहा कि बत्तमीज कहीं के, तुम कैसे अंदर आये चिल्लाते हुये सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। उस दौरान उनके कक्ष में जिला पंचायत कार्यालय के 8 से 10 लगभग कर्मचारी व जिला पंचायत सदस्य सभापति घनश्याम सनोडिया जी बैठे हुये थे। 

गोंगपा जिला प्रवक्ता रावेन शाह उईके ने बताया कि जिला पंचायत सीईओ  पवार नवजीवन विजय  ने यह भी कहा कि मैं अभी तुमको छोड़ रहा हूं नही ंतो तुम्हे बताता कि मैं क्या कर सकता हूं। इस तरह से मुझे धमकी भी दिया। मैं जनजाति वर्ग में आता हूं आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करता हूं यह बात जिला पंचायत सीईओ पवार नवजीवन विजय अच्छी तरह से जानते है क्योंकि उनसे मेरा पूर्व में भी परिचय एवं भेंट मुलाकात हो चुकी है इसके बाद भी उन्होंने जानबूझकर मुझे जातिगत रूप से दुर्भावना रखते हुये सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का कार्य किया है इससे मेरी मानसिक व सामाजिक छबि खराब हुई है। जिला 

पंचायत सीईओ पवार नवजीवन विजय पर अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम एवं मानव अधिकार अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही करने हेतु पुलिस प्रशासन व जिला कलेक्टर मेरे द्वारा आवेदन दिया गया है। 

गोंगपा जिला प्रवक्ता रावेन शाह उईके ने आगे बताया कि इस संबंध में जब मैं शिकायत लेकर कानूनी कार्यवाही कराने अजाक थाना सिवनी गया तो वहां पर अजाक थाना प्रभारी ने प्रकरण दर्ज करने के साथ साथ आवेदन लेने से ही इंकार कर दिया। जिससे मुझे व अनुसूचित जनजाति वर्ग को प्रदत्त संवैधानिक अधिकार एवं मौलिक अधिकार का भी हनन किया गया है। 

गोंगपा जिला प्रवक्ता रावेन शाह उईके ने बताया कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला पदाधिकारियों सहित पंचायत के जनप्रतिनिधियों से इस संबंध में आगे चर्चा की जायेगी। वहीं जिला पंचायत सीईओ के 

द्वारा किये गये जातिगत आधार पर दुर्भावनापूर्वक कृत्य को लेकर आगामी समय में संगठन के निर्णय के बाद जिला पंचायत सीईओ के विरूद्ध मोर्चा खोलकर धरना प्रदर्शन किया जायेगा। 


मोहन यादव के मंत्रिमंडल गठन में नहीं बनी बात

सिवनी महाकौशल 19  दिसं. 2023
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए लगभग 15 दिन से अधिक का समय बीत गया बावजूद इसके मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो पाया ।3 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के परिणाम आए थे और उसके लगभग 10 दिन के बाद 12 दिसंबर को डॉक्टर मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर शपथ दिलाई गई थी। मोहन यादव को मुख्यमंत्री के शपथ लिए लगभग एक सप्ताह होने को आए बावजूद इसके अभी तक मंत्रिमंडल गठित नहीं हो सका । दिल्ली में मंत्रिमंडल को लेकर माथा पच्ची चल रही है लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका । सूत्रों की माने तो अभी भी कुछ नाम में पेंच फंसे हुए हैं जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि अब विधानसभा सत्र के बाद ही मंत्रिमंडल अस्तित्व में आएगा। बताया जाता है कि पिछले दो दिनों से दिल्ली में मंत्रिमंडल को लेकर बैठक चल रही है क्षेत्रीय ,जातिगत एवं लोकसभा क्षेत्र के गणित में मंत्रिमंडल गठन खटाई में पड़ गया है। भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 2024 में लोकसभा का चुनाव है सभी संभागों के ऐसे विधायकों के नाम के ऊपर चर्चा हुई जो जाति गत समीकरण के आधार पर भी फिट बैठते हो लेकिन यह भी तय किया जा रहा है कि ऐसे मंत्री बनाया जाए जो 29 लोकसभा को कवर कर सके । यानी कि हर लोकसभा से कोई ऐसा मंत्री बने जो क्षेत्र को भी कवर कर पाए और लोकसभा को भी।  
06 लोकसभा में बंटी है महाकौशल की 38 विधानसभा सीट
यदि लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से देखा जाए तो जबलपुर संभाग में सिर्फ तीन लोकसभा क्षेत्र है जबकि महाकौशल क्षेत्र में 38 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जो की 6 लोकसभा क्षेत्र में बंटी हुई हैं। जबलपुर संभाग में जबलपुर लोकसभा सीट है जिसमे पाटन, बरगी, जबलपुर पूर्व,जबलपुर उत्तर, जबलपुर केंट,जबलपुर पश्चिम, पनागर, सिहोरा विधानसभा शामिल है। वही दूसरी लोकसभा मंडला आती है जिसमे चार  जिले की 08 विधानसभा आती है। उक्त लोकसभा में  शहपुरा, डिंडोरी बिछिया , मंडला ,निवास के अलावा सिवनी जिले की लखनादौन व केवलारी एवम नरसिंहपुर जिले की गाडरवाड़ा विधानसभा शामिल है। वही बालाघाट लोकसभा में बालाघाट जिले की 06 विधानसभा जिसमे बालाघाट, लांजी, परसवाड़ा, बैहर, वारासिवनी, कटंगी, व सिवनी जिले की सिवनी एवम बरघाट शामिल है।
नरसिंहपुर जिले की तीन विधानसभा होशगाबाद लोकसभा में है शामिल
नरसिंहपुर जिले में चार विधानसभा है जिसमें से गोटेगांव मंडला लोकसभा में आती है जबकि नरसिंहपुर, तेंदूखेड़ा एवं गाडरवारा होशंगाबाद लोकसभा में आती है। नरसिंहपुर जिले से प्रहलाद पटेल एवं राव उदय प्रताप सिंह की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है । यदि लोकसभा के हिसाब से मंत्री पद दिया जाता है तो फिर प्रहलाद पटेल या राव उदय प्रताप सिंह किसी एक को मौका मिलेगा।  
कटनी विधानसभा की तीन विधानसभा खजुराहो लोकसभा में आती है
 महाकौशल क्षेत्र के कटनी जिले में भी चार विधानसभा है जिसमें से बडवारा विधानसभा सीट शहडोल लोकसभा में आती है जबकि विजय राघौगढ़, बहोरीबंद  एवम मुंडवारा खजुराहो लोकसभा में आती है जहां से संजय पाठक प्रबल दावेदार है। महाकौशल क्षेत्र की 38 विधानसभा में से भाजपा ने 21 विधानसभा सीट जीता जबकि कांग्रेस ने 17 विधानसभा सीट जीता है जिसमे से छिंदवाड़ा लोकसभा की सभी 07 सीट कांग्रेस जीती है। यदि लोकसभा क्षेत्र से एक-एक मंत्री दिया जाता है तो फिर बालाघाट लोकसभा से चार विधायकों में से किसी एक को मंत्री पद दिया जाएगा जिनमें कटंगी के विधायक गौरव पारधी,लांजी के विधायक राजकुमार कर्राहे , सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन एवं बरघाट के विधायक कमल मर्सकोले शामिल है । वही मंडला लोकसभा से श्रीमती संपत्तिया ऊईके एवं ओमप्रकाश धुर्वे में से किसी एक को मंत्री बनाया जाएगा । ऐसा ही जबलपुर लोकसभा क्षेत्र से भी होगा जहां से राकेश सिंह या अजय विश्नोई में से किसी एक को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी । हालांकि अभी तक शीर्ष नेतृत्व ने मंत्रिमंडल के आकार को लेकर कोई सहमति नहीं दिया हैं लेकिन भीतर खाने से आ रही खबरों की माने तो यदि पहला मंत्रिमंडल छोटा होगा तो फिर 29 लोकसभा को कवर कर पाना मुश्किल हो जाएगा ऐसे में कयास लगाए जा रहे है की पहला मंत्रिमंडल छोटा नही होगा।

मक्का से भरा ट्रेक्टर चुराने वाले आरोपी को लखनवाड़ा पुलिस ने 24 घंटे के भीतर पकड़ा

सिवनी महाकौशल 16  दिसं. 2023
गत दिवस लखनवाड़ा थाने का प्रभार संभाल रहे उप निरीक्षक प्रमोद भारद्वाज की टीम ने मक्का से भरा ट्रेक्टर चोरी करने वाले आरोपी को 24 घंटे के भीतर दबोच लिया। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार लखनवाड़ा थाना अंतर्गत भंडारपुर निवासी मंगल सनोडिय़ा ने लखनवाड़ा थाने में बताया की उसके पास ट्रेक्टर क्रमांक एम पी 22 ए बी 8775 है जिसकी ट्राली में उन्होंने बेचने के लिए मक्का भरा था। रात के समय उन्होंने मक्का से भरा ट्रेक्टर लल्लू सनोडिय़ा के खेत में खड़ा कर दिया था जिसे वह सुबह चौरई मंडी ले जाकर बेचने वाले थे। पीडि़त किसान ने बताया की सुबह लगभग 05 बजे जब वह ट्रेक्टर के पास पहुंचे तो उनके होश उड़ गए क्योंकि वहां ट्रेक्टर नहीं था। पीडि़त किसान ने ट्रेक्टर की जानकारी जुटाया लेकिन कहीं पता नही चला। किसान के साथ घटी घटना को संज्ञान में लेते हुए लखनवाड़ा थाने का प्रभार संभाल रहे उप निरीक्षक प्रमोद भारद्वाज ने इसे गंभीरता से लेते हुए एफ आई दर्ज किया। मक्का से भरे ट्रेक्टर चोरी के मामले में एस पी राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवम एस डी ओ पी के मार्गदर्शन में उप निरीक्षक प्रमोद भारद्वाज के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया जिसमें सहायक उप निरीक्षक योगेंद्र ठाकुर, नानक राम, प्रधान आरक्षक राजेश मात्रे ,संतोष उईके,ललित शर्मा ,योगेंद्र चौहान की टीम बनाई गई जिन्होंने ट्रेक्टर ढूंढना शुरू किया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली की एक व्यक्ति उक्त ट्रेक्टर से जा रहा है। तब पुलिस की टीम चावड़ी रोड भंडारपुर के पास पहुंची जहां से पुलिस ने ट्रेक्टर ले जा रहे लल्लू उर्फ सुनील सनोडिय़ा पिता परसराम सनोडिय़ा को पकड़ा। बताया जाता है की आरोपी ने मक्का भी बेच दिया था तब पुलिस ने उसके पास से मक्का की राशि 68300 रुपिया जप्त करते हुए उसे न्यायालय भेज दिया जहां से न्यायालय ने आरोपी को जेल भेज दिया। उल्लेखनीय की लखनवाड़ा थाना प्रभारी श्री सिरामे अवकाश में है जिन्होंने थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक प्रमोद भारद्वाज को प्रभार दिया हुआ है । बता दें प्रमोद भारद्वाज ने सिवनी कोतवाली में काम करते हुए भी कई बड़े खुलासे किए उन्हे राष्ट्रीय पर्व में भी कई बार सम्मानित किया जा चुका है जिन्होंने अपनी टीम के साथ सिर्फ 24 घंटे में मक्का से भरा ट्रेक्टर जप्त करने में सफलता पाया।

राजा बघेल के समर्थको को हंगामा करना पड़ा महंगाशिव सनोड़ीया, रंजीत यादव सहित आधा दर्जन नेताओं के ऊपर गिरी निष्कासन की गाज-----

 पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 11 दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री राजा बघेल को प्रदेश कांग्रेस ने 06 वर्षो के लिए निष्कासित कर दिया था। राजा बघेल के निष्कासन के बाद 12 दिसंबर को राजा बघेल के कुछ समर्थको के द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म में इस्तीफा दिया था। आज राजा बघेल के कई समर्थक जिला कांग्रेस कार्यालय पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के द्वारा राजा बघेल के निष्कासन को लेकर जमकर नारे बाजी करते हुए पुतला दहन किया। बताया जाता है की जिला कांग्रेस कार्यालय में कुछ लोगो ने इस्तीफा भी दिया। आज  जिला कांग्रेस कमेटी सिवनी की अनुशासन समिति द्वारा अनुशासनहीनता के आरोप में जिला कांग्रेस के महामंत्री शिव सनोडिया,रंजीत यादव , रत्नेश चौकसे ,युवा कांग्रेस के आदित्य भूरा और करम सिंह बघेल ,नीलम सिंह बघेल ओम उपाध्याय को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निस्काषित कर दिया गया है । बताया जाता है इस्तीफा देने वाले में से बहुत से कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय जाकर  निवेदन किया की उन्हें गुमराह करके उनके नाम इस्तीफे की सूची में जोड़े गए है जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने निर्णय लिया है की  शेष इस्तीफे पर जिला कांग्रेस अनुशासन समिति छानबीन कर निर्णय करेगी। कांग्रेस कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार  इस्तीफे देने वाली  सूची में अनेक ऐसे नाम है जिनकी सदस्यता कांग्रेस पार्टी में है ही नही। जिन नेताओं को 06 वर्षी के लिए निष्कासित किया गया उनमें प्रवेश बाबू भलोटिया सहित कुछ अन्य नेताओं के नाम नही थे जिसके बाद सवाल यह उठ रहा है की क्या प्रवेश बाबू भलोटिया ने इस्तीफा नहीं दिया।

घंसौर में भी विवादित रहे हैं सहायक यंत्री राहुल रोकड़े

केवलारी विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसे विवादित और चर्चित अधिकारी रहे हैं जो अपने आपको मौजूदा विधायक राकेश पाल सिंह का करीबी बताते थे जिनके आचरण के कारण कई लोग अधिकारियों से नाराज थे और यही नाराजगी वोट के माध्यम से निकल गई जिसके चलते केवलारी विधानसभा क्षेत्र से राकेश पाल सिंह लगभग 33000 से अधिक वोटो से हार गए। केवलारी विधानसभा में जो अधिकारी अपने आपको राकेश पाल सिंह का करीबी बताते थे उनमें छपारा जनपद में पदस्थ सहायक यंत्री राहुल रोकड़े और केवलारी जनपद में पदस्थ श्याम सुंदर परिहार रहे है। बताया जाता है की उक्त दोनों ही अधिकारी लंबे समय से सिवनी जिले में पदस्थ है और अपनी पदस्थापना के दौरान उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए  है जिसकी जांच हो जाये तो दोनो की परेशानी बढ़ जाएगी।
घंसौर में भी चर्चित रहे राहुल रोकड़े
छपारा जनपद में पदस्थ राहुल रोकड़े जब घंसौर जनपद में पदस्थ थे तब भी उनके विवाद सुर्खियों में रहते थे। सूत्र बताते है की जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ पार्थ जैसवाल का उन्होंने विश्वास जीता था जिसके चलते उपयंत्री होने के बावजूद वह सहायक यंत्री घंसौर बन गए थे। सूत्र बताते है की घंसौर जनपद में पदस्थ उपयंत्री राहुल रोकड़े के पास क्लस्टर 44 के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का प्रभार था। 27 अगस्त 2021 को राहुल रोकड़े को सहायक यंत्री घंसौर का प्रभार दिया गया था तब से ही उन्होंने घंसौर जनपद के अंतर्गत आने वाली पंचायतो में लापरवाही बरतना शुरू कर दिया था जिसके जमकर चर्चे हुए थे।
योगेंद्र बाबा भी नही देते थे ध्यान
राहुल रोकड़े अपने आपको सबसे सुरक्षित घंसौर जनपद में ही मानते थे। घंसौर में राहुल रोकड़े अपने आप को सबसे सुरक्षित इसलिए मानते थे क्योंकि लखनादौन के विधायक योगेंद्र बाबा कभी भी राहुल रोकड़े जैसे विवादित अधिकारियों के विरुद्ध ना तो कोई आवाज उठाते थे और ना ही विधानसभा में कोई प्रश्न लगाते थे। सूत्र बताते हैं कि जब तक राहुल रोकड़े घंसौर जनपद में पदस्थ रहे तब तक उन्होंने कांग्रेस के कई नेताओं से अपने मधुर संबंध बनाकर रखा था। चर्चा तो यह भी है कि राहुल रोकड़े के रहते कुछ कांग्रेस के नेताओं ने मटेरियल सप्लाई और ठेकेदारी प्रारंभ कर दिया था जिन्हें राहुल रोकड़े का आर्शीवाद मिला हुआ था और उनके कई ऐसे बिल भी पास कर दिये जाते थे जो विवादित हुआ करते थे।
छपारा में पदस्थापना के बाद विधायक का बताने लगे थे करीबी
प्रभारी सहायक यंत्री राहुल रोकड़े जहां-जहां भी पदस्थ रहे वहां उन्होंने कुछ राजनीतिक लोगों से मधुर संबंध बना लिए थे। जब वह छपारा  जनपद में पदस्थ हुए तो राहुल रोकड़े अपने आप को केवलारी के विधायक राकेश पाल सिंह का करीबी भी बताते थे और यह दम तक भरते थे कि जब जबलपुर में कोर गुप की बैठक आयोजित की गई थी जिसमें राहुल रोकड़े के स्थानांतरण की चर्चा हुई तब केवलारी के विधायक राकेश पाल सिंह ने उनका स्थानांतरण रुकवाया था हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है यह तो राहुल रोकड़े जाने या विधायक राकेश पाल सिंह। चूंकि अब राकेश पाल सिंह हार गए है ऐसे में राहुल रोकड़े जैसे विवादित अधिकारी अपने नए आका की तलाश अवश्य करेंगे ताकि उनके ऊपर कृपादृष्टि बनी रहे और उनके कारनामे उजागर ना हो सके।

मुख्यमंत्री के लिए चौकाने वाला निर्णय ले सकते हैं नरेंद्र मोदी

आदिवासियों का विश्वास जीतने फग्गनसिंह कुलस्ते या सुमेरसिंह सोलंकी के नाम पर भी किया जा सकता है विचार

सिवनी महाकौशल 06 दिसं. 2023

भारतीय जनता पार्टी को राजस्थान,छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में बम्फर जीत मिली खास बात यह रही की तीनो ही प्रदेश में किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाया गया था। तीनो ही प्रदेश में भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ी और तीनो ही जगह स्पष्ट बहुमत हासिल किया। अब तीनो प्रदेशों में मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। चूंकि मध्यप्रदेश में भाजपा ने 163 सीट जीता है। अधिकांश भाजपाइयों का कहना है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के द्वारा चलाई गई लाडली बहना का असर है कि इतनी बड़ी जीत मिली जबकि मुख्यमंत्री के दावेदारों के समर्थक दबी जुबान से इसे मैजिक नही मानते बल्कि उनका कहना है की यह सिर्फ मोदी का जादू था जो तीन प्रदेशों में काम कर गया क्योंकि यदि यह लाडली बहनों का जादू होता तो फिर दो अन्य प्रदेशों में स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार नही बनती। जितने नेता मुख्यमंत्री के दावेदार है उनके समर्थकों के उतने ही दावे है। फिलहाल सबकी निगाह मध्यप्रदेश का अगला मुखिया कौन होगा इस पर टिकी है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा के बीच तीनो प्रदेशों के मुख्यमंत्री के नाम पर लगभग चार घंटे मंथन चलते रहा। जो लोग नरेंद्र मोदी और अमित शाह की राजनीति को समझते है उनकी माने तो यदि मुख्यमंत्री के चेहरे के लिए चार घंटे मंथन हुआ है इसका मतलब यह है की तीनो राज्यो में वह कोई अप्रत्याशित निर्णय लेने के मूंड में है जिसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता।

तीनो राज्यो में जाएंगे पर्यवेक्षक

बताया जाता है की मंगलवार को तीनो नेताओ ने चार घंटे मंथन किया जिसके बाद निर्णय लिया गया कि तीनो राज्यो में पर्यवेक्षक भेजा जाएगा जो विधायको से मिलकर सीएम के लिए पैनल बनाकर देंगे। कयास लगाए जा रहे है की आज शाम तक पर्यवेक्षक की नियुक्ति हो सकती है। फिलहाल मुख्यमंत्री के दावेदारो में शिवराज सिंह चौहान के अलावा प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं वीडी शर्मा का नाम सामने है।

प्रहलाद पटेल, नरेंद्र तोमर सहित 10 सांसदो ने दिया स्तीफा

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कई सांसदो को मौका दिया था। बताया जाता है कि जीतने वाले लगभग 10 सांसदो ने स्तीफा दे दिया जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अब वह प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहेंगे। जिन संासदो ने संसदीय सदस्यता से स्तीफा दिया उनमें  नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंंह पटेल, राकेश सिंह, राज्यवर्धन सिंह राठौर, गोमती साय, दीया कुमारी, रीति पाठक, अरूण साव, किरोड़ीमल मीणा, उदयप्रताप सिंह शामिल है जबकि फग्गनसिंह कुलस्ते एवं गणेश सिंह चुनाव हार गये इसलिए उन्होंने स्तीफा नहीं दिया। सांसदो के स्तीफे से यह तो स्पष्ट हो ही गया कि वह मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहेंगे चंूकि वर्तमान में प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री को लेकर मंथन चल रहा है जिसमें शिवराज सिंह चौहान सहित प्रहलाद पटेल, नरेंद्र तोमर, कैलाश विजयवर्गीय,वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम की चर्चा है। इसके अलावा और भी कुछ चौकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।

2018 के चुनाव में अधिकांश एक्जिट पोल पर नहीं लगी थी मुहर,इस चुनाव में भी बताया जा रहा कांटे की टक्कर

सिवनी महाकौशल ---- मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का परिणाम 03 दिसंबर को आएगा। इस बार हुए चुनाव  में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस बार 77.15 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। जबकि 2018 के  विधानसभा चुनाव में 75.63 प्रतिशत मतदान हुआ था।  आज शाम से ही लोग टी व्ही चैनल के सामने बैठकर एग्जिट पोल देखते रहे। मजे की बात तो यह है की कुछ एग्जिट पोल कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दिए तो कुछ भाजपा के पक्ष में। सभी पोल को  देखे तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। हालांकि ऐसा नहीं है की हमेशा एक्जिट पोल सही साबित होते रहे है। 2018 में अधिकांश एक्जिट पोल गलत साबित हुए थे जिनका जिक्र आगे आंकड़ों के साथ किया जा रहा है।                                           2023 का एग्जिट पोल----- आज विभिन्न चैनलों में एग्जिट पोल दिखाई दे रहे है उनमें *India TV-CNX* के एग्जिट पोल में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है। भाजपा को मध्य प्रदेश में 230 में से 140-149 सीटें मिल सकती हैं।

पार्टी सीटें
भाजपा 140-149
कांग्रेस 70-89
अन्य 0-2

*India Today-Axis My India* के एग्जिट पोल में भाजपा को एकतरफा बढ़त
India Today-Axis My India के एग्जिट पोल में मध्य प्रदेश में शिवराज का जादू चलता हुआ दिखाई दे रहा है। भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने की संभावना जताई जा रही है । भाजपा को 140-162 सीटें, कांग्रेस को 68-90 सीटें, जबकि अन्य को 0-3 सीटें मिलने का अनुमान है।                                               *TIMES NOW-ETG* के एग्जिट पोल में भाजपा-कांग्रेस के बीच फंसा मुकाबला
TIMES NOW-ETG के एग्जिट पोल में दोनों पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है।

पार्टी सीटें
भाजपा 105-117
कांग्रेस 109-125
अन्य 1-5।                                  *News24-Chanakya* के एग्जिट पोल में मध्य प्रदेश में शिवराज का राज एक बार फिर से स्थापित होता हुआ दिखाई दे रहा है। भाजपा 150 का आंकड़ा पार कर सकती है। एग्जिट पोल में भाजपा को 151 सीटें, कांग्रेस को 74 और अन्य को पांच सीटें मिलने की संभावना है।

पार्टी सीटें
भाजपा 151
कांग्रेस 74
अन्य 5।                                        *
*Matrize* के एग्जिट पोल में भाजपा की सरकार बनने के आसार दिखाई दे रहे हैं।

पार्टी सीटें
भाजपा 118-130
कांग्रेस 97-107
अन्य 0-2।                                       *Jan Ki Baat* एग्जिट पोल में भी कांटे की टक्कर बताई जा रही है

पार्टी सीटें
भाजपा 100-123
कांग्रेस 102-125
अन्य 5।                                          *TV9 भारतवर्ष और पोलस्टार्ट के* एग्जिट पोल में  भी मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होते हुए दिखाई दे रही है।  एग्जिट पोल में भाजपा को 106-116, कांग्रेस को 111-121 और 0-6 सीटें अन्य के खाते में जा सकती हैं।                                     *Republic TV- Matrize* के एग्जिट पोल में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा को 118-130, कांग्रेस को 97-107, जबकि 0-2 सीटें अन्य को मिल सकती है।                दैनिक भास्कर के सर्वे में भी कांटे की टक्कर-----              देश का एक विश्वसनीय समाचार पत्र दैनिक भास्कर ने भी एग्जिटपोल दिया है। दैनिक भास्कर ने मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को  105 से 120 सीट मिलने का अनुमान लगाया है जबकि भाजपा को  95 से 115 सीट मिलने का अनुमान लगाया है यानी की अधिकांश एक्जिट पोल में दोनो पार्टी के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है।                            *2018 के चुनाव में कई सर्वे हुए थे गलत साबित।*                                 2018 के विधानसभा चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर 2018 को आए थे। नतीजों से पहले
प्रदेश के एग्जिट पोल में अधिकतर एजेंसियों ने भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान जताया था। जिसमे  एबीपी-सीएसडीएस ने कांग्रेस को बहुमत दिया था। उक्त एजेंसी ने भाजपा को 94 और कांग्रेस को 126 सीटें दी थीं। वहीं, टाइम्स नाउ-सीएनएक्स के मुताबिक, भाजपा को 126, कांग्रेस 89 और अन्य को 15 सीटें मिलनी थीं। न्यूज नेशन के अनुसार, भाजपा को 108-112 सीटें, कांग्रेस को 105-109 सीटें और अन्य को 11-15 सीटें मिलनी थीं। न्यूज 24-पेस मीडिया के मुताबिक भाजपा 103 सीटें, कांग्रेस 115 सीटें, अन्य को 10 सीटें मिलनी थीं।

एबीपी-सीएसडीएस
भाजपा 94 सीटें
कांग्रेस 126 सीटें
अन्य 10 सीटें( गलत साबित हुआ था)

टाइम्स नाउ-सीएनएक्स
भाजपा 126 सीटें
कांग्रेस 89 सीटें
अन्य 15 सीटें( गलत साबित हुआ था)

न्यूज नेशन
भाजपा 108-112 सीटें,
कांग्रेस 105-109 सीटें
अन्य 11-15 सीटें ( गलत साबित हुआ था)

न्यूज 24-पेस मीडिया
भाजपा 103 सीटें
कांग्रेस 115 सीटें
अन्य को 10 सीटें ( कुछ हद तक सही साबित हुआ था)

जब 11 दिसंबर 2018 को नतीजे  आए तो अधिकांश एक्जिट पोल धरे की धरे रह गए थे। 2018 के परिणाम में भाजपा को  109 सीटें ही मिली थी । दूसरी ओर विपक्ष में रही कांग्रेस ने 114 सीटों पर कब्जा जमाया। इसके अलावा सात सीटों पर अन्य और निर्दलीय प्रत्याशी जीते, जिनके साथ कांग्रेस ने बाद में गठबंधन कर सरकार बनाई थी लेकिन लगभग 15 महीने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। वर्तमान में भी अलग अलग एजेंसी अलग अलग आंकड़े दिखा रही है इन एक्जिट आंकड़ों की क्या विश्वसनीयता है इसका पता तो 3 दिसंबर को ही चलेगा।

... तो एक दिसंबर से नगर के लोगो को नही मिलेगा पीने का पानी

सिवनी महाकौशल 28  नवं. 2023
नल-जल योजना के तहत लक्ष्मी सिविल इंजीनियर के द्वारा निर्माण कार्य कराया गया था एवं कंपनी के द्वारा ही योजना का संचालन किया जा रहा था। गत दिवस लक्ष्मी सिविल इंजीनियर ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखते हुए चेतावनी दिया कि यदि 30 नवंबर तक उनको बकाया भुगतान नहीं होता तो फिर 01 दिसंबर से वह सिवनी नगर पालिका क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं कर पाएंगे यानी कि नगर पालिका परिषद ने कंपनी को भुगतान नहीं किया तो 01 दिसंबर से सिवनी नगर के लोग पानी के लिए तरसते रहेंगे। बताया जाता है कि गत दिवस लक्ष्मी सिविल इंजीनियर ने नगर पालिका परिषद के सीएमओ को पत्र लिखते हुए उन्हें अवगत कराया कि 2019 से कंपनी के द्वारा उक्त योजना के तहत पानी सप्लाई का काम कराया जा रहा है।  जलावर्धन योजना के तहत भीमगढ़ से बबरिया फिल्टर प्लांट तक  एवं प्लांट से बबरिया तक टंकियों के माध्यम से कंपनी के कर्मचारियों के द्वारा पानी सप्लाई कराई जाती है साथ ही एलम ब्लीचिंग की व्यवस्था भी कंपनी के द्वारा की जाती है। 01 अप्रैल 2022 से लेकर 31 मार्च 2023 तक नगर पालिका परिषद ने कंपनी का एक करोड़ 66 लाख 52000 रू. बिल का भुगतान नहीं किया जिसके कारण कंपनी के सामने आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गई है। कंपनी के पास एलम ब्लीचिंग तक खरीदने के लिए पैसा नहीं है। यदि 30 सितंबर तक नगर पालिका परिषद भुगतान नहीं करती है तो फिर 01 दिसंबर से कंपनी हाथ खींच लेगी जिसके कारण नगर के लोगो को पीने का पानी नहीं मिल पाएगा।
उल्लेखनीय है कि नल जलावर्धन योजना के तहत जब काम प्रारंभ किया गया था तब उक्त कंपनी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती आरती अशोक शुक्ला के ऊपर भी यह आरोप लगते थे कि वह निर्माणाधीन कंपनी के ऊपर मेहरबान है। सिवनी नगर पालिका परिषद में जब कांग्रेस की नगर सरकार आई तब कांग्रेस ने उक्त कंपनी के द्वारा कराये गये काम की जांच कराने की बात कहा था बावजूद इसके नगर पालिका परिषद ने कंपनी को भारी भरकम भुगतान कर दिया था जिसकी शिकायत भारतीय जनता पार्टी के पार्षदो द्वारा जिला कलेक्टर से की गई थी। इस मामले की जांच नहीं हो पाई, इस मामले में एक बार फिर बिल का भुगतान नहीं होने से पानी की सप्लाई बंद करने का अल्टीमेटम दे दिया जिसके बाद देखना यह है कि नगर पालिका परिषद कंपनी को भुगतान करती है या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करती है। 

20 सालो में सिवनी विधानसभा में गोंडवाना का गिरते रहा वोट प्रतिशत

सिवनी महाकौशल 26 नवं. 2023
मध्य प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के दो विधायक चुने गए थे लेकिन 2003 के बाद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की पहचान एक राजनीतिक पार्टी के रूप में कम और वोट काटने वाली पार्टी के रूप में अधिक हो गई है। 2003 के बाद से सिवनी जिले की विधानसभा के आंकड़ों को देखा जाए तो अधिकांश जगह गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का इस्तेमाल वोट काटने के लिए ही किया गया। 2003 से लेकर 2018 तक सिवनी विधानसभा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का ग्राफ धीरे-धीरे कम होते गया। 2003 के विधानसभा चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अनिल भलावी को टिकट दिया था तब अनिल भलावी को 10.26 प्रतिशत यानी की 11865 वोट मिले थे उस समय गोंडवाना सहित 09 निर्दलियों को 24354 वोट मिले थे तब राजकुमार खुराना 15354 वोटो से चुनाव हारे थे। 2008 के चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने इस्माइल खान को टिकिट दिया था जिन्हे 10.69 प्रतिशत वोट यानी कि 13649 वोट मिले थे तब कुछ मुस्लिम और आदिवासियों ने उन्हें वोट दिया था। 2008 के चुनाव में भी निर्दलीय प्रत्याशियों ने जमकर वोट लिया था।
2013 में मिले थे सिर्फ 4.48 प्रतिशत वोट
10 साल के भीतर सिवनी विधानसभा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी कमजोर हो गई। 10 साल पहले 2003 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को 10.26 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि 2013 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को सिर्फ 4. 8 प्रतिशत वोट ही मिले थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने रामू तुमराम को टिकिट दिया था तब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को 7909 वोट मिले थे।
2018 में मिले थे 3.02 प्रतिशत वोट
2018 आते तक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सिवनी विधानसभा में और भी दयनीय स्थिति हो गई थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में गोंडवाना ने गया प्रसाद कुमरे को टिकट दिया था जो वर्तमान में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष हैं। 2018 के चुनाव में गया प्रसाद कुमरे  को सिर्फ 3.02 प्रतिशत यानी की 6066 वोट ही मिले थे। 2008 के बाद गोंडवाना का वोट बैंक धीरे धीरे कांग्रेस की तरफ शिफ्ट होते गया यही कारण है कि 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 77568 वोट मिले थे जो पिछले सभी चुनाव की तुलना में कांग्रेस को मिले वोटो से कही अधिक वोट है।
रंजीत वासनिक के ऊपर गोंडवाना ने जताया भरोसा
2023 के चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व कई मामलों में सुर्खियां बटोरते रहा। असल में 2023 के चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने बालाघाट जिले के परसवाड़ा विधानसभा से तीन लोगों की टिकट बदला जिसके कारण उनके विश्वसनीयता को लेकर प्रश्नचिन्ह लगने लगे थे इस बीच सिवनी विधानसभा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने बरघाट नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष रंजीत वासनिक को टिकट दिया वहीं केवलारी विधानसभा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने मेहरू मर्सकोले को टिकट दिया था जबकि प्रीतम उईके अपने आपको सबसे मजबूत दावेदार बताते थे और उन्होंने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की टिकट फाइनल होने का डिंडौरा भी पीट दिया था बाद में उन्हें जब टिकट नहीं मिली तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ लिया। इन घटनाक्रमों ने जिले की गोंडवाना के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। सिवनी में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने रंजीत वासनिक को टिकट इसलिए दिया ताकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अपना पुराना वोट बैंक हासिल कर सके। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का सीधा सा गणित था कि रंजीत वासनिक को टिकट देने से आदिवासियों के अलावा एससी और मुस्लिम वोट भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की तरफ झुकेंगे हालांकि सिवनी शहर में जहां मुस्लिम बाहुल्य एवं कई एससी क्षेत्र है वहां गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का बहुत कुछ असर देखने को नहीं मिला। सिवनी विधानसभा से गोंडवाना प्रत्याशी रंजित वासनिक को मिलने वाले वोट भी जीत हार तय करेंगे। देखना यह है कि रंजीत वासनिक ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का वोट बैंक बढ़ाया है या नहीं।

महुआ लाहन पकडक़र वाहवाही लूट रहा आबकारी महकमा

इन दिनों आबकारी विभाग शासकीय विज्ञप्ति जारी करते हुए यह बताने का प्रयास कर रहा है कि 30 अक्टूबर से लेकर 19 नवंबर तक वृत्त उत्तर में 30 प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए 160.74 ब.ली.मदिरा एवं 4500 कि.ग्रा महुआ लाहन अनुमानित मूल्य 505802/-रू. को जप्त कर नष्ट करने की कार्यवाही की गई। इसी तरह दक्षिण में 29 प्रकरण पंजीबध्द करते हुए 425.23 ब.ली. मदिरा एवं 11900 कि.ग्रा महुआ लाहन अनुमानित मूल्य 1303208/-रू., वृत्त शहर में 33 प्रकरण 314.66 ब.ली. मदिरा एवं 1410 कि.ग्रा महुआ लाहन अनुमानित मूल्य 224450/-रू., वृत्त लखनादौन में 22 प्रकरण पंजीबध्द करते हुए 143.78 ब.ली. मदिरा एवं 1640 कि.ग्रा महुआ लाहन अनुमानित मूल्य 208522/-रू. तथा वृत्त घंसौर में 20 प्रकरण पंजीबधद करते हुए 128.93 ब.ली. मदिरा एवं 1110 कि.ग्रा महुआ लाहन अनुमानित मूल्य 147384/-रू. जप्त कर नष्ट करने की कार्यवाही की गई। लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारी शैलेष जैन यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि चुनाव के दौरान सिवनी जिले की विभिन्न विधानसभा क्षेत्र में बांटी गई अवैध शराब को रोकने में उन्होंने कोई कार्यवाही क्यों नहीं किया। मतदान से पहले सिवनी विधानसभा क्षेत्र में अवैध शराब परिवहन और अवैध शराब वितरण के मामले सामने आये तब पुलिस ने कार्यवाही किया लेकिन आबकारी महकमा पूरी तरह से निष्क्रिय रहा। आश्चर्य इस बात का है कि 15 नवंबर की शाम से 48 घंटे के लिए लगभग सभी शराब दुकानो को सील कर दिया गया था और 48 घंटे के लिए जिले में शुष्क दिवस घोषित किया गया था बावजूद इसके कई दुकानों से अवैध रूप से वाहनों में शराब भरकर परिवहन किया गया। कई अवैध शराब परिवहन के वीडियो भी वायरल हुए लेकिन आबकारी अधिकारी शैलेष जैन और उनकी पूरी टीम कुंभकर्णीय नींद में सोते रही। चुनाव खत्म होने के बाद आबकारी विभाग के द्वारा शासकीय विज्ञप्ति जारी करते हुए यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि उनका विभाग अवैध शराब पकडऩे के मामले में कितना सक्रिय है लेकिन आबकारी विभाग की कार्यवाही सिर्फ महुआ लाहन पकडऩे तक ही सीमित है। आबकारी विभाग के द्वारा गांव गांव में सप्लाई हो रही अवैध शराब के मामले में सक्रियता नहीं दिखाई जाती जो आश्चर्य का विषय है। 

मतदान से पहले कोतवाली पुलिस ने पकड़ा 153 पेटी अवैध शराब---

इन दिनों सिवनी विधानसभा के चुनाव में सबकी नजर टिकी हुई है। मतदान के कुछ घंटे शेष बचे है इस बीच  सिवनी विधानसभा क्षेत्र में शराब की धरपकड़ प्रारंभ हो गई । बताया जाता है कि आज कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी के नेतृत्व में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली जब मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस ने तिलक वार्ड के एक खंडहर मकान में दबिश दिया तो पुलिस की आंखें फटी की फटी रह गई ।बताया जाता है कि जिस जगह पुलिस ने दबिश दिया वहां लगभग 153 पेटी अंग्रेजी शराब रखी हुई थी जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 05 लाख बताई जा रही है। इस संबंध में कोतवाली पुलिस ने विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रेल्वे स्टेशन रोड़ तिलक वार्ड में एक खंडहर नुमा मकान में शराब का जखीरा रखा हुआ है। तब जिला पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुरुद्त्त शर्मा व एस डी ओ पी पुरुषोत्तम मरावी के मार्गदर्शन में कोतवाली टी आई सतीश तिवारी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया जिसमे उप निरीक्षक राहुल काकोडिया,संपत्ति मरावी सहायक उप निरीक्षक संतोष बेन, आरक्षक अमित रघुवंशी,नितेश राजपूत,इरफान खान, अजय धुर्वे,विशाल भागरे, गौरीशंकर राणा,विशाल कपाले, शिवम बघेल, अरविंद मंडराह, महिला आरक्षक फरहीन, रीना धुर्वे ने दबिश दिया। पुलिस की इस कार्रवाई में 153 लीटर अंग्रेजी शराब जप्त की गई इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी अरविंद साहू पिता तिजबा साहू को गिरफ्तार किया। पुलिस से पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मतदान के एक दिन पहले इतनी बड़ी मात्रा में किसने शराब रखा था पुलिस को मिली इस सफलता के लिए एसपी राकेश कुमार सिंह ने कोतवाली पुलिस को बधाई देते हुए पूरी टीम को पुरुष्कृत करने की घोषणा किया। उल्लेखनीय कि जब चुनाव शुरू हुआ था तब से ही सिवनी में शराब व्यवसाय को लेकर जमकर बातचीत हुआ करती थी बीते दो दिनों के भीतर सिवनी मुख्यालय सहित आसपास क्षेत्र में बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी गई जो यह बताने के लिए काफी है कि सिवनी में विकास के नाम पर चुनाव नहीं हो रहे बल्कि कुछ लोगो ने मतदाताओं को शराब और पैसे में खरीदने का काम शुरू कर दिया है जो  दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए घातक हो सकता है।

मतदान से पहले कोतवाली पुलिस ने पकड़ा 153 लीटर अवैध

इन दिनों सिवनी विधानसभा के चुनाव में सबकी नजर टिकी हुई है। मतदान के कुछ घंटे शेष बचे है इस बीच  सिवनी विधानसभा क्षेत्र में शराब की धरपकड़ प्रारंभ हो गई । बताया जाता है कि आज कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी के नेतृत्व में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली जब मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस ने तिलक वार्ड के एक खंडहर मकान में दबिश दिया तो पुलिस की आंखें फटी की फटी रह गई ।बताया जाता है कि जिस जगह पुलिस ने दबिश दिया वहां लगभग 153 पेटी अंग्रेजी शराब रखी हुई थी जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 05 लाख बताई जा रही है। इस संबंध में कोतवाली पुलिस ने विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रेल्वे स्टेशन रोड़ तिलक वार्ड में एक खंडहर नुमा मकान में शराब का जखीरा रखा हुआ है। तब जिला पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुरुद्त्त शर्मा व एस डी ओ पी पुरुषोत्तम मरावी के मार्गदर्शन में कोतवाली टी आई सतीश तिवारी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया जिसमे उप निरीक्षक राहुल काकोडिया,संपत्ति मरावी सहायक उप निरीक्षक संतोष बेन, आरक्षक अमित रघुवंशी,नितेश राजपूत,इरफान खान, अजय धुर्वे,विशाल भागरे, गौरीशंकर राणा,विशाल कपाले, शिवम बघेल, अरविंद मंडराह, महिला आरक्षक फरहीन, रीना धुर्वे ने दबिश दिया। पुलिस की इस कार्रवाई में 153 लीटर अंग्रेजी शराब जप्त की गई इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी अरविंद साहू पिता तिजबा साहू को गिरफ्तार किया। पुलिस से पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मतदान के एक दिन पहले इतनी बड़ी मात्रा में किसने शराब रखा था पुलिस को मिली इस सफलता के लिए एसपी राकेश कुमार सिंह ने कोतवाली पुलिस को बधाई देते हुए पूरी टीम को पुरुष्कृत करने की घोषणा किया। उल्लेखनीय कि जब चुनाव शुरू हुआ था तब से ही सिवनी में शराब व्यवसाय को लेकर जमकर बातचीत हुआ करती थी बीते दो दिनों के भीतर सिवनी मुख्यालय सहित आसपास क्षेत्र में बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी गई जो यह बताने के लिए काफी है कि सिवनी में विकास के नाम पर चुनाव नहीं हो रहे बल्कि कुछ लोगो ने मतदाताओं को शराब और पैसे में खरीदने का काम शुरू कर दिया है जो  दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए घातक हो सकता है।

निर्दलीय प्रत्याशी तीरथ चंदेल ने आनंद पंजवानी को दिया समर्थन,करेंगे कांग्रेस ज्वाइन-

सिवनी विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप  नामांकन फार्म भर ने वाले तीरथ चंदेल ने आज कांग्रेस प्रत्याशी आनंद पंजवानी को समर्थन देते हुए मतदाताओं से अपील किया है की वह कांग्रेस के युवा प्रत्याशी आनंद पंजवानी के पंजा चुनाव चिन्ह में वोट करते हुए उन्हें भारी मतों से जिताए। तीरथ  चंदेल ने कहा कि वह अपने साथियों के साथ कांग्रेस की सदस्यता लेते हुए आनंद पंजवानी को जिताने की कोशिश करेंगे। श्री चंदेल ने कहा कि उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गुब्बारा चुनाव चिन्ह मिला था ।उन्होंने आनंद पंजवानी का समर्थन करने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय की तीरथ चंदेल कुर्मी समाज का एक बड़ा चेहरा है और राष्ट्रवादी कांग्रेस से भी जुड़े रहे हैं।

मुनमुन राय की रैली में शामिल होने वाले लखनादौन के मकबूल शाह ने फिर भरा नामांकन

सिवनी विधानसभा से एक बार फिर वोट कटवाने के लिए कुछ निर्दलीय लोगों को मैदान में उतर गया है जिनमें लखनादौन निवासी मकबूल शाह भी शामिल है जो पिछला चुनाव भी लड़ चुके है और जिनकी जमानत तक जप्त हो गई थी। बताया जाता है की भगत सिंह वार्ड क्रमांक 12 लखनादौन निवासी मकबूल शाह ने 30 अक्टूबर को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया।
2018 के विधानसभा में भी निर्दलीय लड़ा था चुनाव
लखनादौन निवासी मकबूल शाह ने 2018 का विधानसभा चुनाव भी निर्दलीय लड़ा था तब उनकी जमानत जप्त हो गई थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में मकबूल शाह को 2536 वोट मिले थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में सिवनी विधानसभा से 05 मुस्लिम प्रत्याशी थे जिन्हें सिर्फ 7229 वोट ही मिले थे। वर्तमान में 04 मुस्लिम प्रत्याशियों ने नामांकन जमा किया है जिनमे लखनादौन के मकबूल शाह, ध्यानचंद वार्ड की शबाना खान, कंडीपार के शादाब पटेल एवं भगत सिंह वार्ड के मुनव्वर रजा शामिल है।
अपने आपको मुनमुन का करीबी बताते है मकबूल शाह
सिवनी विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले मकबूल शाह अपने आप को दिनेश राय मुनमुन का करीबी बताते हैं। 27 अक्टूबर को जब दिनेश राय मुनमुन की नामांकन रैली थी तब मकबूल शाह लखनादौन से रैली में शामिल होने के लिए सिवनी पहुंचे थे और मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा था कि वह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता होने के नाते सिवनी पहुंचे हैं उन्होंने यह भी कहा था कि इस सिवनी विधानसभा से दिनेश राय मुनमुन जीतेंगे 27 अक्टूबर तक दिनेश राय मुनमुन की रैली में पहुंचे मकबूल शाह ने 30 अक्टूबर को निर्दलीय पर्चा भरा जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है कि कहीं मकबूल शाह को चुनावी मैदान में खड़ा करने के लिए दिनेश राय मुनमुन और उनके समर्थकों ने मुस्लिम वोट काटने की रणनीति के तहत एक बार फिर लखनादौन से सिवनी बुलाकर चुनाव मैदान में तो नहीं उतारा? वैसे हम याद दिला दें कि दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने भाजपा से जुड़े अल्पसंख्यक नेता निर्दलीय चुनाव लडऩे की तैयारी शीर्षक से समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि सिवनी विधानसभा से कुछ ऐसे मुस्लिम चेहरों को मैदान में उतारा जा सकता है जो भाजपा से जुड़े है और कुछ हद तक मुस्लिम वोट काट सकते है। सूत्र बताते है कि जिन 04 मुस्लिमो ने निर्दलीय फॉर्म भरा है उनमें दो लोगो के परिवार के सदस्य भाजपा से जुड़े हुए है।

आप मेरे लिए एक महीने चलो मैं आपके लिए 5 साल चलूगा: आनंद

आप मेरे लिए एक महीने चलिए मै आपके लिए 05 साल चलूंगा यह वादा एक बेटे का आप लोगो से है। आज जनसंपर्क के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी आनंद पंजवानी ने कहा की कांग्रेस सरकार हमेशा से हर वर्ग और हर व्यक्ति के विकास के लिए सोचती है और मौका मिलने पर काम भी करती है। 2018 के चुनाव में प्रदेश की जनता ने कमलनाथ जी को अपना आशीर्वाद देकर सेवा का मौका दिया था लेकिन सत्ता के लिए भाजपा ने कमल नाथ जी की ईमानदार सरकार को गिराने षड्यंत्र रचा और मात्र 18 महीने में ही कमलनाथ जी की सरकार को गिरा दिया जिसका बदला लेने का मौका भी आ गया है कमलनाथ जी की सरकार आप लोगों के विकास के लिए दृढ़ संकल्पित है । अपने पिछले 10 सालों से सिवनी विधानसभा में क्या विकास देखा है यह आप लोगों से छुपा नहीं है। कांग्रेस ने घोषणा पत्र के बजाए वचन पत्र जारी किया है।और वचन वही देता है जो अपने वादों  का पक्का हो । माननीय कमल नाथ जी वादों के पक्के है। यदि 2018 में कांग्रेस की सरकार पूरे 05 साल रहती तो प्रदेश में विकास के कई अध्याय लिखे जाते। आनंद पंजवानी ने कहा की अभी भाजपा ने प्रदेश में  अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं किया और माननीय कमल नाथ ने ना केवल प्रत्याशियों की घोषणा कर दिया बल्कि अपना वचन पत्र भी जारी कर दिया ।
आनंद ने कहा की लंबे समय से हमारे किसान भाई बिजली पानी की समस्या से जूझते रहे है जिनकी परेशानी को समझते हुए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में किसानों को सिंचाई एवं सडक़ का अधिकार दिया है। कांग्रेस का वचन है कि जहां 70 लाख हेक्टेयर आश्वासित सिंचाई के लक्ष्य हेतु नये बांध बनायेंगे एवं पुराने बांधो की जलग्रहण क्षमता बढ़ायेंगे। नहरों के पास तालाबो को भरकर पानी की व्यवस्था की जाएगी एवं नई नहरें बनाकर सिंचाई का रकबा बढ़ाया जायेगा। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में यह भी उल्लेख किया है कि सिंचाई जल उपभोक्ता समितियों को पुन: सक्रिय कर अधिक संपन्न बनाया जायेगा। मेरा तालाब मेरा खेत, मेरा कुआं-मेरा खेत, मुख्यमंत्री नाला सिंचाई योजना, प्राचीन तालाबो का जीर्णोद्धार एवं गहरीकरण किया जायेगा ताकि किसानों को पानी की समस्या से ना जूझना पड़े। बिजली के लिए भी कांग्रेस सरकार के द्वारा इंदिरा किसान ज्योति योजना प्रारंभ की जाएगी। सिंचाई प्रयोजन के लिए 5 हार्सपावर तक नि:शुल्क बिजली प्रदान की जाएगी तथा 10 हार्सपावर तक के सिंचाइ पंप के बिलो मे 50 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। कृषि के पुराने बिलों को माफ किया जायेगा एवं कृषि प्रयोजन के विद्युत संबंधी झूठे प्रकरण वापस लेंगे। कांग्रेस की सरकार किसानों की सरकार होगी इसलिए आप अपने बेटे को आर्शीवाद देकर कमलनाथ का हाथ मजबूत करें।
आज आनंद पंजवानी ने कांग्रेस के संगठन मंत्री पंकज शर्मा, जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवम जिला पंचायत के उपाध्यक्ष ब्रजेश उर्फ लल्लू बघेल,जनपद सदस्य अप्पू ठाकुर सहित सैकड़ों बुजुर्गो युवाओं के साथ चंदौरी, चंदौरीखुर्द, नकटिया, सागर, जटलापुर, पोतलपानी, औरिया, औरिया रैयत, पिपरिया, समनापुर, गुढ़ी, चारगांव, लामटा, बकौड़ी, बाम्हनवाड़ा, बखारी में जनसंपर्क किया।

सांसद प्रतिनिधि के पद से संजीव मिश्रा और दिलीप अग्रवाल ने दिया इस्तीफा--

विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के भीतर दिनेश राय मुनमुन को प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर मूल भाजपा के कार्यकर्ता है पदाधिकारी नाराज बताएं जा रहे हैं । दिनेश राय मुनमुन को टिकट मिलने के बाद सिवनी  के कई मूल भाजपा कार्यकर्ताओ और पदाधिकारीयो ने दिनेश राय  के जनसंपर्क के कार्यक्रम से भी पूरी तरह से दूरियां बना लिया है। चुनावी सरगर्मी के दौरान आज बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉक्टर ढाल सिंह बिसेन के प्रतिनिधि संजीव मिश्रा और दिलीप अग्रवाल  ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। संजू मिश्रा और दिलीप अग्रवाल का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब सिवनी विधानसभा क्षेत्र में दिनेश राय मुनमुन को टिकट दिए जाने के बाद मूल भाजपा के कई कार्यकर्ताओं और वरिष्ट भाजपा नेताओं ने दूरियां बनाया है। सांसद के दोनों प्रतिनिधियों के इस्तीफे की असली वजह क्या है यह तो वे ही जाने लेकिन राजनेतिक गलियारों में इसे मुनमुन राय को मिली टिकिट से जोड़कर देखा जा रहा है।       प्रहलाद पटेल के करीबी भी रहे है संजीव मिश्रा--- सांसद प्रतिनिधि के पद से इस्तीफा देने वाले संजीव मिश्रा केबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल के भी करीबी रहे है। चुनाव के दौरान संजीव मिश्रा और दिलीप बघेल के द्वारा सांसद प्रतिनिधि के पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद लोगो के भीतर चर्चा है की अभी तो यह ट्रेलर है पूरी पिक्चर  तो अभी बाकी है। गौरतलब है कि जब दिनेश राय मुनमुन  को सिवनी विधानसभा से टिकट मिली थी तब उनके स्वागत कार्यक्रम में मूल भाजपा के अधिकांश पदाधिकारी और कार्यकर्ता नदारत  थे जिनमें संजू मिश्रा और दिलीप अग्रवाल जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल थे जिन्होंने सांसद प्रतिनिधि के पद से इस्तीफा दे दिया है।

...तो दरी-फट्टी ही बिछाते रहेंगे मूल भाजपाई!

2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ते हुए भाजपा को पानी पी-पीकर कोसने वाले दिनेश राय मुनमुन ने अपने मित्र संजय पाठक के प्रयासो से तत्कालीन प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष राकेश सिंह के समक्ष 03 मई 2018 को भाजपा की सदस्यता लिया था और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में सारे मूल भाजपाइयों को दरकिनार कर वह टिकिट ले आए। उस समय भारतीय जनता पार्टी के कई मूल भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी नाराज भी हुए लेकिन इसे उन्होंने संगठन का आदेश मानकर दिनेश राय मुनमुन के पक्ष में काम करना शुरू कर दिया जिसके चलते 2018 के विधानसभा चुनाव में दिनेश राय मुनमुन ने लगभग 22000 वोटो से चुनाव जीत लिया था।  चुनाव जीतने के बाद दिनेश राय मुनमुन और भारतीय जनता पार्टी के मूल भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के बीच दूरियां बढऩे लगी जिसके कारण 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के स्थापित नेता एकजुट हो गए और दिनेश राय मुनमुन के बजाए किसी मूल भाजपाई को टिकिट दिलाए जाने का  प्रयास करने लगे लेकिन दूसरी बार भी 5 साल के भीतर दिनेश राय मुनमुन दूसरी बार टिकट लाने में सफल हो गए जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी के मूल भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के बीच यही चर्चा चल पड़ी है क्या भाजपा का मूल कार्यकर्ता सिर्फ दरी फट्टी बिछाने और उठाने तक ही सीमित रहेगा? यदि इसी तरह आयातित नेताओ को पार्टी टिकिट देगी तो फिर दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओ का वजूद सिर्फ जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे तक ही सीमित हो जाएगा, यही सोचकर नाराज भाजपाई एकजुट होने लगे हैं।
सूत्रों की माने तो भारतीय जनता पार्टी के स्थापित नेताओं ने लगातार बैठक करना भी शुरू कर दिया है। भाजपा के मूल कार्यकर्ता की नाराजगी से ऐसा लगता है कि वह  2018 की तरह 2023 में  किसी भी कीमत में समझौता करने के मूड में नजर नहीं आ रहे। वैसे यदि भाजपा के मूल कार्यकर्ता की इसी तरह नाराजगी बने रही तो दिनेश राय मुनमुन के लिए यह चुनाव आसान नहीं रहेगा क्योंकि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत ईमानदार और निष्ठावान कार्यकर्ता ही रही है और यदि वही नाराज होकर घर बैठ जाएंगे तो श्री राय अपनी निजी टीम के सहारे मैदान में मजबूत नहीं हो पाएंगे।
नाराज नेताओ से मिलने पहुंचे मुनमुन
05 साल पहले भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने वाले दिनेश राय मुनमुन को 5 साल के भीतर पार्टी ने दो बार टिकट दे दिया जिसके बाद पार्टी के कई स्थापित नेता नाराज हो गये जिनकी नाराजगी दिनेश राय मुनमुन के स्वागत कार्यक्रम के दौरान भी दिखाई दी। जब टिकट मिलने के बाद दिनेश राय मुनमुन का स्वागत कार्यक्रम जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित किया गया तब भारतीय जनता पार्टी के चंद नेताओं के अलावा बाकी नेताओं ने दूरियां बना लिया था जिसे भांपते हुए गत दिवस दिनेश राय मुनमुन ने नाराज नेताओं के घर जाना शुरू कर दिया लेकिन कई नेता घर में नहीं मिले। बताया जाता है कि नाराज नेताओं की टीम एक जगह बैठी हुई थी तब दिनेश राय मुनमुन वहां पहुंच गए जहां दिनेश राय मुनमुन के समर्थकों ने उनकी फोटो ले लिया और सोशल मीडिया में वायरल कर यह संदेश देने का प्रयास किया कि सभी लोग दिनेश राय मुनमुन के साथ है लेकिन सूत्रों की माने तो जो नेता दिनेश राय मुनमुन से नाराज है उन्होंने उक्त फोटो वायरल होने के बाद अपनी नाराजगी भी जाहिर किया। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नाराज स्थापित नेता किसी भी कीमत में समझौता करने के मूड में नजर नहीं आ रहे, नाराज नेताओं का अगला कदम क्या होगा यह तो समय बताएगा लेकिन वर्तमान में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी के भीतर मूल भाजपा और आयातित भाजपा को लेकर माहौल बन रहा है वह भारतीय जनता पार्टी के लिए घातक हो सकता है।

भाजपा के मूलवासी बन गए वनवासी!

सिवनी  में मूल भाजपाई अब वनवासी हो गए हैं जिन्हें भाजपा के आला कमान  ने दरकिनार करते हुए 5 साल पहले भाजपा में आए दिनेश राय मुनमुन को दूसरी बार टिकट देकर एक बार फिर भरोसा जताया। 2018 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दिनेश राय मुनमुन ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण किया और टिकिट ले आए थे। 2018 में मूल भाजपाइयों ने इसे संगठन का आदेश मानकर काम किया तब दिनेश राय मुनमुन लगभग  22 हजार वोटो से जीते थे। इस चुनाव में भाजपा संगठन के कई महत्वपूर्ण नेता यह मानकर चल रहे थे कि सर्वे में दिनेश राय मुनमुन कमजोर नजर आ रहे है ऐसे में मूल भाजपाइयों ने दिनेश राय मुनमुन के विरोध में मोर्चा खोल लिया था और भोपाल से दिल्ली तक की दौड़ लगाना शुरू कर दिया था। 09 अक्टूबर को भाजपा की चौथी सूची जारी की गई जिसमें 57 नाम जारी किए गए। सूची में दिनेश राय मुनमुन का नाम शामिल था जिसे देख टिकिट की दावेदारी करने वाले मूल भाजपा नेता मायूस हो गए।
मुनमुन के स्वागत में नही पहुंचे भाजपा के स्थापित नेता
भारतीय जनता पार्टी की चौथी सूची में दिनेश राय मुनमुन का नाम आने के बाद मुनमुन राय के समर्थकों में काफी उत्साह देखा गया ढोलबाजों के साथ उनका स्वागत सत्कार किया गया शाम के समय दिनेश राय मुनमुन का स्वागत कार्यक्रम जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित किया गया जिसमें भाजपा के जिला अध्यक्ष आलोक दुबे ,संतोष अग्रवाल नरेंद्र ठाकुर सहित चंद भाजपा के नेता थे लेकिन उक्त कार्यक्रम में अधिकांश चर्चित और स्थापित चेहरे नदारद थे जिसके बाद राजनैतिक गलियारो में चर्चा चल पड़ी है कि दिनेश राय मुनमुन के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा क्योंकि भाजपा संगठन के अधिकांश नेताओं का समर्थन उन्हें नहीं मिल पायेगा। मुनमुन राय के स्वागत कार्यक्रम में पूर्व विधायक नीता पटेरिया, नरेश दिवाकर, सांसद ढालसिंह बिसेन, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी, पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन, प्रेम तिवारी, सांसद प्रतिनिधि संजीव मिश्रा, लालू राय, महामंत्री गजानंद पंचेश्वर, अजय डागोरिया, जयदीप चौहान, वेदसिंह ठाकुर, भाजपा उत्तर मंडल अध्यक्ष पप्पू सोनी समेत कई नेता दिखाई नहीं दिये जो चर्चा का विषय बने रहा।
                  पितृपक्ष में टिकिट की गई जारी
ऐसा कहा जाता है कि सनातन धर्म के लोग पितृपक्ष में कोई भी शुभ काम नहीं करते लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने चौथी सूची जारी कर दिया जिसमें सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन को टिकिट दी गई। पितृपक्ष में चौथी सूची जारी किये जाने के बाद सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन के राजनैतिक भविष्य को लेकर तरह तरह की भविष्य की जाने लगी है फिलहाल दिनेश राय मुनमुन के समर्थक उन्हें टिकिट मिलने से गदगद नजर आ रहे हैं।

भाजपा से गद्दारी कर पार्षद का चुनाव लड़ चुके रामलाल राय को बरघाट

नगरीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से गद्दारी कर सीव्ही रमन वार्ड से निर्दलीय चुनाव लडक़र पार्टी के प्रत्याशी ज्ञानचंद सनोडिया को हराने का प्रयास करने वाले रामलाल राय इन दिनों अपने आप को बरघाट के प्रत्याशी कमल मर्सकोले का करीबी बताते हुए बरघाट विधानसभा का प्रभारी बताते घूम रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि रामलाल राय यह भी प्रचारित कर रहे हैं कि उन्हें कमल मर्सकोले की अनुशंसा के चलते जिला भाजपा के अध्यक्ष ने बरघाट विधानसभा का प्रभारी बना दिया हालांकि इस आशय की अधिकृत पुष्टि जिला भाजपा के किसी भी नेता ने नहीं किया और ना ही अधिकृत रूप से कोई विज्ञप्ति जारी की गई है लेकिन सूत्र बताते हैं कि रामलाल राय अपने आपको विधानसभा का प्रभारी मानने लगे है।
अभी अजय डागोरिया है विधानसभा प्रभारी
बताया जाता है की बरघाट विधानसभा क्षेत्र का प्रभार जिला भाजपा के महामंत्री अजय डागोरिया के पास है लेकिन रामलाल राय लाल स्वयं प्रभारी बनना चाहते है। भारतीय जनता पार्टी का संगठन भी इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि पार्टी से गद्दारी करने वाले रामलाल राय को यदि वह विधानसभा का प्रभारी बनाते हैं तो इसका खामियाजा कमल मर्सकोले को भुगतना पड़ सकता है क्योंकि रामलाल राय के बारे में कहा जा रहा है कि वह पद के लालची है जब पार्टी से उन्हें टिकिट नहीं मिली थी तो उन्होंने सीव्ही रमन वार्ड से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को हराने के लिए निर्दलीय फार्म भर दिया था हालांकि रामलाल राय ने निर्दलीय चुनाव लड़ा भी बावजूद सके सीव्ही रमन वार्ड से भाजपा की ही जीत हुई। बाद में रामलाल राय यह समझ गये कि पार्टी के बिना उनका अस्तित्व कुछ नहीं है तो उन्होंने उच्च स्तरीय सांठगांठ करते हुए भारतीय जनता पार्टी में पुन: प्रवेश ले लिया और अब वह विधानसभा बरघाट के प्रभारी बनने का सपना संजोने लगे है। यदि रामलाल राय को बरघाट विधानसभा का प्रभारी बनाया जाता है तो फिर कमल मर्सकोले के सपनों में पानी फिर सकता है और वह बैकफुट में आ सकते हैं ऐसे में देखना यह है कि कमल मर्सकोले रामलाल राय से दूरिया बनाते हैं या फिर उन्हें चुपचाप विधानसभा प्रभारी बनता      देखते हैं।

दलसागर के काम में नगर पालिका ने कितना डीजल किया खर्च!

कहने को तो सिवनी नगर पालिका परिषद में कांग्रेस की नगर सरकार काबिज है लेकिन वर्तमान में सिवनी नगर पालिका परिषद लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन के इशारों में चल रही है। बताया जाता है कि वर्तमान में ठेकेदार राहुल जैन के ऊपर सिवनी नगर पालिका परिषद के 21 पार्षदों के साथ साथ नगर पालिका के अधिकारी पूरी तरह मेहरबान है तभी तो फुट ब्रिज निर्माण में काम से अधिक भुगतान कर दिया गया और किसी ने आपत्ति नहीं उठाया। गत दिवस सिवनी नगर पालिका के सीएमओ रामकुमार कुर्वेती को पार्षद राजेश राजू यादव,गोलू पंडित और संजय भलावी ने ज्ञापन सौंपते हुए मांग किया है कि नगर पालिका के भीतर 06 माह में लगभग 60 लाख रू. डीजल का भुगतान कर दिया गया जिसकी जांच कराई जाए। बताया जाता है की सिवनी नगर पालिका परिषद ने  वाऊचार क्रमांक 39, 105, 188, 259, 361, 532, 634, 844, 959 के माध्यम से नगर पालिका परिषद ने 59 लाख 52 हजार 752 का डीजल का भुगतान किया है।
कही राहुल जैन के कामों के लिए तो खर्च नहीं हुआ डीजल
तीन पार्षदों ने सीएमओ को पत्र लिखते हुए कहा है कि पिछले 6 महीने के भीतर लगभग 60 लाख रू. डीजल के नाम से भुगतान किया गया है जिसकी जांच कराई जाए और यह जानकारी दिया जाए कि वहां कितने किलोमीटर चले? किन-किन वाहनों में कितना-कितना डीजल डाला गया? वैसे सूत्र बताते हैं कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्षता के साथ जांच हो तो पता चल जाएगा कि सिवनी नगर पालिका परिषद ने दलसागर तालाब में बनने वाले फुट ओवर ब्रिज के निर्माण में कितना डीजल दिया। लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन अपने आपको सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन का करीबी बताता है सूत्र बताते हैं कि जब से राहुल जैन ने काम प्रारंभ किया है तब से सिवनी नगर पालिका परिषद ठेकेदार के ऊपर मेहरबान है। ठेकेदार ने लगभग 31 लख रुपए की अधिक लागत से 01 करोड़ 88 लाख में उक्त निर्माण कार्य का टेंडर लिया, ठेकेदार के ऊपर सिवनी नगर पालिका परिषद ने मेहरबानी दिखाते हुए जब दलसागर का काम प्रारंभ हुआ तब सिवनी नगर पालिका परिषद के वाहन लगाए गए वहीं डीजल भी भराया गया।
विधायक का करीबी है ठेकेदार
सवाल यह उठता है कि जब ठेकेदार ने 36 प्रतिशत अधिक की दर से ठेका लिया था तो फिर सिवनी नगर पालिका परिषद को इतनी मेहरबानी दिखाने की आवश्यकता क्यों आन पड़ी? इस पूरे मामले में सिवनी नगर पालिका परिषद के उन पार्षदों की भूमिका को लेकर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं जिन्होंने अब तक लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन के द्वारा किये जा रहे कामों की मांग नहीं किया। गौरतलब है कि राहुल जैन अपने आपको सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन का करीबी बताते हुए सिवनी नगर पालिका परिषद में एक तरफ राज कर रहा है जिसके सामने भाजपा और कांग्रेस दोनो ही पार्टियों के पार्षद बौने नजर आ रहे हैं।

जिस ढाबे में टीआई चाय पीने जाते हैं वह 24 घंटे तो खुले ही रहेगा

सिवनी जिले के कई ऐसे थाना क्षेत्र है जहां के ढाबे रात भर संचालित होते हैं जिन्हें बंद कराने की जहमत संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस नहीं उठाती। ऐसा ही कुछ बरघाट थाना क्षेत्र में संचालित होने वाले ढाबों में भी हो रहा है। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले बरघाट पुलिस ने डीजल चोर गिरोह को पकड़ा था जो रात में डीजल चोरी की घटना को अंजाम देते हुए ढाबो में बैठकर रैकी करते थे। उक्त घटना के बावजूद बरघाट पुलिस की नींद नही खुली। बताया जाता है कि बरघाट थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा चर्चित संतोष ढाबा है जिसके संचालक संतोष सोनी यह दंभ भरते है कि उनके बरघाट पुलिस से मधुर संबंध है और इसी मधुर संबंध का फायदा उन्हें मिलता है। बताया जाता है कि संतोष सोनी तो यह तक कहते है कि नए थानेदार श्री तेकाम ने जब पदभार ग्रहण किया था उसके बाद वह चाय पीने के लिए मेरे ढाबे में आये थे। संतोष सोनी नये थाना प्रभारी की तारीफ करते नही थकते, वह कहते हैं कि नये थानेदार श्री तेकाम बहुत ही सज्जन और सीधे सादे आदमी है, संभवत: इसलिए संतोष सोनी जैसे ढाबा संचालक 24 घंटे ढाबा खोलकर रखते हैं जिनके ऊपर पुलिस किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं करती। सूत्रों की माने तो संतोष सोनी के ढाबे में भोजन के साथ साथ अन्य काम भी होते हैं जिसकी तरफ पुलिस का ध्यान नहीं जाता। समाचार प्रकाशन के बाद बरघाट पुलिस का ध्यान इस ओर आकर्षित कराने का प्रयास भी किया गया लेकिन बरघाट पुलिस का ध्यान संतोष ढाबा सहित क्षेत्र में संचालित अन्य ढाबो की तरफ जाता ही नहीं यही कारण है कि बरघाट क्षेत्र में संचालित अधिकांश ढाबो में भोजन की आड़ में कई चीज उपलब्ध कराई जाती है। देखना यह है कि बरघाट थाने में पदस्थ थाना प्रभारी कृपाल तेकाम और एसडीओपी ललित गठरे क्षेत्र में संचालित ढाबो की गतिविधियों के ऊपर नजर रखते हुए ऐसे ढाबा संचालकों के ऊपर कोई कार्यवाही करते हैं या नहीं जिनके ढाबे नियम विरूद्ध संचालित हो रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज के बजाय शौचालय, पुल, सीसी रोड का उद्घाटन कर गये सीएम

मध्यप्रदेश में आचार संहिता किसी भी पल लग सकती है। यह देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज एक वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किया। बताया जाता हैकि आज के उक्त कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान के द्वारा लगभग 53 हजार करोड़ की परियोजनाओं व निर्माण कार्यो का भूमिपूजन किया गया वहीं 14 हजार प्रोजक्टस का उदघाटन भी किया गया। सिवनी जिलेवासियों के लिए यह खबर मायूस करने वाली हो सकती है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लगभग 300 करोड़ की लागत से बन रहे मेडिकल कॉलेज का उदघाटन नहीं किया जो यह बताने के लिए काफी है कि फिलहाल मेडिकल कॉलेज सिर्फ एक भवन तक ही सिमटकर रह जायेगा वहां अभी कॉलेज लगना प्रारंभ नहीं होगा। बताया जाता है कि जिला प्रशासन के द्वारा 06 अक्टूबर 2023 को जिन कार्यो के भूमिपूजन की सूची जारी की गई थी उनमें जिला शिक्षा केंद्र के अंतर्गत लगभग 10 स्कूलो में शौचालय शामिल है वहीं बबरिया पार्क में पेवर ब्लॉक प्लांटस पिचिंग, कंडीपार मुख्यमार्ग से बींझावाड़ा तक ईटीसी बायपास, सरगापुर से घतुरिया से डिबरा ग्रेबल सडक़ निर्माण, बम्होड़ी से फरेदा मार्ग तक स्लैब कल्वर्ट, आंगनवाड़ी भवन, मंगल भवन, श्रीसिद्ध शनिधाम मंदिर पहुंच मार्ग सहित बीटी रोड निर्माण कार्य, ग्राम टिकारी से नरेला, एवं ग्राम निवारी से पौनार तक बीटी रोड निर्माण सहित अन्य काम शामिल है।
सिवनी विधानसभा के किसी भी बड़े काम का नहीं किया उदघाटन
सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन यह दंभ भर रहे थे कि सिवनी में उन्होंने मेडिकल कॉलेज की सौगात दिया है और चुनाव से पहले वह मेडिकल कॉलेज का उदघाटन करा लेंगे लेकिन सिवनी विधायक के लिए यह खबर आहत करने वाली है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिवनी के मेडिकल कॉलेज का उदघाटन नहीं किया। सूत्र बताते है कि विधायक दिनेश राय लंबे समय से इस प्रयास में थे कि आचार संहिता लगने से पहले उक्त मेडिकल का निर्माण कार्य हो जाये ताकि उन्हें इसका श्रेय मिल सके और वह सिवनी विधानसभा के लोगो को यह बता सके कि उन्हीं के प्रयासो से सिवनी का मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुआ है लेकिन आज लगभग 53 हजार करोड़ के कामों के भूमिपूजन व 14 हजार कामो के उदघाटन में सिवनी मेडिकल कॉलेज का नाम नहीं होने से विधानसभा चुनाव में दिनेश राय मुनमुन मेडिकल कॉलेज का श्रेय लेने से चूक जायेंगे। 

भाजपा से दावेदारी करने वाली राजेश्वरी उइके के ऊपर एफआईआर किये जाने जनजातीय कार्यविभाग ने लिखा था पत्र

सिवनी महाकौशल। लखनादौन विधानसभा में विधायक योगेंद्र बाबा के विरूद्ध भारतीय जनता पार्टी को कोई मजबूत चेहरा नहीं मिल रहा। बताया जाता है कि लखनादौन विधानसभा से धूमा की सरपंच श्रीमती राजेश्वरी उइके का नाम पहले पायदान में बताया जा रहा है और राजेश्वरी उइके के समर्थकों की माने तो सबकुछ ठीक ठाक रहा तो राजेश्वरी उइके के नाम पर अंतिम मोहर लग सकती है हालांकि भारतीय जनता पार्टी के स्थापित नेता इस बात को आसानी से हजम नहीं कर सकते क्योंकि राजेश्वरी एक ऐसी नेत्री है जिनका राजनैतिक कार्यकाल विवादो से घिरा रहा है और कभी भी वह एक पार्टी तक सिमटकर नहीं रही। उन्होंने दो बार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से भाग्य आजमाया तो एक बार राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से और तीनों ही बार मतदाताओं ने उन्हे सिरे से नकार दिया जिसके बाद राजेश्वरी उइके ने भाजपा की नाव में सवार होकर चुनाव लडऩे का मन बना लिया है हालांकि उनके लिए चुनाव लडऩा इसलिए आसान नहीं होगा क्योंकि जितना विवाद राजेश्वरी उइके के साथ जुड़ा है उतना अन्य किसी दावेदारो के साथ नहीं जुड़ा।
एफआईआर के लिए लिख चुका है विभाग
गौरतलब है कि जब श्रीमती राजेश्वरी उइके धूमा ग्राम पंचायत की सरपंच थी तब उनके सरपंच होने का फायदा उठाते हुए राजेश्वरी के पुत्र  प्रशांत उइके के द्वारा धूमा में स्थित शासकीय शिक्षक आवास भवन में तोडफ़ोड़ कर कब्जा कर लिया गया था। बताया जाता है कि जिस भवन में तोडफ़ोड़ किया गया था। उक्त भवन  दिनांक 24/11/1999 के द्वारा  एसके तंतुवाय प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धूमा एवं राजेश्वरी ऊईके के पति ओपी उईके जो उस समय कन्या आश्रम चौकी में अधीक्षक के पद पर पदस्थ थे उन्हें आवासीय प्रयोजन के लिए दी गई थी। सूत्र बताते हैं कि जिस समय उक्त शासकीय भवन को तोडफ़ोड़ कर कब्जा किया गया था उस समय राजेश्वरी उईके के पति थे ही नहीं। प्रश्र यह उठता है कि जिसके नाम से भवन आवंटित किया गया था उनकी गैरमौजूदगी में उक्त भवन को तोडफ़ोड़ कर कब्जा करने का प्रयास कैसे कर लिया गया? बताया जाता है कि इस पूरे मामले को आयुक्त जनजातीय कार्यविभाग मध्यप्रदेश भोपाल ने गंभीरता से लेते हुए दिनांक 18.9.2017 को जनजातीय कार्यविभाग सिवनी को पत्र लिखा था जिसके बाद 10 अक्टू. 2017 को कार्यालय कलेक्टर जनजातीय कार्यविभाग की ओर से आयुक्त जनजातीय कार्यविभाग मध्यप्रदेश भोपाल को पत्र लिखते हुए अवगत कराया था कि शासकीय शिक्षक आवास भवन को सरपंच के द्वारा पद का दुरूपयोग कर नियम विरूद्ध तोडऩे पर अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने हेतु जानकारी चाही गई थी जो निम्रानुसार है जिसमें उल्लेख किया गया था कि उक्त भवन शासकीय शिक्षक आवास गृह है जो विभागीय है और उक्त भवन आदिवासी परियोजना के आधिपत्य है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि एफआईआर के लिये लिखे गये पत्र के बाद राजेश्वरी उइके ने उच्च स्तरीय सांठगांठ कर कार्यवाही ठंडे बस्ते में करवा दिया था। यदि भारतीय जनता पार्टी को टिकिट देती है तो भाजपा के स्थापित नेताओं को यह जवाब देना पड़ेगा कि क्या पार्टी के पास एक भी ऐसा बेदाग चेहरा नहीं था जो योगेंद्र बाबा के विरूद्ध चुनाव में खड़ा हो सके। बहरहाल देखना यह है कि राजेश्वरी उइके के नाम पर विचार करने वाला शीर्ष नेतृत्व उनके साथ जुड़े विवादो में भी विचार करते हैं या नहीं?

रामभ्रदाचार्य के कहने से वैसे ही मुनमुन राय को हो गया है डैमेज: अविमुक्तेश्वरानंद महाराज

जगदगुरू स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज की जन्मस्थली सिवनी में दिनेश राय मुनमुन के द्वारा रामकथा का आयोजन किया गया था जिसमें स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने मंच से जगदगुरू स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज को लेकर उनका आचरण कांग्रेसी था, कहा गया था जिससे उनके अधिकांश शिष्य आहत थे तब कई लोगों ने कहा था कि क्या सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन रामभद्राचार्य की बातों से सहमत है और यदि सहमत नहीं है तो उन्हें खंडन देना चाहिए लेकिन विधायक दिनेश राय मुनमुन ने खंडन नहीं दिया इस बीच आपका सिवनी आगमन हुआ तो आप दिनेश राय मुनमुन के निवास स्थान में चले गये, इसे क्या माना जाए? यह सवाल दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के संपादक ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रेस कान्फ्रेस में उठाया तब अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि रामकथा में रामभद्राचार्य द्वारा की गई टिप्पणी से दिनेश राय मुनमुन का कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने ऐसे व्यक्तित्व को बुलाया था जिन्हें ना तो टोका जा सकता था और ना ही बोला जा सकता था। उनहोने कहा कि एक वक्तव्य से किसी व्यक्ति के साथ सारे संबंध समाप्त करने का कारण नहीं बन सकता जबकि जो व्यक्तव्य दिया गया वह व्यक्तव्य उस व्यक्ति का ना हो।
अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने माना मुनमुन को हुआ है डैमेज
दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के सवालों का जवाब देते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि दिनेश राय मुनमुन एक राजनैतिक व्यक्ति हैं और उन्हें यह नहीं मालूम था कि रामभद्राचार्य महाराज मंच से क्या बोलेंगे? उन्होंने कहा कि वैसे ही दिनेश राय मुनमुन को भारी डैमेज हो गया है रामभद्राचार्य महाराज के कहने से। अब दिनेश राय मुनमुन खंडन करें या मंडन करें यह वहीं बात हो गई कि इधर कुंआ, उधर खाई। खंडन करता है तो गड़बड़ है और मंडन करता है तो भी गड़बड़ है, बेचारा षाष्टांग कर रहा है।  प्रेस कान्फ्रेस के दौरान महाराजश्री द्वारा दिनेश राय मुनमुन के द्वारा कराई गई रामकथा को लेकर और भी कई बातें कहीं गई। जब महाराज जी ने कहा कि दिनेश राय मुनमुन खंडन करता है तो गड़बड़ और मंडन करता है तो भी गड़बड़ है, यह सुन वहां मौजूद सभी लोग ठहाके लगाकर हंसने लगे।
संस्कृत पाठशाला का होना चाहिए संचालन
प्रेस कान्फ्रेस के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यहां आकर चला कि यहां संस्कृत की पाठशाला चला करती थी, इस पाठशाला का ज्ञान के प्रकाश में बड़ा योगदान था लेकिन अब यह पाठशाला लुप्त हो गई। उन्होंने सभी के सहयोग से संस्कृत की पाठशाला प्रारंभ करने की बात कहा।
जमकर आक्रोशित हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज
प्रेस वार्ता के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज का आज उग्र रूप देखने को मिला। सिवनी के दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार को लेकर उन्होंने नाराजगी जाहिर किया और जमकर आक्रोश जताने लगे जिसके बाद कुछ पत्रकार उठे और महाराज श्री से कहा कि यदि समाचार पत्र में छपी खबर से आपत्ति है तो नोटिस भेजना चाहिए इस तरह प्रेसवार्ता में पत्रकारों के ऊपर आक्रोशित नहीं हो सकते कहते हुए कुछ पत्रकार पत्रकारवार्ता छोडक़र बीच में ही आ गये। इस बीच अविमुक्तेश्वरानंद ने वहां मौजूद पत्रकारो से कहा कि थू है ऐसी पत्रकारिता में।

रात भर धरतीपुत्र करते रहे इंतेजार

सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन जब विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे तब उन्होंने किसानों से कई महत्वपूर्ण वादा किया था। उन्होंने कहा था कि पेंच व्यपवर्तन परियोजना से किसानों को पानी दिलाया जाएगा। बताया जाता है कि अभी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां के किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा। बार-बार मांग करने के बाद भी जब किसानों के दर्द को किसी ने नहीं समझा तो 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन किसानों ने अहिंसक आंदोलन प्रारंभ कर दिया। बताया जाता है कि 2 अक्टूबर को लाल माटी क्षेत्र के किसान एकजुट हुए और रानी दुर्गावती प्रतिमा के पास ट्रैक्टरों को खड़ा कर धरना प्रारंभ कर दिया। 2 अक्टूबर की दोपहर से शुरू हुए धरना प्रदर्शन करने वाले किसानों की मांग थी कि  सांसद और विधायक धरना स्थल पर पहुंचे जहां उनसे बात की जाएगी लेकिन रात भर किसान धरना स्थल पर मौजूद रहे लेकिन उनसे मिलने ना तो विधायक दिनेश राय मुनमुन को समय मिला और ना ही सांसद डॉक्टर ढालसिंह बिसेन को समय मिला। यहां तक की जिले के कलेक्टर क्षितिज सिंघल भी किसानों से मिलने नहीं पहुंचे। हालांकि कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में एस डीएम मेघा शर्मा अवश्य पहुंची थी।
सुबह पहुंचे विधायक मुनमुन राय
 रात भर किसान धरना प्रदर्शन करते रहे लेकिन रात में किसानों से मिलने की फुर्सत ना तो विधायक को मिली और ना ही सांसद को। आज सुबह दिनेश राय मुनमुन किसानों से मिलने पहुंचे दिनेश राय से किसानों ने कहा की हम आपसे मिलना चाहते थे यदि आप आ जाते तो हमारी रात काली नही होती।
किसी प्रतिनिधि को भेज   देते विधायक
सुबह जब धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों से मिलने के लिए दिनेश राय मुनमुन पहुंचे तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि नरसिंहपुर में एक एक्सीडेंट हो गया था जहां वह चले गए थे और उसके बाद जबलपुर चले गए थे उनकी जानकारी में नहीं था जबकि पूरे सोशल मीडिया में उक्त आंदोलन चर्चाओं में रहा यदि दिनेश राय मुनमुन व्यस्त थे तो उन्हें अपने प्रतिनिधि को धरना स्थल पर भेज देना चाहिए था और किसानों को अवगत कराना चाहिए ताकि दिनेश राय मुनमुन पारिवारिक काम से नरसिंहपुर और जबलपुर गए हुए हैं लेकिन उन्होंने रात के समय किसी भी प्रतिनिधि को नहीं भेजा जिसके कारण रात भर धरतीपुत्र धरना प्रदर्शन करते रहे। समाचार लिखे जाने तक भी किसान धरना आंदोलन में ही बैठे हुए थे किसानों का कहना था कि आज कैबिनेट की अंतिम बैठक के अंतिम बैठक में जो भी निर्णय होगा उसके बाद वह उठ जाएंगे वैसे यदि इस पूरे मामले का हल नहीं निकलता है तो फिर विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है क्योंकि दिनेश राय मुनमुन ने जब चुनाव लड़ा था तब उन्होंने लाल माटी क्षेत्र के किसानों के लिए भी बड़े-बड़े वादे किए थे लेकिन चुनाव जीतने के बाद लाल माटी क्षेत्र के किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जिसके कारण लाल माटी क्षेत्र के किसानों को चुनाव से ठीक पहले धरना प्रदर्शन करने का रास्ता अपनाना पड़ा।
आपने मुझे बुलाया था क्या?
 रात भर किसानों ने धरना प्रदर्शन किया जिनसे मिलने सुबह विधायक दिनेश राय मुनमुन पहुंचे और किसानों से चर्चा करते हुए कहा कि आपने मुझे बुलाया था क्या? मुझे सूचना तो देना चाहिए था तब किसानों ने कहा कि 18 अगस्त को किसान महा पंचायत हुई थी जिसमें विधायक सांसद सहित पार्टी के मुखियाओं को बुलाया गया था तभी तय किया गया था कि यदि समय सीमा के भीतर उनकी मांग पूरी नहीं होती तो वह धरना प्रदर्शन करेंगे। वैसे सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन का यह कहा जाना कि मुझे बुलाया था क्या आश्चर्यजनक इसलिए लग रहा है क्योंकि 2 अक्टूबर की दोपहर से किसानों का आंदोलन पूरे प्रदेश भर में चर्चित हो गया था। सोशल मीडिया में पल-पल की अपडेट आ रही थी सोशल मीडिया में सक्रिय रहने वाले सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन को लाल माटी के किसानों का आंदोलन क्यों नहीं दिखाई दिया? यह आश्चर्य का विषय इसलिए है क्योंकि दिनेश राय मुनमुन ने लालमाटी क्षेत्र के किसानों से कई बड़े-बड़े वादे किए थे और जब आचार संहिता लागू होने को आई तब श्री राय किसानों से पूछ रहे हैं कि क्या आपने मुझे बुलाया था क्या या मुझे बताया था क्या?

भगतराम सर्वे का पढ़ाने में नहीं लगता दिल, कई महीनो से नहीं गये स्कूल

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो शासकीय नौकरी में रहते हुए अपना मूल काम छोडक़र सेटिग में लगे रहते है। ऐसे ही एक अधिकारी जनजातीय कार्यविभाग में पदस्थ भगतराम सर्वे है। बताया जाता है कि लंबे समय तक भगतराम सर्वे लखनादौन मंडल संयोजक के पद पर पदस्थ थे जिनका एक ऑडियो फरवरी 2023 में  सामने आया था जो एक अधीक्षिका से प्रति बच्चों के हिसाब से पैसो की मांग कर रहे थे। जब उक्त ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ तब भगतराम सर्वे की जांच प्रारंभ हुई। जांच के बाद 7 मार्च 2023 को भगतराम सर्वे को शासकीय उत्कृष्ट बालक छात्रावास लखनादौन के अधीक्षक के पद से हटाते हुए उन्हे शैक्षणिक कार्य संपादन के लिए शासकीय माध्यमिक शाला पाना बुढवानी विकासखंड लखनादौन में पदस्थ कर दिया गया लेकिन अपनी उच्च स्तरीय सांठगांठ के चलते श्री सर्वे उक्त स्कूल में पढ़ाने गये ही नहीं। सूत्र बताते हैं कि लंबे समय से शैक्षणिक कार्य से दूर रहने वाले भगतराम सर्वे का मन अध्यापन कार्य में लगता ही नहीं, वह हमेशा इस सेटिंग में रहते हैं कि किसी भी तरह से उन्हें किसी छात्रावास में अधीक्षक का पद मिल जाये ताकि वह अधीक्षक की आड़ में अन्य छात्रावासो में भी अपना सिक्का चला सके। सूत्रों की माने तो लगभग छह महीने तक स्कूल से नदारद रहने वाले भगतराम सर्वे का वेतन नहीं रूका और स्कूल गये बिना उन्हें बकायदा भुगतान होते रहा जो यह बताने के लिए काफी है कि जनजातीय कार्यविभाग में पदस्थ भगतराम सर्वे के इशारो में ही जनजातीय कार्यविभाग काम करता है। यदि कोई अन्य शिक्षक स्कूल ना जाये तो विभाग के आला अधिकारी ना केवल उसका वेतन रोक देते है बल्कि उसके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही भी शुरू कर देते है लेकिन भगतराम सर्वे एक ऐसे शिक्षक है जिनका वेतन बराबर निकल रहा है और वह लखनादौन मुख्यालय में ही रहते है।
अधीक्षक के साथ साथ मंडल संयोजक भी थे सर्वे
भगतराम सर्वे की उच्च स्तरीय पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह ना केवल उत्कृष्ट बालक छात्रावास लखनादौन में अधीक्षक के पद पर पदस्थ थे बल्कि उनहें लखनादौन मंडल संयोजक का प्रभार भी दिया गया था। मंडल संयोजक होने का फायदा उठाते हुए भगतराम सर्वे के द्वारा क्षेत्र के हॉस्टल अधीक्षक से बकायदा कमीशन की बातें की जाती थी जिसका एक ऑडियो वायरल होने के बाद जनजातीय कार्यविभाग के अधिकारियों की छवि धूमिल हुई थी जिसके बाद उन्हें 7 मार्च को अधीक्षक के पद से हटा दिया गया था लेकिन वर्तमान में वह स्कूल जाने से परहेज कर रहे हैं। 

टिकिट के लिए नेताओं की शरण में जा रही राजेश्वरी उइके

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पुन: सरकार बनाने के लिए गंभीर नजर आ रही है जिसके लिए पार्टी ने तीन केंद्रीयमंत्री सहित सात सांसदो को मैदान में उतारा है। बताया जाता है कि भारतीय जनता पार्टी को अभी भी कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली लखनादौन विधानसभा से कोई मजबूत दावेदार नहीं मिल पा रहा जिसके चलते अभी तक भारतीय जनता पार्टी ने लखनादौन विधानसभा से किसी की टिकिट फायनल नहीं किया हालांकि ग्राम पंचायत धूमा की पूर्व सरपंच श्रीमती राजेश्वरी उइके टिकिट के लिए नेताओं की शरण में जरूर पहुंच रही है। गत दिवस राजेश्वरी उइके प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा से मिलने पहुंची थी। वैसे यदि वीडी शर्मा राजेश्वरी उइके के पुराने रिकार्ड को देखें तो उन्हें एहसास हो जायेंगे कि श्रीमती राजेश्वरी उइके भारतीय जनता पार्टी के लिए कितनी घातक है। चुनाव लडऩे का शौक रखने वाली राजेश्वरी उइके ने दो बार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। जब गोंडवाना ने उनके बजाय अन्य किसी को मैदान में उतारा तो राजेश्वरी उइके ने पार्टी से बगावत करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस से चुनाव लड़ लिया। राजेश्वरी उइके के बारे में कहा जाता है कि क्षेत्र में पकड़ नहीं होने के बावजूद वह कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए वोट काटने के लिए मैदान में खड़ी हो जाती है। बताया जाता है कि राजेश्वरी उइके के सरपंच रहते उनके सुपुत्र ने शासकीय जमीन पर कब्जा जमा लिया था जिसकी शिकायत के बाद राजेश्वरी उइके भी दोषी पाई गई थी।
उल्लेखनीय है कि सरपंच के पद का दुरूपयोग करते हुए राजेश्वरी उइके के संरक्षण में उनके पुत्र ने शासकीय जमीन में कब्जा जमाने का काम किया था जिसके बाद तत्कालीन एसडीएमआई जे खालको ने 29/11/2016 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए आदेश दिया था कि श्रीमती राजेश्वरी उईके को ग्राम पंचायत धूमा के धारित सरपंच पद पर बनाए रखना लोकहित व शासन हित में अवांछिनी होने के कारण मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40(1) में निहित प्रावधानों के तहत ग्राम पंचायत धूमा के सरपंच पद से पृथक किया जाता है एवं इसी अधिनियम की धारा 40(2) में वर्णित प्रावधानों के तहत आगामी 6 वर्षों की कालावधि के लिए निर्वाचन के लिए निर्हित( आयोग्य) घोषित किया जाता है। छह सालो के लिए राजेश्वरी उइके को निष्कासित कर दिया गया था यदि ऐसी विवादित महिला नेत्री के ऊपर भाजपा विश्वास जताती है तो क्षेत्र के ईमानदार और निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के सवालों का जवाब देते नहीं बनेगा।

उगली ग्राम पंचायत के फर्जीवाड़ा की जांच करने पहुंची टीम

केवलारी जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उगली की सरपंच श्रीमती पुष्पलता पोचाटे और सचिव छत्रपाल टेंभरे की जुगलबंदी के चलते भ्रष्टाचार के कारनामो को अंजाम दिया गया। दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के द्वारा दिनांक 23 सितं को ‘आरटीआई के नियमो का पालन नहीं करते उगली ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव’ एवं  26 सितं. को ‘ग्राम पंचायत उगली के सचिव चंद्रपाल टेंभरे ने किस मद में जमा किया साप्ताहिक बैठकी बाजार की राशि’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि सचिव छत्रपाल टेंभरे कई वर्षो से उगली ग्राम पंचायत में पदस्थ है जिसने वर्तमान सरपंच के अलावा पूर्व सरपंच आनंद भगत के कार्यकाल के दौरान जमकर फर्जीवाड़ा किया। दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने उल्लेख करते हुए यह भी बताया था कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान लक्ष्मण अहिरवार को सचिव चंद्रपाल टेंभरे ने अदेय प्रमाण पत्र जारी कर दिया जबकि लक्ष्मण अहिरवार के ऊपर 2021-22 से पहले ग्राम पंचायत उगली ने बैठकी बाजार की बकाया राशि था जिसके द्वारा राशि जमा की गई लेकिन ग्राम पंचायत के खाते में सचिव ने राशि जमा नहीं किया। इस पूरे मामले की शिकायत केवलारी निवासी मदनलाल रूसी ने उच्चाधिकारियों से किया था लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। पीडि़त ने 28 अप्रैल 2023 को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत भी जानकारी मांगा था लेकिन ना तो ग्राम पंचायत ने उसे जानकारी उपलब्ध कराया था और ना ही जनपद के अधिकारियों ने कोई ध्यान दिया जिसके बाद दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया। बताया जाता है कि समाचार प्रकाशन के बाद पंचायत समन्वयक रघुवीर इड़पाचे के नेतृत्व में जांच टीम उगली पहुंची। बताया जाता है कि जांच टीम ने शिकायतकर्ता को भी बुलाया था लेकिन शिकायतकर्ता उनकी जांच से सहमत नहीं हुआ। सूत्रों की माने तो सचिव अपने आपको जनपद के कई अधिकारियों का करीबी बताता है, यही कारण है कि वह जांच से भी विचलित नहीं हुआ।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जनपद सदस्य एवं पूर्व में उगली के सरपंच रहे आनंद भगत ग्राम पंचायत उगली में पहुंची जांच टीम से पहले सक्रिय दिखाई दिये। यदि उगली ग्राम पंचायत या आसपास सीसीटीव्ही कैमरे लगे हो तो पता चल जायेगा कि जांच टीम मे शामिल किन किन लोगों से आनंद भगत मिले थे? यह जांच का विषय है कि आनंद भगत जांच टीम के आने की खबर के बाद क्यों सक्रिय हुए थे?

रेत माफियाओं ने एसडीओपी के ड्रायवर के ऊपर किया हमला

सिवनी महाकौशल 27 सितं. 2023
इन दिनों रेत उत्खनन में रोक लगी हुई है बावजूद इसके बरघाट थाना क्षेत्र की कुछ रेत खदानो से अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर परिवहन किया जा रहा है जिनके ऊपर बरघाट पुलिस और खनिज विभाग कोई कार्यवाही नहीं करता। बताया जाता है कि गत दिवस बरघाट एसडीओपी के ड्रायवर देवीसिंह बरकड़े ने देखा कि मूंडापार के पास से अवैध रूप से रेत का परिवहन किया जा रहा है तो उसने रेत परिवहन करने वाले लोगो को रोकने का प्रयास किया तब रेत माफियाओ ने देवीसिंह बरकड़े के ऊपर हमला करते हुए मारपीट कर दिया जिसकी जानकारी बरघाट एसडीओपी और बरघाट पुलिस को लगी तो वह मौके पर पहुंचे। बताया जाता है कि जिन लोगों ने मारपीट किया उन्होंने मौके पर ही रेत खाली किया और वहां से फरार हो गये। बताया जाता है कि इस मामले में पुलिस के सामने दो नाम आये जिनमें से एक अमित चौहान तो दूसरा रंजीत साहू बताया जाता है। चर्चा है कि एसडीओपी के ड्रायवर के ऊपर हमला करने वाले लोगो की संख्या दो से अधिक थी। इस पूरे मामले को लेकर पुलिस ने धारा 353,294,506,147 सहित एससीएसटी एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध किया। घटना के बाद से आरोपी फरार बताये जा रहे हैं जिनकी तलाश की जा रही है। सूत्र बताते है कि यदि पुलिस आरोपियों को पकडक़र सख्ती से पूछताछ करती है तो बरघाट क्षेत्र के कुछ दबंग और रसूखदार लोगो के नाम भी सामने आ सकते है। इस संबंध में जानकारी के लिए जब बरघाट थाने के अधिकारियों को फोन लगाया गया तो किसी ने भी उक्त घटना से संबंधित विस्तृत जानकारी नहीं दिया। गौरतलब है कि बरघाट क्षेत्र में लंबे समय से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन का कारोबार होते रहा है जिसकी तरफ बरघाट थाना प्रभारी  कृपालसिहं तेकाम ने कोई ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र में चर्चा है कि जब कृपालसिंह तेकाम की पदस्थापना बरघाट थाने में हुई थी तब भी रेत उत्खनन में रोक लगी हुई थी लेकिन कभी भी श्री तेकाम ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन करने वाले लोगों की तरफ ध्यान नहीं दिया जिसके चलते क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जोरो पर है।
क्या बरघाट की कांग्रेस बनाएगी मुद्दा
चुनावी साल में बरघाट मुख्यालय में एसडीओपी के ड्रायवर के साथ रेत का कारोबार करने वाले माफियाओं ने एसडीओपी के ड्रायवर के साथ मारपीट कर दिया लेकिन इस घटना के बाद ना तो अब तक बरघाट विधायक अर्जुन काकोडिय़ा की तरफ से कोई बयान आया और ना ही बरघाट कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया जो चर्चा का विषय बना हुआ है। अब जबकि रेत माफियाओं के द्वारा एसडीओपी के ड्रायवर के साथ मारपीट कर दी गई ऐसे में देखना यह है कि पुलिस कब तक आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनसे मुख्य आरोपी के बारे में पता लगाती है।

भोमा के बैंक ऑफ महाराष्ट्र की प्रबंधक से परेशान हो रहे उपभोक्ता

इन दिनों भोमा में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र समय से नहीं खुलता जिसके कारण बैंक में जाने वाले उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ रहा है। बताया जाता है कि बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र शाखा भोमा में प्रबंधक के पद पर शालू चौरसिया पदस्थ है। शालू चौरसिया का मुख्यालय भोमा है लेकिन वह भोमा में नहीं रहती बल्कि वह अपडाउन करती है जिसके कारण वह समय से बैंक नहीं पहुंच पाती। क्षेत्र के लोगों की माने तो प्रबंधक शालू चौरसिया बैंक की चाबी अपने पास रखती है जिसके कारण जब तक वह बैंक नहीं पहुंचती तब तक बैंक में ताला लटका रहता है। आश्चर्य तो इस बात का है कि प्रबंधक की लेटलतीफी के कारण बैंक पहुंचने वाले अन्य कर्मचारियों को भी बैंक खुलने का इंतेजार करना पड़ता है। बताया जाता है कि बैंक में हर दिन ना केवल बैंक के उपभोक्ता बल्कि किसान व वृद्धावस्था पेंशन लेने वाले बुजुर्गो व महिलाओं को बैंक खुलने का इंतेजार करना पड़ता है और जब बैंक खुल जाती है तब भी अपने काम कराने के लिए उपभोक्ताओं को काफी इंतेजार करना पड़ता है। बताया जाता है कि बैंक के उच्चाधिकारी भी कभी भोमा में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र का औचक निरीक्षण नहीं करते जिसके कारण बैंक प्रबंधन की लापरवाही बढ़ते जा रही है।

जनआक्रोश यात्रा में सक्रिय नजर आये फूलछाप कांग्रेसी

भारतीय जनता पार्टी के द्वारा जनाअर्शीवाद यात्रा निकाली गई थी जिसके विरोध में कांग्रेस ने जनआक्रोश यात्रा निकाला। सिवनी में जनआक्रोश यात्रा में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुरेश पचौरी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन शामिल हुए। जनआक्रोश यात्रा का काफिला बरघाट पहुंचा जहां बरघाट के विधायक अर्जुनसिंह काकोडिय़ा ने शक्ति प्रदर्शन किया और काफी भीड़ एकत्रित भी किया, इस बीच बरघाट में फूलछाप कांग्रेसी ना केवल पोस्टर बैनर में दिखाई दिये बल्कि कांग्रेस के कार्यक्रम में वह थिरकते भी नजर आये जिसके बाद बरघाट क्षेत्र में चर्चा चल रही है कि एक साल पहले कांग्रेस के जिन नेताओं ने भाजपा के साथ समझौता करते हुए बरघाट नगर के इतिहास में पहली बार नगर परिषद में फूल खिलाया है वह भाजपा सरकार के विरोध में निकली जनआक्रोश यात्रा में भाजपा का विरोध कर रहे हैं। हम पाठकों को याद दिला दें कि बरघाट नगर परिषद में हुए चुनाव में 15 वार्डो में से बरघाट विकास मोर्चा 7 वार्डो से चुनाव जीती थी जबकि तीन वार्डो से कांग्रेस ने चुनाव जीता था और मात्र 5 वार्डो से भाजपा के पार्षद चुने गये थे। कांग्रेस से नगर कांग्रेस के अध्यक्ष ऋषभ जायसवाल की धर्मपत्नी श्रीमती निधि जायसवाल वार्ड क्र. 14 से चुनाव जीती थी जबकि वार्ड क्र. 4 से अभिलाष गोलू मालवीय व वार्ड क्र. 12 से पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती संध्या ठाकुर चुनाव जीती थी। अध्यक्ष के चुनाव में तीनों ही कांग्रेस के पार्षदो ने भाजपा प्रत्याशी श्रीमती इमरता साहू को वोट देकर नगर परिषद बरघाट में फूल खिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था जिसके एवज में भाजपा शासित नगर परिषद ने श्रीमती निधि ऋषभ जायसवाल एवं गोलू मालवीय को बकायदा पीआईसी का सभापति भी बनाया था। बरघाट में भाजपा और कांग्रेस की जुगलबंदी से नगर सरकार बन जाने के बाद जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने ना केवल उक्त तीनों पार्षदो को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था बल्कि नगर अध्यक्ष ऋषभ जायसवाल एवं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अनिल सिंह ठाकुर को भी निष्कासित कर दिया था लेकिन निष्कासन के बाद भी फूलछाप कांग्रेसी सक्रिय रहे। जनआक्रोश यात्रा में जिस तरह से फूलछाप कांग्रेसी सक्रिय रही उससे तो यही लग रहा है कि नगर परिषद में भाजपा का फूल खिलाने वाले पार्षद जनआक्रोश यात्रा में प्रदेश सरकार का विरोध दर्ज कर क्या बताना चाहते हैं। जनआक्रोश यात्रा में आये सुरेश पचौरी एवं प्रदीप जैन को बरघाट कांग्रेस के कर्णधारो से यह अवश्य पूछना चाहिए कि जो लोग नगर परिषद के चुनाव में कांग्रेस के नहीं हो सके वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कैसे हो सकते हैं? कुल मिलाकर बरघाट में जनआक्रोश यात्रा के तहत फूलछाप कांग्रेसी का सक्रिय नजर आना राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 

वेदसिंह ठाकुर केवलारी से अपने सुपुत्र को दिलाना चाहते हैं टिकिट

केवलारी विधानसभा से लगभग चार दशक बाद राकेश पाल सिंह भाजपा के ऐसे नेता रहे जिन्होंने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाते हुए भाजपा का परचम लहराया। 2018 के विधानसभा चुनाव में राकेश पाल सिंह को 85839 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के ठाकुर रजनीश सिंह को 79160 वोट मिले थे इस तरह राकेश पाल सिंह 6679 वोटो से जीतकर विधायक बने थे। राकेश पाल सिंह से पूर्व 1990 के चुनाव में भाजपा ने श्रीमती नेहा सिंह को टिकिट दिया था जबकि कांग्रेस ने श्रीमती विमला वर्मा को प्रत्याशी बनाया था तब श्रीमती नेहा सिंह को 37475 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस की श्रीमती विमला वर्मा को 30411 वोट मिले थे इस तरह केवलारी से पहली बार भाजपा की नेहा सिंह 7064 वोटो से जीती थी। 1993 से 2018 तक कांग्रेस का कब्जा रहा। वर्तमान में केवलारी विधानसभा से राकेश पाल सिंह के विरोध में कुछ लोगो ने मोर्चा खोल रखा है जिनमे से एक वेदसिंह ठाकुर है जिन्हें भाजपा ने इतना कुछ दिया कि अब यदि भाजपा वेदसिंह को कुछ ना भी दे तो उन्हे जीवन भर पार्टी के प्रति समर्पित रहना चाहिए। राजनीति में कहा जाता है कि नेताओ की अपेक्षाएं कभी कम नहीं होती। यह बात वेदसिंह ठाकुर के ऊपर सटीक बैठती है। वर्तमान में वेदसिंह ठाकुर अपने सुपुत्र समीर ठाकुर को टिकिट दिलाना चाहते है। पिछले कुछ दिनों से वेद सिंह ठाकुर के करीबी हरि ठाकुर के द्वारा विधायक राकेश पाल सिंह के लिए जहर उगलते हुए कांग्रेस में शामिल होने की गीदड़ भपकी देना इस बीच वेदसिंह ठाकुर का अपने पुत्र समीर ठाकुर सहित अन्य भाजपा नेताओं के साथ दिल्ली में डेरा डालना और केवलारी नगर परिषद में अचानक से विधायक प्रतिनिधि देवी सिंह बघेल और उनकी धर्मपत्नी के विरोध में मोर्चा खोलना सयोंग नही हो सकता। सूत्र बताते है की भाजपा के वरिष्ठ नेता वेदसिंह ठाकुर सहित अन्य भाजपा नेता यह नहीं चाहते की राकेश पाल सिंह को दूसरी बार टिकिट मिले इसलिए उन्होंने अघोषित सिंडिकेट बना लिया और राकेश पाल सिंह के विरोध में माहौल बनाना शुरू कर दिया जो पार्टी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
केवलारी विधानसभा के लोगो ने वेदसिंह को दो बार नकारा
भाजपा के वरिष्ठ नेता वेद सिंह ठाकुर अपने सुपुत्र समीर ठाकुर को राजनीति में स्थापित करना चाहते है । वैसे पाठको को हम बता दें कि वेद सिंह ठाकुर को दो बार भाजपा ने केवलारी विधानसभा से मौका दिया और दोनो बार मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया। 1985 में भाजपा ने पहली बार वेदसिंह ठाकुर को केवलारी विधानसभा से टिकिट दिया था जबकि कांग्रेस ने श्रीमती विमला वर्मा को टिकिट दिया था तब श्रीमती विमला वर्मा को 29294 वोट मिले थे जबकि वेदसिंह ठाकुर को 9698 वोट मिले थे इस तरह वह पहला चुनाव 19596 वोटो से हार गए थे। बताया जाता है की पार्टी ने 2003 में एक बार फिर वेदसिंह ठाकुर के ऊपर विश्वास जताया था लेकिन वह पार्टी के विश्वास में खरा नहीं उतरे। 2003 में जब भाजपा की लहर थी तब वेदसिंह ठाकुर हरवंश सिंह से 8810 वोट से हार गए थे। 2003 के चुनाव में हरवंश सिंह को 46312 वोट मिले थे जबकि वेदसिंह ठाकुर को 37502 वोट मिले थे। वेदसिंह ठाकुर को दो बार मौका मिलने के बाद भी वह केवलारी विधानसभा से चुनाव नहीं जीत पाए जबकि राकेश पाल सिंह को 2018 में टिकट मिली थी और उन्होंने अपनी रणनीति के तहत चुनाव जीतकर कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर भाजपा का झंडा लहराया था। वर्तमान में वेदसिंह ठाकुर अपने सुपुत्र को टिकिट दिलाने दिल्ली के गलियारों में घूम रहे हैं, उनके करीबी हरिसिंह ठाकुर सार्वजनिक रूप से विधायक राकेश पाल के खिलाफ जहर उगल रहे हैं जो यह बताने के लिए काफी है कि वेदसिंह ठाकुर जैसे वरिष्ठ नेता केवलारी विधानसभा सीट से भाजपा को मजबूत करने के बजाय कमजोर करने में लगे हुए है जिसकी तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को ध्यान देना चाहिए।

नियम विरूद्ध वक्फ बोर्ड गठन के लिए अनुशंसा करने वाले भाजपा अध्यक्ष आलोक दुबे सहित 11 लोगों को हाईकोर्ट ने नोटिस किया जारी

लगभग एक महीने पहले जिला भाजपा अध्यक्ष आलोक दुबे की अनुशंसा से ग्राम पंचायत बोरदई के सरपंच आसिफ जरदारी की अध्यक्षता में जिला वक्फ बोर्ड का गठन किया गया था जिसमें उपाध्यक्ष शफीक पटेल झालोन, सचिव शहजाद  बेग बोरदई, कोषाध्यक्ष निसार खान गोरखपुर, एवे तीन सदस्य के रूप में अकील खान भगत सिंह वार्ड, हैदर शाह विश्वकर्मा बिल्डिंग कस्तूरबा वार्ड एवं मोहम्मद नूमान बोरदई को शामिल किया गया था तब दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने 26 अगस्त 2023 को ‘आलोक दुबे ने नियम विरूद्ध बनवा दिया जिला वक्फ बोर्ड कमेटी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि अपने करीबी मित्र और व्यवसायिक पार्टनर दीवान शाद अली के साथ मिलकर जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे ने नियमों को दरकिनार करते हुए आसिफ जरदारी की अध्यक्षता वाली जिला वक्फ बोर्ड कमेटी का गठन करते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। समाचार में उल्लेख किया गया था कि वक्फ एक्ट 1995 संशोधन 2014 की धारा 18 (1)(2) में प्रदाय अधिकार के तहत जिला वक्फ कमेटी मध्यप्रदेश के गठन और उसकी जिम्मेदारी के लिए कुछ नियम बनाये गये हैं जिसमें उक्त नियम के तहत लगभग 7 ऐसे सदस्यो को शामिल करना होता है जो विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं। नियम अनुसार किसी भी जिला वक्फ बोर्ड कमेटी में पार्षद/ जिला, जनपद सदस्य, स्थानीय संस्थाओ के चुने गये जनप्रतिनिधि का होना आवश्यक होता है जो आसिफ जरदारी है। इसके अलावा तहसील/ जिला अभिभाषक सदस्य यानि की किसी अधिवक्ता का होना आवश्यक होता है, इसके अलावा एक धार्मिक विद्वान, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा हुआ एक शिक्षाविद, शासकीय अधिकारी या कर्मचारी, शिया/बोहरा समुदाय का एक व्यक्ति एवं एक समाजसेवी का होना आवश्यक होता है लेकिन आलोक दुबे की अनुशंसा से बनाई गई जिला वक्फ बोर्ड कमेटी ने इस नियम का पालन नहीं किया, इस मामले को लेकर जिला वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष शोएब राजा ने उच्च न्यायालय में रिट पिटीशन दायर किया जिसे संज्ञान में लेते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल ने जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे सहित एमपी वक्फ बोर्ड भोपाल के सीईओ एवं अध्यक्ष सन्नवर पटेल, जिला कलेक्टर जिला वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष आसिफ जरदारी, जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे, जिला वक्फ बोर्ड के उपाध्यक्ष शफीक पटेल सहित 11 लोगों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। देखना यह है कि उच्च न्यायालय के द्वारा नोटिस जारी किये जाने के बाद वक्फ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष सन्नवर पटेल, सीईओ जिला कलेक्टर सहित जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे क्या जवाब देते है।

06 साल के लिए चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य घोषित हो चुकी है राजेश्वरी उइके

सिवनी महाकौशल। सरपंच जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए राजेश्वरी उईके ने अपने पुत्र प्रशांत उईके के सहयोग से शासकीय भवन को तोडक़र कब्जा तो करवा लिया था लेकिन उनकी यही तानाशाही उन्हें भारी पड़ गई थी। बताया जाता है की न्यायालय नायब तहसीलदार वृत धूमा ने शासकीय जमीन पर कब्जा कर अवैध निर्माण कार्य में रोक लगाते हुए कब्जा खाली करने का आदेश 26/09/2015 को जारी किया था। सरपंच पद का दुरुपयोग करते हुए राजेश्वरी उईके ने काम नही रोकने दिया। बताया जाता है की सरपंच के इस कृत्य को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की न्यायलय ने गंभीरता से लिया था। तत्कालीन एसडीएमआई जे खालको ने 29/11/2016 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए आदेश दिया था कि श्रीमती राजेश्वरी उईके को ग्राम पंचायत धूमा के धारित सरपंच पद पर बनाए रखना लोकहित व शासन हित में अवांछिनी होने के कारण मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40(1) में निहित प्रावधानों के तहत ग्राम पंचायत धूमा के सरपंच पद से पृथक किया जाता है एवं इसी अधिनियम की धारा 40(2) में वर्णित प्रावधानों के तहत आगामी 6 वर्षों की कालावधि के लिए निर्वाचन के लिए निर्हित( आयोग्य) घोषित किया जाता है।
गौरतलब है की परियोजना प्रशासक कार्यालय लखनादौन के आदेश क्रमांक 693/स्टेनो/ दिनांक 24/11/1999 के द्वारा  एसके तंतुवाय प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धूमा एवं राजेश्वरी ऊईके के पति ओपी उईके जो उस समय कन्या आश्रम चौकी में अधीक्षक के पद पर पदस्थ थे उन्हें आवासीय प्रयोजन के लिए दी गई थी। जब राजेश्वरी उईके सरपंच बनी तो उन्होंने पद का दुरुपयोग कर उक्त शासकीय मकानों को सक्षम अधिकारी से अनुमति लिए बिना तोडक़र कब्जा जमाने का प्रयास किया था। इस मामले में ग्राम पंचायत धूमा की सरपंच राजेश्वरी उइके के ऊपर धारा 40 के तहत कार्यवाही करते हुए उन्हें 06 साल के चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य करार दिया गया था। यदि भारतीय जनता पार्टी राजेश्वरी उइके जैसी विवादित महिला नेत्री के ऊपर विश्वास व्यक्त करती है तो भाजपा को कांग्रेस के सवालों का जवाब देते नहीं बनेगा। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोर विरोधी संजय जोशी गुपचुप आये सिवनी

संघ के प्रचारक रहे संजय जोशी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोधी कहा जाता है जो मध्यप्रदेश में उस समय चर्चाओं में आये थे जब 2005 में शिवराजसिंह चौहान को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका था। बताया जाता है कि उस समय संजय जोशी मध्यप्रदेश में बीजेपी के संगठन महामंत्री थे जिन्होंने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था लेकिन 2005 में ही मुंबई में बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन से ठीक पहले संजय जोशी के सेक्स स्केंडल की सीडी सामने आई थी जिसके बाद संजय जोशी का राजनैतिक कैरियर लगभग समाप्त हो गया। संजय जोशी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का घोर विरोधी भी कहा जाता है जिसके चलते संजय जोशी वर्तमान में सक्रिय राजनीति से दूर हो गये। गुरूवार को संजय जोशी का गुपचुप सिवनी आगमन हुआ जिनकी अगुवाई करने के लिए पेट्रोल पंप संचालक एवं भाजपा के नेता जो वर्तमान में भाजपा से दूरियां बना रहे हैं उन्होंने किया था। बताया जाता है कि सर्किट हाऊस में संजय जोशी का स्वागत करने के लिए सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन भी पहुंचे थे और उन्होंने संजय जोशी का स्वागत किया। सर्किट हाऊस में कुछ चुनिंदा लोगो के बीच संजय जोशी काफी देर तक रहे इस बीच श्री जोशी एवं सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन व हरिसिंह ठाकुर के बीच क्या चर्चा हुई इसका तो पता नहीं चल सका लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोर विरोधी संजय जोशी से सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन का मिलना राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं को जन्म दे गया।

जिन्होंने रामकथा कराया उनके आचरण से तो कहीं नहीं लगता कि उन्होंने भगवान श्रीराम के आचरण को स्वीकार किया हो: खुराना

पॉलिटेक्निक मैदान में आयोजित रामकथा कथा कम, प्रचार ज्यादा लग रही थी
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अपने पिता की आज्ञा का सम्मान करते हुए अपने परिवार के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। मेरा मानना है कि जिस व्यक्ति के भीतर भगवान राम का आचरण दिखाई देता हो वह रामकथा सुनने और कराने का अधिकारी होता है लेकिन जिन्होंने रामकथा कराया उनके आचरण से तो कहीं नहीं लगता कि उन्होंने भगवान श्रीराम के आचरण को स्वीकार किया हो। उक्ताशय की बात गत दिवस ब्रह्मलीन जगदगुरू स्वामी शंकराचार्य जी महाराज के जन्म शताब्दी समारोह में दिघौरी पहुंचे जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा।
सिवनी महाकौशल 20 सितं. 2023
कार्यक्रम में मौजूद मीडिया के लोगो ने श्री खुराना से पूछा कि हाल ही में सिवनी नगर में श्री रामकथा का आयोजन किया गया था जिसे आप किस रूप में देखते है तो श्री खुराना ने कहा की उक्त रामकथा कथा कम और प्रचार ज्यादा लग रही थी। ऐसा महसूस हो रहा था की श्री रामकथा व्यक्ति विशेष का कार्यक्रम बन गया है जहां से बार-बार उन्हें जिताने और मंत्री बनवाने की बात की जा रही थी। राजकुमार खुराना ने कहा कि भगवान राम ने जो जीवन में किया और और जो लोग उनके आचरण को जीवन में उतारते है उन्हे श्रीराम कथा सुनने और कराने का अधिकार है। जिन्होंने राम कथा कराया उनके चरित्र से कहीं भी श्री राम का आचरण नहीं दिखता। जब श्री ख्ुाराना से यह पूछा गया कि आप यह किस आधार पर कह रहे है तो उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए परिवार के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि श्री रामकथा के आयोजक का पारिवारिक विवाद किसी से छुपा नहीं है श्री खुराना ने यह भी कहा कि हो सकता है स्वामी भद्राचार्य महाराज जी से यह सब बाते छुपाई गई हो । जब मीडिया ने उनसे कहा की ऐसी चर्चा है कि श्री रामकथा का आयोजन करने वाले शराब के व्यवसाय से जुड़े हुए है तो उन्होंने कहा की यह बात सभी लोग जानते है कि आयोजक का व्यवसाय शराब सहित अन्य काम है लेकिन मुझे लगता है की आयोजक ने स्वामी भद्राचार्य महाराज जी को अपने बारे में जानकारी नहीं दिया यदि उन्हें जानकारी होती तो मुझे ऐसा लगता है की वह श्री रामकथा करने के लिए तैयार नहीं होते। श्री खुराना ने यह भी कहा कि रामकथा आयोजित कर व्यक्ति विशेष का प्रचार कराने का प्रयास किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मंच से स्वामी रामभदा्राचार्य ने जगदगुरू स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का आचरण कांग्रेसी बताया था, इस मामले में आपने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया तब राजकुमार खुराना ने कहा कि मैं धर्म के मामले में बहुत अधिक जानकार नही हू। स्वामी रामभद्राचार्य विद्वान और धर्माचार्य है और उनके कई भक्त है जिनका मैं सम्मान करता हूं।
श्री खुराना ने कहा कि चूंकि जगदगुरू स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज एक ऐसे शंकराचार्य हुए है जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाइ लड़ा था और जेल गये थे उस समय सिर्फ कांग्रेस ही थी जिसके बेनर तले आजादी की लड़ाई हुआ करती थी। महाराज श्री के संबंध में इस तरह का आरोप निंदनीय है उन्होंने कहा कि महाराजश्री के शिष्यों में सभी पार्टी के लोग शामिल है और महाराज श्री ने कभी भी सार्वजनिक मंच से पार्टी विशेष के लिए कोई प्रचार प्रसार नहीं किया।
गौरतलब है कि पॉलिटेक्निक मैदान में 09 सितम्बर से लेकर 18 सितम्बर तक स्वामी भद्राचार्य जी महाराज की श्री रामकथा का आयोजन किया गया था। आयोजन के दौरान उन्होंने सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन को जिताने की अपील करते हुए कहा था की मैं उन्हे कैबिनेट मंत्री बनवाऊंगा। उक्त कार्यक्रम उस समय ज्यादा विवादो में आ गया था जब सार्वजिनक मंच से जगत गुरु स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के बारे में कहा था की वह आचरण से कांग्रेसी थे जिसके बाद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने आयोजको को आड़े हाथों लिया और अब जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने बेबाकी से अपनी बात रखते हुए आयोजक की नियत में ही सवाल खड़ा कर दिया जिसका जवाब आज तक आयोजक के द्वारा देते हुए यह नहीं बताया गया कि जगत गुरु स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के संबंध में कही गई बातों का वह समर्थन करते है या सार्वजिंक रूप से खंडन करते है।

सरपंच रहते राजेश्वरी उइके ने परिवार से शासकीय जमीन पर कराया था कब्जा

सिवनी महाकौशल। दल बदलने में माहिर राजेश्वरी उईके लखनादौन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की टिकिट मांग रही है। श्रीमती राजेश्वरी उईके के कुछ समर्थक यह दंभ भर रहे है की पार्टी ने उन्हें संकेत भी दे दिए है जबकि हकीकत यह है की पार्टी के स्थानीय नेता इस बात को अच्छी तरह से जानते है कि यदि भाजपा राजेश्वरी उईके को टिकिट देती है तो पार्टी को घेरने के लिए कांग्रेस के पास कई मुद्दे हो जाएंगे जिसका जवाब दे पाना पार्टी के बड़े नेताओं के साथ-साथ स्थानीय नेताओं के लिए भी मुश्किल होगा।
सरपंच रहते परिजनों से करवा लिया था शासकीय जमीन में कब्जा
एक तरफ तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार शासकीय जमीनों में कब्जा करने वाले भूमाफियाओ के विरूद्ध मोर्चा खोला हुए है तो वहीं दूसरी तरफ लखनादौन विधानसभा से पूर्व सरपंच राजेश्वरी उइके टिकिट मांग रही है जिनका नाम भी शासकीय जमीन के कब्जे के मामले से जुड़ चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत धूमा में जब श्रीमती राजेश्वरी उईके सरपंच थी तब उनके पुत्र प्रशांत पिता ओमप्रकाश के द्वारा शासकीय शिक्षक आवास को तुड़वाकर शासकीय भूमि में कब्जा किया गया था जिसकी गूंज न्यायालय तक गूंजी थी। बताया जाता है की ग्राम धूमा में ख. न 464 रकबा 0.19 हेक्टेयर मद आबादी में रकबा 61325 व 19325 क्षेत्रफल में शिक्षक आवास गृह बना हुआ था जो जर्जर अवस्था में पहुंच गया था बताया जाता है कि ग्राम पंचायत धूमा की सरपंच राजेश्वरी उइके के पुत्र ने अपनी मां के सरपंच होने का फायदा उठाते हुए उक्त शासकीय भवन को तुड़वाकर उसका अस्तित्व समाप्त कर लिया था और इसका मटेरियल मौके पर रख लिया था जिसकी शिकायत नायब तहसीलदार न्यायालय में की गई थी। बताया जाता है की 09 फरवरी 2016 को न्यायालय नायब तहसीलदार ने राजेश्वरी उईके के पुत्र प्रशांत उईके के उपर 2 हजार का अर्थदंड लगाते हुए  आदेश दिया था कि एक सप्ताह के भीतर उक्त शासकीय संपत्ति से कब्जा हटाते हुए अर्थदंड की राशि जमा करें और ऐसा नहीं किए जाने की स्थिति में बलपूर्वक उक्त कब्जा को हटाया जाएगा या सिविल कारागार की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। बताया जाता है कि न्यायालय तहसीलदार के द्वारा आदेश जारी होने के बावजूद राजेश्वरी ऊईके के पुत्र ने उक्त आदेश को नहीं माना था। बताया तो यह भी जाता है कि उक्त आदेश के विरुद्ध राजेश्वरी उइके के परिवार ने अपर न्यायालय में भी अपील किया था लेकिन हर न्यायालय से उनकी अपील खारिज हो गई थी। इस बीच राजेश्वरी उइके ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया जिसके कारण उनके ऊपर होने वाली कार्यवाही शिथिल पड़ गई। स्थानीय नेता इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि यदि राजेश्वरी उइके के बारे में पार्टी में विचार करेगी तो कांग्रेस यही सवाल उठायेगी कि चाल चरित्र और चेहरे की बात करने वाली पार्टी के पास बेदाग चेहरे नहीं है जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी दागदार चेहरो को प्रत्याशी बना रही है, ऐसे में देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी राजेश्वरी उइके जैसी विवादित नेत्री को लेकर कितनी गंभीर होती है।

विधायक राकेश पाल सिंह की उम्मीदों में खरा नहीं उतरे देवीसिंह बघेल

भाजपा के वरिष्ठ नेता देवीसिंह बघेल को खुद की ना सही लेकिन विधायक राकेश पाल सिंह की राजनीति की चिंता करना चाहिए था जिन्होंने सुनीता बघेल के नाम का विरोध होने के बावजूद उन्हें अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया था। नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव तीन लोगों के बीच में हुआ जिसमें राकेश पाल सिंह की रणनीति के चलते सुनीता बघेल एक वोटो से जीत गई। राकेश पाल सिंह ने इस उम्मीद से सुनीता बघेल के पति देवी सिंह बघेल को विधायक प्रतिनिधि बनाया था कि 1 साल में वह नगर परिषद केवलारी में इतना काम कर देंगे कि विधानसभा चुनाव में उन्हें आसानी होगी लेकिन राकेश पाल सिंह के विश्वास में देवी सिंह बघेल खरा नहीं उतरे।
देवी सिंह बघेल की पत्नी श्रीमती सुनीता बघेल को जैसे ही नगर परिषद का अध्यक्ष बनाया गया वैसे ही देवी सिंह बघेल ने नगर परिषद में मनमर्जी चलाना शुरु कर दिया। बताया जाता है की देवीसिंह बघेल की मनमर्जी के कारण ही पूर्व में ना तो कोई सीएमओ केवलारी में काम करने तैयार हुआ और ना ही कोई तकनीकी अधिकारी काम कर पाया। केवलारी नगर परिषद के कुछ कामों के लिए टेंडर अवश्य पास हुए लेकिन ठेकेदारों ने भी परेशान होकर काम करने में आस्मर्थता जाता दिया। स्थिति यह हो गई कि वर्तमान में केवलारी नगर परिषद में कई काम अधूरे पड़े है और आधे से ज्यादा काम शुरू भी नहीं हुए। सूत्र बताते है कि श्रीमती सुनीता बघेल के अध्यक्ष बनते ही केवलारी नगर परिषद में परिवारवाद चलने लगा। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि जिन ठेकेदारों ने अलग-अलग कामों का ठेका लिया था उन ठेकेदारों के ऊपर यह दबाव डाला जाता था कि वह देवी सिंह ठाकुर के रिश्तेदारों से काम कराए। बताया जाता है कि देवीसिंह ठाकुर और उनकी धर्मपत्नी के द्वारा नगर परिषद केवलारी में मनमर्जी चलाई जा रही थी जिससे परेशान होकर कुछ ठेकेदारों ने काम करने से ही मना कर दिया। लगभग एक साल से परिषद के पार्षद अध्यक्ष और उनके पति की मनमर्जी झेल रहे थे लेकिन जब स्थिति बेकाबू होने लगी तब पार्षदों ने मोर्चा खोल लिया।
 छवि धूमिल करने के बाद इस्तीफा देने का औचित्य क्या
विधायक प्रतिनिधि देवीसिंह बघेल के ऊपर भ्रष्टाचार और नगर परिषद में मनमर्जी चलाने का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने एसडीएम के नाम से ज्ञापन सौंपा जिसके बाद देवीसिंह बघेल ने इस्तीफे की पेशकश किया लेकिन अब उनके इस्तीफे से कुछ फर्क नही पडऩे वाला। एक साल में उन्होंने विधायक राकेश पाल की छवि में बट्टा लगा दिया। अब विधायक के सामने केवलारी नगर में अपनी छवि सुधारना बड़ी चुनौती होगी।

खेलो एमपी यूथ गेम में खिलाडिय़ों को नही मिल रही मूलभूत सुविधाएं

सिवनी महाकौशल 18 सितं. 2023
इन दिनों मध्य प्रदेश में खेलो एमपी यूथ गेम का आयोजन किया गया है। बताया जाता है कि उक्त आयोजन ब्लॉक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक आयोजित किया गया है जिसमें शासन के द्वारा भारी भरकम राशि भी स्वीकृत की गई है। बताया जाता है कि उक्त पूरी स्पर्धा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है जिसके लिए राज्य शासन ने ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर में राशि भी जारी किया है इन दिनों सिवनी मुख्यालय में भी जिला स्तरीय खेल स्पर्धा आयोजित किया गया है लेकिन खेल एवं युवा कल्याण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की निष्क्रियता के चलते खेल में भाग लेने वाले खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश में लगभग 18 साल से कम आयु के खिलाड़ी जिसमे छात्र एवम छात्राएं शामिल है उन्होंने भाग लिया है। ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएं 12 से 14 सितम्बर तक आयोजित की गई थी। वर्तमान में 16 से 18 सितम्बर तक जिला स्तरीय खेल का आयोजन सिवनी मुख्यालय में रखा गया है। बताया जाता है की खेलो एमपी यूथ गेम में 18 खेलो का आयोजन किया गया है जिसके लिए शासन के द्वारा ब्लॉक स्तर में आयोजन के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 12 हजार रू. स्वीकृत किया गया है वहीं जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए 17 हजार रू. स्वीकृत किया गया है। बताया जाता है की सिवनी में इंडोर और आऊटडोर खेल प्रतियोगिताएं हो रही है जिसमें आसपास ब्लॉक के खिलाड़ी पहुंचे हैं जिन्हें ना तो खाने के लिए बेहतर भोजन मिल पा रहा है और ना ही साफ-सुथरा पानी मिल पा रहा है जिसकी तरफ कोई भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा। चूंकि खिलाड़ी ब्लॉक स्तर से पहुंचे है इसलिए कोई भी खिलाड़ी खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा लेकिन सूत्र बताते है कि बच्चों को भोजन पानी सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते खिलाडिय़ों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

रात में मदद करने के बजाय 100 डायल के जवानों ने युवक को पीटा,

मध्यप्रदेश में 100 डायल योजना संचालित होती है जिसे कभी भी मदद के लिए बुलाया जा सकता है लेकिन 100 डायल में भी कई ऐसे कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी जाती है जो खुद कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सिवनी शहर में सामने आया। बताया जाता है कि इन दिनों सोशल मीडियो में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक युवक घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है जो यह कहते सुनाई दे रहा है कि उसका नाम आलोक यादव है और वह बम्हनी बंजर वार्ड क्र. 2 का रहने वाला है। पीडि़त की माने तो शुक्रवार को वह बस से सिवनी आया था, रात लगभग 12 बजे वह प्रायवेट बस स्टैण्ड की तरफ जा रहा था तभी 100 डायल में सवार कर्मचारियों ने उसे रोका और नाम पता पूछा तो उसने नाम व पता बताया तभी 100 डायल में सवार कर्मचारियों ने उसके साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। पीडित युवक आलोक यादव की माने तो वह पीटने वाले कर्मचारियों से बार बार गुहार लगा रहा था कि आप मुझे थाना ले जा लो लेकिन मारो नहीं, बावजूद इसके उनका दिल नहीं पसीजा और उन्होंने आलोक यादव को इतना पीटा कि वह बेहोश हो गया। सुबह जब उसे होश आया तो उसने किसी तरह अपने जीजा को फोन लगाया जिसके बाद आलोक को अस्पताल ले जाया गया जहां उसका उपचार चल रहा है। बताया जाता है कि वीडियो बनाने वाले लोगों ने घायल युवक से बार बार पूछा कि जिस वाहन के लोगों ने तुम्हे पीटा था तुम्हे पक्का मालूम है कि वह 100 डायल थी तब युवक ने कहा कि जब वह जा रहा था 100 डायल अंधेरे में खड़ी थी जिससे कुछ कर्मचारी उतरे और उसके साथ मारपीट किया। इस घटना के बाद देखना यह है कि जिले के कप्तान इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को 100 डायल में ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की भूमिका की कब तक जांच कराते हैं?

960 करोड़ की साउंड प्रूफ हाइवे में दरार के मामले में क्यों मौन है सांसद बिसेन

सिवनी-बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉक्टर दलसिंह बिसेन एक ऐसे नेता है जो पत्र लिखकर अपनी राजनीति चमकाने के मामले में माहिर है। सांसद ढालसिंह बिसेन के बारे में यह भी कहा जाता है कि केंद्र सरकार से मिलने वाली उपलब्धि का श्रेय लेने का वह कोई मौका नहीं छोड़ते लेकिन जब केंद्र की योजनाओं में घटिया काम, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठते है तो वह चादर तान कर सो जाते है। पिछले दो दिनों से मोहगांव से खवासा तक लगभग 960 करोड़ की लागत से बने पहले साउंड पू्रफ हाइवे में दरार आने का मामला सामने आया। कांग्रेस ने इसे 50 प्रतिशत कमीशन वाली सरकार का कारनामा बताया लेकिन छोटी-छोटी सौगात में बड़ा श्रेय लेकर विज्ञप्ति छपवाने वाले सांसद ढालसिंह बिसेन पूरी तरह मौन धारण किए हुए है। जबकि जिस जगह हाइवे में दरार आई है वह बालाघाट सिवनी संसदीय क्षेत्र का ही हिस्सा है।  
कांग्रेस के आरोपों का भी नही दे पा रहे जवाब
वर्तमान में सिवनी जिले की भाजपा हाइवे में आई दरार के मामले में बैकफुट में नजर आ रही है। गत दिवस जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि 100 साल की गारंटी वाला साउंड पू्रफ हाईवे जरा सी बारिश में बिखर गया उन्होंने कहा कि पूरे देश में आज 50 प्रतिशत कमीशन वाली मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार का हल्ला मचा हुआ है, हर दिन एक नया भ्रष्टाचार की खबरें सुनने को मिल रही है जिससे सिवनी जिला भी अछूता नहीं है जहां करोड़ों अरबो रुपए के कार्यों में भ्रष्टाचार किया गया है।  राजकुमार खुराना के द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति का जवाब समाचार लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी नहीं दे पाई जबकि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता कांग्रेस की विज्ञप्ति जारी होते ही उसका खंडन देने बड़ी बड़ी विज्ञप्ति जारी कर देते हैं लेकिन लगभग 960 करोड़ की लागत से बने 29 किमी बने साउंड पू्रफ हाइवे में दरार के मामले में भारतीय जनता पार्टी का कोई भी नेता सामने आकर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा या यूं कहे कि संबंधित ठेकेदार के विरोध में वह आवाज उठाने से डर रहा है।

क्या दिलीप बिल्डकॉन को बुलडोजर से सडक़ के नीचे गाढ़ेंगे नितिन गडकरी

सिवनी महाकौशल। मोहगांव से खवासा के बीच 29 किलो मीटर की सडक़ लगभग 960 करोड़ रू. की बनाई गई है जिसमे 3,145 मीटर लंबाई के 14 अंडर पास ब्रिज है जिसका लोकार्पण आज से ठीक 2 साल पहले 16 सितंबर 2021 को केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। बताया जाता है की उक्त सडक़ में प्रति किलोमीटर 33 करोड़ 10 लाख की लागत आई। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 में मोहगांव से खवासा तक बनाई गई साउंड पु्रफ हाइवे के लोकार्पण के समय कहा जा रहा था कि यह तकनीक और इंजीनियरिंग की शानदार मिसाल है जिसे सौ साल भी कुछ नही होगा लेकिन दो साल में ही एनएचएआई के कुछ हिस्से में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई जो यह बताने के लिए काफी है कि नितिन गडकरी के विभाग में भी भ्रष्टाचार की दीमक लगी हुई है।
क्या ठेकेदार को गाढ़ेंगे नितिन गडकरी
केंद्रीय सडक़ भूतल मंत्री नितिन गडकरी अक्सर सार्वजनिक मंचों से ठेकेदारों और अधिकारियों को चेतावनी देते नजर आते हैं। अगस्त 2023 को नागपुर में आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम में जब उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस मंच में मौजूद थे तब नितिन गडकरी ने ठेकेदारों -अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था की यदि ठेकेदारों ने घटिया काम किया तो बुलडोजर उनके ऊपर चलेगा। मई 2018 को नितिन गडकरी बैतूल पहुंचे थे जहां उन्होंने तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले असंगठित मजदूरों की सभा को संबोधित करते हुए ठेकेदारो को चेतावनी दिया था कि यदि कोई ठेकेदार घटिया काम करता है तो बुलडोजर के नीचे गिट्टी की जगह आपको डाल दूंगा। ऐसा ही कुछ नवंबर 2022 को पूर्वोत्तर राज्य जिसमें त्रिपुरा, अरूणांचल प्रदेश, मिजोरम और मणिपुर में राष्ट्रीय परियोजना की समीक्षा करते हुए ठेकेदारों को चेताया था। सवाल यह उठता है कि मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में मोहगांव से लेकर खवासा तक 960 करोड़ की लागत से 29 किलोमीटर सडक़ बनाने वाली दिलीप बिल्डकॉन कंपनी को वादा अनुसार नितिन गडकरी बुलडोजर से दबाएंगे या फिर उन्हे अभय दान दिया जाएगा जैसा कि पहले भी होता रहा है। 960 करोड रुपए की लागत से लगभग 29 किलोमीटर की मोहगांव से खवासा तक सडक़ बनाने वाले दिलीप बिल्डकॉन कंपनी के मालिक अपने आपको मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी बताते हैं इसलिए उनके ऊपर बुलडोजर चलाना नितिन गडकरी के लिए शायद मुश्किल काम होगा हालांकि जो लोग नितिन गडकरी को जानते हैं उनकी माने तो नितिन गडकरी साफगोई से बात करते हैं और जो कहते हैं वह करते हैं ऐसे में सबकी नजर नितिन गडकरी के ऊपर टिकी हुई है। देखना यह है कि लगभग 960 करोड़ की लागत से बनाए गए नेशनल हाईवे में दरार आने के बाद श्री गडकरी ठेकेदार के साथ-साथ किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हैं और उनके ऊपर क्या कार्रवाई करते हैं फिलहाल नेशनल हाईवे से गुजरना लोगो के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

भाजपा के कार्यक्रम में क्या करने गये थे सरपंच नदीम?

सिवनी महाकौशल।
11 सितंबर को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान महावीर मढिया में भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने मैली के सरपंच और जिला कांग्रेस के महामंत्री बनाए गए नदीम खान को पहले हार पहनाया और बाद में भाजपा का गमछा डाल दिया। भाजपा के नेता एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनुसूचित जाति मोर्चा राजेश डेहरिया ने उसी दिन अपनी फेसबुक में उक्त फोटो अपलोड भी कर दिया था लेकिन तब नदीम खान को कोई आपत्ती नही हुई और ना ही उन्होंने विरोध दर्ज कराया। जब दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने 12 सितंबर को ‘जिला कांग्रेस के महामंत्री ने थामा भाजपा का दामन’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया जिसके बाद मैली के सरपंच नदीम खान को एहसास हुआ कि तीन दिन पहले उनके ऊपर असमाजिक तत्वों ने भाजपा का गमछा डाला था जिसके बाद 14 सितम्बर को उन्होंने जिला कांग्रेस के प्रवक्ता जेपीएस तिवारी के हवाले से विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि कुछ दिन पूर्व सोशल मीडिया पर सामाजिक तत्वों के द्वारा ग्राम मैली के सरपंच जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री नदीम खान को भाजपा का जबरदस्ती गमछा डालकर यह अफवाह फैला दी गई कि नदीम खान ने भाजपा की सदस्य ग्रहण कर लिया है। इस पूरे मामले को लेकर जब दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने जानकारी एकजुट करने का प्रयास किया तो पता चला कि नदीम खान पूर्व में भी भाजपा के कार्यक्रमो में जाते रहे है। 22 अगस्त 2023 को कोहिनूर लॉन में प्रवासी विधायक प्रताप अड़सठ का आगमन हुआ था तब भी नदीम खान उक्त कार्यक्रम में पहुंचे थे जिन्हें फूल माला व भाजपा का गमछा पहनाकर भाजपा जिलाध्यक्ष आलोक दुबे ने स्वागत किया था। उक्त कार्यक्रम के ठीक 20 दिन बाद नदीम खान का राजेश त्रिवेदी, राजेश डहेरिया ने महावीर मढिय़ा के पास फूल हार और गमछा डालकर स्वागत किया जिसमें कोई नई बात नहीं थी लेकिन जिला कांग्रेस के महामंत्री नदीम खान ने यह विज्ञप्ति जारी कर दिया कि असामाजिक तत्वों ने उसके ऊपर गमछा डालकर झूठा प्रचार प्रसार शुरू कर दिया।
दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने समाचार प्रकाशन के बाद राजेश डहेरिया ने दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस को भेजी विज्ञप्ति में बताया कि महावीर मढिय़ा में जनआर्शीवाद यात्रा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओ के साथ साथ जनपद अध्यक्ष किरण भलावी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे जहां परंपरा अनुसार सभी के गले में भाजपा का गमछा डाला गया था, यदि नदीम को आपत्ति थी तो तुरंत आपत्ति जताना था। श्री डहेरिया ने यह भी कहा कि जब उक्त कार्यक्रम में भाजपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारी थे तो नदीम कार्यक्रम में पहुंचे? श्री डहेरिया ने कहा कि नदीम खान अपनी खुशी से कार्यक्रम में आये थे और खुशी खुशी स्वागत कराया था, उनकी खुशी फोटो से सिद्ध होती है। उन्होंने यह भी कहा कि नदीम खान भाजपा के कई गु्रपो से जुड़े है, यदि वह कांग्रेसी है तो भाजपा के कार्यक्रमो में क्यों जा रहे हैं और जब उन्हें माला या गमछा पहनाया जाता है तो मना क्यों नहीं करते?

लोकार्पण के ठीक 02 साल के भीतर देश के पहले साउंड पू्रफ हाइवे में आई दरार

16 सितम्बर 2021 को नितिन गडकरी ने मोहगांव से खवासा तक बने साउंड पू्रफ हाइवे का किया था लोकार्पण
सिवनी महाकौशल। आज से ठीक 2 साल पहले 16 सितंबर 2021 की शाम खवासा के टोल प्लाजा के पास मानसी पायल रिसोर्ट में एनएच 44 में बने पहले साउंड पू्रफ हाईवे के लोकार्पण का वर्चुअल कार्यक्रम रखा गया था। उक्त कार्यक्रम में बतौर अतिथि नितिन गडकरी केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राज्य मार्ग, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय पंचायत राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिकता मंत्री डॉक्टर वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते केंद्रीय राज्य सडक़ परिवहन मंत्री बीके सिंह सांसद डॉक्टर ढालसिंह बिसेन एवं विधायक अर्जुनसिंह काकोडिय़ा को बतौर अतिथि रखा गया था उक्त कार्यक्रम में बाकायदा बड़ी एलइडी की व्यवस्था भी कराई गई थी। लगभग 968 करोड़ की लागत से बने साउंड पू्रफ हाईवे के निर्माण के समय यह दम भरा जा रहा था कि उक्त साउंड पू्रफ हाईवे एक मजबूत सडक़ बनाई गई है जिससे ना तो जानवरों को परेशानी होगी और ना ही अन्य किसी को यह भी दम भरा जा रहा था कि उक्त सडक़ के लिए तकनीकी अधिकारियों और ठेकेदार ने शानदार मिसाल कायम किया है और चमचमाती हुई सडक़ व ओवरब्रिज बनाये गये है लेकिन 2 साल के भीतर ही तकनीकी अधिकारियों और ठेकेदार की गुणवत्ता की पोल खुल गई। 16 सितंबर 2021 को लोकार्पण हुआ था और लोकार्पण के ठीक 2 साल बाद 15 सितंबर 2023 को साउंड प्रुफ हाईवे की पोल खुल गई जहां बड़ी-बड़ी दरारें आ गई और उक्त सडक़ सवालों के घेरे में आ गई। बताया जाता है कि बीती रात से तेज बारिश हो रही है बारिश के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया इसी बीच मोहगांव से खवासा के बीच कुरई घाटी के पुल में बड़ी-बड़ी दरें साफ तौर से नजर आई जिसके बाद सोशल मीडिया में बहस भी शुरू हो गई और भाजपा सरकार के ऊपर 50 प्रतिशत कमीशन के आरोप भी लगने लगे। बताया जाता है कि लगभग 968 करोड़ की लागत से हाईवे निर्माण का ठेका दिलीप बिल्डकॉन कंपनी ने लिया था। उक्त कंपनी ने कितनी ईमानदारी के साथ काम किया यह बारिश में आई दरार से स्पष्ट होता है। बहरहाल देखना यह है कि इस पूरे मामले को एनएचएआई के मंत्री नितिन गडकरी कितनी गंभीरता से लेते हैं फिलहाल 960 करोड़ का काम सवालो के घेरे में आते दिखाई दे रहा है। 

अब तक मेडिकल कॉलेज नहीं हुआ हेंडओवर

सिवनी महाकौशल। गत दिवस जिले के कलेक्टर क्षितिज सिंघल निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान जिला कलेक्टर क्षितिज सिंघल ने मेडिकल कॉलेज की विभिन्न शाखाओ में संचालित कार्यो का भौतिक रूप से अवलोकन कर आवश्यक दिशा निर्देश निर्माण एजेंसी को दिये। इस अवसर पर क ार्यपालन यंत्री पीआईयू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। वैसे इससे पहले 10 जुलाई को सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन ने सिवनी के मीडियाकर्मियों को निरीक्षण के लिए मेडिकल कॉलेज ले गये थे जहां मीडियाकर्मियों ने कॉलेज का निरीक्षण किया था। इस दौरान सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन, जिला भाजपा अध्यक्ष आलोक दुबे सहित अन्य भाजपा नेता भी मौजूद थे जहां निर्माण एजेंसी के तकनीकी अधिकारियों ने पत्रकारों की मौजूदगी में विधायक दिनेश राय मुनमुन से कहा था कि  मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग लगभग तैयार हो चुकी हो चुकी है जिसे हम अगस्त के महीने में हेंडओवर कर देंगे वहीं हॉस्टल भी लगभग तैयार है तब मीडिया के लोगो ने आश्चर्य व्यक्त किया था कि लगभग 36 एकड़ भूमि में 300 करोड़ की लागत से बने मेडिकल कॉलेज को इतनी जल्दी कैसे हैंडओवर कैसे किया जा सकता है? लेकिन तकनीकी अधिकारियों ने पूरा विश्वास जताया था तब महाकौशल एक्सप्रेस ने 10 जुलाई को ही ‘अगस्त महीने में मेडिकल कॉलेज हो जायेगा हेंडओवर’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि लगभग 300 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज का निर्माण मार्च 2022 में शुरू हुआ था जिसे अगस्त 2023 में हेंडओवर किये जाने की बात की जा रही है लेकिन यह भी एक जुमला ही साबित हुआ। निर्माण एजेंसी के तकनीकी अधिकारियों ने अब तक उक्त मेडिकल कॉलेज हैंडओवर नही किया और ना ही सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन ने यह जानने का प्रयास किया कि मीडिया के सामने उन्होंने जो कहा था वह क्यों नहीं किया? कुल मिलाकर वर्तमान में मेडिकल कॉलेज का भवन सिर्फ भवन बनकर रह गया है। उक्त कॉलेज कब से प्रारंभ होगा इसका जवाब देने को कोई तैयार नहीं।

जिला कांग्रेस के महामंत्री नदीम खान ने थामा भाजपा का दामन

सिवनी महाकौशल। गत दिवस जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने जम्बो कार्यकारिणी का गठन किया जिसमें उन्होंने ग्राम पंचायत मैली के सरपंच नदीम खान को जिला कांग्रेस का महामंत्री बनाया, इसे आश्चर्य ही कहा जायेगा कि जिला कांग्रेस के महामंत्री बनाये गये नदीम खान का शंकर मढिय़ा में राजेश त्रिवेदी, राजेश डहेरिया, गिरधारी पटेल सहित कई भाजपाईयो ने नदीम को हार पहनाकर स्वागत किया। हालांकि नदीम को भाजपाईयो को हार इसलिए नही पहनाया था क्योंकि उन्हें कांग्रेेस का महामंत्री बनाया गया बल्कि उन्हें इसलिए हार पहनाया गया क्योंकि नदीम भाजपा के हो गये।
बताया जाता है कि नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के प्रयासो से मैली के सरपंच नदीम खान को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलाई गई जिसके बाद नदीम खान जनआर्शीवाद यात्रा में राजेश त्रिवेदी और उनकी पूरी टीम के साथ एतिहासिक स्वागत करते हुए नजर भी आये। ऐसे में प्रश्र यह उठता है कि जिला कांगे्रस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने जिला कांग्रेस के महामंत्री जैसे पद पर नदीम खान की नियुक्ति उनसे पूछकर किया था या फिर अपनी मर्जी से किया था।
वैसे जानकारों की माने तो राजकुमार खुराना ने मैली सरपंच नदीम खान से महामंत्री बनाये जाने से पहले नहीं पूछा होगा, क्योंकि यदि वह पूछते तो नदीम खान स्पष्ट मना कर देते जिसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि एक दिन पहले ही कांग्रेस ने विज्ञप्ति जारी किया था और दूसरे ही दिन नदीम खान भाजपा के हो गये।

नगर परिषद केवलारी के लिए सिरदर्द बने अध्यक्ष पति देवीसिंह बघेल

सिवनी महाकौशल। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केवलारी नगर परिषद के लगभग आधा दर्जन पार्षदों ने नगर परिषद की निष्क्रिय कार्यप्रणाली को लेकर मोर्चा खोल लिया है। गत दिवस पार्षदों ने एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपते हुए उन्हें अवगत कराया कि यदि समय सीमा के भीतर नगर परिषद केवलारी की समस्याओं का समाधान नहीं होता तो 22 सितंबर शुक्रवार को दोपहर 2.00 बजे अवंती बाई चौक (चांदनी चौक) पर नगर परिषद के पार्षदों एवं आम नागरिकों के द्वारा धरना प्रदर्शन कर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।  ज्ञापन सौंपने वाले पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद के गठन हुए 01 साल बीत गया बावजूद इसके अभी तक नगर के लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही है नगर परिषद कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। पार्षदों के द्वारा आय व्यय का लेखा-जोखा मांगने पर भी संबंधित अधिकारियों के द्वारा लेखा-जोखा नहीं दिया जाता। बताया जाता है कि 01 साल के बाद भी नगर परिषद केवलारी विकास के नाम से एक काम नहीं कर पाई, वार्ड के पार्षदों ने वार्ड के लोगों से वादा किया था कि पार्षद बनने के बाद वह वार्ड के लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे लेकिन नगर परिषद की चल रही मनमर्जी के चलते वार्ड के लोगों को भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही।
अध्यक्ष पति की चल रही तानाशाही
केवलारी नगर परिषद में वरिष्ट भाजपा नेता देवीसिंह बघेल की धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता बघेल मात्र 01 वोट से अध्यक्ष का चुनाव जीती थी। पत्नी के चुनाव जीतने के बाद देवीसिंह बघेल विधायक प्रतिनिधि बन गए और उन्होंने नगर परिषद के कामों में दखल देना शुरू कर दिया। बताया जाता है की सुनीता बघेल से ज्यादा उनके पति देवी सिंह बघेल केवलारी नगर परिषद में तानाशाही चलाते है जिसके कारण नगर के वही काम हो रहे है जिससे देवीसिंह बघेल और उनके परिजनों को फायदा हो रहा है बाकी काम ठप पड़े है। बताया जाता है कि एक साल के भीतर नगर परिषद केवलारी ने भी भ्रष्टाचार का कीर्तिमान स्थापित किया है जिसका फायदा नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता बघेल और उनके पति देवीसिंह बघेल ने ही उठाया है।
नगर परिषद केवलारी में अध्यक्ष पति देवीसिंह बघेल की तानाशाही के कारण अवरुद्ध हुए विकास कार्य के लिए केवलारी के वार्ड क्र. 08 के पार्षद स्वराज बघेल, वार्ड क्र. 12 के नीरज ठाकुर,वार्ड क्र. 11 से श्रीमती अनसुइया सुरेंद्र साहू,वार्ड क्र. 05 से राममिलन कुर्वेती, वार्ड 03 से मिथलेश तेकाम, वार्ड 07 से राजकुमारी उईके,वार्ड 04 से सेवक साहू विरोध में नजर आ रहे है। पार्षदों ने एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि यदि 10 दिन के भीतर उनकी मांग नही मानी गई तो 22 सितम्बर से अवंती बाई चौक(चांदनी चौक) में नगर परिषद के पार्षदों और गणमान्य नागरिक धरना प्रदर्शन करते हुए नगर परिषद का घेराव करेंगे।

लखनादौन के अस्तित्व की लड़ाई से दूर रहने वाले मुनमुन जनआर्शीवाद यात्रा में दिखाई दिये सक्रिय

सिवनी महाकौशल 12 सितं. 2023
10 सितंबर को लखनादौन क्षेत्र के लोगो ने लखनादौन को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर धरना देते हुए लखनादौन बंद रहा जिसमे लखनादौन क्षेत्र के कुछ रसूखदार और बड़े पद में बैठे नेता गायब रहे जबकि लखनादौन क्षेत्र के लोगो ने उन्हें अपना आशीर्वाद देकर फर्श से अर्श तक भेजा, ऐसे नेताओं में एक विधायक दिनेश राय मुनमुन भी हैं। दिनेश राय मुनमुन एक ऐसे नेता है जिनके परिवार को लखनादौन क्षेत्र के नेताओ ने अपना प्यार और आशीर्वाद देकर लगभग दो दशकों तक लखनादौन नगर की सेवा करने का अवसर दिया। 2008 में जब दिनेश राय मुनमुन ने सिवनी का रुख किया तो उसका आधार भी लखनादौन नगर परिषद में किए गए काम थे। 2008 से लेकर 2018 तक मुनमुन राय को सिवनी की राजनीति में स्थापित करने लखनादौन क्षेत्र के लोगो का योगदान भुलाया नही जा सकता। ऐसा लगता है दो बार विधायक बन जाने के बाद अब दिनेश राय मुनमुन के भीतर लखनादौन क्षेत्र के लोगो के प्रति जिम्मेदारी कम होते नजर आ रही है।
इन दिनों लखनादौन को जिला बनाए जाने के लिए मुहिम छिड़ी हुई है।
10 सितंबर को लखनादौन क्षेत्र के लोगों ने जिले की मांग को लेकर लखनादौन बंद का आव्हान किया था जिसमें क्षेत्र के लोगों ने बढ़ चढक़र हिस्सा लिया लेकिन उक्त धरना प्रदर्शन में कई ऐसे चर्चित चेहरे नदारत रहे जिन्हें लखनादौन क्षेत्र के लोगों ने जमीन से उठाकर आसमान का सफर तय करवाया। उम्मीद की जा रही थी कि सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन इस महत्वपूर्ण मांग का समर्थन करते हुए लखनादौन बंद के दौरान लखनादौन में रहेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और उन्होंने लखनादौन बंद के दौरान पूरी तरह मुंह फेर लिया। हालांकि उनके कुछ समर्थक दबी जबान से यह अवश्य कह रहे थे कि सिवनी में रामकथा की बड़ी जिम्मेदारी उनके कांधों में है इसी कारण उन्हें समय नहीं मिल पा रहा। उक्त बातो पर लोग भरोसा कर पाते इससे पहले ही मुनमुन राय का जन आशीर्वाद रैली में घंटो घूमने के बाद अब दिनेश राय मुनमुन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे है।
घंटो जनआर्शवाद यात्रा में रहे शामिल,आधा घंटे के लिए ही पहुंच जाते लखनादौन
10 सितंबर को लखनादौन बंद था जहां के लिए सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन आधा घंटा भी नही निकाल पाए जबकि ठीक दूसरे दिन 11 सितम्बर को जन आशीर्वाद यात्रा सिवनी में निकाली गई। उक्त यात्रा से पहले केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने साढ़े ग्यारह बजे प्रेस कांफ्रेंस लिया जिसमे सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन उनके साथ थे, बाद में जन आशीर्वाद रैली निकाली गई उसमें भी विधायक राय घंटो मौजूद थे। इसके बाद सवाल यह उठने लगे कि जिस मातृभूमि के लोगो  ने दिनेश राय मुनमुन को  नई पहचान देते हुए उन्हें विधायक बनने का रास्ता दिखाया जब वहीं के अस्तित्व की लड़ाई लडऩे की बारी आई तो दिनेश दिनेश राय मुनमुन लखनादौन पहुंचे ही नहीं लेकिन जब उनके राजनीतिक अस्तित्व की बात आई तो उन्होंने रामकथा की व्यस्तता को छोड़ते हुए जन आशीर्वाद यात्रा में घंटे दे दिया।

चुनावी साल में रामकथा कराने का मुनमुन को मिला फायदा

सिवनी के पॉलिटेक्निक मैदान में स्वामी रामभद्राचार्य महाराज की रामकथा का आयोजन 17 सितंबर तक विधायक दिनेश राय मुनमुन ने आयोजित कराया है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दिनेश राय मुनमुन ने स्पष्ट कर दिया था कि उक्त कार्यक्रम राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, उन्होंने महाराजश्री के आगमन और कथावाचन को लेकर जो पोस्टर और बैनर छपवाये है उसमें भी दिनेश राय मुनमुन ने भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं को दरकिनार रखा है  ताकि लोगों को यह एहसास ना हो सके कि उक्त कार्यक्रम राजनीतिक कार्यक्रम है लेकिन जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे उसमें राजनीति के रंग देखने को मिल रहे हैं। इन दिनों मीडिया और सोशल मीडिया में स्वामी रामभद्राचार्य महाराज का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वह मुनमुन राय का प्रचार प्रसार करते हुए यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि आप इस बार भोपाल में कमल खिलाएं मुनमुन को मैं मंत्री बनवाऊंगा। स्वामी रामभद्राचार्य के द्वारा दिनेश राय मुनमुन के पक्ष में माहौल बनाए जाने का वीडियो इलेक्ट्रानिक मीडिया में भी चला जिसके फुटेज दिनेश राय मुनमुन के समर्थक सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चलने लगी है। लोगों का कहना है कि भले ही दिनेश राय मुनमुन यह कहते हो कि उक्त कार्यक्रम राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है लेकिन पूरा ताना-बाना चुनाव को दृष्टिकोण रखते हुए बनाया गया है। लोगों के भीतर चर्चा है कि यदि दिनेश राय मुनमुन रामकथा कराना ही चाहते थे तो पिछले 4 सालों में कभी भी करा सकते थे लेकिन चुनाव के समय ही राम कथा कराने के पीछे क्या कारण है। बहरहाल सिवनी में स्वामी रामभद्राचार्य के कार्यक्रम में बिना राजनीतिक फायदा नुकसान देखते हुए श्रद्धालु पहुंच रहे है।
भाजपा के स्थापित नेताओं ने बनाई दूरी
इस पूरे कार्यक्रम में एक बात और देखने को मिल रही है कि दिनेश राय मुनमुन के द्वारा आयोजित रामकथा के कार्यक्रम से भाजपा के स्थापित नेताओं ने लगभग दूरी बनाई हुई है। कार्यक्रम शुरू हुए लगभग 3 दिन बीत गये इन तीन दिनों में सिर्फ ढालसिंह बिसेन ही आर्शीवाद लेने पहुंचे थे।

प्रेस कांफ्रेंस में 15 दिन पहले आलोक दुबे ने जो स्क्रिप्ट पढ़ा वही स्क्रिप्ट पढक़र चले गए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर

सिवनी महाकौशल। भाजपा की जन आशीर्वाद रैली में शामिल होने सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर सिवनी पहुंचे। 11.00 बजे उन्होंने सिवनी की एक निजी होटल में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित किया था जिसमें वह लगभग आधा घंटे देर से पहुंचे। कार्यक्रम में पहुंचने के बाद अनुराग ठाकुर ने वही स्क्रिप्ट पढ़ा जो लगभग 15 दिन पहले प्रेस कांफ्रेस आयोजित करते हुए आलोक दुबे ने पढ़ा था। असल में मध्य प्रदेश सरकार ने 20 साल का रिपोर्ट कार्ड जारी किया था जिसके बाद आलोक दुबे ने 25 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इन 20 सालों में भाजपा की उपलब्धि बताया था वही कागज लेकर अनुराग ठाकुर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंच गए और उन्होंने वही पढ़ा जो आलोक दुबे ने पढ़ा था जिसमें कोई नई बात नहीं थी।
अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ी प्रेस कांफ्रेंस
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की प्रेस कॉन्फ्रेंस अव्यवस्थाओ की भेंट चढ़ गई। प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचे कई मीडियाकर्मियों को कुर्सी में खड़े होकर श्री ठाकुर को सुनना पड़ा। बताया जाता है की उक्त प्रेस कांफ्रेंस में सिवनी जिले के अलावा अन्य जिले से आए पत्रकारों की भरमार थी लेकिन उन्हें भी सम्मान नही मिल पाया।
अनुराग ठाकुर से पूछना था यह सवाल
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की प्रेस कान्फ्रेस का न्यौता दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस को भी था जिसमें शामिल होने के लिए दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के संपादक पहुंचे थे। प्रेस कान्फ्रेस में संपादक को केंद्रीय मंत्री से दो सवाल करना था लेकिन अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुकी उक्त प्रेस कान्फ्रेस में सवाल करने का माहौल नहीं मिल पाया इसलिए समाचार प्रकाशन के साथ दो सवाल प्रकाशित किये जा रहे हैं जिसका जवाब केंद्रीय मंत्री के प्रतिनिधि के रूप में जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे, सांसद डा. ढालसिंह बिसेन, सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन में से कोई भी दे सकता है।
प्रश्र नं. 01- दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से यह पूछना चाहता था कि भारतीय जनता पार्टी को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी कहा जाता है लेकिन वर्तमान में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी को निष्ठावान और ईमानदार कार्यकर्ता नहीं मिल पा रहे जिसके कारण आयतित नेताओं को टिकिट दी जा रही है जिसका प्रमाण यह है कि मंडला जिले के बिछिया विधानसभा से डॉ. विजय आनंद को नौकरी से स्तीफा दिलाकर पहले टिकिट दी गई फिर भाजपा में शामिल कराया गया। लांजी विधानसभा से आम आदमी पार्टी के राजकुमार कर्राहे को स्तीफा दिलाकर भाजपा की टिकिट दिलाई गई। पांर्ढुणा से जज प्रकाश उइके को स्तीफा दिलाकर पार्टी ने टिकिट दिया, बंडासागर विधानसभा से शिक्षक वीरेंद्रसिंह को स्तीफा दिलाकर टिकिट दिया गया, गुना के चाचौड़ा से आईआरएस की पत्नी श्रीमती प्रियंका मीरा को टिकिट दिया गया। सिवनी विधानसभा ही ले लिजिए पिछले चुनाव में दिनेश राय मुनमुन को पार्टी ने सदस्यता दिलाया और टिकिट दे दिया, तो क्या आपकी पार्टी में निष्ठावान व ईमानदार कार्यकर्ताओ की कोई कद्र नहीं जिसके चलते आप मूल भाजपाईयों को छोडक़र आयातित नेताओं को टिकिट दे रहे हैं।
प्रश्र नं. 02- दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस केन्द्रीय मंत्री से यह भी पूछना चाहता था कि लोकसभा में बहुमत होने के बाद आपकी सरकार ने बिना बहस किये किसान कानून बना दिया गया। दिल्ली में सेवा बिल लाकर उप राज्यपाल को शक्तिशाली बना दिया गया, लोकसभा में सीएए, एनआरसी, ट्रिपल तलाक, 370 का मामला बिना बहस किये हुए ला लिया गया तो फिर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का कानून क्यों नहीं बना पा रहे। देश में लगभग 09 साल से एनडीए की सरकार है और भाजपा गौसेवा के नाम से राजनीति करती है तो फिर उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने में आपकी सरकार रूचि क्यों नहीं दिखा रही? लेकिन सवाल अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गये।
जिला चुनाव प्रभारी वेद सिंह ठाकुर को नही दी जगह
भाजपा के कार्यकर्ताओं को सिद्धांत, अनुशासन और मान सम्मान करने की सलाह तो दी जाती है लेकिन जब इसे अमलीजामा पहनाने की बात आती है तो पार्टी के बड़े नेता ही मान सम्मान देना भूल जाते है। आज प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर,संभागीय सयोजक उदय प्रताप सिंह के अलावा जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे, सांसद ढालसिंह बिसेन,सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन, चुनाव प्रभारी और पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष वेदसिंह ठाकुर,पूर्व जिला अध्यक्ष नरेश दिवाकर प्रेस कांफ्रेंस के हॉल में थे जहां प्रेस कांफ्रेंस के आयोजकों ने वेदसिंह ठाकुर और नरेश दिवाकर के लिए कुर्सी कि व्यवस्था नहीं कराया। काफी देर तक दोनो नेता खड़े रहे बाद में उन्हें  पत्रकारों ने कुर्सी ऑफर किया।कुल मिलाकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की प्रेस कॉन्फ्रेंस रस्म अदायगी बनकर रह गई।

कुंवर लखन की नगरी के अस्तित्व की लड़ाई से मुनमुन, योगेंद्र, मीना, मालती, पार्वती ने बनाई दूरी

लखनादौन को जिला बनाने के लिए लखनादौन के नागरिकों के साथ-साथ विभिन्न संगठन के लोगों ने आज सडक़ पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया सभी ने स्वेच्छा से लखनादौन बंद रखा। इस बीच लखनादौन क्षेत्र के कुछ नेताओं का दोहरा चरित्र सामने देखने को मिला। कल तक जो लोग जिला बनाओ संगठन के साथ नजर आ रहे थे और लखनादौन को जिला बनाए जाने की पैरवी कर रहे थे उनमें से अधिकांश लोगो के भीतर आज  अपनी-अपनी पार्टी के प्रति प्रेम जाग गया। लखनादौन क्षेत्र के स्थापित भाजपा नेताओं के भीतर भारतीय जनता पार्टी के प्रति प्रेम जाग उठा और उन्होंने जन आशीर्वाद यात्रा में अपना समय देना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि लखनादौन बनाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग जब सडक़ों पर उतरे तो उक्त विरोध प्रदर्शन के दौरान लखनादौन नगर के वह  चर्चित चेहरे नजऱ नही आए जिन्हें लखनादौन क्षेत्र के लोगों ने फर्श से उठाकर अर्श में बैठाया और उन्हें एक पहचान दिया लेकिन जब कुवर लखन की नगरी के अस्तित्व की लड़ाई का मामला सामने आया तो उन लोगों ने पीठ फेर लिया जिन्हें लखनादौन क्षेत्र के लोगों ने कामयाबी के शिखर तक पहुंचाया।
विधायक,नगर परिषद अध्यक्ष सहित दर्जनों नेता    रहे नादरत
लखनादौन क्षेत्र के लोगों के द्वारा लखनादौन को जिला बनाए जाने की मांग करते हुए जिला नहीं तो वोट नहीं का नारा दिया गया लेकिन वर्तमान में लखनादौन क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक पार्टी के लोग इस पूरी मुहिम से दूरी बनाए हुए नजर आ रहे हैं जो आज आम लोगों ने भी महसूस किया समाचार लिखे जाने तक लखनादौन बंद के दौरान जो धरना प्रदर्शन चल रहा था उसमें लखनादौन के विधायक योगेंद्र बाबा नजर नहीं आए। बताया जाता है कि योगेंद्र बाबा आज घंसौर क्षेत्र के दौरे मे थे। समाचार लिखे जाने तक उन्हें इतना समय नहीं तक नहीं मिला कि वह लखनादौन नगर के लोगों के बीच जाकर उक्त मुहिम का समर्थन करते। वही लखनादौन नगर की प्रथम नागरिक श्रीमती मीना बलराम गोल्हानी, उनके पुत्र आशीष गोल्हानी भी नदारद थे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती डेहरिया और उनके पति मुकेश डेहरिया ,जनपद अध्यक्ष श्रीमती पार्वती उइके, जनपद के उपाध्यक्ष दीपक निगम, जनपद सदस्य सचिन पाटकर, आशीष बंटी गोल्हानी, विजय उइके जैसे दर्जनों ऐसे दर्जनो लोग नदारद थे जो भाजपा और कांग्रेस से जुड़े हुए है और जिन्होंने लखनादौन को जिला बनाये जाने के लिए आयोजित बैठक में बड़ी-बड़ी डींगे हांके थे।
दिनेश राय मुनमुन ने भी बनाई दूरी
लखनादौन को जिला बनाए जाने की मुहिम में सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन ने भी पूरी तरह से किनारा कर लिया जबकि लखनादौन नगर परिषद के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सिवनी में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश करते हुए विधायक बने। दिनेश राय मुनमुन को विधायक बनाने में लखनादौन क्षेत्र के लोगों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता लेकिन जब लखनादौन क्षेत्र के लोगों को दिनेश राय मुनमुन के समर्थन की आवश्यकता पड़ी तो उन्होंने मुहिम से ही किनारा कर लिया। दिनेश राय मुनमुन ने लखनादौन को जिला बनाए जाने की मुहिम से किनारा क्यों किया यह तो वही जाने लेकिन लोगों को उम्मीद थी कि हमेशा की तरह दिनेश राय मुनमुन आज भी लखनादौन को जिला बनाए जाने के लिए बुलाए गए बंद का समर्थन करते हुए लखनादौन में रहेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि वह सिवनी में उनके द्वारा आयोजित राम कथा में ही व्यस्त नजऱ आए। क्षेत्र के लोगो का कहना है की सिवनी में रामकथा का कार्यक्रम सुबह से नही बल्कि दोपहर 3 बजे से आयोजित है यदि दिनेश राय चाहते तो वह अपनी कर्मभूमि रहे लखनादौन के लिए कुछ समय तो निकाल ही लेते लेकिन समाचार लिखे जाने तक मुनमुन राय लखनादौन नही पहुंच पाए। कुल मिलाकर लखनादौन को जिला बनाये जाने की मुहिम में राजनैतिक संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ने दूरी बना लिया।

03 साल बाद भी नही बन पाया भीम गढ़ का पुल आसपास के ग्रामीण हो रहे परेशान

सिवनी महाकौशल। लगभग 3 साल पहले अगस्त के महीने में तेज बारिश के चलते सिवनी जिले के दो पुल बह गए थे जो आज तक नहीं बन पाए जिनमें से एक भीमगढ का पुल है। वर्तमान में उक्त पुल क्षेत्र के लोगो के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है जहां से ना तो एम्बुलेंस गुजर पाती है और ना ही स्कूली बच्चे, स्थिति यह हो गई है की लोगो को जान हथेली पर रखकर जाना पड़ता है। क्षेत्र के लोगो को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव से पहले उक्त पुल का ठेका हो जाएगा लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ होता दिखाई नही दे रहा। हालांकि इस मामले में विधायक राकेश पाल सिंह का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और शीघ्र ही एंजेसी तय कर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इस मामले में भीमगढ और उसके आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि जब तक टेंडर नहीं होगा तब तक हम ऐसे अधूरे पुल से आना जाना कैसे करेंगे? सूत्र बताते हैं कि क्षेत्रीय लोगों ने अब यह निर्णय लिया है कि आपस में कुछ राशि एकत्रित करते हुए पुल में इतना तो काम कर लिया जाए ताकि लोग आसानी से आना-जाना कर सके और उनकी जान बच सके। उल्लेखनीय है की वर्ष 2011-12 में लगभग चार करोड़ की लागत से पीडब्ल्यूडी ब्रिज कारपोरेशन के द्वारा डेढ़ सौ मीटर लंबा भीमगढ़ का पुल बनाया गया था जो 09 साल के बाद तेज बारिश में बह गया जो वर्तमान में परेशानी का कारण बना हुआ है।

गुंडागर्दी में उतारू हुए सीएम राइज स्कूल के प्रिंसिपल प्रीतम जवरिया

सिवनी महाकौशल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में सीएम राइज स्कूल इसलिए खोला ताकि बच्चों को बेहतर माहौल और शिक्षा मिल सके लेकिन कई ऐसे सीएम राइज स्कूल है जहां के प्राचार्य की लापरवाही के चलते न केवल बच्चों का भविष्य धूमिल हो रहा है बल्कि बच्चे परेशान भी हो रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला धनौरा साजपानी में स्थित सीएम राइज हाईस्कूल में सामने आया जहां के प्रिंसिपल प्रीतम सिंह जवरिया के ऊपर गुंडागर्दी करने का आरोप लग रहे हैं। गत दिवस स्कूल के विद्यार्थी धनौरा थाना पहुंचे और प्राचार्य के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग किया। बच्चों ने बताया कि प्रचार प्रीतम सिंह जवरिया बच्चों से कहते हैं कि मैं शिक्षक नहीं गुंडा हूं मेरे पास दो पेन है एक रेड और एक हरा जिससे मैं शिक्षक और विद्यार्थियों का जीवन बर्बाद कर सकता हूं। एक बच्चे ने बताया कि प्रिंसिपल ने जब उससे नाम पूछा और उसके परिवार का व्यवसाय पूछा तो उसने बताया कि मेरा परिवार बाल काटने का काम करता है तब प्राचार्य ने कहा कि तू भी बाल काटने का ही काम करेगा। बताया जाता है कि प्रिंसीपल ने एक आदिवासी छात्र से भी कहा कि तुम यहां के गौंड हो जो काम करने के लिए नागपुर जाते हो और तुम दो तीन हजार रू. ही कमा सकते हो। इसी तरह उन्होंने अन्य छात्रों के साथ भी बर्ताव किया। बताया जाता है कि प्राचार्य प्रीतमसिंह जवरिया के द्वारा बार बार विद्यार्थियों को अपमानित करने से आहत विद्यार्थियों ने सहायक आयुक्त के नाम एक आवेदन लिखा जिसकी प्रतिलिपि जिले के कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार सहित थाना प्रभारी को देते हुए मांग किया है कि एक सप्ताह के भीतर उक्त विवादित प्राचार्य के विरूद्ध कार्यवाही की जाए और यदि एक सप्ताह के भीतर कोई कार्यवाही नहीं होती है तो बच्चे उग्र आंदोलन करेंगे।
देखना यह है कि बच्चों के द्वारा दिये गये आवेदन को सहायक आयुक्त डॉ. अमर उइके सहित धनौरा थाने की पुलिस कितनी गंभीरता से लेती है फिलहाल बच्चों को इस बात का डर भी सताने लगा है कि कहीं शिकायत करने के बाद संबंधित प्राचार्य उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ ना करने लगे। यदि समय रहते विभाग के आला अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो प्राचार्य श्री जवरिया की मनमर्जी बढऩे लगेगी और वह शिकायत करने वाले बच्चों के ऊपर दबाव भी बनाने लगेंगे।

बीटगार्ड निरंजन मर्सकोले के ऊपर निलंबन की कार्यवाही कर विभाग ने कर दिया रस्म अदायगी

सिवनी महाकौशल। सिवनी जिले के उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले वन वृत्त में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार हो रहा है जिसकी तरह उत्तर वनमंडल की डीएफओ वासु कनोजिया का ध्यान नहीं जा रहा या यूं कहे कि वासु कनोजिया की मौन स्वीकृति से ही क्षेत्र में लापरवाही बरती जा रही है। उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले छपारा वृत्त के पूर्व छपारा में स्थित जंगल से लगभग 11 नग सागौन के पेड़ काटकर तस्करो ने ले जा लिये इस मामले को दैनिक महाकौशल ने प्रमुखता से उजागर किया जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने बीटगार्ड निरंजन मर्सकोले के ऊपर निलंबन की कार्यवाही कर रस्म अदायगी कर लिया जबकि सूत्र बताते हैं कि इस मामले में डिप्टी रेंजर संजय जायसवाल की भूमिका की विशेष जांच होना चाहिए जो छपारा रेंज में ही रहना पसंद करते है। वनविभाग जंगल की अवैध कटाई के मामले में कितना निष्क्रिय है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि छपारा पूर्व के जंगल से लगभग 10 लाख कीमत की सागौन की कटाई करने के बाद तस्करी का मामला उजागर हुए लगभग एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है बावजूद इसके वनविभाग अमला तस्करों का पता नहीं लगा पाया और ना ही इस मामले का कोई प्रकरण पंजीबद्ध कर पाया। इस पूरे मामले को लेकर वनविभाग के अधिकारी क्यों मौनधारण किये हुए है यह तो वे ही जाने लेकिन जिस तरह से छपारा क्षेत्र में अवैध रूप से जंगलो की कटाई करते हुए सागौन का परिवहन किया जा रहा है उससे तो यही लग रहा है कि संजय जायसवाल के रहते क्षेत्र में सागौन के तस्कर सक्रिय है जिनके ऊपर कार्यवाही करने से वनविभाग बच रहा है।
गौरतलब है कि संजय जायसवाल जब चमारी बीट में पदस्थ थे तब अवैध रूप से लकडिय़ों की कटाई के मामले में तत्कालीन डीएफओ गौरव चौधरी ने उन्हें सितंबर 2017 को निलंबिन कर दिया था जिसके बाद संजय जायसवाल को लूपलाइन में भेज दिया गया था लेकिन बाद में उन्होंने राजनीतिक पहुंच पकड़ के चलते बहाली के बाद अपनी पदस्थापना छपारा रेंज में करवा लिया था। चर्चा है कि जहां जहां संजय जायसवाल पदस्थ रहते हैं वहां वहां सागौन तस्कर सक्रिय हो जाते हैं और बेखौफ होकर सागौन की कटाई कर तस्करी का कारोबार करते है जिसे रोक पाने में वनविभाग अमला नाकाम ही रहता है। आश्चर्य तो इस बात का है कि उत्तर वनमंडल में पदस्थ डीएफओ भी कभी यह पता लगाने का प्रयास नहीं करते कि आखिर संजय जायसवाल के रहते उनके क्षेत्र में तस्कर क्यों सक्रिय रहते हैं? 

सागौन की अवैध कटाई मामले में बीट गार्ड निरंजन मर्सकोले हुए निलंबित डिप्टी रेंजर संजय जायसवाल को बचाने में लगे अधिकारी

सिवनी महाकौशल। अक्सर कहा जाता है की बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है ऐसा ही उत्तर वन मंडल सिवनी में हो रहा है। उत्तर वन मंडल सिवनी छपारा वृत के पूर्व छपारा के जंगल से लगभग 11 नग सागौन जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख बताई जा रही है उन पेड़ो को काटकट तस्करो ने गायब कर दिया। इस मामले को दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने ‘पूर्व छपारा के जंगल में सागौन की हुई अंधाधुंध कटाई’, ‘अब अपने आपको बचाने डिप्टी रेंजर संजय जायसवाल अधिकारियों को कर रहे गुमराह’ , एवं  ‘सागौन की अवैध कटाई रोकने में नाकाम संजय जायसवाल हो चुके है निलंबित’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि इस मामले में बीट गार्ड निरंजन मर्सकोले के ऊपर गाज गिराकर डिप्टी रेंजर को बचाने का प्रयास किया जा सकता है। सूत्र बताते है की इस मामले में बीट गार्ड निरंजन मर्सकोले को निलंबित कर दिया गया हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी ने अधिकृत रूप से कोई पुष्टि नहीं किया। विभाग में चल रही चर्चाओं की माने तो वरिष्ट अधिकारियों से मधुर संबंध होने का फायदा डिप्टी रेंजर को मिल गया है।
डीएफओ भी रहे मेहरबान
सूत्रों की माने तो संजय जायसवाल लंबे समय से उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले छपारा वृत्त में पदस्थ है और उनकी डीएफओ वासु कनोजिया से मधुर संबंध है, यही कारण है कि उक्त घटना के कई दिन बीत चुके अब तक डीएफओ ने संजय जायसवाल की भूमिका तय नहीं किया। अब जबकि बीटगार्ड निरंजन मर्सकोले के निलंबन की बात सामने आ रही है ऐसे में देखना यह है कि वरिष्ठ अधिकारी संजय जायसवाल के विरूद्ध कार्यवाही करते हैं या फिर वह भी संजय जायसवाल के ऊपर मेहरबान नजर आते हैं।

जिला पंचायत के ड्राइवर की अचानक हुई मौत, देर रात तक अधिकारियों और कर्मचारियों से क्यों कराया जा रहा काम

सिवनी जिला पंचायत में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा जब से आईएएस अधिकारी पवार नव जीवन विजय जिला पंचायत के सी ई ओ बने है तब से ही जिला पंचायत के अधिकारी मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान है और इस परेशानी के चलते कर्मचारियों की मौत तक हो रही है।बताया जाता है कि जिला पंचायत के सी ई ओ पवार नवजीवन की कार्यप्रणाली से परेशान होकर आज जिला पंचायत के सभी अधिकारी और कर्मचारी एक जुट हुए। जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर, एसपी सहित जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपते हुए उन्हें अवगत कराया कि कार्यालय समय के अलावा जिला पंचायत में रात 11:00 से 12:00 बजे तक काम लिया जाता है। देर रात तक महिला कर्मचारियों को भी रोका जाता है यहां तक की शनिवार एवं रविवार अवकाश के दिन भी उनसे काम लिया जाता है।  जिला पंचायत में लगातार उनका शोषण किया जा रहा है।    ज्ञापन सौंपते हुए जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बताया कि छोटी-छोटी बातों को लेकर उनका वेतन तक काटा  जाता है। 8 घंटे से कहीं अधिक समय तक उनसे काम लिए जाने के बाद मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जाता है जिसके चलते कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मानसिक रूप से तनाव में है। बताया जाता है कि जिला पंचायत में चालक के पद पर वरुण चंद्र गोलदार पदस्थ है जो पिछले कुछ दिनों से परेशान था। बताया जाता है कि 4 सितंबर की रात्रि वरुण चंद्र काम से घर वापस गया था जिसका आज निधन हो गया वह भी कई दिनों से काम की अधिकता के चलते परेशान रह रहा था ।बताया जाता है कि इस घटना के बाद जिला पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी ज्ञापन सौंपने के लिए उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचे और आग्रह किया की उन्हें जिला पंचायत में चल रही मनमर्जी से मुक्ति दिलाए वरना भविष्य में और भी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ इस तरह की घटना घट सकती है।

जितेंद्रसिंह ने साफ कहा- टिकिट वितरण में नहीं चलेगा तेरा-मेरा अब तक सिवनी में सर्वे के बजाय नेताओं की पसंद से मिलते रही है टिकिट

सिवनी महाकौशल 04 सितं. 2023
इन दिनों प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी रणदीपसिंह सुरजेवाला और मप्र स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्रसिंह प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में व्यस्त नजर आ रहे है। बताया जाता है कि स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने साफ संकेत दे दिया है कि इस बार टिकिट वितरण में तेरा-मेरा नहीं चलेगा। प्रत्याशी चयन का एकमात्र आधार जीत की संभावना रहेगी। बताया जाता है कि दोनो नेताओं ने जिलाध्यक्षों व प्रभारियों से भी खुलकर बात किया।
बताया जाता है कि कई प्रभारियों और जिलाध्यक्षो से जब बंद लिफाफे में नाम मांगे गये तो उन्होंने अपनी अपनी पसंद के नाम दिये जबकि सर्वे में उक्त नाम थे ही नहीं, जिसे लेकर दोनो नेताओं ने ऐसे अध्यक्षों और जिला प्रभारियों से सवाल जवाब भी किया। वैसे यदि रणदीपसिंह सुरजेवाला और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्रसिंह की मंशा के अनुरूप टिकिट का वितरण किया जाता है तो फिर सिवनी विधानसभा से भी सर्वे के आधार पर टिकिट दी जाएगी। 1993 के बाद से सिवनी जिले में टिकिट वितरण सर्वे के बजाय तेरा-मेरा के चलते मिलते रही, जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह सिवनी आये थे वहीं हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री राठौर भी आये थे तब दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के संपादक ने यह बात रखा था कि सिवनी विधानसभा सीट से अब तक उन्हें ही टिकिट दी जाते रही है जो किसी ना किसी नेताओं के करीबी रहे है। 1993 में आशुतोष वर्मा को टिकिट दी गई थी जो पूर्व केबिनेट मंत्री विमला वर्मा के करीबी थे। चुनाव हारने के बाद 1998 में पुन: उन्हें टिकिट दी गई, 2003 में कमलनाथ के करीबी राजकुमार खुराना को टिकिट दी गई जो हार गये। 2008 के चुनाव में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी के करीबी प्रसन्न मालू को टिकिट दी गई वह भी चुनाव हार गये। 2013 में पुन: कमलनाथ के करीबी राजकुमार खुराना को टिकिट दी गई तो वह भी चुनाव हार गये तो क्या इस बात भी टिकिट किसी नेता की पसंद और नापसंद से दी जाएगी या फिर जो सिवनी विधानसभा सीट में कांग्रेस को जिता सकता है उन्हें टिकिट दी जाएगी जिसके बाद दिग्विजयसिंह ने कहा था कि इस बार ऐसा नहीं चलेगा चूंकि जितेंदं्रसिंह ने स्पष्ट कर दिया कि टिकिट में तेरा मेरा नहीं चलेगा ऐसे में सिवनी के निष्ठावान और ईमानदार कार्यकर्ताओं को विश्वास है कि टिकिट वितरण में पार्टी पूरी तरह से पारदर्शिता बरतते हुए जिताऊ चेहरे को ही टिकिट देगी।
उल्लेखनीय है कि जिला कांग्रेस के प्रभारी गंभीरसिंह चौधरी जबसे प्रभारी बने है तब से उन्होंने सिवनी में गुटबाजी का जहर घोल रखा है और वह अपने करीबियों को ही टिकिट दिलाना चाहते है जिसके लिए वह लंबे समय से प्रयासरत है लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमेन जितेंद्रसिंह के द्वारा दिये गये संकेत के बाद गंभीरसिंह चौधरीकी शायद ही मनमर्जी चल सके।

शफीक खान के मामले में उच्च न्यायालय ने कलेक्टर न्यायालय में चल रही सुनवाई में लगाई रोक

सिवनी महाकौशल। सिवनी नगर पालिका परिषद में 18 सालों के बाद कांग्रेस की नगर सरकार बनी जिसे गिराने के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेता सक्रिय तो हुए लेकिन अब उनकी उम्मीदों में पानी फिरता नजर आने लगा है । आज उच्च न्यायलय में जस्टिस संजय द्वेवदी ने सिवनी कलेक्टर न्यायालय में चल रही सुनवाई में रोक लगाते हुए शफीक खान को उच्च न्यायलय में सुनवाई की अनुमति दे दिया। गौरतलब है की  गांधी वार्ड से पार्षद का चुनाव हारे विशाल यादव ने चुनाव हारने के  01 साल बाद  उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए शफीक खान के चुनाव को शून्य किए जाने की गुहार लगाते हुए माननीय उच्च न्यायालय को अवगत कराया था कि शफीक खान ने पार्षद का चुनाव लड़ते समय अपनी कई महत्वपूर्ण जानकारी छुपाया।

इस मामले में जस्टिस संजय द्विवेदी ने जिला कलेक्टर को 30 दिवस के भीतर पक्षकारो की सुनवाई करते हुए अभ्यावेदन देने को कहा था। उच्च न्यायलय के आदेश के बाद कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई प्रारंभ हुई। 29 अगस्त और  01 सितंबर को सुनवाई किया था  । 01 सितंबर को जब कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई प्रारंभ हुई तो विशाल यादव के पक्ष के लोग शफीक खान के ऊपर लगाए गए आरोपों का पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। इस बीच शफीक खान की तरफ से उच्च न्यायलय के वरिष्ट अधिवक्ता शशांक शेखर ने उच्च न्यायलय में रिव्यू पिटीशन लगाते हुए माननीय न्यायलय को अवगत कराया कि विशाल यादव के द्वारा जो पिटिशन दायर की गई थी उसमे उनके पक्ष को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया गया और जो आरोप विशाल यादव का पक्ष लगा रहा है वह बेबुनियाद है। इस मामले की सुनवाई आज जस्टिस संजय द्विवेदी के समक्ष हुई जिसमे वरिष्ट अधिवक्ता शशांक शेखर ,समरेश कटारे और सिवनी के युवा अधिवक्ता सोहेल जकी अनवर खान उपस्थित हुए और माननीय न्यायलय का ध्यान आकर्षित कराते हुए उनसे कहा की इस मामले में विशाल यादव के द्वारा जो पिटिशन दायर करते हुए जो आरोप लगाए गए है उसके लिए उन्हें उच्च न्यायालय में सुनवाई का मौका दिया ही नहीं  गया बल्कि इस मामले की सुनवाई क्लेक्टेड में की जा रही है।बताया जाता है की उच्च न्यायलय ने क्लेक्टेड की सुनवाई में रोक लगाते हुए उक्त मामले को रिस्टोर कर उच्च न्यायलय में शफीक खान के पक्ष को सुनने का मौका दिया । बताया जाता है कि शफीक खान के पक्ष के अधिवक्ताओं ने माननीय उच्च न्यायालय को अवगत कराया की शफीक खान के ऊपर जितने भी आरोप लगाए गए हैं वह बुनियाद है यदि उन्हें सुनवाई का मौका मिलता तो वह सभी दस्तावेज माननीय उच्च न्यायालय को उपलब्ध करा देते लेकिन उन्हें सुनवाई का मौका दिया ही नहीं गया जिसके बाद माननीय न्यायालय ने कलेक्टर की कार्रवाई में रोक लगा दिया और इस मामले में दोनों पक्षों को सुनवाई का मौका दिया है। नगर पालिका अध्यक्ष शफीक खान के मामले में उच्च न्यायालय ने सिवनी कलेक्टर न्यायालय में चल रही सुनवाई में आरोप लगा दिया जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं के सपनों में पानी फिरता नजर आ रहा है जो इसे अपनी जीत मानकर चल रहे थे।

आखिर सिवनी जिले में कहां से आ रही बंदूके?

सिवनी महाकौशल। पिछले 20 दिनों में सिवनी मुख्यालय सहित लखनादौन में तीन ऐसी घटनाएं हुई जिसमें बंदूक का इस्तेमाल किया गया। तीनों घटनाओं के बाद अब तक पुलिस यह पता नही लगा पाई कि आखिर फायरिंग करने वाले लोगो के पास बंदूके कहां से आ रही है। बताया जाता है कि रक्षाबंधन के दिन बालाघाट हॉक फोर्स में पदस्थ विशाल बघेल एक कार से अपने ससुराल लोनिया गया था जहां उसने अपने साले 22 वर्षीय जयदीप पिता रामगोपाल बघेल एवं बुआ सास श्रीमती सुलोचना पति मेघनाथ के ऊपर फायरिंग कर फरार हो गया था। आरोपी को शनिवार को गिरफ्तार किया गया। बताया जाता है की मुख्य आरोपी के अलावा कोतवाली पुलिस ने उसके सहयोगी सतीश बघेल,पियूष पाल एवं खेलेश उर्फ शैलु राजपूत को भी गिरफ्तार कर लिया है लेकिन पुलिस को उनके पास से कोई हथियार नहीं मिल पाये। बताया जाता है कि पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर विशाल बघेल ने किस बंदूक से फायरिंग किया था। वैसे पुलिस को इस पूरे मामले की बारीकी से जांच इसलिए करना चाहिए क्योंकि पिछले 20 दिनों के भीतर फायरिंग की तीन घटनाएं हुई है लेकिन पुलिस यह पता नहीं लगा पाई कि फायरिंग करने वाले लोगो के पास बंदूके कहां से आती है।
गोली लगने से योगेश अग्रवाल की भी हुई मौत
फायरिंग की एक अन्य घटना  18 अगस्त की है। बताया जाता है कि बारापत्थर के शास्त्री वार्ड मे योगेश अग्रवाल के ऊपर कुछ लोगों ने फायरिंग कर दिया था जिसके बाद उसे नागपुर ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन पुलिस यह पता नहीं लगा पाई कि फायरिंग करने वाले आरोपियों के पास बंदूक कहां से आई?
जेल से निकलने के बाद युवक ने कर लिया था आत्महत्या
लखनादौन के वार्ड क्र. 3 में रहने वाले 28 वर्षीय भवानीशंकर माथुर ने भी 12 अगस्त को अपने आपको गोली मार लिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी इस मामले में भी पुलिस यह पता नहीं लगा पाई कि आखिर भवानीशंकर के पास बंदूक कहां से आई थी? बताया जाता है कि भवानीशंकर उत्तरप्रदेश के अगरना हाथरस का रहने वाला था जो लखनादौन में रहकर मजदूरी किया करता था जिसे एक बच्चे के अपहरण के मामले में जेल भेजा गया था। जेल से छूटने के बाद भवानीशंकर ने अपने घर में गोली मारकर ने आत्महत्या कर लिया था तब भी दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने समाचार प्रकाशित करते हुए उल्लेख किया था कि उत्तरप्रदेश से आकर लखनादौन में रहने वाले भवानीशंकर के पास बंदूक कहां से आई? 20 दिन के भीतर गोली चलने की तीन घटनाएं हो गई है ऐसे में पुलिस के लिए यह जांच का विषय है कि आखिर सिवनी जिले में बंदूक कौन सप्लाई कर रहा है। यदि समय रहते पुलिस ने बंदूक सप्लाई करने वाले गिरोह का पता नहीं लगाया तो बड़ी घटनाएं भी हो सकती है।

12 हजार से अधिक वोटो से हारने वाले विजय उइके के ऊपर फिर दांव लगा सकती है भाजपा

कांग्रेस को हराने भाजपा को नहीं मिल पा रहे प्रत्याशी
सिवनी महाकौशल। लखनादौन विधानसभा एक ऐसी विधानसभा है जहां से भारतीय जनता पार्टी को मौजूदा विधायक योगेंद्र बाबा को हराने के लिए कोई प्रत्याशी नजर नहीं आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के द्वारा लखनादौन विधानसभा सीट जीतने के लिए काफी माथापच्ची करना पड़ रहा है। क्षेत्र में चर्चा चल रही है कि हो सकता है भाजपा किसी ऐसे चेहरे को सामने लाये जो काफी हद तक कांग्रेस को पटखनी दे सके लेकिन इस बीच राजनैतिक गलियारो में चल रही चर्चाओ की माने तो भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर लखनादौन विधानसभा से विजय उईके को अपना प्रत्याशी बना सकती है जिसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई है जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को ऐसा कोई चेहरा नजर नहीं आ रहा जो लखनादौन से जीत सके। हालांकि विजय उइके को टिकिट दिया जाना भी भाजपा के लिए घातक कदम ही होगा क्योंकि विजय उइके को योगेंद्र बाबा एक बार हार का मजा चखा चुके हैं।
पिछला चुनाव 12 हजार वोट से हारे थे विजय उईके
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने योगेंद्र बाबा को टिकिट दिया था जबकि भाजपा ने विजय उईके को टिकिट दिया था जिसमे कांग्रेस के प्रत्याशी योगेंद्र बाबा को 82 हजार 921 वोट मिले थे जबकि भाजपा के विजय उईके को 70 हजार 675 वोट मिले थे इस तरह विजय उईके 12 हजार 240 वोटों से हार गए थे। विजय उईके चुनाव हारने के बाद निष्क्रिय हो गये थे लेकिन जैसे ही चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई वैसे ही विजय उइके सक्रिय हो गये थे हालांकि बताया जाता है कि लखनादौन विधानसभा से विजय उइके के अलावा 09 अन्य नेता भी चुनाव लडऩे के इच्छुक थे जिनमें पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेश्वरी उइके, पूर्व जिपं सदस्य सुश्री संगीता, रिटायर्ड शिक्षक डीएल नामी, पूर्व डीएपी अर्जुन उइके, पूर्व विधायक ढालसिंह, एसडीओ रहे पवनसिंह, रविंद्र परते, सरपंच शैलेंद्र मरकाम एवं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पूर्व प्रत्याशी इंदरसिंह का नाम सामने आ रहा था। बताया जाता है कि विजय उइके को भाजपा ने 2013 के चुनाव में टिकिट दिया था लेकिन वह योगेंद्र बाबा को टक्कर नहीं दे पाये और 12 हजार से अधिक वोटो से हार गये थे जिसके बाद वह निष्क्रिय हो गये थे, यदि पुन: विजय उइके को टिकिट दी जाती है और वोट मांगने क्षेत्र में जाते है तो लोग उनसे यही पूछेंगे कि चुनाव हारने के बाद विजय उइके कहां गुम हो गये थे?

आलोक दुबे के रहते भाजपा प्रबंध समिति की छवि हो रही धूमिल पार्टी में बढ़ रही गुटबाजी को नहीं कर पा रहे समाप्त

सिवनी महाकौशल। किसी भी पार्टी के जिलाध्यक्ष का यह प्रयास होता है कि उसकी कार्यप्रणाली इतनी अच्छी हो कि इसका असर संबंधित जिले के सभी विधानसभा में हो लेकिन सिवनी जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे को अपनी पार्टी को मजबूत करने से कोई लेना देना नहीं है। आलोक दुबे को उनकी प्रतिभा और पार्टी के प्रति समर्पण के बजाए उन्हें व्हीडी शर्मा के करीबी होने का  आशीर्वाद मिला है और उन्हीं के आशीर्वाद से वह कम उम्र में जिला भाजपा अध्यक्ष बन गए। आलोक दुबे को जिला भाजपा का अध्यक्ष बने तीन साल से अधिक का समय बीत गया और इन बीते समय में वह पार्टी को मजबूत करने के बजाए कमजोर करते चले गए। भाजपा में जितनी गुटबाजी वर्तमान में है उतनी गुटबाजी पहले कभी नही रही।
आलोक दुबे भाजपा के संभवत: पहले अध्यक्ष है जिनके रहते संगठन के पदाधिकारियों की अधिकारियों के सामने भी किरकिरी होते रही है। ताजा मामला भाजपा प्रबंध समिति से जुड़ा है। बताया जाता है की भाजपा प्रबंध समिति के द्वारा कोई निर्णय लिया जाता है तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाता है लेकिन आलोक दुबे के कार्यकाल के दौरान भाजपा प्रबंध समिति की गरिमा भी धूमिल हो गई है जिसका प्रमाण यह है कि भाजपा की प्रबंध समिति ने लगभग 06 महीने पहले सिवनी नगर पालिका की सीएमओ पूजा बुनकर, बरघाट की सीएमओ कामिनी लिलहारे, एसपी रामजी श्रीवास्तव एवं लोक सेवा केन्द्र के प्रबंधक संदीप मिश्रा का स्थानांतरण करने की सिफारिश किया था। स्थानांतरण सूची जारी होने के ठीक एक दिन पहले 24 फरवरी 2023 को कामिनी लिल्हारे रिश्वत लेते गिरफ्तार हो गई थी वहीं सिवनी सीएमओ पूजा बुनकर का करेली नरसिंहपुर स्थानांतरण हो गया था जबकि संदीप मिश्रा को भोपाल स्थानांतरित किया गया था तो उन्होंने उच्च न्यायलय से स्थगन ले आया था जबकि एसपी रामजी श्रीवास्तव भाजपा प्रबंध समिति के ऊपर भारी पड़ गए थे जिनका शिकायत होने के 06 महीने तक स्थानांतरण नहीं हुआ था।
बताया जाता है कि बाद में शिकवा शिकायत का दौर समाप्त नहीं हुआ और भारतीय जनता पार्टी के कुछ पदाधिकारी लगातार शिकायत करते रहे इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के बड़े पदाधिकारी को जिला कलेक्टर के पास से नोटिस जारी करते हुए जवाब देने का समय दिया जाने लगा। इन दिनों जिला भाजपा कार्यालय में भाजपा के कुछ स्थापित नेताओं को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किये जाने का मामला जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। राजनीति से जुड़े हुए लोगों की माने तो ऐसा पहली बार हुआ है जब सत्ता पक्ष के स्थापित नेताओं को किसी शिकायत पर नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब तलब किया जा रहा है जो यह बताने के लिए काफी है कि जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे की संगठन के साथ-साथ प्रशासन में पकड़ कमजोर हो गई है जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के स्थापित नेताओं को शिकायत करना भारी पडऩे लगा है। वर्तमान में चुनावी वर्ष है ऐसे में भाजपा के जिला अध्यक्ष का इस तरह कमजोर होना कहीं ना कहीं पार्टी को कमजोर अवश्य करेगा जिसे गंभीरता से लेने के बजाय जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे स्वयं को और स्वयं के करीबियों को मजबूत करने में लगे हुए हैं, उन्हें संगठन से कोई लेना देना नहीं है जिसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

नगर पालिका अध्यक्ष शफीक खान के ऊपर लगे आरोपो के दस्तावेज नहीं दिखा पाया विशाल यादव का पक्ष

08 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सिवनी महाकौशल। सिवनी नगर पालिका परिषद में 18 सालों के बाद कांग्रेस की नगर सरकार बनी जिसे गिराने के लिए भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं जिन्होंने गांधी वार्ड से पार्षद का चुनाव हारे विशाल यादव की आड़ में राजनीति प्रारंभ कर दिया है। बताया जाता है कि 01 साल तक विशाल यादव मौन रहे लेकिन बाद में उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए शफीक खान के चुनाव को शून्य किए जाने की गुहार लगाते हुए माननीय उच्च न्यायालय को अवगत कराया था कि शफीक खान ने पार्षद का चुनाव लड़ते समय अपनी कई महत्वपूर्ण जानकारी छुपाया।
इस मामले में जस्टिस संजय द्विवेदी ने जिला कलेक्टर को 30 दिवस के भीतर पक्षकारो की सुनवाई करते हुए अभ्यावेदन देने को कहा था। उच्च न्यायलय के आदेश के बाद कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई प्रारंभ हुई। 29 अगस्त को सुनवाई के बाद भाजपा नेताओं को उम्मीद थी कि 01 सितंबर को शफीक खान के विरुद्ध कोई निर्णय हो सकता है। 01 सितंबर को जब कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई प्रारंभ हुई तो विशाल यादव के पक्ष के लोग शफीक खान के ऊपर लगाए गए आरोपों का पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। बताया जाता है की शफीक खान से लगभग 800 वोटों से चुनाव हारे विशाल यादव की तरफ से प्रमुख रूप से तीन आरोप लगाए गए है। पहला उनका कहना है की शफीक खान के पास पिछड़ावर्ग का जो जाति प्रमाण पत्र है वह कूटराचित है इस मामले में शफीक खान की तरफ से अपना पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं ने कहा की शफीक खान को जाति प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी ने दिया है जो हर पहलुओ का ध्यान रखते हैं। बताया जाता है कि भाजपा के नेता विशाल यादव का पक्ष यह नहीं बता पाया कि किस तरह शफीक खान का जाति प्रमाणपत्र कूट रचित है। जानकारी मिली है कि इस मामले की जांच के लिए कलेक्टर ने सक्षम अधिकारी को निर्देश दिए है।
वैसे जानकर बताते है की यदि जाति प्रमाणपत्र का मुद्दा उठाया जाता है तो उक्त जाति प्रमाणपत्र की जांच राज्य छानबीन समिति के द्वारा की जाती है ना कि जिला स्तर से कोई जांच की जाती है। विशाल यादव के पक्ष का यह भी आरोप था की शफीक खान ने अपराधिक रिकॉर्ड छुपाया है लेकिन वह कलेक्टर न्यायालय में ऐसा कोई दस्तावेज जमा नहीं करा पाए जिससे यह प्रमाणित होता हो की वर्तमान में शफीक खान के विरुद्ध कोई मामला विचाराधीन हो। शफीक खान के पक्ष के अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि शफीक खान के विरुद्ध कोई प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन है तो संबंधित पक्ष को हलफनामा के साथ यह बताना चाहिए कि वर्तमान में शफीक खान के विरुद्ध प्रकरण की सुनवाई किस न्यायालय में चल रही है उसकी पेशी कब है। उन्हें यह भी बताना चाहिए था कि शफीक खान को दो साल या उससे अधिक की सजा कब मिली और किस न्यायालय से मिली। इसके अलावा विशाल यादव के पक्ष का यह भी कहना है कि शफीक खान ने नलजलावर्धन का नियम विरुद्ध भुगतान कर दिया। बताया जाता है कि शफीक खान के पास के अधिवक्ताओं ने यह तर्क दिया कि इनमें से कुछ ऐसे बिंदु है जिनकी सुनवाई इलेक्शन पिटिशन में होना चाहिए वही अधिवक्ताओं का कहना है कि शफीक खान के विरूद्ध जितने मामले पंजीबद थे वह खत्म हो चुके है।
बताया जाता है कि 01 सितंबर को कलेक्टर न्यायालय में विशाल यादव के पक्ष के अधिवक्ता ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए जिससे शफीक खान के ऊपर लगे आरोप सिद्ध हो सके कलेक्टर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई 8 सितंबर को रखा है। शफीक खान की तरफ से वरिष्ट अधिवक्ता आरिफ याहया, सुधीर सक्सेना, सोहेल जकी अनवर खान ने अपने तर्क रखे वहीं विशाल यादव की तरफ से हिमांशु राय अपने कुछ अधिवक्ताओं के साथ मौजूद थे।
01 सितंबर को कलेक्टे्रड में शफीक खान के मामले की सुनवाई चल रही थी तब कलेक्टर न्यायालय के सामने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं का जमावड़ा भी देखने को मिला। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के पार्षद ज्ञानचंद सनोडिया, राजू यादव, दक्षिण मंडल के अध्यक्ष अभिषेक यादव, पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी, सांसद प्रतिनिधि संजू मिश्रा सहित अन्य नेता मौजूद थे तो वहीं दूसरी तरफ एआईसीसी कमेटी के सदस्य राजा बघेल, नगर पालिका परिषद के वरिष्ठ पार्षद एवं जिला कांग्रेस के प्रवक्ता राजिक अकील, पार्षद जोएब जकी अनवर खान, मेहमूद खान, जिला कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री लल्लू बघेल, घनश्याम सनोडिया, शिव शिव सनोड़ीया सहित अन्य नेता मौजूद थे।

जमानत मिलने के बाद एसएएफ के जवान ने साले और बुआ सास के ऊपर किया फायरिंग

सिवनी महाकौशल। रक्षाबंधन के दिन अपने साले और बुआ सास के ऊपर फायरिंग करने वाले आरोपी को कोतवाली पुलिस तलाश कर रही है लेकिन अब तक वह पुलिस गिरफ्त से बाहर है। बताया जाता है कि रक्षाबंधन के दिन साई साकार कॉलोनी निवासी विशाल बघेल ने कोतवाली थाना अंतर्गत लोनिया में साले और बुआ सास के ऊपर फायरिंग कर दिया जिससे दोनों घायल हो गया जिन्हे प्राथमिक उपचार के बाद नागपुर रेफर किया गया जहां दोनों का इलाज चल रहा है।
बताया जाता है की विशाल बघेल हॉक फोर्स बालाघाट का जवान है जबकि उसकी पत्नी आरक्षक है जिनका लंबे समय से  विवाद चल रहा है। रक्षा बंधन के दिन विशाल बघेल लोनिया पहुंचा जहां किसी बात को लेकर विवाद हो गया जिसके चलते उसने अपने साले 22 वर्षीय जयदीप पिता रामगोपाल बघेल एवं बुआ सास सुलोचना पति मेघनाथ बघेल निवासी जैतपुर कला के ऊपर फायरिंग कर दिया जिससे दोनों गंभीर घायल हो गए। बताया जाता है कि विशाल बघेल के साथ एक सतीश बघेल नामक युवक का नाम भी सामने आ रहा है जो फायरिंग के दौरान उसके साथ था घटना के बाद से दोनों फरार बताए जा रहे हैं।
ससुर के ऊपर भी किया था प्राणघातक हमला
सूत्र बताते हैं कि विशाल बघेल ने अपने ससुर रामकुमार बघेल के ऊपर तलवार से प्राणघातक हमला किया था जिसके बाद रामकुमार बघेल को लगभग 18 टांके लगे थे लेकिन पुलिस ने रामकुमार बघेल के ऊपर कोई संगीन धारा नहीं लगाया था। रामकुमार के ऊपर उस समय धारा 324,25 आम्र्स एक्ट एवं 325 लगाई गई थी। बताया जाता है कि तब रामकुमार बघेल मुचलके में छूट गया था और घटना के एक दिन पहले ही उसने जमानत लिया था। पीडि़त परिवार के लोगों का कहना है कि विशाल बघेल ने जब अपने ससुर रामकुमार बघेल के ऊपर प्राणघातक हमला करते हुए तलवार मारा था तब उसके विरूद्ध संगीन धाराओ के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया होता तो यह घटना होने से बच जाती। बताया जाता है कि आरोपी गिरफ्तारी नहीं होने के बाद बघेल युवा क्रांति सेना के लोगो ने ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि विशाल बघेल ने अपने ससुर के ऊपर प्राणघातक हमला किया था तब थाना प्रभारी और विवेचक ने कुछ लोगो के दबाव मे घटना को दबाने का प्रयास किया था। बताया जाता है कि आरोपी हॉक फोर्स का जवाब है और वह बालाघाट एसपी के यहां कुक का काम भी करता था वहीं उसके परिवार के कुछ लोग बड़ी पोस्ट में भी बताये जा रहे है जिसके कारण उसके ऊपर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हो पाई। अब जबकि विशाल ने अपने साले और बुआ सास के ऊपर प्राणघातक हमला किया ऐसे में देखना यह है कि पुलिस कब तक आरोपी को गिरफ्तार कर पाती है।

अब दलसागर मे फांउटेन लाईट और साउंड सिस्टम में विशेष ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की तैयारी

लखनादौन क्षेत्र के ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की तैयारी में तकनीकी अधिकारी, 06 करोड़ 31 लाख का है काम
सिवनी महाकौशल।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा झील एवं तालाबों के रखरखाव एवं सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 156.73 लाख की लागत से दलसागर तालाब में फुटब्रिज एवं टापू के सौंदर्यीकरण की राशि स्वीकृत की गई थी तब लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन ने 36 प्रतिशत अधिक की दर से ठेका ले लिया था जिसे सिवनी नगर पालिका परिषद ने 12 मई 2023 को कार्यादेश जारी किया। आधा अधूरा काम करने के बावजूद राहुल जैन ने नगर पालिका के तकनीकी अधिकारियों को विश्वास में लेते हुए 01 करोड़ से अधिक का भुगतान लेने का प्रयास किया लेकिन दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के द्वारा लगातार समाचार प्रकाशन के बाद वर्तमान में ठेकेदार को भुगतान नहीं हो पाया है। इस बीच सूत्र बताते है कि सिवनी के दलसागर तालाब में नगरीय अधोसरंचना निर्माण योजना के अंतर्गत दलसागर तालाब में फाउंटेन लाईट एवं साउंड सिस्टम के लिए 6 करोड़  31 लाख हजार 987 रू. का टेंडर भी निकाला गया है।
ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तो में फेरबदल की चल रही तैयारी
सूत्र बताते हैं कि जिस तरह राहुल जैन को फुटवर्क एवं टापू सौंदर्यीकरण का ठेका 36 प्रतिशत अधिक की दर से दिया गया है उसी तरह लगभग 6 करोड़ 31 लाख की लागत से होने वाले दलसागर तालाब में फाउंटेन लाइन एवं साउंड सिस्टम के काम के लिए भी लखनादौन क्षेत्र के ही ठेकेदार को फायदा पहुंचाने का प्रयास चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि लगभग 6 करोड़ 31 लाख की लागत से होने वाले उक्त निर्माण कार्य के लिए जो टेंडर जारी किया गया है उसमें कुछ ऐसी शर्ते जोड़ दी गई है जिसका पालन हर ठेकेदार या निर्माण एजेंसी नहीं कर सकती। सूत्र बताते है कि शर्त जोडऩे के पीछे सबसे बड़ी वजह लखनादौन क्षेत्र के कुछ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाना है।
बताया जाता है कि सिवनी नगर पालिका परिषद के द्वारा 18 जुलाई 2023 को टेंडर क्र. 2023-यूएडी-292087/18.07.2023 को प्रकाशित किया गया जिसमें निविदा की अंतिम तिथि 23 अगस्त दी गई थी। बताया जाता है कि उक्त टेंडर निकलने के बाद सिवनी नगर पालिका परिषद में लोक निर्माण सभापति श्रीमती आकांक्षा शीबू सेंगर ने सीएमओ को पत्र लिखते हुए आपत्ति लगाते हुए उन्हें अवगत कराया था कि उक्त टेंडर की अंतिम तिथि 23 अगस्त है जिसमें एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि निविदा में भाग लेने के लिए सीनियर वर्क एक्सपीरियंस ठेकेदार का होना आवश्यक है। उक्त शर्त के चलते निविदा आम ठेेकेदारों के लिए नहीं खुल पायेगी और ना ही इस प्रक्रिया में आम ठेकेदार भाग ले पायेंगे जिससे नगर पालिका परिषद को आर्थिक नुकसान होने की संभावना है। उन्होंने सीएमओ को लिखे पत्र में कहा कि इस तरह की शर्तो को हटाया जाये जिससे एक या दो लोग को फायदा हो। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी शर्त लगाई जाती है तो निविदा डालने वाले ठेकेदारो के द्वारा अधिक दर पर निविदा लगाई जायेगी जिससे शासन को भी नुकसान होगा। हालांकि सूत्र बताते हैं कि पीडब्ल्यूडी के सभापति के द्वारा आपत्ति जताये जाने के बावजूद कुछ राजनीतिक रसूखदारो के दबाव में तकनीकी अधिकारी माननीयो के चहेते ठेकेदारो को फायदा पहुंचाने उक्त शर्त में ही टेंडर जारी करने के प्रयास में है। यदि ऐसा होता है तो सिवनी नगर पालिका परिषद को करोड़ो का नुकसान होगा।

कही कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री लल्लू बघेल से भाजपा अध्यक्ष आलोक दुबे का अघोषित समझौता तो नही था ?

जिला पंचायत के वार्ड 01 से भाजपा ने किसी को नही बनाया था अपना समर्थित प्रत्याशी,वार्ड 15 से मुनमुन ने बचाई थी पार्टी की लाज
सिवनी महाकौशल। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व्हीडी शर्मा ने आलोक दुबे को जिला भाजपा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी इसलिए सौंपी थी ताकि सिवनी जिले में भारतीय जनता पार्टी मजबूत स्थिति में पहुंच सके लेकिन आलोक दुबे के कई कांग्रेसियों से इतने मधुर संबंध रहे कि उन्होंने कांग्रेस को कई जगह वॉकओवर देने से परहेज नहीं किया। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को ही देख लिया जाए तो पता चल जाएगा कि आलोक दुबे किस तरह से नाकाम रहे हैं। असल में सिवनी जिला पंचायत अध्यक्ष का पद एससी के लिए आरक्षित था। सिवनी जिले के 19 जिला पंचायत वार्डों में वार्ड क्रमांक 01 और वार्ड क्रमांक 15 एससी वर्ग के लिए आरक्षित था। आलोक दुबे इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि दोनो वार्डो से जीतने वाले प्रत्याशियों में से कोई एक ही जिला पंचायत का अध्यक्ष बनेगा बावजूद इसके उन्होंने दोनो ही वार्डो से भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा नहीं किया था चूंकि वार्ड क्रमांक 1 से कांग्रेस ने प्रभारी महामंत्री ब्रजेश उर्फ लल्लू बघेल को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था जिनकी पारिवारिक पृष्ठ भूमि भाजपाई है उक्त वार्ड से भाजपा ने ना तो किसी को अधिकृत रूप से अपना प्रत्याशी बनाया था और ना ही भाजपा ने अपने किसी समर्थक को जिताने में कोई प्रयास किया था सूत्र बताते हैं कि जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे और जिला कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री ब्रजेश उर्फ लल्लू बघेल के बीच मधुर संबंध है जिसके चलते आलोक दुबे ने भाजपा के सिद्धांतों को दरकिनार कर दिया और किसी को भी पार्टी समर्थित प्रत्याशी नहीं बनाया जिसके चलते वार्ड क्रमांक एक से कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी बृजेश उर्फ लल्लू बघेल की जीत हो गई।
मुनमुन राय ने वार्ड 15 से बचाई थी लाज
जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे को सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन का एहसानमंद रहना चाहिए जिन्होंने भाजपा की लाज बचा लिया था। असल में वार्ड क्रमांक 15 से भी आलोक दुबे ने किसी को भारतीय जनता पार्टी का समर्थित प्रत्याशी नहीं बनाया था। सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन ने वार्ड क्रमांक 15 की बागडोर संभाला और श्रीमती मालती डेहरिया के लिए सक्रिय हुए बताया जाता है कि चुनाव के चंद दिन पहले ही मालती डेहरिया को भारतीय जनता पार्टी ने अपना समर्थित उम्मीदवार बनाया जो सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन के विशेष प्रयासों से जीत गई, यदि दिनेश राय मुनमुन वार्ड क्रमांक 15 से सक्रिय नहीं होते तो श्रीमती मालती डेहरिया का जीत पाना भी असंभव रहता। दिनेश राय मुनमुन के प्रति एहसानमंद होने के बजाए आलोक दुबे मुनमुन राय के विरोध में एकजुट होने वाले भाजपा नेताओं के साथ खड़े होते नजर आ रहे है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व्हीडी शर्मा को अपने करीबी आलोक दुबे से यह अवश्य पूछना चाहिए की कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री ब्रजेश उर्फ लल्लू बघेल से उनका कोई अघोषित समझौता तो नही था और यदि अघोषित समझौता नहीं था तो फिर वार्ड क्रमांक 01 से लल्लू बघेल के विरुद्ध भाजपा ने अपने समर्थित प्रत्याशी की घोषणा क्यों नही किया। व्हीडी शर्मा को आलोक दुबे से यह भी पूछना चाहिए कि लखनादौन नगर परिषद के वार्ड क्र. 05 से चुनाव जीती मंजू साहू को हराने के लिए उन्होंने वार्ड क्र. 12 से निर्दलीय चुनाव जीती मीना बलराम गोल्हानी को प्रत्याशी क्यों बनाया था तब पता चल जायेगा कि अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए आलोक दुबे ने पार्टी के सिद्धांतो से समझौता करने में कोई कसर नहीं छोड़ा।

आलोक दुबे ने लखनादौन नगर परिषद में भाजपा पार्षद मंजू साहू के बजाय मीना बलराम गोल्हानी को बनवाया था अध्यक्ष

मुनमुन राय की पसंद का अध्यक्ष ना बन जाये इसलिए निर्दलीय को अध्यक्ष बनाने में निभाई थी भूमिका
सिवनी महाकौशल। आलोक दुबे को भाजपा जिलाध्यक्ष बने 03 साल से अधिक का समय हो गया। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपने बेहद ही करीबी आलोक दुबे को जिला भाजपा का अध्यक्ष इसलिए बनाया था ताकि उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी मजबूत हो सके। तीन सालो में आलोक दुबे के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी कितनी मजबूत हुई है और अध्यक्ष रहते आलोक दुबे कितने मजबूत हुए है इसकी समीक्षा वीडी शर्मा को अवश्य करना चाहिए।
वैसे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओ की माने तो आलोक दुबे भाजपा के कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में नाकाम ही रहे हैं, उनके रहते भारतीय जनता पार्टी में इतनी गुटबाजी हो गई है कि वह भाजपा के प्रत्याशियो को हराने निर्दलियो का सहारा तक लेते हैं जिसका प्रमाण नगर परिषद लखनादौन का चुनाव रहा है। बताया जाता है कि लखनादौन नगर परिषद से वार्ड क्र. 12 में श्रीमती मीना बलराम गोल्हानी को भारतीय जनता पार्टी ने टिकिट नही दिया था जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीता था। बताया जाता है कि जब नगर परिषद लखनादौन के अध्यक्ष का चुनाव होना था तब भारतीय जनता पार्टी की टिकिट से वार्ड क्र. 05 से चुनाव जीती पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष मंजू साहू अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार थी जिन्हें सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन का संरक्षण मिला हुआ था, यह बात जिला भाजपा अध्यक्ष आलोक दुबे को स्वीकार नहीं थी जिन्होंने स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ मिलकर निर्दलीय चुनाव लड़ी श्रीमती मीना गोल्हानी को भाजपा का प्रत्याशी घोषित करवा दिया और इस तरह अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा की अधिकृत पार्षद मंजू साहू को हार का सामना करना पड़ा। ऐसा ही कुछ उपाध्यक्ष के चुनाव में भी हुआ जहां निर्दलीय चुनाव जीती विजूषा प्रदीप राजपूत को जीत मिली।
अध्यक्ष बनने के बाद मुनमुन राय ने सबसे ज्यादा किया था मदद
सिवनी में भाजपा नेता इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि जब आलोक दुबे को जिला भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था उसके बाद सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन ही एक ऐसे विधायक रहे हैं जो आलोक दुबे को अपने साथ शासकीय बैठकों में लेकर जाते थे साथ ही ग्रामीण क्षेत्रो में उनके कार्यक्रम होते थे तब भी वह आलोक दुबे को ही साथ में लेकर जाते थे। मुनमुन राय और आलोक दुबे के बीच बढ़ती नजदीकियो को बढ़ते देख भाजपा के अन्य नेताओं को यही लगता था कि मुनमनु राय और आलोक दुबे एक हैं लेकिन बाद में आलोक दुबे की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं बढऩे लगी और वह विधायक बनने का सपना देखने लगे जिसके कारण उन्होंने दिनेश राय मुनमुन से किनारा कर लिया और इतना विरोध मे आ गये कि नगर परिषद लखनादौन में अध्यक्ष चुनाव में मुनमुन राय की करीबी मंजू साहू को जब नगर परिषद का अध्यक्ष प्रत्याशी बनाया गया तो आलोक दुबे ने अपने करीबियों के साथ मिलकर निर्दलीय चुनाव जीती श्रीमती मीना बलराम गोल्हानी को पार्टी का प्रत्याशी घोषित करवाते हुए उन्हें जीत दिलवाकर यह बताने का प्रयास किया कि पार्टी के भीतर मुनमुन राय से ज्यादा उनकी पकड़ है। आलोक दुबे की यही अति महत्वाकांक्षा पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

अब चुनाव लडऩे का सपना पालने लगे आलोक

मई 2020 को प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष व्हीडी शर्मा ने सिवनी जिले के युवा आलोक दुबे को इसलिए अध्यक्ष बनाया था ताकि वह अपनी ऊर्जा संगठन को मजबूत करने में लगाएं। राजनीति में अक्सर कहा जाता है की नेताओ की महत्वाकांक्षा कभी खत्म नहीं होती ऐसा ही कुछ जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे के साथ हो रहा है। जब आलोक दुबे जिला भाजपा के अध्यक्ष बने थे तब जिला भाजपा कार्यालय में उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन जैसे-जैसे उनका कार्यकाल बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे उनके सपनों में पर लगते जा रहे है।
सूत्र बताते हैं कि जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे विधानसभा चुनाव लडऩा चाहते हैं और उनकी नजर सिवनी के अलावा केवलारी विधानसभा सीट में भी लगी हुई है। चूंकि आलोक दुबे ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति की शुरुवात किया था। जमीनों के कारोबार से जुड़े आलोक दुबे ने सपने में भी नही सोचा था कि उन्हें जिला भाजपा अध्यक्ष बनने का मौका मिलेगा।
आलोक दुबे की किस्मत उस समय चमक गई जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान व्हीडी शर्मा को मिली जिन्होंने प्रबल दावेदारों को दरकिनार करते हुए अपने करीबी आलोक दुबे को सिवनी जिला भाजपा की कमान सौंपते हुए राजनीतिक जमीन तैयार करने का एक बेहतर मौका दिया। उम्मीद की जा रही थी कि जिला भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा करने वाले आलोक दुबे निष्पक्ष होकर काम करेंगे और जिले में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करते हुए गुटबाजी को खत्म करने का प्रयास करेंगे लेकिन अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने भावनाओं में बहकर घोषणा तो कर दिया था लेकिन धीरे-धीरे उनकी घोषणा ठंडे बस्ते में चले गई और उन्होंने जमीनों के कारोबार के साथ साथ राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाकर विधानसभा चुनाव लडऩे का सपना पाल लिया। हालांकि आलोक दुबे ने अपनी तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया कि वह चुनाव लडऩा चाहते हैं लेकिन उनके करीबी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आलोक दुबे चुनाव लड़ेंगे और जिस तरह व्हीडी शर्मा ने उन्हें जिला भाजपा का अध्यक्ष बनाया है उसी तरह  व्हीडी शर्मा के रहते आलोक दुबे को विधानसभा की टिकट भी मिल सकती है।
मुनमुन राय के विरोधियों की बैठक में भी होते है शामिल
किसी भी संगठन के जिला अध्यक्ष पार्टी के मुखिया कहलाते है जिन्हे गुटबाजी से दूर ही रहना चाहिए । भाजपा के जिला अध्यक्ष आलोक दुबे इन दिनों भाजपा के मुखिया है लेकिन वह गुटबाजी को हवा देने के लिए आयोजित बैठकों का हिस्सा बनते रहते हैं सूत्र बताते हैं कि कुछ दिन पहले लूघरवाड़ा में स्थित एक नवनिर्मित होटल में भारतीय जनता पार्टी के कुछ स्थापित नेताओं की बैठक आयोजित की गई थी जिसमें सिवनी विधानसभा क्षेत्र से मुनमुन राय के अलावा किसी को भी टिकट दिए जाने की बात चल रही थी उस समय संकल्प हमारा- विकल्प तुम्हारा के उद्देश्य की पूर्ति के लिए चिंतन और मनन भी किया गया था तब सिवनी जिला भाजपा के अध्यक्ष आलोक दुबे भी उस बैठक का हिस्सा बने थे। सूत्र बताते हैं कि आलोक दुबे भी चाहते हैं कि किसी तरह सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन का विरोध चरम पर पहुंच जाए और विरोध के चलते उनकी टिकट में खतरे का बादल मंडराने लगे जिसका फायदा उन्हें मिल सके। यही कारण है कि आलोक दुबे संगठन से लेकर अन्य नियुक्तियों में दिनेश राय मुनमुन की पसंद और नापसंद का ख्याल रखे बिना नियुक्तियां करवा रहे हैं।

18 साल से मंत्री पद के लिए तरस रहा सिवनी

सिवनी महाकौशल। प्रदेश सरकार ने चुनाव से लगभग दो महीने पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया जिसमे तीन मंत्रियों को शामिल किया गया है। उक्त मंत्रिमंडल में महाकौशल से बालाघाट के विधायक गौरीशंकर बिसेन ,रीवा के विधायक राजेंद्र शुक्ला को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है जबकि टीकमगढ़ के खरगापुर के विधायक राहुल लोधी को राज्य मंत्री बनाया गया है। बताया जाता है कि चुनाव से पहले जातिगत एवं क्षेत्रीय समीकरण को देखते हुए तीन चेहरों को शामिल किया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक बार फिर सिवनी की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। असल में मध्य प्रदेश की सरकार लगातार सिवनी जिले को नजर अंदाज करते रही है। वर्ष 2003 में जब पहली बार प्रदेश में सुश्री उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनी थी तब उमा भारती ने अपने मंत्रिमंडल में डॉक्टर ढालसिंह बिसेन को वन परिवहन और खनिज जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा था लेकिन बाद में उमा भारती की विदाई हो गई थी और 2004 में भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया था तब बाबूलाल गौर के मंत्रिमंडल में डॉक्टर ढालसिंह बिसेन को 2004 -2005 में स्कूल शिक्षा एवं जेल मंत्री बनाया गया था। शिवराज सिंह चौहान के हाथो में प्रदेश की कमान आने के बाद सरकार ने जिले के जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करना शुरू कर दिया। स्थिति यह हो गई है की पिछले लगभग 18 सालो से सिवनी जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि को मंत्री नही बनाया गया जबकि इसके ठीक विपरीत सरकार ने बालाघाट जिले को हमेशा से नेतृत्व दिया है। वर्तमान में बालाघाट जिले में दो मंत्री हो गये है जिनमे से एक आयुषमंत्री रामकिशोर कांवरे है तो दूसरे वरिष्ट नेता डॉक्टर ढालसिंह बिसेन को मंत्री बना दिया गया। जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ था तब वारासिवनी के निर्दलीय विधायक प्रदीप जयसवाल को खनिज निगम का अध्यक्ष बनाते हुए उन्हें भी केबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया, कुल मिलाकर वर्तमान में बालाघाट जिले के तीन मंत्री है जबकि सिवनी जिले को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया।
2013 में ढालसिंह और नरेश दिवाकर को मिला था मंत्री का दर्जा
2005 के बाद सिवनी जिले में किसी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था तब भारतीय जनता पार्टी के भीतर जमकर आक्रोश पनप रहा था जिसे देखते हुए वर्ष 2012-13 में राज्य सरकार ने डॉक्टर ढालसिंह बिसेन को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया था जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था वही सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनते हुए उन्हें भी मंत्री का दर्जा दिया गया था लेकिन उसके बाद से सिवनी जिले के किसी भी नेता को ना तो मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और ना ही आयोग मंडल में शामिल करते हुए उन्हें मंत्री का दर्जा दिया गया कुल मिलाकर लंबे समय से सिवनी जिले के भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है और आश्चर्य इस बात का है कि बार-बार दरकिनार किए जाने के बाद भी सिवनी जिले के भाजपा नेता शीर्ष नेतृत्व के सामने भाईसाहब और जी-हुजूरी करते हुए अपने नंबर बढ़ा रहे हैं, उन्हें सिवनी जिले के विकास से कोई लेना देना नहीं है उन्हें तो सिर्फ अपने विकास से लेना देना है यही कारण है कि लंबे समय से सिवनी के भाजपा नेताओं ने ना तो अपनी नाराजगी जाहिर किया और ना ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सिवनी के लोगों की भावनाओं से अवगत कराया जिसे पूरा फायदा राज्य सरकार उठा रही है जो सिवनी को लगातार नजर अंदाज कर रही है।

ठेकेदार राहुल जैन मुनमुन के सपनों में फेर रहे पानी

सिवनी महाकौशल। सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन का प्रयास है कि किसी भी तरह विधानसभा चुनाव से पहले सिवनी के दलसागर तालाब में फुटब्रिज निर्माण के साथ साथ टापू का सौंदर्यीकरण एवं टापू में राजा दलपतशाह की प्रतिमा स्थापित हो जाये जिसके लिए 19 जुलाई को मुनमुन राय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुलाकर राजा दलपतशाह की प्रतिमा का शिलान्यास कार्यक्रम भी आयोजित किया था लेकिन मुनमुन राय के सपनो में लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन पानी फेरते नजर आ रहे है।
असल में राहुल जैन ने 36 प्रतिशत अधिक की दर से फुटब्रिज का ठेका लिया हुआ है जो लगभग 1 करोड़ 88 लाख के आसपास का ठेका बताया जा रहा है जिसके लिए सिवनी नगर पालिका परिषद ने 12 मई 2023 को कार्यादेश जारी किया था। साढ़े तीन महीने से ज्यादा का समय बीत गया राहुल जैन सिर्फ पिल्लर ही खड़े कर पाये। अपने आपको सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन का करीबी बताने वाले राहुल जैन ने अनुभवी तकनीकी अधिकारियों के बजाय अनुभवहीन तकनीकी अधिकारी अशरफ अली की देखरेख में काम प्रारंभ तो किया लेकिन उक्त काम की गुणवत्ता को लेकर प्रश्रचिन्ह लगने लगे। बताया जाता है कि राहुल जैन ने नगर पालिका परिषद के कुछ तकनीकी अधिकारियों को विश्वास में लेकर एमबी में माप दर्ज कराते हुए एक करोड़ से अधिक का बिल निकलवाने का प्रयास भी किया लेकिन उक्त बिल अधर में लटक गया। जानकारो की माने तो राहुल जैन के द्वारा चुनाव से पहले किसी भी स्थिति में ना तो फुटब्रिज का निर्माण किया जायेगा और ना ही सौंदर्यीकरण, ऐसे में सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन दलसागर तालाब में फुटब्रिज बनाने और दलसागर के सौंदर्यीकरण के साथ साथ राजा दलपतशाह की प्रतिमा स्थापित करने का श्रेय नहीं ले पायेंगे। तकनीकी जानकारो की माने तो राहुल जैन कछुआ गति से काम कर रहे है, यदि इसी गति से काम हुआ तो समयसीमा के भीतर दलसागर में फुटब्रिज व सौंदर्यीकरण का काम नहीं हो पायेगा। आश्चर्य तो इस बात का है कि जिस दलसागर तालाब के सौंदर्यीकरण व राजा दलपतशाह की प्रतिमा स्थापित करने का सपना दिनेश राय मुनमुन ने देखा था वहीं विधायक ठेकेदार राहुल जैन द्वारा बरती जा रही लापरवाही में मौनधारण किये हुए है इसके पीछे क्या कारण है यह तो वे ही जाने लेकिन जिस तरह से ठेकेदार लापरवाही बरत रहा है उससे तो यही लग रहा है कि ठेकेदार विधायक दिनेश राय मुनमुन के सपनो में पानी फेरने की पूरी तैयारी कर रहा है।

भाजपा की दूसरी सूची में भी सिवनी और केवलारी के प्रत्याशियों की नहीं होगी घोषणा

लखनादौन, वारासिवनी, छिंदवाड़ा जैसी विधानसभाओ में हो सकती है घोषणा
सिवनी महाकौशल। मध्य प्रदेश में भाजपा पूरी तरह चुनाव की तैयारी में जुट गई है। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की 39 विधानसभा सीटों की घोषणा कर दिया जिनकी ट्रेनिंग भी शुरू हो गई। सूत्रों की माने तो यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो एक सप्ताह के भीतर भारतीय जनता पार्टी दूसरी सूची भी फाइनल कर सकती है। पहली सूची में सिवनी जिले की बरघाट विधानसभा सीट से कमल मर्सकोले के नाम की घोषणा हो चुकी है। सूत्र बताते है की दूसरी सूची में लखनादौन विधानसभा से भाजपा अपने प्रत्याशी की घोषणा कर सकती है हालांकि लखनादौन विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी को ऐसा कोई चेहरा नजर नहीं आ रहा जो कांग्रेस को पटखनी दे सके वहीं सिवनी एवं केवलारी विधानसभा में दावेदारों को इंतजार करना पड़ सकता है। वर्तमान में सिवनी एवं केवलारी विधानसभा क्षेत्र में दावेदारों की संख्या ज्यादा है और दोनो ही विधानसभा में भाजपा के भीतर गुटबाजी साफ तौर से देखने को मिल रही है।
राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं की माने तो शीर्ष नेतृत्व दोनो विधान सभाओं में से किसी एक विधानसभा से मौजूद विधायक की टिकिट काट सकती है जिसे देखते हुए दोनो ही विधानसभाओ में दर्जनो नेता टिकिट के लिए सक्रिय हो गये है। मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा में अन्य प्रदेशो के विधायको को फीडबैक लेेने लगाया गया है। जिले की सिवनी एवं केवलारी विधानसभा में महाराष्ट्र के विधायक फीडबैक के लिए घूम रहे हैं जिनके सामने कई लोगों ने अपनी दावेदारी पेश भी किया वहीं कुछ लोगों ने मौजूदा विधायको के खिलाफ मोर्चा भी खोला। यदि दूसरी सूची में केवलारी व सिवनी विधानसभा के नामो की घोषणा नहीं होती तो दोनो ही विधानसभाओ में राजनीति दिलचस्प हो जाएगी।

क्या गुटबाजी को हवा देने गंभीर सिंह चौधरी और राजकुमार खुराना से भी रायशुमारी करेंगे रणदीप

सिवनी महाकौशल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को पीछे छोड़ पहली सूची जारी कर 39 प्रत्याशियों के नाम तय कर दिए जबकि एक सप्ताह के भीतर दूसरी सूची जारी करने की तैयारी चल रही है। वहीं दूसरी तरफ अभी कांग्रेस का मंथन ही चल रहा है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस भी 10 से 15 सितंबर के बीच लगभग 100 उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है जिसके लिए पार्टी महासचिव एवं प्रदेश के प्रभारी बनाए गए रणदीप सुरजेवाला और छानबीन समिति के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह 02 सितंबर को भोपाल पहुंच रहे हैं जो प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जिला अध्यक्षों एवं जिला प्रभारी से संभावित उम्मीदवारों के नाम पर अलग-अलग रायशुमारी करेंगे और चुनाव की तैयारी व राजनीति के संबंध में उन्हें संबोधित भी करेंगे।
 वैसे रणदीप सुरजेवाला व पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को सिवनी जिले के प्रभारी गंभीरसिंह चौधरी एवं जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना से रायशुमारी नहीं करना चाहिए क्योंकि सिवनी में गंभीर सिंह चौधरी के नेतृत्व में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। स्थिति यह हो गई है कि गंभीर सिंह चौधरी को हटाने के लिए सिवनी के गली मोहल्ले में ‘गुटबाज गंभीर सिंह को हटाओ-भाजपा बचाओ’ के नारे लिखे हुए पोस्टर तक चिपकाए गए थे। सूत्र बताते है कि सिवनी जिले में गंभीर सिंह चौधरी की कांग्रेस राजकुमार खुराना और लल्लू  बघेल तक ही सिमटकर रह गई है। सिवनी जिले में जब कुलदीप राठौर रायशुमारी करने पहुंचे थे तब जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना उनके करीबी ब्रजेश उर्फ  लल्लू बघेल, राजा बघेल,आनंद पंजवानी,अतुल मालू, मोहन चंदेल, घनश्याम सनोडिया, मुबीन राजा सहित लगभग 10 लोगो ने दावेदारी पेश किया था। गंभीर सिंह चौधरी की नजरों में सभी दावेदार बराबर होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है, जब से वह प्रभारी बने है तब से उनकी राजनीति राजकुमार खुराना और ब्रजेश उर्फ लल्लू बघेल तक ही सिमटकर रह गई है वहीं दूसरी तरफ हाल ही में एक समाचार पत्र के द्वारा सर्वे कराया जा रहा था जिसमे राजकुमार खुराना और ब्रजेश उर्फ लल्लू बघेल का नाम भी शामिल था उक्त सर्वे में भाग लेने श्री खुराना के द्वारा उक्त एप्प हजारों लोगो को शेयर किया गया था जो यह साबित करता है कि श्री खुराना स्वयं के लिए और अपने करीबी ब्रजेश उर्फ लल्लू बघेल के लिए माहौल बनाना चाह रहे है, ऐसी स्थिति में यदि रणदीप सुरजेवाला और जितेंद्र सिंह जिला प्रभारी गंभीर सिंह चौधरी और जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना के साथ रायशुमारी करेंगे तो स्वाभाविक है वह अपनी पैरवी करेंगे और स्वयं की दावेदारी मजबूत बताने का प्रयास करेंगे। जिला प्रभारी एवं जिला अध्यक्षों से रायशुमारी करने से पहले रणदीप सुरजेवाला व जितेंद्र सिंह को यह समीक्षा करना चाहिए कि किन जिलों के जिला अध्यक्ष टिकट की मांग कर रहे हैं और किन जिलों के प्रभारी के ऊपर गुटबाजी को हवा देने का आरोप लग रहा है ऐसे जिला अध्यक्षों और जिला प्रभारी से उन्हें किनारा करना चाहिए वरना कांग्रेस उन सीटों से भी हाथ धो बैठेगी जो सीट कांग्रेस जीत सकती है।

छपारा जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी ‘कमीशन’ की भेंट चढ़ी

लंबे समय से छपारा जनपद कई मामलो में सुर्खियां बटोर चुकी है। छपारा जनपद में पदस्थ रहे लोकेश नारनोरे को शासन ने निलंबित तक कर दिया। लोकेश नारनोरे के बाद छपारा जनपद में प्रभारी सीईओ के पद पर विवादित और चर्चित अधिकारी श्रीमती सुमन खातरकर को पदस्थ किया गया जिन्होंने छपारा जनपद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी छीनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन सीईओ लोकेश नारनोरे के कार्यकाल के दौरान जनपद में सीईओ सहित जनपद अध्यक्ष सदमसिंह वरकड़े, उपाध्यक्ष प्रभातसिंह ठाकुर सहित अन्य अधिकारियों के लिए व्हीआईपी चेयर खरीदी गई थी लेकिन कुर्सी सप्लाई करने वाली फर्म को भुगतान नहीं किया गया था, इस बीच तत्कालीन सीईओ लोकेश नारनोरे को निलंबित कर दिया गया जिसके चलते व्यापारी का बिल अधर में लटक गया। सूत्र बताते है कि व्यापारी कई दिनों से जनपद की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमन खातरकर के चक्कर लगा रहा था लेकिन सीईओ खातरकर ने बिल का भुगतान करने से मना कर दिया जिसके बाद व्यापारी मंगलवार को जनपद पहुंचा और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चेंबर से कुर्सियां उठा लिया जिसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बैठने के लिए फायबर की कुर्सियां लगाई गई।
कमीशन के खेल की हो रही चर्चा
सूत्र बताते हैं कि छपारा जनपद में पदस्थ सुमन खातरकर व्यापारी का बिल पास नहीं करना चाहती थीं जिसके पीछे कमीशन का खेल बताया जाता है। सूत्रों की माने तो सुमन खातरकर इसलिए भी बिल पास नहीं करना चाहती थी क्योंकि उक्त कुर्सी के लिए तत्कालीन सीईओ लोकेश नारनोरे के कार्यकाल के दौरान खरीदी की गई थी, संभव है कि उक्त कुर्सी के बिल के लिए तत्कालीन सीईओ ने अपना कमीशन भी जोड़ा होगा। बाद में सीईओ के पद पर सुमन खातरकर की पदस्थापना हो गई। हो सकता है कि सुमन खातरकर भी अपना हिस्सा चाहती हों लेकिन व्यापारी के द्वारा उनकी बात नहीं मानी गई जिसके बाद व्यापारी ने दबंगई दिखाते हुए व्यापारी ने जनपद से कुर्सियां उठा ले आया। इस मामले को लेकर जनपद के अध्यक्ष उपाध्यक्ष भी बेहद नाराज बताये जा रहे हैं चूंकि जनपद अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के है वहीं उपाध्यक्ष प्रभातसिंह ठाकुर युवा कांग्रेस छपारा ब्लॉक के अध्यक्ष बताये जा रहे है। चर्चा है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष विपक्षी पार्टी के होने के कारण भी सीईओ द्वारा कुर्सी सप्लाई करने वाले व्यापारी को भुगतान नहीं किया जा रहा था। बहरहाल इसमें सच्चाई क्या है यह तो जांच का विषय बना हुआ है लेकिन छपारा में चर्चा चल रही है कि पद में रहते हुए भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी छीन ली गई।

क्या पालिका अध्यक्ष शफीक खान की कुर्सी खतरे में है!

सिवनी जिले में इन दिनों किस्सा कुर्सी का चल रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में अध्यक्ष की कुर्सी में बैठने के लिए लल्लू बघेल ने जी तोड़ प्रयास किया लेकिन उन्हें कुर्सी से हाथ धोना पड़ा क्योंकि उनके पास डिजीटल जाति प्रमाण पत्र नहीं था। सिवनी नगर पालिका परिषद में शफीक खान के नेतृत्व में 10 अगस्त 2022 को नगर पालिका परिषद का गठन किया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गांधी वार्ड निवासी विशाल यादव ने शफीक खान से जुड़े हुए कुछ दस्तावेजो को उच्च न्यायालय में चैलेंज किया जिसमें यह बताया गया था कि शफीक खान के द्वारा जो जाति प्रमाण पत्र लगाया गया है वह फर्जी है। सूत्र यह भी बताते हैं कि विशाल यादव ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि शफीक खान ने चुनाव लडऩे के लिए जो शपथ पत्र पेश किया है उसमें उन्होंने अपराधिक प्रकरण से संबंधित जानकारी छुपाया है। सूत्र बताते हैं कि उच्च न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को पत्र जारी करते हुए शफीक खान के ऊपर लगाये गये आरोपो की एक महीने के भीतर जांच करते हुए रिपोर्ट मांगा है जिसके बाद जिला कलेक्टर ने शफीक खान को नोटिस जारी किया, हालांकि इस संबंध में जिला प्रशासन की तरफ से अधिकृत पुष्टि नहीं की गई लेकिन शफीक के दस्तावेजो को लेकर जो शिकायत की गई उसे लेकर नगर पालिका परिषद में दिन भर चर्चाओ का दौर चलते रहा। सूत्रो की माने तो शफीक खान को नोटिस जारी किये जाने की जानकारी जैसे ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को लगी तो उनमें से कुछ नेता इस प्रयास में जुट गये कि किसी भी तरह से शफीक खान की कुर्सी हिल जाये जिसका फायदा उन्हें मिल सके। बताया जाता है कि नोटिस मिलने के बाद शफीक भी अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से कानूनी सलाह ले रहे है फिलहाल सिवनी में किस्सा कुर्सी का चल रहा है जिसमें सब अपना अपना फायदा और नुकसान देख रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि विशाल यादव ने भारतीय जनता पार्टी की टिकिट से गांधी वार्ड से चुनाव लड़ा था और शफीक कांग्रेस से चुनाव जीते थे। शफीक ने विशाल को लगभग 800 वोटो से हराया था, हार के बाद विशाल यादव ने शफीक खान से संबंधित दस्तावेज जुटाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। देखना यह है कि इस मामले में शफीक खान को राहत मिलती है या फिर विशाल यादव की जीत होती है।

ऐसे कैसे भाजपा का फीडबैक ले पायेंगे विधायक सतपुरे?

सिवनी महाकौशल। मध्यप्रदेश में चुनाव होना है जिसकी तैयारी में  कांग्रेस से आगे भाजपा नजर आ रही है। लगभग एक सप्ताह पहले भाजपा ने 39 विधानसभा सीटों में अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दिया वहीं भाजपा अन्य प्रदेशों के विधायको को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र का फीडबैक लेने के लिए तैनात कर चुकी है। सिवनी जिले की केवलारी विधानसभा में महाराष्ट्र के सोलापुर विधानसभा के विधायक श्रीराम सतपूरे को भेजा गया है। बताया जाता है कि श्रीराम सतपुरे को 20 अगस्त से 27- 28 अगस्त तक केवलारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी मंडलों का दौरा करते हुए नब्ज टटोलना है।
राकेश पाल के विरोधी हुए एकजुट
केवलारी विधानसभा सीट से राकेश पाल सिंह ने कांग्रेस के गढ़ को तोड़ते हुए भाजपा का झंडा लहराया। 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रजनीश सिंह को हराया था, लगभग साढ़े चार साल में राकेश पाल का विरोध स्वयं की पार्टी में शुरू हो गया। सूत्र बताते है की केवलारी विधानसभा क्षेत्र के सभी कद्दावर नेताओं ने स्वयं का नाम या अपने किसी करीबी का नाम आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। सूत्र बताते है की कुछ लोगो ने महाराष्ट्र के विधायक श्रीराम सतपुरे के सामने भी दावेदारी पेश कर दिया। केवलारी विधानसभा क्षेत्र में चल रही चर्चाओं की माने तो वर्तमान में केवलारी विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी सर्वे के आधार पर अपने आप को कमजोर समझ रही है यही कारण है कि केवलारी विधानसभा क्षेत्र में नब्ज टटोलने का काम तेजी से चल रहा है। क्षेत्र में दो नेताओं के नाम सबसे ज्यादा लिए जा रहे हैं जिनमें से एक भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वैभव पवार है तो दूसरे केवलारी क्षेत्र के वरिष्ठ नेता श्रीराम ठाकुर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। बताया जाता है कि क्षेत्र में चर्चा है कि राकेश पाल सिंह की टिकट कटती है तो वैभव पवार या श्री राम ठाकुर को दी जा सकती है हालांकि अन्य नेता भी अपने अपने स्तर से अपनी दावेदारी करने में जुटे हुए है।
फीडबैक लेने घूम रहे विधायक के साथ दिखाई दिए राकेश पाल
सूत्र बताते हैं कि केवलारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक राकेश पाल सिंह ग्वालियर में आए अमित सिंह की बैठक में भाग लेने गए हुए थे इसी बीच केवलारी विधानसभा क्षेत्र में सोलापुर के विधायक श्रीराम सतपुरे का आगमन हुआ था जिसके साथ भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री जयदीप चौहान, अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता शाहिद पटेल, नगर परिषद छपारा के उपाध्यक्ष ठा. शिवकांत, नवल श्रीवास्तव जैसे कुछ नेता घूमते नजर आये। वहीं धनौरा मंडल में हुई बैठक में केवलारी के विधायक राकेश पाल सिंह भी नजर आये। फीडबैक लेने आये महाराष्ट्र के विधायक के साथ भाजपा के नेताओं का घूमना क्षेत्र के लोगों को रास नहीं आ रहा। क्षेत्रीयजनों का कहना है कि यदि महाराष्ट्र के विधायक को इमानदारी से फीडबैक लेना है तो उन्हें क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से वन-टू-वन चर्चा करते हुए नब्ज टटोलना चाहिए, इस तरह सार्वजनिक रूप से ना तो कोई किसी का कोई विरोध कर सकता है और ना ही किसी का समर्थन। वन-टू-वन चर्चा करने में श्रीराम सतपुते को केवलारी विधानसभा की हकीकत पता चल सकती थी लेकिन वह नेताओं से घिर गये जिसके बाद केवलारी विधानसभा क्षेत्र की वास्तविक रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचेगी, ऐसा कहा जाना मुश्किल ही होगा।
अस्वस्थता के चलते स्थगित हुई बैठके
महाराष्ट्र के सोलापुर के विधायक श्रीराम सतपुरे को केवलारी विधानसभा सीट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जो 20 अगस्त से लगातार बैठकें ले रहे थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के विधायक को आज पलारी एवं केवलारी क्षेत्र में बैठक करना था जिसके कारण आज आयोजित की जाने वाली बैठक स्थगित कर दी गई हालांिक भाजपा की तरफ से अधिकृत विज्ञप्ति जारी नहीं की गई थी लेकिन इस आशय की जानकारी सोशल मीडिया में अवश्य वायरल कर दी गई थी।

ठेकेदार राहुल जैन के ऊपर क्यों मेहरबान है नगर पालिका के तकनीकी अधिकारी

सिवनी महाकौशल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा झील एवं तालाबो के रखरखाव व सौंदर्यीकरण के लिए सिवनी के दलसागर तालाब में टापू का सौंदर्यीकरण एवं फुटब्रिज निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ 56 लाख 73 हजार स्वीकृत किये गये थे जिसमें उच्च स्तरीय सांठगांठ करते हुए लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन के द्वारा लगभग 36 प्रतिशत अधिक की दर से ठेका प्राप्त कर लिया गया जिसे नगर पालिका परिषद ने 12.05.2023 को राहुल जैन को कार्यादेश जारी किया। नगर पालिका परिषद के द्वारा कार्यादेश मिलने के बाद राहुल जैन ने अपनी कंपनी के तकनीकी अधिकारियों के बिना ही काम प्रारंभ कर दिया जिसके ऊपर सिवनी नगर पालिका के तकनीकी अधिकारी बेहद ही मेहरबान रहे। बताया जाता है कि राहुल जैन के द्वारा कार्यस्थल पर लैब की स्थापना किये बिना काम प्रारंभ कर दिया गया था जहां उन्होंने मटेरियल की गुणवत्ता को ध्यान में रखे बिना मटेरियल का उपयोग किया। उम्मीद की जा रही थी कि सिवनी नगर पालिका के तकनीकी अधिकारी बिल पास करने से पहले ठेकेदार राहुल जैन के द्वारा फुटब्रिज में उपयोग किये गये मटेरियल की जांच करने के बाद ही एमबी (मेजरमेंट बुक) में माप दर्ज करेंगे लेकिन सूत्रों की माने तो नगर पालिका परिषद के तकनीकी अधिकारियों ने एमबी में माप दर्ज कर लिया जिसके आधार पर ठेकेदार राहुल जैन को 1 करोड़ से अधिक का भुगतान करने की तैयारी भी शुरू हो गई। हालांकि दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस के द्वारा लगातार समाचार प्रकाशित करने के बाद सूत्र बताते हैं कि फिलहाल राहुल जैन को किये जाने वाले भुगतान की फाईल रूक गई है।
अपने आपको विधायक का करीबी बताता है राहुल जैन
सिवनी नगर पालिका से जुड़े सूत्रो की माने 01 करोड़ 56 लाख 73 हजार की लागत से होने वाले निर्माण कार्य के लिए राहुल जैन ने लगभग 36 प्रतिशत से अधिक दर पर ठेका लिया हुआ है जो अपने आपको सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन का करीबी बताते हुए नियम विरूद्ध तरीके से बिल पास कराने की कोशिश में लगा हुआ है। सूत्र तो यह भी बताते है कि राहुल जैन सिवनी नगर पालिका परिषद के कुछ अधिकारियों को विश्वास में लेकर बिल पास कराने का प्रयास कर रहा है। देखना यह है कि इस पूरे मामले में सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन सिवनी नगर पालिका परिषद के तकनीकी अधिकारियों से बिल निकालने से पहले यह पूछते है या नहीं कि राहुल जैन के द्वारा ब्रिज निर्माण में जो मटेरियल का उपयोग किया गया है उसकी जांच कराये बिना बिल किसके कहने पर निकाला जा रहा है। फिलहाल सबकी नजर नगर पालिका परिषद के ऊपर टिकी ुहई है।

कांग्रेस विधायक को छोड़ भाजपा के प्रत्याशी को तिलक लगाकर सेवकराम चद्रवंशी दे रहे शुभकामनाएं

सिवनी महाकौशल। भारतीय जनता पार्टी ने बरघाट विधानसभा क्षेत्र से 2 बार के विधायक रहे कमल मर्सकोले को प्रत्याशी बनाया है ।प्रत्याशी घोषित होने के बाद कमल मर्सकोले बरघाट विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं जिनका जगह-जगह स्वागत और सत्कार भी किया जा रहा है । कमल मर्सकोले के स्वागत सत्कार में एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और नेता लगे हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष सेवकराम चंद्रवंशी ने भी कमल मर्सकोले का बकायदा तिलक लगाकर स्वागत कर उन्हें अग्रिम शुभकामनाएं दिया। सेवकराम चंद्रवंशी के द्वारा भारतीय जनता पार्टी के द्वारा घोषित किए गए प्रत्याशी का तिलक लगाकर शुभकामनाएं दिए जाने की फोटो वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई। हालांकि सेवक राम चंद्रवंशी के समर्थक यह कह रहे हैं कि यह एक औपचारिक स्वागत था लेकिन राजनीति में इस तरह की औपचारिक स्वागत चुनावी साल में काफी कुछ तस्वीर साफ कर देता है। चर्चा है कि बरघाट के विधायक अर्जुन काकोडिय़ा  के द्वारा भी लगातार कभी संविधान यात्रा निकाली जा रही है तो कभी आक्रोश यात्रा लेकिन कभी भी कार्यवाहक अध्यक्ष होने के नाते सेवक राम चंद्रवंशी ने अर्जुन सिंह काकोडिय़ा  का इस तरह ना तो स्वागत किया और ना ही उन्हें अग्रिम शुभकामनाएं दिया जबकि कमल मार्सकोले के लिए उनका प्रेम ऐसा उमड़ा की उन्होंने सार्वजनिक रूप से कमल मर्सकोले का स्वागत सत्कार कर दिया जिसके बाद बरघाट विधानसभा क्षेत्र में चर्चा चल रही है कि यह कांग्रेस का संस्कार है या गुटबाजी?
गुटबाजी का असर तो नही
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने जिला कांग्रेस का प्रभारी गंभीर सिंह चौधरी को बनाया है लेकिन जब से गंभीर सिंह चौधरी सिवनी जिला कांग्रेस के प्रभारी बने हैं तब से ही सिवनी जिले में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है जिसके कारण सिवनी में उनके विरोध में गुटबाज गंभीरसिंह चौधरी हटाओ, कांग्रेस बचाओ के नारे लिखे हुए पोस्टर तक चिपकायें गये हैं। गंभीर सिंह चौधरी के बारे में कहा जाता है कि वह ऐसे ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजते है जो गुटबाजी को हवा देने में माहिर है जिनमें से एक सेवक राम चंद्रवंशी भी है। सूत्र बताते हैं कि सेवक राम चंद्रवंशी बरघाट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को मजबूत करने के बजाय कमजोर करने में ज्यादा विश्वास करते हैं यही कारण है कि उन्होंने कमल मर्सकोले  जैसे भाजपा नेता का सार्वजनिक रूप से स्वागत सत्कार कर अपनी मंशा स्पष्ट कर दिया जिसे कमलनाथ या उनकी टीम अब तक समझ नहीं पाई है।

क्या ठेकेदार राहुल जैन को भुगतान करने से पहले मटेरियल गुणवत्ता की जांच कराएगी नगर पालिका

सिवनी महाकौशल। लखनादौन के ठेकेदार राहुल जैन के द्वारा सिवनी के दलसागर तालाब में लगभग एक करोड़ 56 लाख 73 हजार  की लागत से फुट ब्रिज निर्माण किया जा रहा है जिसे लगभग 3 महीने पहले 12 मई को कार्यादेश जारी किया गया था। बताया जाता है की राहुल जैन ने बारिश के दौरान काम प्रारंभ किया है जो अभी तक आधा अधूरा पड़ा हुआ है। बताया जाता है की राहुल जैन ने सिवनी नगर पालिका से लगभग एक करोड़ से अधिक का भुगतान कराने का जुगाड़ भी कर लिया है, यदि नगर पालिका परिषद के पार्षद सक्रिय नहीं हुए तो राहुल जैन को एक करोड़ से अधिक का भुगतान कर दिया जाएगा।
वैसे जानकर बताते है की यदि सिवनी नगर पालिका परिषद के तकनीकी अधिकारी उक्त निर्माण कार्य में लगे लोहा सहित अन्य सामग्री की जांच कराए तो उन्हे पता चल जाएगा की राहुल जैन को एक करोड़ का भुगतान करना चाहिए या नहीं।
गौरतलब है कि राहुल जैन के द्वारा 1 करोड़ 56 लाख से अधिक की लागत से फुट ब्रिज का निर्माण कार्य किया जा रहा है। शुरूआती दौर में उनके द्वारा निर्माण स्थल में लैब की स्थापना नहीं की गई थी जिसके चलते उन्होंने बिना जांच किये ही मटेरियल लगा दिया था। दैनिक महाकौशल एक्सप्रेस ने लैब को लेकर लगातार समाचार भी प्रकाशित किया था बावजूद इसके नगर पालिका परिषद के तकनीकी अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। सिवनी नगर पालिका परिषद में चल रही चर्चाओं की माने तो राहुल जैन लखनादौन के रहने वाले है और वह अपने आपको सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन का बेहद ही करीबी बताते है। जो लोग दिनेश राय मुनमुन की कार्यप्रणाली से वाकिफ है वह इस बात को अच्छी तरह से जानते है कि श्री राय ना तो कमीशन लेते है और ना ही काम में कोई समझौता करते है। यदि राहुल जैन बिल निकलवाने के लिए अपने आपको सिवनी विधायक का करीबी बताते है और उनकी बातो में विश्वास करते हुए सिवनी नगर पालिका परिषद बिना जांच के उन्हें भुगतान करती है तो इस मामले में ना केवल सिवनी नगर पालिका की भूमिका संदिग्ध हो जाएगी बल्कि सिवनी के विधायक दिनेश राय मुनमुन के ऊपर भी प्रश्रचिन्ह लगने लगेगा। ऐसे में देखना यह है कि अपने आपको विधायक का करीबी बताने वाले राहुल जैन एक करोड़ से अधिक का बिल निकलवाने में सफल हो पाते हैं या नहीं?

विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा ने आधा दर्जन विधानसभा में क्यों उतारे नए चेहरे

सिवनी महाकौशल। भारतीय जनता पार्टी अपने आप को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बताती है जो केडर बेस पार्टी है। गुरुवार को भाजपा ने 39 विधानसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा किया जिसकी सूची जारी होने के बाद चर्चा चल रही है कि क्या बीजेपी  कई विधानसभा क्षेत्र से अपने समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता नहीं मिले जिसके चलते उन्होंने ऐसे चेहरों को टिकट दिया है जिनका भारतीय जनता पार्टी में कोई योगदान नहीं है। सूची में नजर दौड़ाई जाए तो लगभग आधा दर्जन ऐसी विधानसभा है जहां से पार्टी ने वर्षो से जुड़े कार्यकर्ताओं के बजाय सरकारी कर्मचारियों या उनके परिजनों के ऊपर दांव लगाया है।
बिछिया से डॉक्टर को मिली टिकिट
मंडला विधानसभा में कांग्रेस के नारायण सिंह पट्टा विधायक है। वर्तमान में बिछिया विधानसभा से भाजपा ने पुराने कार्यकर्ताओं के बजाए डॉक्टर विजय आनंद मरावी को टिकिट दी है। बताया जाता है की डॉक्टर विजय शिशु रोग विशेयग है जिन्होंने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के पद से इस्तीफा देते हुए टिकट पा लिया इसके बाद प्रश्न यह उठता है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बिछिया से क्या बीजेपी ने ऐसा कोई कार्यकर्ता तैयार किया जो चुनाव लडने में सक्षम हो।
आप के कर्राहे को लांजी से मिली टिकिट
बालाघाट जिले की लांजी विधानसभा सीट से भाजपा ने राजकुमार कर्राहे को टिकिट दिया जिन्होंने गुरुवार की सुबह आम आदमी पार्टी से टिकिट दिया और शाम को भाजपा ने उन्हें टिकिट दे दिया। राजकुमार कर्राहे को टिकिट मिलने के बाद रमेश भटेरे के पक्ष में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आक्रोशित रैली निकालकर वरिष्ठ नेताओं के ऊपर टिकट बदलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। लांजी में चर्चा चल रही है कि क्या हिना कांवरे को हराने के लिए भारतीय जनता पार्टी के पास ऐसा कोई समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता नहीं है जिसके चलते भाजपा ने आम आदमी पार्टी की राजनीति करने वाले राजकुमार को टिकट दिया है।
पांर्ढुना से रिटायर जज को मिली टिकिट
मध्यप्रदेश का छिंदवाड़ा एक ऐसा जिला है जहां सातों विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। बताया जाता है कि भारतीय जनता पार्टी ने 39 विधानसभा सीट में से पांढुर्ना विधानसभा सीट से प्रकाश उइके को अपना प्रत्याशी घोषित किया है जो दमोह में मजिस्ट्रेट रहे हैं और जिन्होंने 27 जुलाई को नौकरी से इस्तीफा दे दिया, उनके इस्तीफा दिए 01 महीने भी नहीं हुए कि उन्हें पार्टी ने टिकट दे दिया। छिंदवाड़ा में चल रही चर्चाओं की माने तो कमलनाथ के जादू के सामने भारतीय जनता पार्टी कितनी कमजोर नजर आ रही है कि अब उन्हें सरकारी अधिकारियों के ऊपर भरोसा जताना पड़ रहा है। प्रकाश उईके को पार्टी ने टिकट तो दिया है लेकिन देखना यह है कि प्रकाश उईके  पार्टी के निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ताओं का कितना विश्वास जीत पाते हैं।
बंडा से शिक्षक को मिली टिकिट
भाजपा ने सागर जिले की बंडा विधानसभा से वीरेंद्र सिंह लंबरदार को टिकिट दिया है जो पूर्व सांसद शिवराज सिंह लोधी के पुत्र है। बताया जाता है की वीरेंद्र सिंह बंडा के स्कूल में शिक्षक है जिनके ऊपर भाजपा ने विश्वास जताया है।
आईआरएस की पत्नी को चाचौड़ा से बनाया प्रत्याशी
भारतीय जनता पार्टी ने गुना के चाचौड़ा विधानसभा सीट से भी पुराने कार्यकर्ताओं के बजाय एक आईआरएस की पत्नी को प्रत्याशी बनाया है। बताया जाता है कि प्रद्युम्न सिंह की पत्नी प्रियंका मीरा को भारतीय जनता पार्टी ने चाचौड़ा का प्रत्याशी घोषित किया है जिन्होंने फरवरी में ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था कुल मिलाकर 39 विधानसभा सीट में से लगभग आधा दर्जन ऐसी विधानसभा सीट है जहां से भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को दरकिनार करते हुए नए चेहरों को टिकट दिया है जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी यही चर्चा चलने लगी है कि भाजपा अपने  आप को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी क्यों कहती है।

एसी कार्यालय के स्थापना शाखा प्रभारी यशवंत नगभिरे की चल रही मनमर्जी स्कूलों में भृत्य की भर्ती में चलाते है मनमर्जी

सिवनी महाकौशल। सिवनी के जनजाति कार्य विभाग में कई ऐसे कर्मचारी पदस्थ है जिन्हें एक ही शाखा को संभालते हुए कई वर्ष बीत चुके हैं और वह इतने बेलगाम हो गए हैं कि अपनी मनमर्जी चलाने लगे हैं। बताया जाता है कि लंबे समय से जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ विजेंद्र बोरकर, राकेश दुबे, सुधीर राजनेगी यशवंत नगभिरे ,संतोष राजनेगी जैसे अधिकारियों और कर्मचारियों की चर्चा चलते रही है जिनके ऊपर कभी भी उच्च अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं किया जिसका पूरा फायदा उक्त सभी कर्मचारी उठाते हैं। बताया जाता है की स्थापना शाखा में पदस्थ यशवंत नगभिरे सहायक ग्रेड 2 के पद पर पदस्थ है जिनके स्थानांतरण की भी चर्चाएं चल रही थी। सूत्र बताते है की श्री नगभिरे ने स्थापना शाखा प्रभारी रहते हुए कई ऐसे कारनामों को अंजाम दिया है कि यदि उनकी पोल खुल गई तो श्री नगभिरे परेशानी में पड़ सकते हैं। यह बात वह अच्छी तरह से जानते हैं यही कारण है कि वह अपना स्थानांतरण रुकवाने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे और वर्तमान में उनका स्थानांतरण रुक भी गया। सूत्र बताते है की हाई स्कूल से हायर सेकेंडरी स्कूल को उन्नयन किया गया है। जिले में कई ऐसे स्कूल है जहां स्कूल की आवश्यकता को देखते हुए दैनिक वेतन भोगी के रूप में एक एक भृत्य रखने  का प्रावधान है। बताया जाता है कि श्री नगभिरे ने अपने उच्च अधिकारियों को विश्वास में लिए बिना कुछ ऐसे स्कूलों में दैनिक वेतन भोगी भृत्य रखने के बजाय उनसे उच्च स्तरीय सांठ गांठ करते हुए नियमित भृत्य को पदस्थ कर दिया। विभाग में चर्चा तो यह भी है कि श्री नगभिरे ने एक ही स्कूल में दो दो भृत्य की पदस्थापना भी किया है। आश्चर्य तो इस बात का है कि इस तरफ ना तो मंडल संयोजको का ध्यान जाता है और ना ही क्षेत्रीय संयोजको का। या यूं कहे कि यशवंत नगभिरे की मनमर्जी में उनकी भी मौन स्वीकृति है। जिसकी तरफ कभी भी उच्च अधिकारियों का ध्यान नही जाता।

जिसे डॉक्टर अमर उइके ने दोषी पाया उसे पुन: क्यों बना दिया गया अधीक्षक

सिवनी महाकौशल। इन दिनों जनजाति कार्य विभाग में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा। जनजाति कार्यविभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त डॉ. अमर उइके उच्च स्तरीय सांठ- गांठ करते हुए दोषी शिक्षकों को छात्रावास का अधीक्षक बनाने के मामले में सुर्खियां बटोर रहे हैं। इन दिनों सबसे ज्यादा सुर्खियों में श्रीमती प्रियंका ठाकुर है जिन्हें लगभग 9 महीने पहले जनजाति कार्यविभाग के सहायक आयुक्त डॉ. अमर उइके ने आकस्मिक निरीक्षण के दौरान दोषी पाया था और उन्हें कलेक्टर ने निलंबित कर दिया था, आश्चर्य इस बात का है कि जिस प्रियंका ठाकुर की कार्यप्रणाली के ऊपर जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त ने प्रश्न चिन्ह लगाया था बाद में उसी सहायक आयुक्त ने प्रियंका ठाकुर के ऊपर मेहरबानी बरतते हुए उन्हें नियम विरूद्ध तरीके से सीनियर कन्या आदिवासी छात्रावास का अधीक्षक बना दिया।
यह था मामला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब डॉक्टर अमर उइके को सिवनी जिले का सहायक आयुक्त बनाया गया था तब उनका एक सूत्रीय कार्यक्रम रहता था कि वह हॉस्टल और आश्रमों का आकस्मिक निरीक्षण करते थे और दोषी अधीक्षक या भृत्य  के ऊपर कार्रवाई प्रस्तावित कर देते थे। बताया जाता है कि 6 नवंबर 2022 को सहायक आयुक्त डॉ. अमर उईके, क्षेत्र संयोजक के द्वारा शासकीय कन्या शिक्षा परिसर का आकस्मिक निरीक्षण करने पहुंच गए थे जहां श्रीमती प्रियंका ठाकुर अधीक्षक थीं। बताया जाता है कि उन्होंने पाया था  कि छात्रावास अधीक्षक प्रियंका ठाकुर के द्वारा परिसर में मौजूद बच्चों को मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता। उन्होंने रसोइयों से भी चर्चा किया तो रसोइयों ने उन्हें बताया था कि उन्हें भोजन बनाने की सामग्री प्रियंका ठाकुर के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है जबकि नियम यह कहता है कि जहां शिक्षा परिसर है वहां आउट सोर्स के माध्यम से भोजन व्यवस्था कराई जाएगी लेकिन प्रियंका ठाकुर ने स्वयं के फायदे के लिए आउटसोर्स के माध्यम से भोजन की व्यवस्था नहीं कराते हुए स्वयं की देखरेख में बच्चों को घटिया किस्म का भोजन उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा अमर उईके ने और भी कई कमियां पाया था जिसके बाद जिले के तत्कालीन कलेक्टर डॉ राहुल हरिदास फटिंग ने डॉक्टर अमर उईके के आकस्मिक निरीक्षण के बाद श्रीमती प्रियंका ठाकुर को 10 नवंबर को निलंबित करते हुए उन्हें छपारा अटैच कर दिया था।
जिले के कलेक्टर क्षितिज सिंघल को यह जांच करना चाहिए कि जिस अधीक्षक की कमियां सहायक आयुक्त डॉ अमर उइके ने लगभग 09 महीने पहले निकाला था उस प्रियंका ठाकुर को अचानक सीनियर आदिवासी कन्या छात्रावास का अधीक्षक क्यों बना दिया गया। डॉक्टर अमर उइके का अचानक ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया? इस बात की भी जांच होना चाहिए ताकि पता चल सके कि जनजातीय कार्यविभाग में किस तरह काफर्जीवाड़ा चल रहा है।

जुआ फड़ से भागे गौरीशंकर सनोडिया की बिजली के करेंट से हुई थी मौत

सिवनी महाकौशल। बादलपार पुलिस चौकी के अंतर्गत पोतलई के जंगल में 7 अगस्त को कुरई पुलिस ने दबिश  दिया था। पुलिस से डरकर गुंदरई निवासी गौरीशंकर सनोडिया पिता रूप राम सनोडिया भाग गया था। बताया जाता है कि जब गौरीशंकर घर नही पहुंचा तब गौरीशंकर के पिता ने 08 अगस्त को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराया था। बताया जाता है की 09 अगस्त को गौरीशंकर सनोडिया को पुन: पोतलई के जंगल में तलाश किया गया तब पोतलई में लेखराम वर्मा के खेत के पास उसका शव मिला था।
फसल को जानवरो से बचाने बिछाया था तार
बताया जाता है की जिस जगह गौरीशंकर का शव मिला था उसके कुछ दूर बिजली का तार दिखाई दिया तब पुलिस ने खेत मालिक लेखराम वर्मा से पूछताछ किया तो उसने बताया कि मक्का की फसल जानवर बर्बाद ना कर दे इसके लिए उसने विद्युत तार चारों तरफ बिछा दिया था जिसकी चपेट में आकर गौरीशंकर की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि खेत में गौरीशंकर का शव देखने के बाद लेखराम वर्मा ने उसे खींचकर दूर फेंक दिया था। इस मामले में पुलिस ने खेत के मालिक लेखराम के विरुद्ध धारा 304 ,201 तथा 138 विद्युत अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध किया।

सहायक आयुक्त के माध्यम से छात्रावासो तक पहुंचने का प्रयास कर रही आरसीएम कंपनी

सिवनी महाकौशल। सिवनी जिले का जनजाति कार्य विभाग कई मामलों में चर्चित रहा है( बताया जाता है की जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त डॉ. अमर उनके के रहते कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड दो यशवंत नगभिरे, लेखापाल संतोष राजनेगी, सहायक ग्रेड 3 सुधीर राजनेगी, तथाकथित क्षेत्रीय संयोजक वीरेंद्र बोरकर, मंडल संयोजक राकेश दुबे जैसे कुछ कर्मचारी है जो पूरी तरह से बेलगाम है। इनके अलावा कुछ स्कूलों, छात्रावास के अधीक्षकों और आश्रम अधीक्षकों की लापरवाही भी सामने आते ही रही है। बताया जाता है कि इन दिनों जनजाति कार्य विभाग में आरसीएम नेटवर्किंग कंपनी की गूंज सुनाई दे रही है। सूत्रों की मानें तो रीवा से आरसीएम नेटवर्किंग कंपनी से जुड़े कुछ लोग सिवनी के जनजाति कार्य विभाग के कुछ अधिकारियों का विश्वास जीतकर उनके माध्यम से वह हॉस्टल तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं ताकि अधीक्षकों को आरसीएम का प्रोडक्ट खरीदने के लिए प्रेरित किया जा सके और उन्हें आरसीएम प्रोडक्ट से जोड़ा जा सके ताकि संबंधित लोगों की आय बढ़ सके। सूत्रों की मानें तो रीवा से आने वाले लोग इस प्रयास में है कि जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त डॉ. अमर उइके को विश्वास में लेते हुए उन्हें आरसीएम की आईडी दे दी जाए और उनके माध्यम से अधीक्षकों से दैनिक उपयोग में आने वाली सामग्री सप्लाई की जा सके। बताया जाता है कि आरसीएम में कई तरह के उपलब्ध होते हैं और आरसीएम से जुड़े हुए लोग नेटवर्किंग के माध्यम से व्यवसाय करते हैं। बताया जाता है कि आरसीएम प्रोडक्ट को लेकर रीवा के कुछ लोग सहायक आयुक्त कार्यालय के आसपास अक्सर दिखाई देते है। सूत्रों की माने तो कुछ लोगों ने अधीक्षकों के ऊपर यह दबाव डालने का प्रयास किया था कि वह आरसीएम से जुडक़र किराना दुकानों से प्रोडक्ट लेने के बजाय आरसीएम से प्रोडक्ट लें ताकि उनकी आय भी बढ़ सके। देखना यह है कि आरसीएम का प्रोडक्ट खरीदने का दबाव बनाने वाले लोगो के नाम उजागर होते हैं या नहीं? फिलहाल कई छात्रावास अधीक्षक आरसीएम प्रोडक्ट लेने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।

हर घर तिरंगा अभियान के लिए किस स्वसहायता समूह को झंडा सप्लाई का दिया गया ठेका

सिवनी महाकौशल। मध्य प्रदेश में स्व सहायता समूह के माध्यम से सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास कर रही है लेकिन अधिकांश जगह स्व सहायता समूह की आड़ में फर्जीवाड़ा हो रहे हैं। फर्जीवाड़ा धान खरीदी के दौरान भी देखने को मिला। जब सिवनी जिले में लगभग 127 खरीदी केंद्रों में से 29 खरीदी केंद्र स्व सहायता समूह को दिया गया था जिसका संचालन पुरुषों के द्वारा किया जा रहा था और अधिकांश जगह भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया। सूत्रों की माने तो वर्तमान में कुछ स्व सहायता समूह हर घर तिरंगा अभियान के तहत तिरंगा झंडा बेचने के मामले में सुर्खियां बटोर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 13 अगस्त से हर घर तिरंगा अभियान के तहत हर घर में झंडा लगाने के लिए स्व सहायता समूह कुछ ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव आंगनबाड़ी केंद्रों  सहित शासकीय कार्यालय में संपर्क कर रहे हैं और झंडा बेचने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि स्व सहायता समूहों का संचालन कराने वाले कुछ अधिकारियों ने थोक के भाव से झंडा बुलवा लिया है और अपने कुछ करीबी स्वा सहायता समूहों के माध्यम से बिकवाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि झंडे की आड़ में उन्हें अच्छी खासी रकम मिल सके।
स्वसहायता समूह को मास्क उपलब्ध कराने के मामले में आरती चोपड़ा बटोर चुकी है सुर्खियां
आजीविका मिशन में पदस्थ जिला परियोजना अधिकारी श्रीमती आरती चोपड़ा भी स्वसहायता समूहो के ऊपर मेहरबानी दिखाने के मामले में सुर्खियां बटोर चुकी है। बताया जाता है कि आपदा को अवसर बनाने के मामले में भी आरती चोपड़ा का नाम सामने आया था जिसमें कोरोनाकाल के दौरान मास्क के नाम पर भारी भरकम भुगतान किये जाने के मामले में आरती चोपड़ा का नाम सामने आया था। बताया जाता है कि संकल्प आजीविका स्वसहायता किंदरई विखं. घंसौर, राधारानी आजीविका स्वसहायता समूह कोसमी घंसौर, विकास महिला आजीविका स्वसहायता समूह दमपुरी पद्दीकोना घंसौर, नमामि देवी महिला आजीविका स्वसहायता समूह पिपरिया झुरकी, दुर्गा शक्ति महिला आजीविका स्वसहायता समूह केदारपुर जैसी कुछ संस्थाओं ने कोरोनाकाल के दौरान घंसौर जनपद में मास्क सप्लाई करने के नाम से बिल लगाया था जिन्हें बकायदा बिलो का भुगतान भी कर दिया गया था। बताया जाता है कि इसकी शिकायत आरती चोपड़ा से की गई थी लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं किया था। चर्चा है कि आरती चोपड़ा के निर्देशन में ही कई स्वसहायता समूहों का संचालन किया जाता है। उच्च अधिकारियों को जांच कराना चाहिए कि जिन स्वसहायता समूहों को झंडा बेचने की जिम्मेदारी दी गई है उक्त स्वसहायता समूह किसके द्वारा संचालित किया जाता है और जो झंडा बेचने का काम किया जा रहा है उक्त झंडे कितने गुणवत्ता वाले हैं।

जो प्रकृति के पुजारी होते है वह हिंसक नहीं होते: अर्जुन

सिवनी महाकौशल 13 अगस्त 23
जो धर्म प्रकृति की पूजा करता है वह हिंसक नही हो सकता। 09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के दिन जिन लोगो ने भी व्यापारी भाईयो के साथ अभद्रता करते हुए जबरन दुकान बंद कराते हुए हिंसक घटना को अंजाम दिया वह सुनियोजित लगता है। उक्त घटना के बाद मैं स्वयं एसपी से मिला और उनसे आग्रह किया कि इस घटना में शामिल लोगो को चिन्हित कर उन्हे कठोर दण्ड दिया जाए। कुछ लोगों के द्वारा किए गए कामों से पूरे समाज को नहीं जोडऩा चाहिए हमारा आदिवासी समाज सीधा-साधा और भोला भाला समाज है। हम प्रकृति की पूजा करते हैं भगवान शिव हमारे दिलों में बसे हुए हैं। यह देश विभिन्न धर्म जात संप्रदाय के लोगों का देश है जिसे हिंदू राष्ट्र की अवधारणा में बांधा ही नहीं जा सकता। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी घबराई हुई है और वह किसी भी तरह से माहौल को बदलने का प्रयास कर रही है। मेरे बयान को तोड़ मरोडक़र प्रस्तुत किया गया है मेरे पूरे भाषण को सोशल मीडिया में नहीं लाया गया यदि सोशल मीडिया में लाया जाता तो मैने भाषण में यह भी कहा था कि राम हमारे दिल में बसते हैं और ऐसी कई बातें मेरे द्वारा कही गई थी लेकिन षडयंत्र पूर्वक मेरे भाषण को आधा ही प्रसारित किया गया। उक्ताशय की बात गत दिवस प्रेस वार्ता के दौरान बरघाट विधायक अर्जुन सिंह काकोडिय ने कहा।
विश्व आदिवासी दिवस खुशी मनाने के दिन है ना कि बंद कराने का
09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सिवनी नगर में कुछ लोगो के द्वारा दुकान बंद कराने का प्रयास करते हुए हिंसक घटना को अंजाम दिया गया जिसकी मैने पहले भी निंदा किया था और अभी भी निंदा करता हूं। अर्जुन काकोडिय़ ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भारत बंद का आव्हान किसने किया यह मुझे नही मालूम लेकिन यह सत्य है की विश्व आदिवासी दिवस मार्केट बंद कराने का नही बल्कि खुशियों का दिन है।
आदिवासी समाज सभी धर्मो का सम्मान करता है
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने अर्जुन काकोडिय़ा से पूछा कि आपने कहा कि हम हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देंगे तो क्या आप हिंदू नहीं हो तब अर्जुन काकोडिय़ा ने कहा कि आदिवासी समुदाय प्रकृति की पूजा करता है वह प्रकृति में पाए जाने वाली हर चीज का सम्मान करते हुए पूजा करता है। आदिवासियों का कहीं मंदिर नहीं है लेकिन हम सनातन हिंदू संस्कृति का पालन करते हैं और आदिवासी समाज सभी धर्म का सम्मान करता है। अर्जुन काकोड़ीया ने कहा कि मैं आज भी सुबह भगवान राम और हनुमान की पूजा करता हूं, मेरे घर के लोग रामचरितमानस का पाठ करते हैं। मेरे द्वारा विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जो वक्तव्य दिया गया उसे भाजपा नेता एडिट कर प्रचार करते हुए गलत अर्थ निकाल रहे है। मेरे उक्त वक्तव्य को पूरा प्रचारित करें तो पता चलेगा कि मेरे वक्तव्य में शुरुआत से ही भगवान राम एवं भगवान हनुमान को अपना आराध्य बताया गया था साथ ही मैने संविधान के हिसाब से यह देश चलेगा कहा था।
सांसद,विधायक ने क्यों नही दी प्रतिक्रिया
09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सिवनी नगर के कुछ व्यापारियों के साथ हिंसक घटना हुई थी जिसकी मैने भी व्यक्तिगत रूप से निंदा किया, कांग्रेस ने भी निंदा किया और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी निंदा करते हुए विज्ञप्ति जारी किया लेकिन भाजपा के सांसद विधायक और जिलाध्यक्ष ने ना तो कोई विज्ञप्ति जारी किया और ना ही अपनी प्रतिक्रिया दिया जो उनकी कथनी और करनी को स्पष्ट करता है। अर्जुन सिंह काकोडिय़ा ने कहा कि मुझे तो आशंका है कि यह पूरी घटना भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा कराई गई है यही कारण है कि अब तक पुलिस आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार नहीं कर पाई। क्योंकि हो सकता है कि उपद्रव करने वाले नेताओं के ऊपर भाजपा नेताओं का संरक्षण हो।
पूर्ण बहुमत की सरकार है तो हिंदू राष्ट्र कब बनाएगी भाजपा सरकार
विधायक अर्जुन सिंह काकोडिय़ा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के रहते हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की मांग उठ रही है। वर्तमान में लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा बहुमत से सरकार में बैठी हुई है यदि अभी भी हिंदू राष्ट्र नहीं बनाया जा रहा तो फिर भाजपा कब हिंदू राष्ट्र बनाएगी। भाजपा को तो गौमाता को भी राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए लेकिन बहुमत में होने के बाद भी भाजपा सरकार यह काम क्यों नही कर पा रही। अर्जुन काकोडिय़ा ने कहा की भाजपा के सीनियर लीडर अमित शाह भी यही मानते है की इस देश में अलग अलग धर्म,पंथ के लोग रहते है यह देश संविधान से चलने वाला देश है, यही बात तो मेरे द्वारा कही गई जिसे भाजपा के लोग तूल दे रहे है। वर्तमान में जिस तरह भाजपा ऐसे मामलो को बिना कारण तूल दे रही है उससे तो यही लग रहा है की अब भाजपा यह समझ चुकी है की प्रदेश और देश उसकी सरकार को खतरा है।

कब होगी निरीक्षकों की थाने में पदस्थापनाएं

सिवनी महाकौशल। राज्य शासन ने चुनाव को देखते हुए कई निरीक्षकों के स्थानांतरण कर दिये। सिवनी में पदस्थ रहे कोतवाली टीआई महादेव नागोतिया को सिवनी से जबलपुर स्थानांतरित किया गया है। लखनादौन टीआई मनोज गुप्ता को सिवनी से कटनी ,लखनवाड़ा टीआई नवीन जैन को सिवनी से सागर, डूंडासिवनी थाना प्रभारी कार्यवाहक निरीक्षक देवकरण डेहरिया को सिवनी से बैतूल, यातायात निरीक्षक राजन उईके को सिवनी से बैतूल, अजय मरकाम को सिवनी से छिंदवाड़ा ,कुंवर सिंह मरावी को सिवनी से डिंडोरी, कुरई थाना प्रभारी  मदन मरावी को सिवनी से उमरिया, रमन मरकाम को सिवनी से जबलपुर, बरघाट थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा को सिवनी से जबलपुर, आदेगाव पुलिस चौकी प्रभारी प्रवीण धुर्वे को सिवनी से जबलपुर एवं शिवदयाल सनोडिया को सिवनी से जबलपुर स्थानांतरित किया गया है जिनमें से कुरई थाना प्रभारी मदन मरावी को छोडक़र बाकी सभी थाना प्रभारियों को पदमुक्त कर दिया गया जिसमें से बैतूल गये डूंडासिवनी थाना प्रभारी देवकरण डहेरिया को बैतूल कोतवाली की कमान सौंपी गई है। वहीं यातायात थाना प्रभारी रहे राजन उइके को आठनेर थाने की कमान सौंपी गई लेकिन अभी तक सिवनी में किसी भी थाने में टीआई की पदस्थापना नहीं की गई। 09 अगस्त को सिवनी में हुए घटनाक्रम के बाद थानो में टीआई की पदस्थापना किया जाना अतिआवश्यक हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक सिवनी जिले में सभी निरीक्षकों ने आमद नहीं दिया।
इनके सिवनी हुए ट्रांसफर
सिवनीसे 11 निरीक्षकों के स्थानांतरण किए गए हैं जबकि 8 निरीक्षक सिवनी को मिले हैं जिसमें भोपाल शहर से कार्यवाहक निरीक्षक ब्रजेश उईके, डिंडौरी से चंद्रकिशोर सिरामे,बुरहानपुर से कीरत प्रसाद धुर्वे, जबलपुर से कार्यवाहक निरीक्षक संदीपिका ठाकुर, जबलपुर से लक्ष्मण झारिया, जबलपुर से अनिल पटेल, शहडोल से ओमश्वर ठाकरे एवं पीटीएस सागर से रमेश कुमार गायधने, कटनी से कार्य. निरीक्षक सतीश तिवारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ टीआई कोतवाली में पदस्थापना के लिए एड़ी चोटी का जोर भी लगा रहे है। देखना यह है कि कप्तान राकेश कुमार सिंंह सिवनी कोतवाली की कमान किसे सौंपते हैं।

घोघरी स्कूल का कारनामा: विद्यार्थी परीक्षा में बैठा ही नहीं और दे दिया सप्लीमेंट्री

विद्यार्थी परीक्षा में बैठा ही नहीं और उसे सप्लीमेंट्री आ गई यह कारनामा सिवनी जिले में ही हो सकता है जहां कुछ भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी अपना मूल काम छोडक़र मलाई चाटने में लगे हुए हैं। बताया जाता है कि सिवनी में जनजाति कार्य विभाग एक ऐसा विभाग है जो आए दिन सुर्खियों में रहता है जिसकी मनमर्जी रोकने में उच्च अधिकारी भी नाकाम है और जिले के जनप्रतिनिधि भी जनजाति कार्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने बौने नजर आते हैं जिसका पूरा फायदा लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी उठाते हैं। ताजा मामला लखनादौन तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम डूंगरिया पोस्ट कहानी का है जहां एक विद्यार्थी आठवीं की कक्षा में बैठा ही नहीं लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उसे सप्लीमेंट्री दे दिया।
यह है मामला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम डूंगरिया पोस्ट कहानी तहसील लखनादौन निवासी  रामसिंह उईके दृष्टि बाधित है। चूंकि घर पालने की जिम्मेदारी उसी की है यह देखते वह अपने पुत्र जो एकीकृत माध्यमिक शाला घोघरी में कक्षा आठवीं का विद्यार्थी है उसे लेकर काम करने के लिए छिंदवाड़ा जिले में चले गया था और पुत्र के साथ काम कर रहा था इस बीच कक्षा आठवीं की परीक्षा हुई लेकिन उसके पुत्र ने परीक्षा नहीं दिया। आश्चर्य तो तब हुआ जब कक्षा आठवीं का परीक्षा परिणाम आया तो दृष्टिबाधित व्यक्ति के पुत्र को सप्लीमेंट्री दे दी गई। प्रश्न उठता है कि जब विद्यार्थी ने परीक्षा दिया ही नहीं तो फिर उसे बाकी विषयों में पास कैसे कर दिया गया और सप्लीमेंट्री कैसे दे दी गई? बताया जाता है कि उक्त स्कूल हरप्रसाद पाराशर महेंद्र नाग एवं कमलेश जायसवाल जैसे शिक्षकों की देखरेख में संचालित होता है। सवाल यही उठता है कि क्या उक्त शिक्षक अपने उच्च अधिकारियों को अंधेरे में रखकर मनमर्जी चला रहे हैं। इस पूरे मामले की जांच इसलिए भी होना चाहिए कि हो सकता है संबंधित शिक्षक अपना बेहतर परिणाम बताने के लिए इस तरह के कारनामे कर रहे हो। गौरतलब है कि जनजातीय कार्यविभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त डॉ. अमर उइके के रहते ना केवल कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मनमर्जी चला रहे हैं बल्कि स्कूलों, कुछ छात्रावासो व आश्रमों में भी मनमर्जी चल रही है जिसे रोक पाने में श्री उइके पूरी तरह नाकाम है।
कर्मचारियों को किसका मिल गया आर्शीवाद
गौरतलब है कि जनजातीय कार्यविभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त डॉ. अमर उइके के संरक्षण में कुछ कर्मचारी अपनी मनमर्जी चला रहे हैं जिसमें सहायक ग्रेड 2 यशवंत नगभिरे, लेखापाल संतोष राजनेगी, सहायक ग्रेड 3 सुधीर राजनेगी शामिल है। बताया जाता है कि यह सभी को क्षेत्रीय संयोजक वीरेंद्र बोरकर के इशारो में ही काम करते हैं और वीरेंद्र बोरकर के ऊपर डॉ. अमर उइके का संरक्षण है। सूत्रों की माने तो जब तबादला प्रारंभ हुआ था तब सहायक ग्रेड 2 यशवंत नगभिरे, लेखापाल संतोष राजनेगी, सहायक ग्रेड 3 सुधीर राजनेगी एवं तथाकथित क्षेत्रीय संयोजक वीरेंद्र बोरकर का नाम भी स्थानांतरण सूची में था और बकायदा नोटशीट भी चलाई गई थी लेकिन इनमें से कुछ लोगों ने सत्तापक्ष के नेताओं का विश्वास जीत लिया जिसके कारण उन्हें अभयदान दे दिया फिलहाल इसलिए उक्त स्थानांतरण की फाईल रूक गई है। कुल मिलाकर सिवनी में जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता का भी लोग फायदा उठा रहे हैं।

आखिर भवानीशंकर के पास कहां से आई थी बंदूक

सिवनी महाकौशल। लखनादौन मुख्यालय में एक व्यक्ति ने खुद को गोली मार लिया जि